महभारत कथा – राजा शांतनु और गंगा The Mahabharatha – King Shantanu and Ganga Story in Hindi

The Mahabharatha – King Shantanu and Ganga

Shantanu and Gangaराजा हस्ती के हस्तिनापुर नगर के निर्माण पश्चात उनकी अगली पीढियों में एक के बाद एक शाषन करते गये | उनमे से एक राजा कुरु हुए जिसके नाम से कुरु वंश की शुरुवात हुयी थी | महभारत की शुरवात कुरु वंश के राजा शांतनु Shantanu से प्रारंभ होती है | राजा शांतनु बड़े बुद्धिमता और बहादुरी से हस्तिनापुर का शाषन चलाया | शांतनु को आखेट का बहुत शौक था और राजपाट से समय निकालकर वो आखेट पर जाते थे | एक बार Shantanu शांतनु को वन में एक हिरण दिखा और उन्होंने हिरण को अपना निशाना बनाने का प्रयास किया | वो हिरण एकदम शांत था और शांतनु Shantanu उसके ओर शांत होने का इंतजार कर रहे थे | जैसे ही उन्होंने तीर लगाने का सही समयदेखा उन्होंने हिरन की तरफ तीर छोड़ दिया लेकिन अंतिम समय पर हिरण के थोडा सरक जाने से उनका तीर चुक गया |

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अब Shantanu शांतनु वापस घोड़े पर बैठकर वापस हिरण का पीछा करने लगे और घने वन के अंदर पहुच गये | आखेट उनका शौक होने के कारण वो सदैव आखेट के लिए अकेले आते थे क्योंकि अगर वो अपने दरबारियों या मत्रियो को साथ लाते तो उनकी आवाज से शिकार भाग जाता था | शांतनु सदैव शांत रहते थे इसलिय उनका नाम शांतनु था और बहुत एकाग्रचित होकर शिकार करते थे |शांतनु उस हिरण के पीछे पीछे वन के अंत तक चले गये लेकिन उनको हिरण नही मिला | वन के अंत में उनको गंगा नदी बहती हुयी दिखी | अब शांतनु अब वहा अपने घोड़े से उतरकर गंगा नदी के नजदीक बैठ गये | उन्होंने नदी के पानी से अपना मुख धोया और फिर से हिरण का पीछा करने के लिए तैयार हुए |

जैसे ही वो घोड़े पर बैठने के लिए उठे शांतनु ने अपने समक्ष एक सुंदर महिला को देखा | उन्होंने ऐसी महिला अपने जीवन एम् कभी नही देखी और उसे देखकर मंत्रमुग्ध हो गये | शांतनु उस महिला के पास दौडकर गये और उससे नाम पूछा | उस महिला ने शांतनु के प्रश्न का कोई उत्तर नही दिया और चलने लग गयी | शांतनु उसके पीछे भागकर गये और उससे अपना नाम बताने की प्रार्थना की | अब शांतनु ने अपना परिचय दिया कि वो हस्तिनापुर के राजा है | अब उस महिला ने मुस्कुराते हुए पूछा “राजन , आप मेरा नाम क्यों जानना चाहते है ” |

शांतनु ने अब खुद को संभाला और निर्भीकता से कहा “मै आपसे विवाह करना चाहता हु ” | अब उस महिला ने कहा कि “मैंने तो आपसे ये प्रश्न नही पूछा था मै तो आपसे ये पूछ रही थी कि आप मेरा नाम क्यों जानना चाहते हो “| अब शांतनु ने कहा कि “मै जीवन भर आपको कल्पना में देखता रहा हु ” | अब उस महिला ने कहा “मै आपसे शादी कर सकती हु अगर आप मुझसे वादा करे कि ना तो आप मेरा नाम पूछेंगे और ना ही मेरे द्वारा किये जाने वाले किसी कार्य पर प्रश्न करेंगे “| राजा शांतनु ने हामी भर दी | अब शांतनु ने कहा “वचन के अनुसार मै आपका नाम तो नही पूछ सकता हु लेकिन आप मुझे गंगा नदी के समीप मिली इसलिए मै आपको गंगा कहकर पुकारूँगा ” | अब वो महिला हसने लगी क्योंकि शांतनु ने अनजाने में उनका असली नाम बता दिया था |

शांतनु गंगा को हस्तिनापुर ले गये और उन्हें अपनी रानी घोषित कर दिया | राजा ने अब गंगा से विवाह किय और सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत करने लगे | गंगा एक अच्छी रानी थी जो प्रजा के साथ साथ शांतनु का भी ध्यान रखती थी | कुछ समय बाद गंगा गर्भवती हुयी तो राजा शांतनु बहुत प्रस्सन हुए | जब उनको ये सुचना मिली की उनको पुत्र हुआ है तो वो दौड़ते हुए रानी के महल में प्रवेश किया तो महल को खाली पाया | राजा शांतनु ने दसियों को गंगा के बारे में पूछा तो दसियों ने झिझकते हुए कहा कि रानी बच्चे को लेकर बाहर गयी है और उन्होंने उनका पीछा नही करने का आदेश दिया है |

शांतनु अब गंगा के बारे में विचार करने लगा तभी गंगा लौटी लेकिन उसके हाथ में कोई बच्चा नही था | शांतनु ने गंगा की तरफ आश्चर्य से देखते हुए कहा “गंगा , मेरा पुत्र कहा है “| गंगा ने शांतनु को तुरंत उत्तर दिया “महाराज , आपने मुझसे कोई प्रश्न ना करने का वचन दिया था , आपने मुझसे बिना इस बारे में जाने प्रश्न पूछा….इसलिए इस बार आपको क्षमा कर देती हु लेकिन कुपा करके आगे कोई प्रश्न मत पूछना ” | शांतनु अब मानकर उदास हो गया लेकिन वो वचनों में बंधे होने के कारण कुछ ना बोल सका |

इस तरह गंगा के 6 पुत्र ओर हुए लेकिन शांतनु को कभी उनके बारे में पता नही चला | शांतनु गंगा से बहुत नाराज हो गया था | अंत में जब गंगा ने आठवे पुत्र को जन्म दिया तब शांतनु ने बिना उसको बताये गंगा का पीछा किया | उसने देखा कि गंगा , नदी की समीप जा रही थी अब शांतनु से रहा नही गया और दौड़ता हुआ गंगा के पास गया और चिल्लाता हुआ बुला “ये आप क्या कर रही हो और आप कौन हो ?” | गंगा ने बच्चे को अपनी बाहों में लेकर रोते हुए शांतनु से कहा “राजन , आपने मेरा वचन तोडा है इसलिए अब हम दोनों को अलग होना होगा ” | उसने बच्चे को शांतनु को दिया और सारे प्रश्नों का उत्तर दिया | अब शांतनु को बहुत पछतावा हुआ |

अब गंगा अदृश्य हो गयी और उसके स्थान पर एक देवी खडी थी तब उन्हें एहसास हुआ कि जिसे उन्होंने गंगा नाम दिया था वो वास्तविकता में वो नदी देवी गंगा ही है | देवी गंगा ने अब कहा “राजन , पिछले जन्म में आप राजा महाभिषेक थे और हम पहली बार इन्द्रदेव के बुलावे पर स्वर्ग में मिले थे और आप मुझे सभा में घुर घुर कर देख रहे थे और इंद्रदेव आपके इस कृत्य को देखकर बहुत नाराज हुए और उन्होंने आपको श्राप दिया था कि आप मनुष्य रूप में जन्म लेकर प्यार और विरह का अनुभव करेंगे उसके परिणामस्वरुप ये सब घटित हुआ | ”

शांतनु ने अब अपने पुत्र के विषय में गंगा से प्रश्न किया | गंगा ने हँसते हुए कहा “राजन आपको एक श्राप ओर मिला था जिसके बारे में मै आपको बताती हु, ऋषि वशिस्ठ के पास नंदिनी नामक गाय थी और उसको वो बहुत प्यार करते थे | उसके बछडी को जन्म दिया था जिसको वो अपनी बेटी की तरह मानते थे | उस समय स्वर्ग के 8 देवो को वासु कहते थे |वासुओ ने जब नंदिनी को देखा तो वो नंदिनी को ले जाना चाहते थे और वासुओ ने अपने भाई प्रभासा को उकसाकर गाय और बछडी को चुरा लिया , ऋषि वशिस्थ ने क्रोधित होकर वासु को मनुष्य रूप में जन्म लेने का श्राप दे दिया था लेकिन वासु के माफी मांगने पर श्राप में कमी कर दी जिसके अनुसार 7 वासु जन्म लेते ही स्वर्ग में चले जायंगे और आठवा वासु प्रभासा इस धरती पर ही रहेगा जिसने उस गाय और बछडी को चुराया था और उसको पृथ्वी पर लम्बा जीवन व्यतीत करना होगा | मै धरती पर पहले ही आ चुकी थी इसलिए वासुओ ने मुझे उनकी माँ बनने को कहा इसलिए 6 वासुओ को जन्म लेते ही मेंने स्वर्ग में पंहुचा दिया ” |

शांतनु पुरी कहानी सुनकर विलाप करने लग गया और उनको अपने पिछले जन्म की गलतियों पर पछतावा हुआ | अब शांतनु ने गंगा को रोकने का प्रयास किया लेकिन गंगा ने कहा कि अब वो इस जन्म में कभी नही मिल सकते है | अब शांतनु ने अपने पुत्र के लिए रुकने को कहा तो गंगा ने कहा “राजन , हमारा पुत्र अपने माता पिता के साथ सदैव नही रहेगा ” | अब शांतनु ओर भी ज्यादा दुखी हो गया और गंगा ने कहा “राजन , हमारा पुत्र इसी समय से पुरे हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी बनता ही और ये बहुत दीर्घायु और मुश्किल जीवन व्यतीत करेगा और यही उसका भाग्य है ”

गंगा ने कहा कि वो स्वर्ग में उसका पालन पोषण करेगी और सब कुछ सीख जाने पर उसे वापस आप तक भेज देगी | ये कहकर वो उनके पुत्र को लेकर अदृश्य हो गयी और शांतनु एक ही दिन में अपने पत्नी और पुत्र को खोकर बहुत दुखी हुआ | लेकिन सारा सच जानने से उसे राहत मिली कि उनका पुत्र स्वर्ग में पलेगा और फिर धरती पर आएगा | इस तरह Shantanu शांतनु के जीवन से गंगा चली गयी |

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