Home निबन्ध हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा पर निबन्ध | National Flag of India essay in...

हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा पर निबन्ध | National Flag of India essay in Hindi

74
0
SHARE
हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा पर निबन्ध | National Flag of India essay in Hindi
हमारा राष्ट्रध्वज तिरंगा पर निबन्ध | National Flag of India essay in Hindi

प्रस्तावना – प्रत्येक देश अथवा प्रत्येक पार्टी का एक ध्वज है | इसको फहराते रहना उसका जीवन और झुकना उसकी मृत्यु मानी जाती है | जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश की जनता ने स्वतन्त्रता का युद्ध आरम्भ किया तब एक ऐसे ध्वज की आवश्यकता प्रतीत हुयी जो सारे देश के लिए मान्य हो | देश के नेताओं ने इस प्रकार का तिरंगा ध्वज देश के लिए स्वीकार किया जिसमे तीन रंग है और बीच में अशोक चक्र है | यह ध्वज हमारे देश की शान है और हमारे देश का प्राण है |

हमारे राष्ट्रीय ध्वज का परिचय

हमारा ध्वज तीन पट्टियों से बना हुआ है | ये सभी पट्टिया समान है | सबसे उपर की पट्टी केसरिया रंग की है | बीच की पट्टी सफेद है | सबसे नीचे की पट्टी हरी है | तीन रंगो की पट्टियों से बने होने के कारण यह तिंरगा कहा जाता है | बीच में चक्र बना है जो सम्राट अशोक के धर्मचक्र का प्रतीक है |

झंडे में सबसे उपर जो केसरिया रंग है वह त्याग और बलिदान का प्रतीक है | राजपूत जब देख लेते थे कि अब शत्रु पर बिजय पाना कठिन है तब वे सब प्रकार की मोह-ममता का त्याग कर केसरिया पहनकर और जान को हथेली पर रखकर युद्धभूमि में कूद पड़ते थे और विजय प्राप्त करते थे | सफेद रंग सच्चाई , इमानदारी और सहनशीलता का प्रतीक है | हरा रंग देश की हरियाली अर्थात खुशहाली का प्रतीक है |

ये तीनो रंग मिलकर देशवासियों को बताते है कि देश की स्वतंत्रता , उसकी रक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए देशवासियों को त्याग , बलिदान , इमानदारी ,सादगी और सहनशीलता के गुण अपनाने चाहिए | इन्ही गुणों के रहने पर देश का भविष्य उज्ज्वल होगा | सन 1947 में देश के स्वतंत्र होने पर चरखे के स्थान पर अशोक का धर्मचक्र रखा गया | इस चक्र के साथ का ध्वज राष्ट्रध्वज स्वीकार किया गया और चरखे से युक्त झंडा कांग्रेस पार्टी का झंडा माना गया |

झंडे का महत्व और उसके लिए बलिदान

झंडे को लेकर और “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा, इसकी शान न जाने पाए चाहे जान भले ही जाए” गाते हुए देश के बच्चे बूढ़े तक प्रभातफेरी निकालते थे और आजादी की अलख जगाते थे | जब जब आजादी के महत्व को बताने के लिए सभाए हुआ करती थी तब तब सबसे पहले झंडागान हुआ करता था | कितने ही वीर झंडा फहराते हुए अंग्रेजी शासन की गोलियों के शिकार हो गये थे | अंग्रेजी शासन के लोग बालको के झंडा छीनते , किन्तु वे झंडा न देकर अपने प्राण दे देते थे |

उपसंहार 

राष्ट्रीय ध्वज हमारे देश का प्राण है | अत: हमे प्राण देकर भी इसके सम्मान की रक्षा करनी चाहिए | इसके फहराने के भी कुछ नियम है | स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतन्त्र दिवस (26 जनवरी) के दिनों पर झंडा हर जगह फहराया जा सकता है | फहराते हुए एवं उतारते हुए इसे पृथ्वी पर नही गिरने देना चाहिए अर्थात इसके सम्मान का पूरा पूरा ध्यान रखना चाहिए |

झंडा देश का प्रतीक है | झंडे की रक्षा करने का अभीप्राय है देश की रक्षा करना | यदि हम चाहते है कि हमारे देश की स्वतंत्रता पर किसी प्रकार की आंच न आये तो हमे उन लोगो के त्याग-तपस्या और बलिदान का अनुकरण करना चाहिये जिन्होंने झंडे की रक्षा के लिए हंसते हंसते अपने प्राण दे दिए थे |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here