मकर सक्रांति पर लगनेवाले ख़ास मेले | Makar Sakranti Fairs Significance in Hindi

भारत में उत्सव के दौरान मेला एक ख़ास आकर्षण होता है वैसे भी मेले हमारी सांस्कृतिक ,सामाजिक और आर्थिक जीवन के केंद्र है मकर सक्रांति के दिन नदियों,ताल-तलैयों में स्नान कर दान करने की प्रथा रही है यह प्रथा अत्यंत प्राचीनकाल से चली आ रही है ऐसे में लोगो की आस्था और भीड़ मेले अक रूप धारण कर लेती है आइये आपको आज मकर सक्रांति पर लगने वाले कुछ प्रमुख मेलो के बारे में रोचक जानकारी बताते है

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प्रयाग का माघ मेला | Allahabad Magh Mela

इलाहाबाद में गंगा-यमुना के संगम पर प्रति वर्ष मकर सक्रांति के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेले का आयोजन बड़े व्यापक स्तर पर किया जाता है जहा लाखो लोग संगम स्थल के पवित्र जल में डुबकी लगाकर स्नान करते है | माना जाता है कि इस दिन यहा स्नान करने से पूण्य फल मिलते है एक महीने तक चलनेवाले इस मेले के दौरान संगम की रेतीली भूमि पर तम्बुओ का शहर बस जाता है जहा श्रुधालू एक महीने तक कल्पवास भी करते है प्रयाग के अलावा वाराणसी ,हरिद्वार और गढ़ मुक्तेश्वर में भी स्नान और मेले का आयोजन किया जाता है |

पंजाब में मुक्तसर का मेला | Shri Muktsar Sahib

मकर सक्रांति की पूर्व संध्या पर पंजाब में लोहड़ी मनाते है इस दिन अलाव जलाकर उसमे नये अन्न और मूंगफलीया भूनते है और खाते खिलाते है अगली सुबह पंजाब के सिखों में एतेहासिक कारणों से भी सक्रांति का विशेष महत्व है | मुक्तसर वह जिला है जहा गुरु गोविन्द सिंह जी ने मुगलों के विरुद्ध 1705 में अंतिम लड़ाई लड़ी थी | गुरु गोविन्द सिंह के प्राय: सभी साथियो ने हताश होकर साथ छोड़ दिया था | तब माई भागो नामक एक महिला की प्रेरणा से उनमे से 40 के महासिंह नामक सरदार के नेतृत्व में फिर उनके साथ चलने का संकल्प लिया |

जब मुगल सेना ने गोविन्द सिंह जी को घेर लिया था तब हमला क्र इन वीरो ने ही गुरूजी की प्राणरक्षा की थे | इस युद्ध में माई भागो सहित उन सबको वीरगति प्राप्त हुयी | 1705 ईस्वी में मकर सक्रांति को खिरदाना के ढाब नामक स्थान पर हुए संग्राम का साक्षी वह तालाब आज मुक्तसर कहलाता है | सक्रांति के दिन यहा मेला लगता है और 40 मुक्तो की याद में यहा हर वर्ष श्रुधालू पवित्र मुक्तसर सरोवर में स्नान करते है लंगर होता है

बौंसी का मन्दार मेला | The Annual Bounsi Fair at Mandar Hill

यह मेला 15 दिनों के लिए लगता है | भागलपुर प्रमंडल के बांका जिला स्थित काले ग्रेनाईट पत्थर से निर्मित 700 फीट ऊँचे मन्दार पर्वत स्थित मधुसूदन मन्दिर और पहाड़ के नीचे स्थित पापहारिणी सरोवर के संबध में अनेक कथाये प्रचलित है माना जाता है कि मंदार पर्वत का प्रयोग समुद्र मंथन में किया गया था हिन्दू मान्यता के अनुसार यह भगवान विष्णु का आश्रय स्थल है लोक मान्यता है कि पर्वत की तलहटी में स्थित पापहारिणी सरोवर में स्नान करने से कुष्ठ रोग से मुक्ति मिलती है सक्रांति के दिन लोग स्नान करके मन्दिर दर्शन ,पर्वत परिभ्रमण ,दही चुडा और तिलवा खाकर बौंसी के मेले का लुत्फ़ उठाते है

ओडिशा के नागफेनी गाँव की रथयात्रा

ओडिशा के नागफेनी गाँव में मकर सक्रांति के दिन 14 जनवरी को रथयात्रा का आयोजन होता है नागफेनी के एतेहासिक जगन्नाथ मन्दिर में भगवान जगन्नाथ ,भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा सहित भगवान मकर ध्वज की मूर्ति है मकर सक्रांति के दिन मकरध्वज की विशेष पूजा होती है और रथयात्रा निकाली जाती है भगवान मकरध्वज के नाम पर इसे दोस्ती के पर्व के रूप में मनाया जाता है महिलाय एक दुसरे को उपहार देती है लोग सुबह बर्तन में सरसों तेल ,तिल और हल्दी म्मिलार्क शरीर पर लगाते है |

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