मौर्य वंश , जिन्होंने अखंड भारत का सपना किया था पूर्ण | Maurya Empire and Maurya Rulers History in Hindi

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Chandragupta Maurya History and Facts in Hindi

  • मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईस्वी पूर्व हुआ था |
  • विशाखदत्त कृत मुद्राराक्षस में चन्द्रगुप्त मौर्य के लिए वृषल (निम्न कुल में उत्त्पन्न) शब्द का प्रयोग किया था |
  • घनानंद को हराने के लिए चाणक्य ने चंदगुप्त मौर्य की मदद की थी जो बाद में चन्द्रगुप्त का प्रधानमंत्री बना |
  • नन्द वंश का विनाश करने में चन्द्रगुप्त ने कश्मीर के राजा प्रवर्तक से सहायता प्राप्त की थी |
  • चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना में लगभग 50000 अश्वारोही सैनिक , 9000 हाथी और 8000 रथ थे |
  • चन्द्रगुप्त ने नंदों के  पैदल सेना से तीन गुनी अधिक संख्या में अर्थात 60000 सैनिको को लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत को रौंद डाला था |
  • चन्द्रगुप्त मगध की राजगद्दी पर 322 ईसा पूर्व में बैठा |
  • चन्द्रगुप्त जैन धर्म का अनुयायी था |
  • चन्द्रगुप्त ने 305 ईस्वी में सिकन्दर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर को हराया था |
  • सेल्यूकस ने अपने बेटी कार्नेलिया की शादी चन्द्रगुप्त से करवा दी |
  • युद्ध की संधि शर्तो के अनुसार चार प्रांत काबुल ,कांधार, हेरात और मकरान चन्द्र्पुत को दिए गये |
  • मेगास्थनीज सेल्यूकस निकटर का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त के दरबार में रहता था |
  • चन्द्रगुप्त मौर्य और सेल्यूकस के बीच हुए युद्ध का वर्णन एप्पियानस ने किया है |
  • प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिए थे |
  • चन्द्रगुप्त मौर्य ने अपना अंतिम समय कर्नाटक के श्रवणबोला नामक स्थान पर बिताया |
  • चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 298 ईसा पूर्व में श्रवणबोला में उपवास से हुयी |

Bindusara History and Facts in Hindi

  • बिन्दुसार ,चन्द्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी हुआ |
  • 298 ई.पु. में बिन्दुसार मगध की राजगद्दी पर बैठा |
  • बिन्दुसार को अमित्रघात के नाम से भी जाना जाता है जिसका अर्थ होता है शत्रु विनाशक
  • बिन्दुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था |
  • वायुपुराण में बिन्दुसार को भद्र्सार कहा गया है |
  • जैन ग्रंथो में बिन्दुसार को सिंहसेन कहा गया है |
  • बिन्दुसार के शासनकाल में तक्षशिला में हुए दो विद्रोहों का वर्णन है |
  • इन विद्रोहों को दबाने के लिए बिन्दुसार ने पहले सुसीम और बाद में अशोक को भेजा |
  • बौद्ध विद्वान तारानाथ के अनुसार बिन्दुसार को 16 राज्यों का विजेता बताया है |

Ashoka History and Facts in Hindi

  • बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक महान हुआ जो 269 ई.पु. में मगध की राजगद्दी पर बैठा |
  • राजगद्दी पर बैठने के समय अशोक अवन्ती का राज्यपाल था |
  • मास्की और गुर्जरा अभिलेख में अशोक का नाम अशोक मिलता है |
  • पुराणों में अशोक को अशोक वर्धन खाया गया है |
  • अशोक ने अपने अभिषेक के 8वे वर्ष लगभग 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया |
  • उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी |
  • अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी था |
  • अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा |
  • भारत में शिलालेख का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने किया था |
  • अशोक के शिलालेखो में ब्राह्मी ,खरोष्टी ,ग्रीक और अरमाइक लिपि का प्रयोग हुआ है |
  • अशोक के शासन में जनपदीय न्यायालय के न्यायाधीश को राजूक कहा जाता था |
  • मौर्य प्रशासन में गुप्तचर विभाग महामात्य सर्प नामक अमात्य के अधीन था |
  • मौर्य वंश का शासन 137 वर्षो तक रहा |
  • मौर्य वंश का अंतिम शासक ब्रुह्द्र्थ था | इसकी हत्या सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसवी पूर्व में कर दी और मगध पर शुंग वंश की नीव डाली |
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