Roop Chaturdashi Pooja Vidhi and Katha in Hindi | रूप चतुर्दशी कथा और पूजा विधि

Roop Chaturdashi Pooja Vidhi and Katha in Hindi | रूप चतुर्दशी कथा और पूजा विधि
Roop Chaturdashi Pooja Vidhi and Katha in Hindi | रूप चतुर्दशी कथा और पूजा विधि

जैसा कि इस व्रत का नाम से ही स्पष्ट है कि नरक चतुर्दशी (Roop Chaturdashi) को किया गया पूजन और व्रत यमराज को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है जिसका उद्देश्य नरक से मुक्ति पाना है क्योंकि यमराज के रुष्ट होने से प्राणी को नरक में दी जाने वाली यातनाओं का कष्ट भोगना पड़ता है | दैत्यराज बलि के वामन भगवान से मांगे वरदान के अनुसार उस दिन जो व्यक्ति दीपदान करता है उसको यम यातना नही दी जाती है और दीपावली मनाने वाले के घर को लक्ष्मी जी कभी छोडकर अन्यत्र नही जाती है |

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पुरानो के अनुसार इस पर्व का नरकासुर से भी संबध है | इंद्र सहित देवताओ को दुखी और त्रस्त करने वाले नरकासुर का भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन वध करके पृथ्वी को भारमुक्त किया था | उसी के उपलक्ष्य में इसे मनाया जाता है | इस तिथि को सूर्योदय से पूर्व ही प्रात:काल में स्नान करने का बड़ा महात्म्य माना गया है | श्रीब्रह्म पुराण के अनुसार जो मनुष्य प्रात:काल स्नान करता है वह प्राय:निरोगी रहता है और जीवन भर सुखी और संतुष्ट रहता है |

इस पर्व पर स्नान के पूर्व शरीर पर तिल के तेल की मालिश करने का अधिक महात्म्य बताया गया है | इस चतुर्दशी के दिन यदि दीवाली हो जाए तो तेल में लक्ष्मी और जल में गंगाजी निवास करती है ऐसा विश्वास किया जाता है |चतुर्दशी को महारात्रि माना जाता अहि इसलिए शक्ति के उपासको को शक्ति की पूजा करनी चाहिए | इस रात्री को मन्त्र भी सिद्ध किये जा सकते है |

पूजा विधि विधान | Roop Chaturdashi Pooja Vidhi in Hindi

यह व्रत कार्तिक मॉस के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है | इस दिन शरीर को तिल के तेल की मालिश करके सूर्योदय के पूर्व स्नान करने का विधान है | स्नान के दौरान अपामार्ग को शरीर से स्पर्श करना चाहिए | स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर तर्पण करके तीन अंजलि भरकर जल अर्पित करे | इस तीन दिन तक करना चाहिए चूँकि यमराज देव भी है पितर भी ,अत: जिनके माता पिता जीवित हो उनको भी नरक चतुर्दशी के दिन तिलांजलि अर्पित कर यमराज और भीष्म का तर्पण करना चाहिए | इस प्रकार तर्पण कर्म सभी पुरुषो को करना चाहिए ,चाहे उनके माता पिता गुजर चुके हो या जीवित हो | फिर देवताओ का पूजन करके सांयकाल यमराज को दीपदान करने का विधान है |

दीपक जलाने का कार्य त्रयोदशी से शूरू करके अमावस्या तक करना चाहिए | इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने का विधि विधान बताया गया है क्योंकि इसी दिन उन्होंने नरकासुर का भी वध किया था | इस दिन जो भी व्यक्ति विधिपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करता है उसके सारे मन के ताप दूर हो जाते है और अंत में उसे बैकुंठ में जगह मिलती है |

पौराणिक कथा | Roop Chaturdashi Katha in Hindi

इस व्रत की कथा का उल्लेख “श्रीसनत्कुमार संहिता ” में सी प्रकार हुआ है |

एक बार त्रयोद्शी से अमावस्या की अवधि के बीच जब वामन भगवान ने दैत्यराज बलि की पृथ्वी को तीन पगों से नाप लिया तो राजा ने उनसे प्रार्थना की “हे प्रभु ! मुझे जो कुछ आपने दिया है इसके अतिरिक्त मै कुछ ओर नही चाहता लेकिन संसार के लोगो के कल्याण के लिए मै एक वरदान मांगता हु | आपकी शक्ति है तो दे दीजिये |”

भगवान वामन ने पुछा “क्या वरदान माँगना चाहते हो , राजन ”

दैत्यराज बोले “प्रभु ! आपने कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से लेकर अमावस्या की अवधि में मेरी सम्पूर्ण पृथ्वी नाप ली है इसलिए जो व्यक्ति मेरे राज्य में नरक चतुर्दशी के दिन यमराज के लिए दीपदान करे , उसे यम यातना नही होनी चाहिए और जो व्यक्ति इन तीन दिनों में दीपावली करे उनके घर को लक्ष्मी जी कभी न छोड़े ”

राजा बलि की प्रार्थना सुनकर भगवान वामन बोले “राजन ! मेरा वरदान है कि जो नरक चतुर्दशी के दिन नरक के स्वामी यमराज को दीपदान करेंगे उनके सभी पितर लोग कभी भी नरक ने नही रहेंगे आयर जो व्यक्ति इन तीन दिनों में दीपावली का उत्सव मनायंगे उन्हें छोडकर मेरी प्रिय लक्ष्मी अन्यत्र नही जायेगी ”

भगवान वामन को दिए इस वरदान के बाद ही नरक चतुर्देशी के व्रत , पूजन और दीपदान का प्रचलन आरम्भ हुआ , जो आज तक चला आ रहा है |

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