Home रोचक जानकारी खूंखार सेंटीनेलीज जनजाति से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य | Sentinelese Tribe Facts...

खूंखार सेंटीनेलीज जनजाति से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य | Sentinelese Tribe Facts in Hindi

162
0
SHARE
खूंखार सेंटीनेलीज जनजाति से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य | Sentinelese Tribe Facts in Hindi
खूंखार सेंटीनेलीज जनजाति से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य | Sentinelese Tribe Facts in Hindi

सेंटीनेलीज जनजाति (Sentinelese) बंगाल की खाड़ी में स्थित नार्थ सेंटिनल द्वीप पर हजारो वर्षो से रह रही है | नार्थ सेंटिनल द्वीप वर्तमान में अंडमान द्वीपसमूह का हिस्सा है इसलिए सेंटीनलीज को अंडमानी लोग भी कहते है | ये एक आदिम जनजाति है जो अभी तक बाहरी दुनिया से कटी हुयी है | इनकी आबादी लगभग 40 से 500 के बीच है | अंडमानी द्वीप के अन्य जनजातियो की तरह सेंटीनलीज जनजाति (Sentinelese) ने भी बाहरी दुनिया के साथ सम्पर्क रखने से साफ मना कर दिया है | सेंटीन्लीज लोग बाहरी लोगो को दुश्मन समझकर उन पर हमला कर उनकी हत्या कर देते है | भारतीय कानून एक अनुसार इस द्वीप के 5 किमी के अंदर घूमना प्रतिबंधित है | आइये अब आपको सेंटीन्लीज  जनजाति से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |

#1. सेंटीनलीज (Sentinelese) लोगो की आबादी का एकदम सटीक आंकड़ा किसी को पता नही है क्योंकि उस द्वीप पर वर्षो से जाना प्रतिबंधित है इसके बावजूद 2001 जनगणना के अनुसार आधिकारिक रूप से 21 पुरुष और 18 औरतो की गणना की गयी है | इस सर्वे में काफी दूर से लोगो को देखा गया है जो सटीक नही है |

#2. 2004 में आयी भंयकर सुनामी के बावजूद इस द्वीप के लोग अपने आप को बचाने में सफल रहे इस कारण जब दस वर्षो बाद 2011 में लोगो को गिना गया तो 12 पुरुषो और 3 महिलाओं को देखा गया | हो सकता है सुनामी में इस आबादी से काफी नुकसान हुआ लेकिन वे पुरी तरह से खत्म नही हुए |

#3. सेंटीनलीज जनजाति (Sentinelese) पुरी तरह से शिकार पर निर्भर है और ये धनुष-बाण के जरिये स्थानीय जंगली जीवो एवं समुदी जीवो को अपना भोजन बनाते है | ये अपना भोजन ओंगे लोगो की तरह तैयार करते है |

#4. सेंटीनलीज लोग आज भी पाषाण युग में जी रहे है जिनको खेती और धातु तक का ज्ञान नहा है और यहाँ तक कि आग जलाने से भी वो अनजान है हालंकि कुछ स्त्रोत इस बात को नकारते है |

#5 सेंटीनलीज (Sentinelese) को अपनी शारिरीक बनावट के आधार पर नेग्रितो माना जात है | उनकी चमड़ी काली होती है और कद सामान्य पुरुष से कम होता है | अमूमन इनकी ऊँचाई 5 फीट 3 इंच होती है और ये कपड़े नही पहनते है |

#6. सेंटीनलीज लोगो की अपनी भाषा है जिसे सेंटिनल भाषा कहते है | इस भाषा के बारे में ना तो कोई जानकारी है और ना कोई इसको समझ पाया है | इस द्वीप के लोग दुसरी भाषा बोलने वालो से तो बात ही नही करते है इसलिए इनमे कोई दोहरी भाषा वाला कोई नही है |

#7. 1980 में जब कुछ खोजकर्ताओं ने इनके साथ बातचीत करने की कोशिश की तो वो भी उनकी भाषा नही पढ़ पाए क्योंकि अंडमान द्वीप पर रहने वाले इनकी तरह ही ओंगे लोगो से इनकी भाषा अलग है जो बाहरी दुनिया से घुल-मिल गये है | इसी तरह जारवा लोगो से भी उनकी भाषा नही मिलती है |

#8. सेंटीनलीज लोगो के साथ सम्पर्क करने का पहला प्रयास 1880 ईस्वी में ब्रिटिश नौसेना अफसर मौरिस विडाल पोर्टमेन नी की थी जो अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर अपना कार्यभार सम्भाल रहे थे | मौरिस अपने साथ यूरोपीयन सशस्त्र सेना दल को अपनी रक्षा के लिए लेकर गये थे |

#9. इस दल के पहुचने पर इस द्वीप के निवासे पहले तो पेड़ो की आड़ में चुप गये | चार खाली गाँव एवं रास्ते मिलने के कई दिनों के बाद पोर्टमेन को छ: लोग को पकड़ा जिसमे से एक वृद्ध व्यक्ति और महिला और चार बच्चे थे | वो पुरुष और महिला तो पोर्ट ब्लेयर पहुचने के कुछ समय बाद (किसी बीमारी से) ही मर गये इसलिए पोर्टमेन ने उन चार बच्चो को तोहफे देकर वापस नार्थ सेंटीनल द्वीप पर छोड़ दिया |

#10 पोर्टमेन ने उन चार बच्चो को इस आशा में छोड़ा था कि वो अपने बडो को बता सके कि ब्रिटिश लोगो से दोस्ती की जा सकती है | दो सेंटीनली लोगो की मौत और कुछ हाथ नही लगने से ये प्रयास असफल माना गया | इसी तरह संस्कृति में विविधता होने के कारण बच्चे उने तोहफों का अर्थ ही समझ नही पाए होंगे |

 

#11. सेंटिनलीज लोगो से सम्पर्क करने का दूसरा प्रयास 1967 में किया गया जब मानव विज्ञानी टी.एन.पंडित 20 लोगो के दल के साथ भारतीय पुरातत्व विभाग की तरह से इस द्वीप पर गये | वो बिना सेंटीन्लीज लोगो से मिले बिना जंगलो में पैरो के निशान के पीछे पीछे गये | तब उन्हें घास और पत्तो से बनी 18 जर्जर झोपडिया मिली जिससे ये अनुमान लगाया गया कि यहाँ 40-50 लोग रहते है |

#12. उनकी अगली यात्रा में पंडित को सेंटीनलीज लोगो का पहली बार सामना हुआ हालांकि उनकी विजिट का अच्छा स्वागत नही हुआ और उन्हें वापस लौटना पड़ा लेकिन वो अपने पीछे गिफ्ट छोडकर गये जिसे वो लेने के लिए आये | तब उन्होंने देखा कि पुरुष धनुष-बाण लिए हुए थे जबकि महिलाये नही |

#13. 1991 में अंतिम बार पंडित उस द्वीप पर गयी तब सेंटीनलीज लोगो ने पंडित के दल के हाथो से नारियल तो उठा लिए लेकिन उन्हें द्वीप पर नही आने दिया | उन्होंने देखा कि सेंटीनलीज लगातार अपनी भाषा में उनसे बात करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उनका दल उस भाषा को समझ नही पा रहा था | उसी वर्ष पंडित उनके जैसे दिखने वाले ओंगे जनजाति के लोगो को लेकर गये थे लेकिन उनकी उपस्थिति ने सेंटीनलीज लोगो को क्रोधित कर दिया |

#14. 1974 की शुरुवात में National Geographic की टीम कुछ मानवविज्ञानियों के साथ उस द्वीप पर एक documentary बनाने गये जिसका शीर्षक था Man in Search of Man | उनके साथ सशस्त्र पुलिस भी थी |  जब मोटरबोट उस द्वीप के तट पर पहुची तो सेंटीनलीज जंगलो से बाहर आकर बोट पर तीर चलाने लगे | बाद में वो किनारे के एक सुरक्षित स्थान पर उतर जहां रेत पर उनके लिए तोहफे के रूप में कुछ नारियल , जिन्दा सूअर , एक गुडिया और कुछ दुसरी चीज छोड़ गये |

#15. कुछ देर में सेंटीनलीज वहा भी पहुच गये और तीर दागने लगे ,जिसमे से एक Documentary निर्माता की जांघ में लगा | जिस आदमी ने निर्माता को घायल किया वो पेड़ की आड़ में छुप गया वो गर्व से हंसने लगा जबकि दुसरे फ़ैल गये | तब उन्होंने सूअर और गुडिया को जमीन में को गाड़ दिया और नारियल और पकाने का सामान लेकर चले गये |

#16. अगस्त 1981 में एक कार्गो शिप नार्थ सेंटिनल द्वीप के किनारे पर विश्राम के लिए रुका तो 50 द्वीपवासी आकर उनको भाग जाने की धमकी देने लगे | तब शिप के कप्तान ने तुरंत निकलने का आदेश दिया | उनके जहाज पर उन्होंने तीरों से हम कर दिया | हालँकि बाद में वो बच निकले |

#17.  वर्ष 1991 में पहली बार सेंटीन्लीज लोगो (Sentinelese) के साथ शांतिपूर्ण सम्पर्क हुआ जब भारतीय मानव विज्ञानियों का एक दल दो बार वहा गया | इस सफलता का श्रेय अंडमान-निकोबार लोगो की एक्सपर्ट डा.मधुमाला चट्टोपाध्याय को जाता है जिनकी मौजूदगी में सेंटीनलीज ने खुद को खतरा नही माना |

#18. 2006 में दो भारतीय मछुआरे सुंदर राज और पंडित तिवारी नार्थ सेंटिनल द्वीप की तरफ भारी मात्रा में केकडे पकड़ने के उदेश्य से गये तभी रात के समय उनकी बोट का एंकर खराब हो गया और उनकी बोट गहराई में चली गयी तब सेंटीनलीज लोगो के दल ने उन मछुआरो को कुल्हाडी से मार दिया | एक रिपोर्ट के अनुसार उनकी बॉडी को उन्होंने बाद में बांस पर लटकाकर सभी को चेतावनी दी | तीन दिन बाद उनके दफन शरीर को इंडियन कोस्ट गार्ड ने ढूंढा और हेलीकॉप्टर से बाहर निकाला |

#19. इसी दौरान 50 से ज्यादा द्वीपवासी हाथ में धनुष-बाण लेकर हेलीकाप्टर को निशाना बनाने लगे लेकिन बड़ी मुश्किल से बाहर निकले | इस मिशन में एक बॉडी तो बाहर निकल गयी लेकिन दुसरी बॉडी ढूंढने के मिशन को रद्द करना पड़ा और दुसरी बॉडी कभी नही मिली |

#20. नवम्बर 2018 में एक 26 वर्षीय अमेरिकी मिशनरी जॉन अलेन चाऊ स्थानीय मछुआरो एके सहायता से अवैध रूप से नार्थ सेंटिनल द्वीप पर गया ताकि वो उन्हें ईसाई धर्म  में परिवर्तित कर सके | 15 नवम्बर को पहले प्रयास में मछुआरे जॉन को तट से लगभग 500 मीटर दूर छोडकर आये | मछुआरे जॉन को आगे जाने के लिए मना कर रहे थे लेकिन वो अकेला हाथ में बाइबिल लेकर तट पर चला गया तो द्वीपवासियों ने उसपर तीरों से हमला कर दिया हालांकि वो उस समय तो बच गया |

#21. नवम्बर 17 को जॉन की फाइनल विजिट थी तो जॉन में मछुआरो को उसे अकेले छोड़ कर निकल जाने को कहा | कुछ देर बाद मछुआरो ने दिखा कि सेंटीनलीज जॉन की बॉडी को घसीट रहे है आयर अगले दिन किनारे पर मछुआरो ने जॉन की डेड बॉडी देखी लेकिन वो कुछ नही कर पाए | इसके बाद भारत ने जॉन की बॉडी को लाने के कई प्रयास किये लेकिन असफल रहे तब 28 नवम्बर को जॉन की बॉडी लाने के मिशन को रद्द करना पड़ा |

तो मित्रो अगर आपको सेंटीनलीज जनजाति (Sentinelese) से जुडी जानकारी पसंद आयी तो कमेंट में अपनी बात जरुर लिखे और इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करे |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here