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हिमपात (बर्फबारी) से जुड़े रोचक तथ्य | Snowfall Facts in Hindi

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हिमपात (बर्फबारी) से जुड़े रोचक तथ्य | Snowfall Facts in Hindi
हिमपात (बर्फबारी) से जुड़े रोचक तथ्य | Snowfall Facts in Hindi

शायद ही कोई ऐसा बच्चा होगा जिसे बर्फ (Snowfall) से खेलना पसंद न हो परन्तु बर्फ (Snowfall) के बारे में कई ऐसी बाते है जिससे आप शायद ही अवगत हो | यहाँ हम आपको बर्फ से जुडी रोचक बाते बता रहे है |

बर्फ में भी गर्मी होती है 

बर्फ में 90-95 प्रतिशत तक हवा कैद होती है | इसका मतलब है कि यह गर्मी को रोककर रखती है | यही वजह है कि बर्फीले इलाको में बहुत से जानवर बर्फ के भीतर गहराई तक खुदाई करके अपने छुपने के ठिकाने बनाते है | ध्रुवो पर बनाये जाने वाले “इग्लू” यानि बर्फ के घर भी इसी वजह से लोगो को गर्म रखने में मददगार होते है | बाहर की तुलना में अंदर से ये 100 डिग्री तक अधिक गर्म हो सकते है |

बर्फ गिरने की रफ्तार 

हिमकण गिरने की रफ्तार एक किमी प्रति घंटे जितनी धीमी से लेकर 14 किमी प्रति घंटे तेज हो सकती है | यह रफ्तार माहौल पर निर्भर करती है | बर्फ के कण जितना पानी समेटते है और हवा जितनी तेज चलती है उसी हिसाब से उनकी रफ्तार तय होती है | हिमकणों को बादलो से जमीन तक पहुचने में करीब एक घंटे का वक्त लग जाता है |

आवाज पर बर्फ का असर 

जैसे ही बर्फ (Snowfall) गिरती है यह वातावरण में मौजूद ध्वनि को सोख लेती है यानि बर्फ गिरने से आस–पास का माहौल शांत हो जाता है | तेज आवाजे खुसर-पुसर में तब्दील हो जाती है | जब बर्फ पिघलकर फिर से जमती है तो इसमें आवाज कैद होकर दूर तक फ़ैल जाती है |

सफेद नही होती बर्फ

भले ही बर्फ (Snowfall) की बात होने पर सफेद चादर में लिपटे हुए मैदानों की कल्पना की जाती है लेकिन सच्चाई यही है कि वास्तव में बर्फ सफेद नही होती है | दरअसल यह क्रिस्टल जैसी होती है जिसके आर-पार रोशनी के गुजरने की वजह से यह सफेद दिखती है | बर्फ कई बार प्रदुषण , धुएं  और हरी काई का रंग भी ले लेती है | बर्फ को नारंगी से लेकर काले रंग में भी देखा गया है |

बर्फ के 421 नाम

कहा जाता है कि उत्तरी ध्रुव पर रहने वाले बर्फ के आदिवासी इनुइट लोगो ने बर्फ के 50 नाम रखे हुए है | कुछ लोग इसे कोरी कल्पना कहते है तो कोई इसे सटीक सत्य बताते है पर स्कॉटलैंड के रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि बर्फ को 421 तरह से पुकारा जाता है |

बर्फ की बीमारी

बर्फबारी (Snowfall) के बीच अधिक वक्त बिताने से “आर्कटिक हिस्टीरिया” नामक बीमारी के शिकार हो सकते है | उत्तरी ध्रुव पर रहने वाले इनुइट लोग अक्सर इसके शिकार हो जाते है | इस दौरान लोग बेवजह के शब्द बोलते है | जोखिम भरे काम करने लगते है फिर उनकी याददाश्त भी गम हो जाती है | इस दौरान विटामिन “ए” जहर का काम भी करने लगता है | हालांकि हाल के दिनों में कुछ जानकारों ने इस बीमारी के अस्तित्व पर भी सवाल उठाये है |

बर्फबारी का भय

“आर्कटिक हिस्टीरिया” के होने पर संदेह हो लेकिन बर्फबारी से डर लगने की बीमारी तो लोगो को यकीनन होती है | इसे “शिओंनफोबिया” कहते है | यह ग्रीक शब्द “शिओन” से बना है | ग्रीक भाषा में बर्फ को शिओंन कहते है | बहुत से लोगो को बचपन के किसी हादसे की वजह से बर्फबारी से डर लगने लगता है | उन्हें लगता है कि वे बर्फ के नीचे दब जायेंगे | जरा सी बर्फबारी से भी ऐसे लोग सिहर उठते है |

छोटे से केंद्र से बनता है हिमकण

जिस तरह किसी कोशिका का न्युक्लियाई यानी केंद्र होता है बर्फ का ठीक वैसा तो नही होता मगर उससे कुछ कुछ मिलता जरुर है | बर्फ अक्सर किसी एक चीज के इर्द-गिर्द इकट्ठा होकर जमने लगती है | बर्फ के गोले किसी ओल्से से अलग होते है | कई जगहों पर 15 इंच तक के बर्फ के गोले गिरने की बात भी सुनने को मिलती है | बहुत से लोगो ने ऐसे दावो पर शक जाहिर किया है परन्तु वैज्ञानिको का कहना है कि इनके इतना बड़ा होने में कोई बाधा नही है क्योंकि सर्द हवा के झोंके बर्फ को जमाकर इसका आकार बड़ा कर सकते है |

तरह तरह के हिमकण

किसी भी बर्फ के हिमकण का आकार कैसा होगा यह बात हवा के तापमान पर निर्भर करती है | हिमखंडो पर रिसर्च से यह बात सामने आयी है कि जब तापमान शुन्य से 2 डिग्री सेल्सियस कम होता है तो बर्फ जमती है | इससे भी कम तापमान यानि 5 डिग्री सेल्सियस होने पर एकदम सपाट क्रिस्टल बनते है | तापमान में ओर बदलाव होने पर जब हिमपात होता है तो ये क्रिस्टल रोयेदार दिखने लगते है | 35 अलग-अलग प्रकार के Snow-flex का वर्णन किया जा चूका है | इसके अलावा भी कई तरह के हिमकण देखने को मिलते है | वे बड़े घनाकार टुकडो से लेकर परो जैसे पतले आकार तक के मिलते है |

जोरदार आवाजो से नही होता हिमस्खलन

अक्सर दावा किया जाता है कि शोर मचाने पर कभी भी बर्फ से  घिरी हुयी चट्टाने खिसक सकती है लेकिन ऐसा नही है | अक्सर हिमस्खलन बर्फ का बोझ बढ़ जाने की वजह से होता है | अचानक से भारी बर्फबारी होने से ऐसा होता है | कई बार हवा के झोंके भी हिमस्खलन के लिए जिम्मेदार होते है | वही कई ऐसे मौके भी आये है कि अतिउताश में बर्फ के उपर Sking  कर रहे लोगो के बोझ से हिमस्खलन हो गया |

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