महमूद गजनवी , जिसने 17 बार भारत में मचाई लुट लेकिन किया नही कभी राज | Mahmud of Ghazni History in Hindi

mahmud-of-ghazni-history-in-hindiमहमूद गजनवी , गजनी सामराज्य का सबसे शक्तिशाली शासक था जिसने तत्कालीन भारत उपमहाद्वीप में आने वाले उत्तर पश्चिम इलाके (वर्तमान अफगानिस्तान और पाकिस्तान) पर अपनी मौत तक शासन किया था | महमूद ने भारत में आकर जमकर पैसा लुटा और अपने साम्राज्य को धनी बनाया था | महमूद गजनवी पहला शासक था जिसे सुल्तान की उपाधि दी गयी थी | अपने शासन के दौरान उसने हिंदुस्तान के कई हिस्सों पर आक्रमण किया और लूटपाट मचाई थी |

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महमूद गजनवी का प्रारम्भिक जीवन

महमूद गजनवी का जन्म वर्तमान दक्षिणपूर्व अफगानिस्तान के गजना जिले में 02 नवम्बर 971 ईस्वी में हुआ था | उसके पिता सबुक्तगिन एक तुर्की मामलुक था जिसने गजनी साम्राज्य की नींव रखी थी | उसकी माँ एक ज़बुलिस्तान के एक कुलीन परिवार की बेटी थी | 994 ईस्वी से वो अपने पिता के साथ युद्ध अभियानों में लग गया था और 998 ईस्वी ने गजनी का युद्ध जीतकर अपने पिता की सत्ता सम्भाल ली | वहा से वो कांधार के हिस्से को हराने को जीतने के लिए आगे बढ़ा |

भारत में शुरू की अपने विजय अभियानों की शुरुवात

महमूद गजनवी ने अपने विजय अभियानों की शुरुवात भारत में उस दौर में की थी जब राजपूत शकित क्षीण हो रही थी | महमूद गजनवी के भारत पर आक्रमण करने के दो मुख्य कारण थे | पहला कर्ण था उसे भारत में छिपी हुयी अपार धन सम्पदा के बारे में पता चला गया था और दूसरा वो इस्लाम को भारत में फैलाना चाहता था | इसके अलावा वो लुटे हुयी धन सम्पदा से अपनी राजधानी गजनी को मध्य एशिया का सबसे शक्तिशाली प्रदेश बनाना चाहता था |

महमूद गजनवी ने अब उत्तरी भारत में अपने विजय अभियानों की शुरुवात सन 1000ईस्वी से की | महमूद गजनवी ने अपनी मौत तक भारत पर 17 बार आक्रमण किया था | उसके विजय अभियानों में उसका रास्ता राजा जयपाल और उसके पुत्र ने रोका था जिसे उसने पराजित कर दिया था | 1009 ईस्वी से लेकर 1026 ईस्वी तक महमूद गजनवी ने काबुल , कन्नौज ,मथुरा ,कांगड़ा ,थानेश्वर ,कश्मीर ,ग्वालियर ,मालवा , बुंदेलखंड , बंगाल और पंजाब के इलाको पर आक्रमण किया था |

भारत पर किया 17 बार आक्रमण

महमूद गजनवी ने अपने जीवन में कभी भी शिकस्त नही खाई थी | ऐसा कहा जाता है कि वो हमेशा भारत पर गर्मी के दिनों में आक्रमण करता था और मानसून शुरू होने के साथ वापस गजनी लौट जाता था | इसका प्रमुख कारण था कि वो पंजाब की बहती नदियों से बचना चाहता था और उसे डर था कि उसकी सेना उन नदियों से अटक न जाए | उसके इस 17 आक्रमणों में उसने कई साम्राज्यों को नस्तेनाबुद कर दिया था | आइये उसके सभी आक्रमणों पर नजर डालते है |

आक्रमण आक्रमण वर्ष आक्रमण प्रदेश आक्रमण वाले प्रदेश के शासक
पहला 1000 ई. पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों पर हिंदूशाही राजा जयपाल
दूसरा 1001 ई. पेशावर हिंदूशाही राजा जयपाल
तीसरा 1005 ई. भटिंडा विजयराय
चौथा 1006  ई. मुल्तान दाऊद करमाक्षी
पांचवा 1007-1008 ई. मुल्तान सुखपाल
छठा 1008-1009 ई. वैहिद (पेशावर ) हिंदूशाही राजा के आनंदपाल
सातवा 1009 ई. नारायणपुर (अलवर) स्थानीय अज्ञात शासक
आठवा 1010 ई. मुल्तान सुखपाल
नवा 1013-1014 ई. थानेश्वर राजाराम
दसवा 1014 ई. नंदन त्रिलोचनपाल
ग्यारहव 1015 ई. कश्मीर संग्राम लोहार
बारहवा 1018 -1019 ई. मथुरा एवं कन्नौज प्रतिहार राज्यपाल
तेरहवा 1019 ई. कालिंजर गंड चंदेल एवं त्रिलोचनपाल
चौदहवा 1021 ई. कश्मीर स्त्री शासिका
पन्द्रहवा 1022 ई. ग्वालियर एवं कालिंजर गंड चंदेल
सोलहवा 1025 ई. सोमनाथ के मंदिर पर भीमदेव
सतरहवा 1026 ई. सिंध के जाटों पर

दुसरे आक्रमण में हिन्दुशाही राजा जयपाल को किया पराजित

जयपाल हिन्दूशाही साम्राज्य का शासक था | महमूद गजनवी उसके खिलाफ पहले भी लड़ चूका था जब गजनी का राजा उसके पिता सुबुत्गिन था | जब महमूद गजनवी राजा बना तो उसने अपने पुराने दुश्मन से बदला लेने के लिए हिन्दूशाही साम्राज्य पर आक्रमण करने की योजना बनाई | 1001 ईस्वी में महमूद गजनवी ने हिन्दूशाही साम्राज्य पर धावा बोल दिया | इस आक्रमण में 15000 हिन्दू सैनिक मारे गये और जयपाल को बंदी बना लिया गया |

जयपाल को उसके अन्य 15 रिश्तेदारों और 5 लाख गुलामो के साथ महमूद गजनवी के समक्ष लाया गया | महमूद ने उसकी सारी धन सम्पदा लुट ली और | जयपाल ने खुद को आजाद कराने के लिए महमूद गजनवी को ढाई लाख दीनार दी और 5 लाख भारतीयों को गुलाम बनाकर गजनी लाया गया | हालांकि जयपाल रिहा तो हो गया था लेकिन वो अपने इस अपमान को सहन नही कर पाया और आग में कूदकर आत्महत्या कर ली |

छठे आक्रमण में दुर्भाग्यवश जयपाल के पुत्र आनन्दपाल की हुयी पराजय

जयपाल की मौत के बाद हिन्दूशाही साम्राज्य का राजा उसका पुत्र आनन्दपाल बना | 1008 ईस्वी में महमूद गजनवी ने आनन्दपाल पर आक्रमण बोल दिया | आनन्दपाल ने अन्य हिन्दू राजाओ से मदद माँगी | अब उज्जैन ,ग्वालियर , कालिंजर , कन्नौज ,दिल्ली , अजमेर आदि के राजानो की सेना आनन्दपाल के साथ आ गयी | पेशावर के युद्धक्षेत्र में दोनों की सेना आमने सामने हो गयी लेकिन किसी ने आक्रमण नही किया |

इसी दौरान खोखरा भी हिन्दुओ की सहायता करने के लिए आगे ए | महमूद गजनवी ने अपने 6000 तीरंदाजो को आक्रमण के लिए आगे किया | खोखरो ने भी मुस्लिम आक्रमणकारियों पर आक्रमण कर 5000 मुस्लिम सैनिको को मौत के घाट उतार दिया | दुर्भाग्यवश जयपाल का हाथी क्रोधित होकर रणभूमि से भाग गया | जैसे ही जयपाल रणभूमि छोड़ गया तो हिन्दू सेना भी परेशान होकर तितर-बितर हो गयी | मुस्लिम सैनिको ने उनका पीछा किया उर 20000 हिन्दू सैनिको को मार गिराया | इस प्रकार एक विदेशी आक्रमणकारी के खिलाफ खड़ी हुयी सबसे बढिया एक संग्ठन के बावजूद

नगरकोट के मन्दिरों में मचाई लुट

नगरकोट अपने मन्दिरों में रखे हुए धन के लिए काफी प्रसिद्ध था इसलिए महमूद गजनवी ने अपना अगला निशाना नगरकोट को बनाया | टिड्डियो के झुण्ड के तरह आगे बढ़ते हुए गजनवी की सेना में मार्ग में आने वाले हर चीज को नष्ट कर दिया |  डर के मारे रक्षक दल ने शहर ने द्वारा खोल दिए और समर्पण कर दिया | गजनवी ने वहा से बहुत सारे जवाहरात , सोना और चांदी लुटा | इसके बाद वो वापस अपनी राजधानी में भारत की लुटी हुयी अपार सम्पदा को ले गया |

थानेसर के मन्दिरों को बनाया निशाना

महमूद अब जाना चुका था कि हिन्दुओ के मन्दिरों में बहुत सारा धन है इसलिए उसने अपने 1014 ईस्वी में अपना अगला निशाना थानेसर को बनाया | हिन्दू उसके साथ संधि करने को तैयार थे लेकिन गजनवी ने मना कर दिया | उसकी सेना ने शहर को नष्ट करते हुए अप्रत्याक्षित नरसंहार करते हुए हिन्दू मन्दिरों को ध्वस्त कर दिया |

मथुरा और कन्नौज के मन्दिरों से हुआ आकर्षित

जब महमूद गजनवी ने मथुरा पर आक्रमण किया तब वो हिन्दू मन्दिरों क्व्व विशालता और सुन्दरता को देखकर चकित रह गया | गजनवी का सामना करने की किसी में हिम्मत नही थी और बिना रुके उसने मथुरा से अपार धन लुटा | इसके बाद 1019 ईस्वी में उसने क्न्नौज पर आक्रमण किया | कन्नौज का राजा राजपल प्रतिहार उसका सामना नही कर पाया और भाग गया | गजनवी ने यहा भी पवित्र मन्दिरों को लुटा और निर्दोष लोगो को मौत के घाट उतार दिया | कन्नौज के राजा ने महमूद गजनवी की गुलामी स्वीकार की और उसके बाद गजनवी वापस गजनी लौट गया |

कन्नौज राजा के कत्ल का बदला लेने लौटा गजनवी

जब कन्नौज राजा राजपल प्रतिहार ने गजनवी की गुलामी स्वीकार की तो उससे अन्य हिन्दू राजा क्रोधित हो गये | कालिंजर के राजपूत राजा गंदा चन्देल ने ग्वालियर के राजा और अन्य राजाओ के साथ मिलकर कन्नौज पर आक्रमण कर राजपल प्रतिहार को मार दिया | गजनवी को जब इस बात की खबर लगी तो वो दोषियों को सजा देने के लिए एक बार फिर भारत आया और उसने कलिंजर पर आक्रमण किया | चन्देल ने गजनवी की गुलामी स्वीकार की और उसकी धन सम्पदा छीनकर वापस गजनी लौट गया |

अपार धन सम्पदा वाले सोमनाथ मन्दिर को लुटा

महमूद गजनवी का सबसे प्रसिद्ध और क्रूर आक्रमण गुजरात के सोमनाथ मन्दिर पर था | सोमनाथ मन्दिर गजनी से बहुत ज्यादा दूर था इसलिए अभी तक उसकी नजर उस पर नही पड़ी थी | सोमनाथ मन्दिर अपने अपार खजाने के लिए मशहूर था | उस मन्दिर में 1000 पुरोहित शिवजी की सेवा करते थे | हजारो नर्तक और गायक उसक मन्दिर के द्वार पर अपना प्रदर्शन देते थे | वहा पर एक प्रसिद्ध हीरे जवाहरातो से जडित एक शिवलिंग था जिसे बहुत पवित्र माना जाता था |

अपने पवित्र मन्दिर को बचाने के लिए हिन्दू राजपूत महमूद गजनवी की सेना के आगे आये | उधर गजनवी की सेना “अल्लाह-हु-अकबर” चिल्लाते हुए मन्दिर में प्रवेश करने का प्रयास कर रही थी | हिन्दू राजपूतो ने बहादुरी के साथ आक्रमणकारियों का सामना किया और मन्दिर को नुकसान नही पहुचने दिया | यह लड़ाई तीन दिन तक चली | तीन दिनों के बाद आक्रमणकारी सोमनाथ मन्दिर में प्रवेश करने में सफल रहे |

गजनवी ने अपने सैनिको को पवित्र शिवलिंग को नष्ट करने के लिए कहा | उसने मन्दिर का सारा खजाना लुट लिया | ऐसा कहा जाता है कि उसने सोमनाथ मन्दिर से 20 मिलियन दीनार धन प्राप्त किया जो उसके पहले आक्रमण से मिले धन से आठ गुना ज्यादा था |

जाटो से बदला लेने के किया अंतिम आक्रमण

सोमनाथ मन्दिर को लुटने के बाद महमूद जब वापस गजनी लौट रहा था तब जाटो ने गजनवी की सेना पर आक्रमण कर दिया | क्रोधित गजनवी वापस गजनी तो लौट गया था लेकिन क्रोध के मारे जाटो से बदला लेने के लिए वो अंतिम बार 1026 में वापस भारत लौटा | उसने जाटो को पराजित किया और वापस लौट गया | अपने इसी अंतिम आक्रमण पर उसे मलेरिया हो गया था जिसके बाद वो कभी वापस भारत पर आक्रमण नही कर पाया |

महमूद गजनवी की मौत

30 अप्रैल 1030 को महमूद गजनवी की 59 साल की उम्र में मौत हो गयी | सुल्तान महमूद गजनवी को अपने अंतिम आक्रमण के दौरान मलेरिया हो गया था | मलेरिया से उसकी हालत इतनी ज्यादा बिगड़ गयी जिसके कारण उसे टीबी हो गया और उस दौर में टीबी एक जानलेवा बीमारी थी जिसका कोई इलाज नही थी | गजनवी साम्राज्य उसकी मौत के बाद 157 वर्ष तक चला | गजनवी साम्राज्य के ज्यादातर हिस्से पर बाद में सेल्जुल साम्राज्य ने राज किया था | 1150 ईस्वी में मुह्म्द्द गौरी ने गजनी पर कब्जा कर लिया |

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