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बॉलीवुड के पहले एंग्री यंग मेन सुनील दत्त की जीवनी Sunil Dutt Biography in Hindi

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Sunil Dutt Biography in Hindi

बॉलीवुड के पहले एंग्री यंग मेन सुनील दत्त की जीवनी Sunil Dutt Biography in Hindi
बॉलीवुड के पहले एंग्री यंग मेन सुनील दत्त की जीवनी Sunil Dutt Biography in Hindi

बलराज दत्त उर्फ़ सुनील दत्त Sunil Dutt का जन्म पंजाब (तत्कालीन पाकिस्तान ) के झेलम जिले के खुर्दी गाँव में हुआ था | वह बचपन सही अभिनय के क्षेत्र में जाना चाहते थे | बलराज साहनी , फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता के रूप में उन दिनों स्थापित हो चुके थे इसे देखते हुए उन्होंने अपना नाम बलराज दत्त से बदल कर सुनील दत्त रख लिया | उनका बचपन यमुना नदी के किनारे मदाली गाँव में बीता जो हरियाणा प्रदेश में है | वह इसके बाद लखनऊ चले गये , जहा पर वह अख्तर नाम से अमीनाबाद गली में मुस्लिम औरत के घर [पर रहे | कुछ समय बाद वो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई चले गये |

मुम्बई आकर उन्होंने परिवहन सेवा के बस डिपो में चैकिंग क्लर्क के रूप में कार्य किया | फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए 1955 से 1957 तक संघर्ष करते रहे | उनकी पहली फिल्म “रेलवे प्लेटफोर्म ” 1955 में प्रदर्शित हुयी , जिसमे उन्होंने अभिनेता के रूप में कार्य किया | अपनी पहली फिल्म में कुछ खास पहचान नही मिली | उन्होंने इसके बाद “कुंदन” “राजधानी ” “किस्मत का खेल ” और “पायल” जैसी कई छोटी फिल्मो में अभिनय किया लेकिन किसी में उन्हें सफलता नही मिली |

1957 में प्रदर्शित हुयी “मदर इन्डिया ” से उन्हें अभिनेता के रूप में ख़ास पहचान और लोकप्रियता मिली | इसमें नकारात्मक किरदार निभाकर वह दर्शको के दिल में जगह बनाने में सफल रहे | इस फिल्म के बाद उन्होंने नर्गिस से शादी कर ली और उनकी तीन संताने हुयी , संजय दत्त ,प्रिय दत्त और नम्रता दत्त | उनकी सुपरहिट फिल्म “वक्त ” 1965 में प्रदर्शित हुयी थी उनके सामने इसमें  बलराज साहनी , राजकुमार , शशि कपूर और रहमान जैसे नामी सितारे थे इसके बावजूद वह अपने दमदार अभिनय से दर्शको का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे | उस वर्ष उनकी “मिलन ” “मेहरबान ” और “हमराज”जैसी सुपरहिट फिल्मे प्रदर्शित हुयी ,जिसमे उनके अभिनय के नये रूप देखने को मिले | इनकी सफलता के बाद वह अभिनेता के रूप में शोहरत की बुलन्दियो पर जा पहुचे |

“मदर इन्डिया ” की सफलता के बाद उन्हें “साधना (1958)” , “मुझे जीने दो (1963)” ,“खानदान (1965)” , “पड़ोसन (1967)“ जैसी सफल फिल्मो में भारतीय दर्शको के बीच सफल अभिनेता के रूप में पहचान मिली | “गुमराह ” “वक्त” और “हमराज ” जैसी फिल्मो में निभाई गयी यादगार भूमिकाओ ने भी दर्शको के बीच लोकप्रिय किया | उनकी मल्टीस्टारर फिल्मो में  “नागिन ” , “जानी दुश्मन ” “काला धंधा गोर लोग ” “वतन के रखवाले ” “परम्परा ” तथा “क्षत्रिय ” आदि प्रमुख है | 1993 की “क्षत्रिय” के बाद Sunil Dutt सुनील दत्त लगभग 10 वर्षो तक फिल्मो से दूर रहे | विधु विनोद चोपड़ा के जोर देने पर उन्होंने 2007 में प्रदर्शित फिल्म “मुन्ना भाइअ एम.बी .बी.एस” में अभिनय किया |

फिल्म “यादे (1964)” के साथ सुनील दत्त में फिल्म निर्देशन में भी कदम रखा था | इस पुरी फिल्म में एक युवक की भूमिका थी जो अपने संस्मरण याद करता रहता है | इस किरदार को सुनील दत्त ने निभाया था | उनकी यह फिल्म बहुत सफल नही रही ,लेकिन भारतीय सिनेमा जगत के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा गयी | Sunil Dutt सुनील दत्त ने 1963 में प्रदर्शित फिल्म “यह रास्ते प्यार के” के जरिये फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा | वह पंजाबी फिल्मो से भी जुड़े रहे जिनमे “मन जीते जग जीते  (1973)” “दुःख भंजन तेरा नाम (1974)” तथा “सतश्री अकाल (1977)” प्रमुख है |

Sunil Dutt सुनील दत्त ने फिल्मो में कई भूमिकाये निभाने के बाद समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया और कोंग्रेस के सहयोग से लोकसभा सदस्य बने | साल 1968 में वह पद्मश्री से सम्मानित किये गये | उन्हें 1982 में मुम्बई का शेरिफ नियुक्त किया गया | 1980 में उन्होंने अपने बेटे संजय दत्त को फिल्म “रॉकी ” में लांच किया | यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुयी लेकिन फिल्म के प्रदर्शित होने के थोड़े समय पहले बाद उनकी पत्नी नर्गिस का कैंसर की बीमारी की वजह से देहांत हो गया |नर्गिस की कैंसर से हुयी मृत्यु के कार उन्हें इस बीमारी के प्रति सामाजिक जागरूकता बढाने की प्रेरणा मिली | उन्होंने पत्नी की याद में “नर्गिस दत्त फाउंडेशन” की स्थापना की | यह वह समय था जब वह सामाजिक कार्यो में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे |
Sunil Dutt Family Photoहिंदी फिल्म के पहले एंग्री यंग मैन और राजनितिक तौर पर आदर्श नेता Sunil Dutt सुनील दत्त का 25 मई 2005 को हृदय गति रुकने के कारण बांद्रा स्थित उनके निवास स्थान पर देहांत हो गया | वह मदर इन्डिया के बिरजू के रूप में या के आदर्श नेता के तौर पर आज भी हमारे बीच मौजूद है |

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