Vrindavan Tour Guide in Hindi | वृन्दावन के प्रमुख पर्यटन स्थल

Vrindavan Tour Guide in Hindi
Vrindavan Tour Guide in Hindi

वृन्दावन (Vrindavan) ब्रजमंडल के 84 कोस के तीर्थो में सर्वोपरि है तभी तो कहा गया है “वृन्दावन सब धामों का धाम, जहां मिलेंगे राधे-श्याम” | यह मथुरा से 15 किमी दूर यमुना तट बसा ऐसा पावन क्षेत्र है जहां की पवित्र माटी भक्तजनों के हृदय को पुलकित कर देती है | वृन्दावन का नाम वृन्दावन क्यों पड़ा ? वृन्दा तुलसी को कहते है | वृन्दावन (Vrindavan) में तुलसी के पौधे अधिक होने के कारण इसे वृन्दावन कहा जाता है | विद्वानों का मत है कि वृंदा कृष्ण प्रिया राधा जी के 16 नामो में से एक है |

वृन्दावन के प्रमुख पर्यटन स्थल | Tourist Places of Vrindavan

बांकेबिहारी का मन्दिर

जिस प्रकार मथुरा का सर्वाधिक प्रसिद्ध और दर्शनीय स्थल श्री कृष्ण जन्म भूमि है ठीक उसी प्रकार वृन्दावन का सर्वाधिक पवित्र और दर्शनीय मन्दिर बाँकेबिहारी का मन्दिर | बादामी रंग के पत्थरों पर खुबसुरत नक्काशी एवं रजत स्तम्भों वाले इस मन्दिर का निर्माण संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास ने किया था | मन्दिर में बांकेबिहारी जी के दर्शन का समय सुबह 9 बजे से 12 एवं सांयकाल 6 से 9 बजे तक है | पुष्पों एवं बैंडबाजो से नित्य बांकेबिहारी जी की आरती की जाती है | बांकेबिहारी के दर्शन पर्दे में होते ही | यह परम्परा इसलिए है क्योंकि एक बार भक्त के प्रेमाभाव से मूर्ति भक्त के पीछे चल दी थी |

निधिवन

वृन्दावन प्राचीन कला में एक वन क्षेत्र था तथा निधिवन वृक्षों का वन है जिसके वृक्ष सदा हरे रहते है जहां तानसेन के गुरु वैष्णव संत स्वामी हरिदास ने राधा-कृष्ण युगल को अपने भजन से साक्षात प्रकट कर लिया था | इस वन में राधा-कृष्ण विहार करते थे | वन का प्रत्यक्ष जनश्रुति चमत्कार यह है कि यहाँ एक मन्दिर कक्ष में राधा-कृष्ण की शैय्या बिछा दी जाती है तथा श्री राधा जी का शृंगार का सामान रख दिया जाता है | रात्रि को कक्ष बंद कर दिया जाता है | सुबह जब इस कक्ष को खोला जाता है रो शैय्या अस्त-व्यस्त मिलती है और शृंगार का सामान प्रयोग में लाया होता है | यहाँ स्वामी जी की समाधि भी है |

श्रीशाह का मन्दिर

निधिवन के नजदीक ही स्थापित है 150 वर्ष प्राचीन श्रीशाह विहारी जी का मन्दिर | टेढ़े-मेढ़े खम्भों वाले इस मन्दिर का निर्माण शाह विहारी ने करवाया था | इस मन्दिर में संगमरमर एवं रंगीन पत्थर की वास्तुकला अद्वितीय है | लगभग 27 टेढ़े-मेढ़े खम्भों वाला यह मन्दिर कला का अद्भुद उदाहरण है | परिसर में तीन कलात्मक फव्वारे है | मन्दिर के फर्श पर बने पांवो के स्थायी निशान एवं उन पर बनी रंगीन कलाकृतिया बेहद सुंदर है | मन्दिर शिखर पर बनी मूर्तियों एवं दीवारों पर बनी संगमरमर की तस्वीरे अतुलनीय है |

श्री राधा मोहन मन्दिर

इस मन्दिर को अमृतसर के रामदास सौदागर ने सन 1523 में बनवाया था | यह मन्दिर दर्शनीय है ही , यहाँ बैठकर अपूर्व शान्ति का अनुभव होता है |

काली दह

यह वह क्षेत्र है जहां यमुना नदी में कालिया नाग रहता था तथा भगवान कृष्ण ने उसका मान-मर्दन करके उसके फनो पर नृत्य किया था |

सेवा-कुंज

सेवा कुंज का दूसरा नाम निकुंजवन है | सेवा कुंज के प्रांगण में एक तालाब एवं कदम्ब के वृक्ष है | ऐसा माना जाता है कि यहाँ नित्य राधा-कृष्ण रास रचाते है | आज भी इस वन में रात्रि को कोई प्राणी नही ठहरता है |

श्रीरंगनाथ मन्दिर

सोने के खम्भों वाले इस मन्दिर का निर्माण 1825 में सेठ गोविन्ददास एवं राधाकृष्ण ने करवाया था | दक्षिणी एवं उत्तरी वास्तु शैली में बने इस मन्दिर का मुख्य प्रवेश द्वार राजस्थानी शैली एवं मुख्य भवन दक्षिणी शैली में बना है | सात परकोटो वाला यह मन्दिर 1 किमी वनक्षेत्र में फैला हुआ है तथा मन्दिर के प्रांगण में 500 किलोग्राम वाला 60 फीट ऊँचा सोने का गरुड स्तम्भ है | मन्दिर के प्रवेश द्वार पर 19 सोने के कलश स्थापित है | अद्वितीय वास्तुकला से मंडित इस मन्दिर का मुख्य आकर्षण श्री रंगनाथ जी है | चाँदी एवं सोने के सिंहासन , पालकी एवं चन्दन का विशाल रथ विशेष रूप से दर्शनीय है | जिस कुंड से भगवान कृष्ण ने गजेन्द्र हाथी को मगरमच्छ के फंदे से छुड्वाया था वह इसी मन्दिर के प्रांगण में है |

अन्य दर्शनीय स्थल

उपरोक्त मुख्य दर्शनीय स्थलों के अतिरिक्त वृन्दावन में अहिल्या टीला , अद्वैतवट ,शृंगारवट , चीरघाट , वेणु कूप , गोविन्द देव मन्दिर , कांच का मन्दिर , गोपेश्वर मन्दिर , सवामन शालिग्राम , अंग्रेजो का मन्दिर और पागल बाबा का मन्दिर विशेष दर्शनीय है |

कैसे पहुचे

दिल्ली से लगभग 170 किमी दूर बसे वृन्दावन धाम हेतु रेल और बस सुविधाए सहज ही उपलब्ध है | मथुरा से वृन्दावन तक पहुचने हेतु स्थानीय बसे ,ऑटो रिक्शा उपलब्ध है | यात्रियों के प्रवास हेतु दर्जनों धर्मशालाए , होटल और आश्रम आसानी से मिल जाते है | यहाँ भोजन की भी व्यवस्था है |

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