Om Puri Biography in Hindi | ओम पुरी , जिसने बदल दिए थे अभिनय के मायने

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Om Puri Biography in Hindiकिसी चाय की दूकान के अँधेरे कोने से उठकर भारतीय और फिर ब्रिटिश और हॉलीवुड सिनेमा में पहचान बनाने वाले ओम पुरी (Om Puri) के लिए सफर कितना मुश्किल रहा होगा ,इसका अंदाजा किसी डायरी किसी बायोग्राफी को पढकर नही लगाया जा सकता | एक और “जुदाई” और “स्वयम्वर” जैसी चिकनी चुपड़ी दक्षिण भारतीय फिल्मो का उभार , दुसरी ओर अमिताभ बच्चन ,जितेन्द्र और ऋषि कपूर जैसे हिंदी सिनेमा में परम्परागत रूप से स्वीकार्य नायको का वर्चस्व , ऐसे में गोविन्द निहलानी अपनी पहली आक्रोश के लिए रूखे दागदार चेहरे के रूप में ओमपुरी (Om Puri) का चयन करते है जो अपनी ही बहन का गला काट देता है इस डर से कि उसे भी जमींदार का अत्याचार न सहना पड़े | आइये उसी बहुआयामी अभिनेता की जीवनी से आपको रुबुरु करवाते है

ओम पुरी का प्रारम्भिक जीवन

हरियाणा के अम्बाला में एक पंजाबी परिवार में 18 अक्टूबर 1950 को ओम पुरी (Om Puri) का जन्म हुआ था | पुणे के भारतीय दिलम एवं टेलीवीजन संस्थान में स्नातक थे || वर्ष 1973 में वह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्र भी रहे , जहा अभिनेता नसीरुद्दीन शाह उनके सहछात्र थे | कम ही लोगो को पता होगा कि उन्हें अपनी पहली नौकरी में सिर्फ पांच रूपये मिलते थे | सात साल की उम्र में चाय की दूकान में काम करने से लेकर भारतीय सिनेमा के मशहूर कलाकार के दर्जे तक पहुचने वाले ओमपुरी (Om Puri) की यात्रा कठिन परिस्थितियों से भरी थी | बचपन में उनके माता पिता को दो वक्त की रोटी के लिए भी काफी मेहनत करनी पडती थी |

अभिनेता नही रेलवे ड्राईवर बनना चाहते थे ओम पुरी

ओम पुरी (Om Puri) के बारे में कम ही लोगो को पता होगा कि वो अभिनेता नही बल्कि रेलवे ड्राईवर बनना चाहते थे | बचपन में ओमपुरी जिस मकान में रहते थे उससे पीछे एक रेलवे यार्ड था |रात के समय ओमपुरी अक्सर घर से भागकर रेलवे यार्ड में जाकर किसी ट्रेन में सोने चले जाते थे | उन दिनों उन्हें ट्रेन से काफी लगाव था और वह सोचा करते थे कि बड़े होने पर ववह रेलवे ड्राईवर बनेगे | कुछ समय बाद ओमपुरी (Om Puri) अपने ननिहाल पंजाब से पटियाला चले आये जहा उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा पुरी की |

इस दौरान उनका रुझान अभिनय की ओर हो गया और वह नाटको में हिस्सा लेने लगे | इसके बाद ओमपुरी ने खालसा कॉलेज में दाखिला ले लिया | इसी दौरान ओमपुरी एक वकील के यहा बतौर मुंशी काम करने लगे | इस बीच नाटक में हिस्सा लेने के कारण वह वकील के यहा काम पर नही गये | बाद में वकील ने नाराज होकर उन्हें नौकरी से हटा दिया | जब इस बात का पता कॉलेज के प्राचार्य को चला तो उन्होंने ओमपुरी (Om Puri) को रसायन विज्ञान लैब में सहायक की नौकरे दे दी | इस दौरान ओमपुरी कॉलेज में हो रहे नाटको में हिस्सा लेते रहे | यहा उनकी मुलाक़ात हरपाल और नीना तिवाना से हुयी जिनके सहयोग से वह पंजाब कला मंच नमक नाट्य संस्था से जुड़ गये |

दर्शको को दिखा था नया एंग्री यंग मैन

ओम पुरी (Om Puri) फिल्म आक्रोश के जरिये खुद को इस तरह साबित करते है कि हिंदी सिनेमा में उनमे एक नया एंग्री यंग मेन दिखाई देने लगता है जो उस समय स्थापित एंग्री यंग मेन से बिलकुल अलग था | यहा गुस्से को संवास और घूंसे की जरूरत नही थी यहा भाव और संवेदना थी | गुस्सा आँखों की पुतलियो से जाहिर होता था | शायद अपनी निजी जिन्दगी की परेशानियों को कम करने के लिए ओम पुरी रंगमंच की ओर आये लेकिन फिर यही के होकर रह गये |

1970 जे दशक में वे पंजाब के कला मंच नामक नाट्य संस्था से जुड़ गये | लगभग तीन वर्ष तक पंजाब कला मंच से जुड़े रहने के बाद उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला ले लिया | अपने अभिनय के प्रति विश्वास उन्हें पुणे फिल्म संस्थान तक खींच लाया | 1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्ष्ण प्राप्त करने के बाद ओमपुरी ने डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की शिक्षा भी दी थी | बाद में ओमपुरी (Om Puri) ने अपने निजी थिएटर ग्रुप मजमा की स्थापना की | ओमपुरी (Om Puri) ने पर्दे पर अभिनय की शुरुवात विजय तेंदुलकर के मराठी नाटक पर बनी फिल्म “घासीराम कोतवाल ” के साथ की |

संवेदनशील और सहृदय अभिनेता

1980 के दशक में अमरीश पुरी , नसीरुद्दीन शाह ,शबाना आजमी और स्मिता पाटिल के साथ ओम पुरी उन मुख्य अभिनेताओ में शामिल हो गये ,जिन्होंने उस दौर में हिंदी सिनेमा को नई पहचान देने की जिद से शुरू हुए समांतर सिनेमा को एक नई उंचाई दी | भवनी भवई , स्पर्श , मंडी ,आक्रोश , मिर्च मसाला और धारावी जैसी फिल्मो ने यह स्पष्ट करने में देर नही लगाई कि वास्तव में इस रूखे दागदार चेहरे के पीछे एक संवेदनशील अभिनेता छिपा है जो पर्दे पर थोडा कुरेदते ही किसी खुबसुरत अभिनेता से ज्यादा खुबसुरत और किसी सहृदय अभिनेता से अधिक सहृदय दिख सकता है |

ओम पुरी (Om Puri) ने वर्ष 1982 में आई रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी में भी एक छोटी सी भूमिका अदा की थी आश्चर्य है कि कुछ ही वर्षो के दौरान लोकप्रिय हिंदी सिनेमा ने ओम पुरी के लिए पलक पावडे बिछा दिए | फर्क यही था कि हिंदी सिनेमा अपनी जरुरतो के लिए ओमपूरी का उपयोग कर रहा था | चाची 420 , गुप्त , प्यार तो होना ही था , हे राम , कुंवारा , हेराफेरी ,दुल्हन हम ले जायेंगे  से लेकर दबंग और घायल वंस अगेन तक ओम पुरी हिंदी के लोकप्रिय सिनेमा का उपयोग अपने मुताबिक़ नही कर सके | शायद बॉलीवुड की पहली शर्त भी यही होती है कि यहा शर्ते सिर्फ बॉलीवुड की चलती है | बावजूद इसके माचिस ,मकबूल ,देव ,चुप चुप के जैसी फिल्मे भुनाई नही जा सकती है जहा ओमपुरी अभिनय के अपने व्याकरण के साथ आते है |

सुखमय नही रहा ओमपुरी का वैवाहिक जीवन

ओमपुरी (Om Puri) का वैवाहिक जीवन अच्छा नही रहा , उन्होंने दो शादिया की थी पहली पत्नी सीमा कपूर से अलग होने के बाद उन्होंने नंदिता कपूर से दुसरी शादी की जो पेशे से पत्रकार थी और एक इंटरव्यू के दौरान उनकी मुलाक़ात हुयी थी | इस रिश्ते में खटास तब आयी जब 2009 ने नंदिता द्वार अपने पति के जीवन पर लिखी किताब “Unlikely Hero-The Story om Om Puri”जारी हुयी | नंदिता ने किताब में अपने दाम्पत्य जीवन की बेहद निजी बाते भी सांझा की | ओमपुरी का एक बेटा भी है |

निधन

6 जनवरी 2017 को 66 वर्ष की उम्र में दिल का दौरान पड़ने से ओमपुरी (Om Puri) का निधन अपने निवास स्थान पर हो गया | उनके निधन से बॉलीवुड में शोक छा गया और बड़ी बड़ी हस्तिया उनके अंतिम दर्शन को आयी | ओमपुरी अपने निधन के दो दिन बाद ही सलमान खान की आगामी फिल्म tubelight के लिए शूटिंग पर जा रहे थे | ओमपुरी हाल ही में अपने विवादास्पाद बयानों एके वजह से काफी सुर्खियों में आये थे जिसकी वजह से उनकी छवि को काफी नुकसान हुआ | अपने बयानों की वजह से उन्हें काफी आत्मग्लानि भी हुयी और इसके लिए उन्होंने सम्पूर्ण देश भी माफी माँगी | ओमपुरी का अनुमान भी नही था कि जितना संघर्ष से उन्होंने जीवन बिताया था उतने ही संघर्ष और विवादों के साथ उनके जीवन का अंत हो जायेगा | एक विचारक के रूप ने ना सही लेकिन एक संजीदा अभिनेता के रूप में ओमपुरी को फिल्म जगह सदैव याद रखेगा |

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One Comment

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  1. ओमपुरी साहब का कोई जवाब ना था अभिनय में
    इनका फिल्मों और रंगमंचों पर अदाकारी का कोई तोड़ ना
    इन्ही से प्रेरित होकर ओम साहब के छोटे भाई अमरीश पूरी ने फिल्म जगत में आने का सपना देखा.
    और एक सफल कलाकार बने ……

    धन्यवाद आप का आज मैं आप के इस ब्लॉग पर पहली बार आया हु मुझे आप का ब्लॉग सबसे ज्यादा पसंद आया आप के ब्लॉग पर सभी प्रकार की जानकारिया उपलब्ध हैं ….
    हम सभी पाठको की तरफ से आप का धन्यवाद आप इसी तरह हम सब को ज्ञानरुपी लेखो से अवगत कराते रहे……

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