पांडिचेरी के प्रमुख पर्यटन स्थल | Pondicherry Tour Guide in Hindi

समुद्र की गिरती-उठती तरंगे , मनोरम सागर तट , मनोहर प्राकृतिक सुन्दरता के साथ ही साथ भारत और फ़्रांसिसी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने वाली वाली प्राचीन और आधुनिक शैली की एतेहासिक इमारते देश विदेश के पर्यटकों को पांडिचेरी आने का निमन्त्रण देती है | चेन्नई से 162 किमी दूर दक्षिण पूर्व कोरोमंडल तट पर स्थित पांडिचेरी भारत का केंद्रशासित प्रदेश है | पुराने जमाने में इसे पोडे , पुंडचीरा तथा वेद्पुरी कहा जाता था |

पल्लव और चोल सम्राटो ने अलग अलग समय में इस पर शासन किया था | सोलहवी शताब्दी के आरम्भ में गिंगी के नायक के शासनकाल में इसे पुलिचेरी उया पुच्छेरी के नाम से जाना जाता था | यह कभी रोमनो का मुख्य व्यापारिक केंद्र था | यहाँ 200 वर्ष पूर्व रोमन संस्कृति के अवशेष भी पाए गये है | कहा जाता है कि यहाँ भी अगस्त्य ऋषि का आश्रम था | पांडिचेरी का जो आधुनिक रूप है उसके निर्माण में फ्रांसीसी शासन का प्रमुख योगदान है |

फ्रेकाल नामक  फ़्रांसिसी वास्तुविद ने आधुनिक पांडिचेरी के स्वरूप को विकसित किया था | सन 1673 से 1680 के बीच फ्रांस का अधिकतम व्यापार इसी बन्दरगाह से होता था | सन 1693 में पांडिचेरी पर डचो का अधिकार हो गया किन्तु 1699 में स्वीक समझौते के अनुसार इस पर पुन: फ्रांसीसियो का अधिकार हो गया | फ़्रांसिसी प्रशासक मार्थ के शासनकाल में यहाँ फ़्रांसिसी साम्राज्य का काफी विस्तार हुआ | ब्रिटेन और फ्रांस से युद्ध छिड जाने पर पांडिचेरी पर अधिकार करने के लिए दोनों वर्षो तक लड़ते रहे |

सन 1742 में फ़्रांस सरकार ने जोसेफ फ्रांसिस डुप्ले को यहाँ का गर्वनर बनाकर भेजा | डुप्ले की कमान में फ़्रांसिसी सेना ब्रिटिश सैनिको से डटकर मुकाबला करती रही | अंतत: सन 1814 में इस पर फ़्रांसिसी अधिकार हो गया | भारत को आजादी मिलने पर फ्रांसीसियो को भगाकर पांडिचेरी भारतीय संघ में मिला लिया गया | सन 1954 में पांडिचेरी भारत का एक हिस्सा बन गया | पांडिचेरी के विकास में डुप्ले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है | डुप्ले की मृत्यु के 100 वर्ष बाद उसकी एक मूर्ति फ़्रांस में और एक पांडिचेरी में स्थापित की गयी | पांडिचेरी के चिल्ड्रन पार्क में डुप्ले की विशाल प्रतिमा देखी जा सकती है |

पांडिचेरी में आधुनिक भारतीय और फ़्रांसिसी सभ्यता का अद्भुद संगम देखा जा सकता है | यहाँ कई भाषाए बोली समझी जाती है तमिल ,तेलुगु , मलयालम , हिंदी , बंगला और अंग्रेजी के साथ फ्रेंच भी | आज भी यहाँ के अनेक स्थानों , दुकानों , सडको और अनुसन्धान केन्द्रों के नाम यही के विख्यात व्यक्तियों के नाम पर है | यहाँ की पुलिस पर भी फ़्रांसिसी साम्राज्य का प्रभाव दिखाई पड़ता है | स्कूलों में फ्रेंच भी पढाई जाती है | आज भी पांडिचेरी के जनजीवन में फ़्रांसिसी रहन-सहन और संस्कृति की झलक दिखाई पडती है |

पांडिचेरी के समुद्रतट बड़ा प्यारा है | समुद्र के समानांतर 1500 मीटर लम्बी कंक्रीट की पक्की सडक है जैसे हरिद्वार में हर की पौड़ी | यहाँ गांधी स्क्वायर है | पांडिचेरी के पश्चिम में लम्बा समुद्र तट है और प्रतिदिन वहां के हजारो स्थानीय लोग और पर्यटक सैर करने तथा समुद्र का सौन्दर्य निहारने आते है | समुद्र की लहरों पर प्रात:कालीन सूर्य की थिरकती किरणों और छोटी नौकाओ का दृश्य बड़ा सुखद प्रतीत होता है | पांडिचेरी के छोटा सा शांत शहर है | यहाँ की हवा में आध्यात्मिक खुशुबू उअर प्रगाढ़शीलता है | यहाँ की खूबी यह है कि यहाँ म न ज्यादा भीड़-भाड़ है और न ही लोकल बसों और रेलगाड़ियो का शोर |

पांडिचेरी के पर्यटन स्थल

चर्च – यहाँ 17वी-18वी शताब्दी के विशाल चर्च दर्शनीय है | यहाँ अन्य चर्चो के अलावा The Church of Sacred Heart of Jesus और The Cathedral आदि प्रमुख है | इन चर्चो में मध्यकालीन यूरोपीय चर्चो की उच्च कोटि की स्थापत्य कला की झलक दिखाई देती है |

दर्शनीय मन्दिर – पांडिचेरी में हिन्दू देवी-देवताओं के करीब 350 मन्दिर है | इनमे कुछ मन्दिर 10वी-12वी शताब्दी के चोल राजाओं द्वारा निर्मित है | इन मन्दिरों में विजयनगर वरदराज का तिरुभवनई तथा भगवान शिव के तिरुवन्दार की विशेष मान्यता है | रथ उत्सव के अवसर पर पुरे शहर में मुख्य प्रतिमा की परिक्रमा कराई जाती है |

अरविन्द आश्रम – महान क्रांतिकारी चिंतक और विचारक योगी अरविन्द का आश्रम विश्व में भारत की अध्यात्मिक पहचान है | किसी अज्ञात देवी प्रेरणा से अरविन्द घोष अपने सक्रिय राजनितिक जीवन परित्याग कर 4 अप्रैल 1910 को पांडिचेरी आये और कई बार अपना निवास बदलने के बाद आश्रम में साधनारत हो गये | आश्रम में साधक स्वयम भोजन पकाते और अथिथियो को परोसते है | आश्रम में शिक्षालय और कुछ कारखाने है | एक खेल का मैदान भी है | आश्रम में कोई धुम्रपान नही करता | यहाँ के लोग शाकाहारी है | आश्रम में 400 विशाल भवन और पॉवर हाउस है | सभी दृष्टियों से आश्रम आत्मनिर्भर है |

पांडिचेरी संग्रहालय – इस संग्रहालय में ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान समय की वस्तुए देखी जा सकती है | इस संग्रहालय में पल्लव ,चोल तथा विजयनगर काल की बहुत सी वस्तुए है | भारतीय स्मारक संग्राहलय में महान देशभक्त कवि सुब्रह्मण्यम भारती के चित्र , पुस्तके और उनकी निजी वस्तुए है |

बोटानिकल गार्डन – सन 1826 में सी.एम् .बोराट द्वारा लगाया गया बोटैनिकल गार्डन भी दर्शनीय है | यहाँ देश-विदेश की अनेक प्रजातियों के पेड़-पौधे तथा किस्म-किस्म की फुल देखे जा सकते है | पुरे दक्षिण भारत में अपनी तरह का अनोखा दर्शनीय उद्यान है | बच्चो के मनोरंजन के लिए यहाँ एक छोटी रेलगाड़ी भी चलती है |

कैसे पहुचे

पांडिचेरी का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा चेन्नई है | पांडिचेरी के लिए मीटरगेज की रेलगाड़ी चलती है | सडक मार्ग सर्वाधिक सुविधाजनक है |  चेन्नई , तंजावर , नागाप्त्तिम , बेंगलोर और कौम्ब्तुर से पांडिचेरी के लिए बसे जाती है |

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