प्रति सोमवार व्रत कथा Somvar Vrat Katha in Hindi

Somvar Vrat Katha in Hindiसोमवार व्रत का हिन्दू धर्म में बहुत बड़ा महत्व है क्योंकि ये व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है | वैसे इस व्रत का कठोर रूप से पालन करने वाले दिन में “ॐ नम: शिवाय ” का जाप करते रहते है | इस व्रत को आप शाम 4 या 5 बजे तक खोल सकते है | इस व्रत में फलाहार पर कोई प्रतिबन्ध नही होता है लेकिन भोजन दिन में एक बार ही करना चाहिए | वैसे तो इस व्रत को कोई भी कर सकता है लेकिन अविवाहित लडकिया सुंदर वर के लिए इस व्रत को करती है और विवाहित औरते अपने लम्बे और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत को करती है | पुरुष इस व्रत को इसलिए करते है ताकि सुखी और शांतिपूर्ण जीवन बिता सके | इस व्रत का पालन करने वाले को व्रत खोलते समय केवल शाकाहारी भोजन करना चाहिए |

Loading...

Types of Monday Fast (Somvar Vrat) सोमवार व्रत के प्रकार

सोमवार व्रत चार प्रकार से किया जा सकता है | चारो व्रतो के लिए विधि एक समान है जिसमे शिवजी की पूजा के बाद कहानी पढी या सूनी जाती है | आइये आपको चारो व्रतो के बार में बताते है

(1) साधारण प्रति सोमवार व्रत Simple every Monday fast /Somvar Vrat Katha
(2) प्रदोष सोमवार व्रत Pradosh fast / Pradosh Somvar Vrath Katha
(3) श्रावण मास सोमवार व्रत 4-5 week Shraavan Maas Monday fast / Shraavan Maas Somvrat Vrat
(4) सोलह सोमवार व्रत 16 weeks Monday fast / Solah Somvar Vrat Katha

साधारण प्रति सोमवार व्रत कथा Somvar Vrat Katha / Simple Every Monday Fast

बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक साहूकार रहता था | उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नही थी लेकिन उसके सन्तान नही थी | वो वक़्त अपने वंश के लिए चिंतित रहता था | वो हर सोमवार को व्रत रखता था जिसमे दिन में वो शिवजी की पूजा करता था और शाम को शिवलिंग के दिया जलाता था | एक दिन माता पार्वती ने शिवजी से कहा “नाथ , ये मनुष्य आपका परम भक्त है , आपको इसकी इच्छा पुरी करनी चाहिए ” | शिवजी ने कहा “पार्वती , ये संसार एक कर्मक्षेत्र है , जैसे एक किसान अपने खेत में बीज बोता है तो इसका परिणाम उसको मिलता है उसी प्रकार इस संसार में आदमी जैसा भी कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मिलेगा “|

माता पार्वती ने फिर शिवजी से आग्रह किया “प्रभु , फिर भी आप इसकी श्रुधा को देखिये , ये आपका परम भक्त है आपको इसकी मदद करनी चाहिये , अगर आपको लोगो की इच्छा पुरी नही करेंगे तो वो आपकी आराधना क्यों करेंगे ” | माता पार्वती के जोर देने पर शिवजी ने कहा “इस मनुष्य के कोई पुत्र नही है इसलिए ये सदैव चिंतित रहता है , हालांकि इसके भाग्य में पुत्र नही है फिर भी मै आपके आग्रह पर इसको पुत्र देने का वरदान देता हु लेकिन वो केवल 12 वर्ष जीवित रह पायेगा , मै इससे ज्यादा कुछ नही कर सकता हु  ”

साहूकार को भगवान शिव ने स्वप्न में उसके पुत्र के 12 वर्ष तक जीवित रहने की बात कही | जिसको सुनकर वो ना तो ज्यादा खुश हुआ और ना ज्यादा दुखी हुआ | वो हमेशा की तरह अपनी पूजा जारी रखने लगा | कुछ दिनों बाद उसकी पत्नी गर्भवती हो गयी और उसने एक सुंदर बालक को जन्म दिया | सभी घर में बालक के जन्म पर खुशिया मना रहे थे लेकिन वो साहूकार अपना दर्द केवल खुद ही जानता था और उसने किसी को भी बालक के 12 वर्ष जीवित रहने की बात नही बताई | जब वो बालक 11 वर्ष का हुआ तो उसकी माँ ने साहूकार से उसकी शादी की बात करने को कहा लेकिन साहूकार ने शादी के लिए साफ़ मना करते हुए कहा कि वो उसको शिक्षा के लिए काशी भेजेगा |

साहूकार ने बालक के मामा को बुलाया और कुछ पैसे देकर बालक को काशी ले जाकर शिक्षा देने को कहा | उसने अपने पुत्र को कहा कि वो काशी जाते वक़्त यज्ञ करते और ब्राह्मणों को खाना खिलाते हुए जाए | दोमो मामा-भांजे ने ऐसा ही किया | रास्ते में एक बार वो दोनों जिस शहर से जा रहे थे उसका राजा अपनी पुत्री का विवाह एक ऐसे राजकुमार से करवा रहा था जिसके केवल एक आँख थी | दुल्हे का पिता बहुत चिंतित था कि अगर दुल्हन उसके पुत्र को देखेगी तो विवाह के लिए मना कर देगी | इसलिए उसने जब उस साहूकार के लडके को देखा तो उसने सोचा कि इस बालक को विवाह के लिए तोरण के समय मेरे पुत्र के स्थान पर दुल्हन के सामने पेश कर दू |

दुल्हे के पिता ने उस लडके के मामा से बात की तो वो राजी हो गये | इस तरह उस बालक ने दुल्हे के कपड़े पहन लिए और घोडी पर बैठकर तोरण की रस्म पुरी कर दी | अब जब तोरण की रस्म हो गयी तो दुल्हे के पिता ने सोचा कि फेरो में भी उसके पुत्र के स्थान पर साहूकार के बेटे को बदल दिया जाए ताकि उसकी बात ढकी रहे | मामा फिर राजी हो गया और विवाह समारोह भी निपट गया | अब वो बालक काशी के लिए रवाना हो गया और जाने से पहले उसने दुल्हन के कपड़ो पर लिख दिया कि “तुम्हारी शादी  मुझसे हुयी है , लेकिन जिसके साथ तुम्हे भेजेंगे वो एक आँख वाला आदमी है और मै काशी शिक्षा ग्रहण करने जा रहा हु “|

जब वो बालक काशी के लिए रवाना हो गया तक उस दुल्हन ने अपने कपड़ो पर लिखे शब्द पढ़े और राजकुमार के साथ जाने से मना करते हुए कहा “ये मेरा पति नही है , मेरी शादी इससे नही हुयी है , मेरा पति तो शिक्षा ग्रहण करने के लिए काशी गया है ” | मजबूरी में दुल्हे के पिता को सारी बात बतानी पड़ी और दुल्हन के पिता ने उसको भेजने से इंकार कर दिया | दुल्हे का परिवार वापस घर लौट आया | अब वो बालक और मामा काशी पहुच गये | वो बालक शिक्षा में लग गया और मामा ने यज्ञ करना शुरू कर दिया | जब वो बालक 12 वर्ष का हुआ तो एक दिन उसने अपने मामा से कहा जो यज्ञ कर रहे थे “मामा , आज मेरी तबियत ठीक नही है ” | मामा ने उसे घर के अंदर जाकर सोने को कहा | वो बालक अंदर जाकर सो गया और कुछ देर बाद उसकी मृत्यु हो गयी |

कुछ देर बाद जब मामा अंदर उसे देखने आया तो उसकी म्रत्यु हो चुकी थी | वो बहुत दुखी हुआ और सोचने लगा कि अगर मै रोऊंगा तो मेरा यज्ञ अधुरा रह जाएगा | इसलिए जब यज्ञ पूरा हुआ और ब्राहमण चले गये तो उसने रोना शुरू कर दिया | किस्मत से शिवजी और माता पार्वती उस रास्ते से गुजर रहे थे | उन्होंने रोने की आवाज सूनी तो पार्वती जी ने कहा “नाथ , कोई आदमी रो रहा है , चलो उसके दुःख को दूर करते है ” | वो मामा के पास गये तो एक मृत बालक को जमीन पर पड़े हुए देखा | पार्वती जी ने कहा “ये तो वही साहूकार का पुत्र है जिसका आपके आश्रीवाद से जन्म हुआ ” | शिवजी ने कहा “इसका जीवन इतना ही था और ये अपना जीवन बिता चूका था ” |

पार्वती ने उस पर दया दिखाते हुए शिवजी से कहा “प्रभु , आप इस बालक को जीवनदान दे दीजिये अन्यथा इसके माता-पिता शोक में मर जायेंगे ” | माता पार्वती के कई बार आग्रह करने पर शिवजी ने उस बालक को जीवनदान दे दिया | अब मामा और भांजा दोनों अपने घर की ओर रवाना हुए | रास्ते में वो उसी शहर से गुजरे जहा उस बालक का विवाह हुआ था | उन्होंने वहा पर भी यज्ञ किया | उस बालक के ससुर ने उसे पहचान लिया और उसे अपने महल में लेकर गया | उसने उसका भव्य स्वागत किया और एक समारोह आयोजित अपनी पुत्री को उसके साथ भेज दिया | वो सब वापस अपने शहर आ गये |

उस बालक के माता पिता छत पर बैठे हुए थे | वो सोच रहे थे कि अगर उनका पुत्र जीवित वापस आ जायेगा तो वो नीचे आ जायेंगे वरना इस छत से कूदकर जान दे देंगे | उसी समय मामा वहा आ गया और उसने बताया की “आपक पुत्र आ गया है ” | उनको विश्वास नही हुआ और मामा ने बताया कि उसके साथ उसकी पत्नी भी आई अहि | उस साहूकार ने उन दोनों का स्वागत किया और वो सभी खुशी खुशी जीवन बिताने लगे | इस तरह जो भी सोमवार का व्रत करता है उसकी सभी मनोकामनाये पुरी होती है |

Read : सोलह सोमवार व्रत कथा Solah Somvar Vrat Katha

Loading...

One Comment

Leave a Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *