बर्फीली सुन्दरता की रानी मनाली के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manali Tour Guide in Hindi

बर्फीली सुन्दरता की रानी मनाली के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manali Tour Guide in Hindi
बर्फीली सुन्दरता की रानी मनाली के प्रमुख पर्यटन स्थल | Manali Tour Guide in Hindi

हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी के पूर्वी छोर पर 2050 मीटर की ऊँचाई पर स्तिथ मनाली (Manali)को “बर्फीली सुन्दरता की रानी” कहा जाए तो अनुचित न होगा | चीड़ और देवदार वृक्षों से घिरी मनाली सर्पीले रास्ते , आसमान छूती बर्फ से ढंकी पर्वतों की चोटियों और पहाड़ो के बीच से निकलते झरने सैलानियों का बरबस मन मोह लेते है |आउटडोर शूटिंग के लिए इससे सुंदर स्थल कही नही है | यहाँ फिल्मो की शूटिंग होती ही रहती है | बर्फीले खेल भी होते रहते है | स्किंग , पैराग्लाइडिंग और पर्वतारोहण के शौक़ीन युवको के लिए मनाली सर्वोत्तम स्थान है | यहाँ कई ट्रेकिंग मार्गो का आधार भी है | Sking और हेली स्कीइंग के लिए सोलंग की ढलाने दुनिया की सर्वोत्तम प्राकृतिक ढलानों में गिनी जाती है | मनाली (Manali) में अनेक दर्शनीय स्थल है उनके बारे में आपको विस्तार से बताते है |

हिडिम्बा मन्दिर

मुख्य बस अड्डे से 1 किमी की चढाई के बाद डूंगरी देवी वन क्षेत्र में पगोडा शैली से निर्मित इस मन्दिर की काष्ट कला और तत्कालीन वास्तुकला देखकर आप चकित रह जायेंगे | देवदारु के घने जंगलो में स्तिथ इस मन्दिर का निर्माण 1553 में कुल्लू महाराजा बहादुर सिंह ने कराया था | हिडिम्बा कुल्लू की कुलदेवी मानी जाती है | यह वही हिडिम्बा है जिसके साथ अज्ञातवास काल में भीम ने गन्धर्व विवाह किया था | हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच ने महाभारत युद्ध में कौरवो के छक्के छुड़ा दिए थे | वह दानवी थी इसलिए कुंती उस अपनी बहु बनाकर घर में रखने के लिए तैयार नही हुयी | उसने यह भी कहा कि हिडिम्बा के जब पुत्र होगा तो वह और भीम अलग अलग रहेंगे | जिस स्थान पर भीम की हिडिम्बा से मुलाकात हुयी थी वहां इस मन्दिर का निर्माण किया गया |

बौद्ध मन्दिर

बस अड्डे के समीप इस मन्दिर में भगवान बुद्ध की अनेक कलात्मक मुर्तिया है | मन्दिर का शिल्प औत थंका चित्र भी दर्शनीय है | इन चित्रों में बुद्ध के अलावा अनेक देवी शक्तियों और दानवो के चित्र है | यहाँ कई प्राचीन बौद्ध यंत्र और पोथिया रखी हुयी है | यहाँ बड़ी संख्या में बौद्ध रहते है | मन्दिर में बौद्ध मन्त्र “ओम मणि पद्मे हुम् ” गूंजता रहता है जिससे आसपास का वातावरण आध्यात्मिक हो जाता है |

वशिष्ट मन्दिर

मनाली (Manali) से 3 किमी दूर व्यास नदी का पुल पार करने पर वहां से 3 किमी दूर व्यास नदी के तट पर वशिष्ट मन्दिर के दर्शन होते है | 6200 फीट की उंचाई पर स्थित इस मन्दिर की छत स्लेटी पत्थर से निर्मित है | यह स्थान गंधक के कुंड के लिए भी प्रसिद्ध है | व्यास नदी व्यास कुंड से निकलती है |

मनु मन्दिर

मनाली गाँव में स्थित इस आकर्षक मन्दिर की विशेष मान्यता है कि ब्रह्मा जी के पुत्र मनु ने यहाँ तपस्या की थी | यही पर मनु ने मानवी सृष्टि की रचना का आरम्भ किया था |

सोलंग घाटी

कोठी मार्ग पर रोहतांग के समीप हिमाचादित पहाड़ो और ग्लेशियरो का दृश्य बड़ा मनोरम प्रतीप होता है | यहाँ Ice Skating के लिए बहुत अच्छी ढलाने है | मनाली से 13 किमी दूर इस घाटी के आस पास कई अच्छे निजी होटल भी है |

रोहतांग दर्रा

मनाली से 53 किमी दूर 3890 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह दर्रा हिमाचल प्रदेश के दूरस्थ लाहौल स्पीती मार्ग का प्रवेश द्वार माना जाता है | यह वर्ष के केवल चार महीने खुला रहता है | गर्मी के मौसम में भी यहाँ बर्फ से ढके पर्वत देखे जा सकते है | 2 किमी लम्बे बर्फाच्छादित इस दर्रे को देखने के लिए याक और घोड़े उपलब्ध रहते है | यहाँ आने के लिए बर्फ के विशेष जूते और कोट किराए पर मिलते है | हिमपात के कारण नवम्बर से 15 जून तक यह दर्रा बंद रहता है | यही स्थित व्यास कुंड से व्यास नदी निकलती है |

अर्जुन गुफा -मनाली से 5 किमी दूर इस गुफा के विषय में कहा जाता है कि अर्जुन ने यहाँ पाशुपत अस्त्र प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी |

जगत सुख – मनाली से 6 किमी दूर यहाँ अनेक प्राचीन मन्दिर है | आठवी शताब्दी में हिमाचल प्रदेश के प्राचीनतम पत्थरों से गौरी शंकर मन्दिर का निर्माण किया गया था | जगत सुख नगर कुल्लू रियासत के राजाओं की राजधानी रह चूका है |

नेहरु कुंड – मनाली से 6 किमी दूर रोहतांग मार्ग पर शीतल जल का यह झरना भी दर्शनीय है

कोठी – मनाली से 12 किमी दूर रोहतांग मार्ग और स्थित यह स्थान पिकनिक और शिविर के लिए मनोरम एवं उपयुक्त है | यहाँ पर सरकारी गेस्ट हाउस के अलावा निजी होटल भी है |

राहला – कोठी से 6 किमी दूर 2501 मीटर की उंचाई पर स्थित इस झरने को देखने के लिए पर्यटक यहाँ अवश्य आते है |

पर्वतारोहण संस्थान – पर्वतारोहण में दिलचस्पी रखने वाले देश-विदेश के युवको को यहाँ पर्वतारोहण की जानकारी दी जाती है | इस संस्थान की और से ट्रेकिंग टूर का भी आयोजन किया जाता है |

मढी – यहाँ हिमाचल पर्यटन निगम द्वारा संचालित हट्स भी है | मनाली से चलने वाली बसे यहाँ रुकती है | यहाँ से आगे पेड़-पौधे नही , बर्फ और चट्टाने ही है |

तिब्बतियन बाजार – मनाली बस अड्डे के समीप मॉल रोड से सटे इस बाजार में तिब्बती वस्तुए खरीदी जा सकती है | दुकाने तिब्बती महिलाये चलाती है |

तिब्बती मठ – तिब्बती शैली से बना यह मठ भी दर्शनीय है | यहाँ पर तिब्बती गलीचे बनाये जाते है | इन सुंदर सुंदर गलीचो को पर्यटक बड़े चाव से खरीदते है |

कैसे जाए

हवाई मार्ग – मनाली पहुचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कुल्लू है | कुल्लू के लिए दिल्ली से सप्ताह में कई उड़ाने है |

रेल मार्ग – समीपवर्ती रेलवे स्टेशन चंडीगढ़ है जो कुल्लू से 258 किमी दूर है | कुल्लू मनाली के लिए कोई सीधी रेल सेवा नही है | शिमला होते हुए कुल्लू-मनाली जाने के लिए कालका तक बड़ी रेलगाड़ी और उसके बाद खिलौना गाडी से शिमला जाया जा सकता है | मनाली के लिए आप शिमला , योगेन्द्रनगर या कीरतपुर तक ट्रेन में यात्रा कर सकते है | शेष यात्रा के लिए बस उपलब्ध रहती है |

सडक मार्ग – चंडीगढ़ और शिमला से कुल्लू-मनाली के लिए दिल्ली, शिमला , चंडीगढ़ और देहरादून से सीधी बस सेवा उपलब्ध है |

कब जाए

मनाली जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितम्बर से नवम्बर | हिमपात का आनन्द लेना हो तो जनवरी में जाए |

क्या खरीदे

मनाली में तिब्बती गलीचे , कलात्मक वस्तुए , शाल और काष्टकला की अच्छी वस्तुए खरीद सकते है |

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