Mahendra Singh Dhoni Biography in Hindi महेंद्र सिंह धोनी की जीवनी

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Mahendra Singh Dhoni Biography in Hindi

Mahendra Singh Dhoni Biography in Hindi

Mahendra Singh Dhoni महेंद्र सिंह धोनी , जिन्हें कैप्टेन कूल के नाम से भी जाना जाता है , भारतीय टीम के अब तक के सबसे सफल कप्तान है जिन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को 2007 T20 वर्ल्ड कप और 2011 वर्ल्ड कप में जीत दिलाई | महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी से टेस्ट और एकदिवसीय मैचो में भारत को शीर्ष पर पहुचा दिया था | धोनी की कप्तानी में कभी टीम में विवाद नही होता है क्योंकि वो अपने कैप्टेन कूल स्वभाव से टीम में एकता बनाये रखते है | टीम का कप्तान बनने के बाद उन्होंने भारत को कई सीरीज में जीत दिलाई है | महेंद्र सिंह धोनी ना केवल एक बेहतरीन खिलाड़ी बल्कि एक बेहतर इन्सान भी है जो कभी मैच की जीत का श्रीय खुद को नही मानते है बल्कि पुरी टीम को इसका श्रेय देते है जिसके कारण टीम के सभी खिलाड़ी भी उनका सम्मान करते है | आइये आपको महेंद्र सिंह धोनी के जीवन के उतार चढ़ाव सहित पुरी ट्रेन टीटी से लेकर भारतीय टीम के कप्तान बनने तक की कहानी आप लोग को बता रहे है |

Early Life of Mahendra Singh Dhoni धोनी का प्रारम्भिक जीवन

Dhoni Childhood PhotosMahendra Singh Dhoni महेंद्र सिंह धोनी का जन्म झारखंड के रांची जिले में हुआ था | महेंद्र सिंह धोनी के बचपन के बारे में बताने से पहले उनके पिता के जीवन पर थोडा प्रकाश डालना चाहेंगे | Mahendra Singh Dhoni महेंद्र सिंह धोनी के पिता का नाम पान सिंह है जो अल्मोड़ा जिले के तलासलाम गाँव में रहते थे | उनका गाँव अल्मोड़ा की सुंदर पहाडियों में बसा हुआ था जहा तक जाने के लिए कोई सडक नही हुआ करती थी और इसके लिए केवल दुर्गम पहाडियों से ही पैदल जाया जा सकता था |पान सिंह के माता-पिता खेती किया करते थे लेकिन उन्होंने पान सिंह को पढ़ाया था | पान सिंह थोड़े बहुत पढ़े होने के कारण नौकरी की तलाश में लखनऊ चले गये |

उसके बाद कुछ समय बिहार रहकर रांची आ गये जहा उनको MECON में जूनियर मनगेमेंट पोजीशन पर नौकरी करने लग गये | शुरुवाती दिनों में उन्हें दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ी थी लेकिन बाद में पदोन्नति हो गयी थी |  पान सिंह का विवाह नैनीताल में रहने वाली देवकी देवी से 1969 में हुआ था | महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को हुआ था | महेंद्र सिंह धोनी के एक बड़ा भाई नरेंद और एक छोटी बहन जयंती है | अल्मोड़ा में अभी भी पान सिंह के रिश्तेदार रहते है | नरेंद पहले अपनी पैतृक सम्पति की रक्षा के लिए अल्मोड़ा ही रहते थे लेकिन महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेट में चमकने के बाद वो भी रांची आ गये |

राची में पान सिंह श्यामली कॉलोनी में जल आपूर्ति के लिए पम्प ऑपरेटर का काम किया करते थे जहा पर DAV Jawahar Vidya Mandir है | महेंद्र सिंह धोनी भी इसी स्कूल में पढ़ा करते थे | क्रिकेट से पान सिंह का नाता पहली बार तब पड़ा जब 1984 में रणजी ट्राफी के दौरान रांची के स्टेडियम में जलापूर्ति का काम दिया गया था | Mahendra Singh Dhoni धोनी बचपन में एडम गिलक्रिस्ट के फेन है और बचपन में वो सचिन तेंदुलकर , अमिताभ बच्चन और लता मंगेशकर के फेन थे | Mahendra Singh Dhoni धोनी बचपन से ही फूटबाल और बैडमिंटन में माहिर खिलाड़ी थे जिसके कारण उनका जिला स्तर पर इन खेलो में चुनाव कर लिया जाता था |

Mahendra Singh Dhoni धोनी अपनी फूटबाल टीम में गोलकीपर थे | धोनी जब सात वर्ष के थे तब उनके जीवन में एक अहम मोड़ आया जिससे वो फूटबाल की जगह क्रिकेट में आ गये थे | उनके खेल प्रशिक्षक केशव चन्द्र बेनर्जी ने क्रिकेट में नियमित विकेटकीपर के अनुपस्तिथ रहने के कारण धोनी को विकेटकीपिंग करवाने लग गये थे क्योंकि फूटबाल में गोलकीपर के लिए विकेटकीपिंग आसान था | धोनी इससे पहले कभी क्रिकेट नही खेले थे लेकिन क्रिकेट में आने क बाद 2-3 वर्षो तक लगातार विकेटकीपिंग करते रहे थे और Commando cricket club के रेगुलर विकेटकीपर बन गये थे |  अब  विकेटकीपिंग करते करते जब उनकी बल्लेबाजी की बारी आयी तो उसमे भी उन्होंने कमाल कर दिखाया था धोनी 10वी कक्षा के बाद क्रिकेट में ज्यादा ध्यान देने लग गये थे |

2001 से 2003 तक वो खडगपुर रेलवे स्टेशन पर टीटी का काम करने लग गये थे | यह ग्रेड 9 श्रेणी की नौकरी थी जो मध्मयवर्गीय परिवार के लिए वरदान समान थी | उनके साथी काम के दौरान उन्हें रेलवे का सबसे ईमानदार कर्मचारी मानते थे | अब रेलवे क्वार्टर में रहते वक़्त धोनी और उनके मित्र शरारते भी किया करते थे | एक बार वो सफ़ेद चद्दर ओढकर रात को काम्प्लेक्स में लोगो को डराने के लिए निकल पड़े थे | रात को पहरा देने वाले पहरेदारो को उन्होंने खूब डराया जिसके कारण अगले दिन ये बहुत बड़ी कहानी बन गयी थी |

Early career of Mahendra Singh Dhoni

Early career of Mahendra Singh DhoniMahendra Singh Dhoni धोनी 1998-99 सत्र में बिहार के अंडर 19 टूर्नामेंट खेले थे जहा पर उन्होंने आठ पारियों में 185 रन बनाये थे | 1999-2000 में बिहार फाइनल में पहुचा और धोनी को CK Nayudu Trophy में खेलने का मौका मिला था | इस ट्राफी में टॉस जीतकर बिहार ने बल्लेबाजी करते हुए 357 रन बने जिसमे धोनी ने 12 चौको और दो छक्को की मदद से सर्वाधिक 84 रन बनाये थे |धोनी ने इस टूर्नामेंट में 9 मैचो में 488 रन बनाये थे और इस टूर्नामेंट के बाद उनको प्रथम श्रेणी में खेलने का मौका मिला था |

1999-2000 में Mahendra Singh Dhoni धोनी ने बिहार की तरफ से रणजी ट्राफी में डेब्यू किया था जिस समय वो 18 वर्ष के थे | उन्होंने अपने डेब्यू मैच में ही अर्द्धशतक मारते हुए 68 रन की नाबाद पारी खेली थी जो उन्होंने असम के खिलाफ खेला था | धोनी ने इस सीजन के पांच मैचो में 283 रन बनाये थे | धोनी ने 2000-01 में बिहार की तरफ से खेलते हुए पहला शतक मारा था लेकिन उस मैच में उनकी हार हुयी थी | ये उनका बेहतरीन प्रदर्शन तो नही था लेकिन उनकी प्रतिभा को अनदेखा नही किया जा सकता था | जनवरी 2001 में बिहार का सामना सत्र के फाइनल लीग मैच में बंगाल से था |

भारतीय टीम में पदार्पण

Mahendra Singh Dhoni ODI Teamवर्ष 2000 से 2005 के बीच टीम इंडिया के लिए कोई स्थाई विकेटकीपर नही मिल पा रहा था | Mahendra Singh Dhoni धोनी ने जब दिसम्बर 2004 में एकदिवसीय क्रिकेट में पदार्पण किया तो वो पांच साल में टेस्ट या वनडे खेलने वाले 12वे विकेटकीपर थे | इसकी शूरुवात 1999 के ऑस्ट्रेलिया  दौरे से हुयी जब प्रसाद ने टेस्ट और समीर दिघे ने एकदिवसीय श्रुंखला में विकेटकीपिंग की थी | इंग्लैंड में 1999 विश्वकप के दौरान नयन मोंगिया के घायल होने के बाद मजबूरन राहुल द्रविड़ को दस्ताने पहनने पड़े थे | वह 2003 विश्वकप और 2004 में भी कुछ समय तक अपनी विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी को सम्भाल रहे थे |

इससे पहले 2000 में सबा करीब ने कुछ समय विकेटकीपिंग की थी लेकिन ढाका में उनकी आंख में चोट लग गयी थी | इसी बीच 2001 में कुछ समय के लिए नयन मोंगिया और उसी साल दीप दासगुप्ता को भी मौका दिया गया था | विजय दहिया ने भी टेस्ट और वनडे में कुछ समय यह जिम्मा सम्भाला था | अजय रात्रा ने 2002 में वेस्टइंडीज दौरे पर अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन उसी साल उन्हें इंग्लैंड दौरे पर चोट लग गयी थी | अजय रात्रा के बाद युवा पार्थिव पटेल को मौका दिया गया जिन्होंने आस्ट्रलिया के 2003-04 में अच्छा प्रदर्शन नही किया जिसके कारण दिनेश कार्तिक कोविकेटकीपिंग का मौका मिला |

उस समय ऐसा लग रहा था कि घरेलू क्रिकेट में एक विकेटकीपर अपनी बल्लेबाजी के जरिये ही राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खीच सकता था | सितम्बर 2004 में इंग्लैंड दौरा करने वाली वनडे टीम में कार्तिक का चयन होने से धोनी को एक ब्रेक मिला जो उनके लिए भाग्यशाली रहा | तमिलनाडू के विकेटकीपर बल्लेबाज कार्तिक जिम्बाबे और केन्या के भारत “ए” टीम के दौरे की पहली पसंद थे जबकि धोनी रिज़र्व विकेटकीपर थे | जिम्बाबे दौरे पर पहले चार मैच खेलने के बाद कार्तिक को इंग्लैंड दौरे के लिए सीनियर टीम के लिए चुन लिया गया लिहाजा धोनी को खेलने का मौका मिल गया था |

जिम्बाबे चयन एकादश के खिलाफ हरारे में दोनों ने दूसरा मैच खेला था | यह चारदिवसीय मैच 29 जुलाई 2004 को शुरू हुआ था लेकिन तीन दिन के भीतर भारत ए ने इसे दस विकेट से जीत लिया था | जिम्ब्बबे की टीम बेहद कमजोर थी | कार्तिक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में खेले जबकि धोनी ने विकेटकीपिंग का जिम्मा सम्भाला | पहली बार धोनी ने उस समय इंडियन टीम की पोशाक पहनी थी हालांकि यह एक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय मैच नही था | इस मैच में धोनी ने सात कैच और चार स्टंपिंग कर एक ही मैच में ग्यारह बल्लेबाजो को पैवेलियन भेजने का रिकॉर्ड बना लिया और साथ ही उन्होंने 48 गेंदों पर 45 रन भी बनाये थे |

अगले मैच में लिए कार्तिक टीम में लौटे | इस वनडे में Mahendra Singh Dhoni धोनी ने पारी का आरम्भ किया और एक ही रन बना सके | चौथे और फाइनल मैच में कार्तिक को विकेटकीपिंग और धोनी को बेंच पर बैठना पड़ा था  | लेकिन उस दौरे पर भारत ए  के लिए कार्तिक का आखिरी मैच था क्योंकि उन्हें भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर जाना था | धोनी ने केन्या के खिलाफ मैच में विकेटकीपिंग की थी | उन दिनों अच्छी बल्लेबाजी करने वाले विकेटकीपर का जोर था | वनडे क्रिकेट में दोहरी जिम्मेदारी निभाने को लेकर राहुल द्रविड़ के उदासीन रवैये से कार्तिक और धोनी को फायदा मिला था |

केन्या के खिलाफ मैच में भी धोनी सलामी बल्लेबाज में आये लेकर आठ रन बनाकर पैविलियन लौट गये | इसके बाद त्रिकोणीय श्रुंखला में पाकिस्तान ए के खिलाफ मैच में धोनी ने सबसे ज्यादा 70 रन बनाये थे जिसके लिए उनको पहली बार मैंन ऑफ़ मैच पुरुस्कार मिला था | इसके बाद 16 अगस्त को पाकिस्तान के खिलाफ मैच में भारत में जीत दर्ज की जिसमे धोनी ने पहला अंतर्राष्ट्रीय शतक लगाया था | उन्होंने 122 गेंदों में 120 रन बनाये जिसमे दस चौके और दो छक्के जड़े थे | सलामी बल्लेबाज गौतम गम्भीर ने भी सैकड़ा जड़ा था | दोनों ने दुसरे विकेट के लिए 208 रन जोड़े थे जिससे भारत ने 330 रन का विशाल लक्ष्य रखा और जवाब में पाकिस्तानी टीम 209 पर आउट हो गयी |

त्रिकोणीय एकदिवसीय शृखला की खोज साबित हुए Mahendra Singh Dhoni धोनी ने सीरीज में 362 रन बनाये थे और अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से भारतीय क्रिकेटप्रेमियों  का दिल जीत लिया था | अब धोनी को पूरा यकीन हो गया था कि उनके इंडिया के लिए खेलने का सपना सच होने को है |  अब कार्तिक का लगातार प्रदर्शन खराब होने की वजह से दिसम्बर 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ कार्तिक की जगह धोनी को लिया गया | धोनी ने अपना पहला एकदिवसीय मैच चटगाँव के MA अजीज स्टेडियम पर 23 दिसम्बर 2004 को खेला | भारत ने पहला मैच 11 रन से जीता और इस मैच में धोनी बिना खाता खोले रनआउट हो गये थे | धोनी ने इस मैच में एक भी कैच नही लिया था |

दुसरे मैच में दिग्गज खिलाडियों की कमी की वजह से बांग्लादेश से हार का सामना करना पड़ा था | बांग्लादेश को अपने 100वे मैच में पहली एकदिवसीय जीत हासिल हुयी थी | तीसरे और अंतिम निर्णायक मैच में भारत की जीत हुयी जिसमे धोनी सात रन बनाकर नाबाद रहे थे | इसी मैच में उन्होंने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय छक्का जड़ा था | इस मैच में उन्होंने तीन कैच और दो स्टंपिंग भी की थी | सौरव गांगुली ने धोनी को टीम में रखने के लिए सेलेक्टर को कहा | इसके बाद टीम इंडिया सीनियर्स के एक मैच में उन्होंने 96 गेंदों पर 102 नाबाद रन बनाये थे जिससे गांगुली को यकीन हो गया कि धोनी एक अच्छे खिलाड़ी है बस कुछ मौको की जरूरत है | 2004-05 में उन्होंने आखिरी प्रथम श्रेणी मैच खेला था |

Fame of Mahendra Singh Dhoni धोनी की लोकप्रियता

Fame of Mahendra Singh Dhoniवर्ष 2005 की शुरुवात में पाकिस्तान टीम का भारत दौरा टीम इंडिया के कोच जॉन राईट की आखिरी श्रुंखला थी | कोच्ची में पहला मैच जीतने के बाद टीम इंडिया को विशाखापत्तनम में दूसरा मैच खेलना था | दुसरे मैच में भी भारतीय टीम की जीत हुयी जिसके हीरो महेंद्र सिंह धोनी रहे | धोनी ने 148 रन की ताबड़तोड़ पारी खेलकर पाकिस्तानी गेंदबाजो के हौसले पस्त कर दिए थे | इस पारी का श्रेय गांगुली को जाता है जिन्होंने धोनी को तीसरे नम्बर पर उतारा था जो इससे पहले सातवे नम्बर पर बल्लेबाजी करते आ रहे थे | जब सचिन तेंदुलकर का विकेट गिरा तब टीम का स्कोर केवल 23 था | तब धोनी जब मैदान में उतरे तो लोग स्तब्ध रह गये क्योंकि धोनी उस समय एकदम नये बल्लेबाज थे |

Mahendra Singh Dhoni धोनी ने अपनी पहली ही गेंद पर चौका जड दिया और इसके बाद सहवाग के साथ मिलकर उन्होंने पाकिस्तानी गेंदबाजों की धुनाई कर दी | सहवाग 74 रन बनाकर आउट हो गये जो उन्होंने केवल 40 गेंदों पर बनाये थे | दोनों ने 62 गेंदों में 96 रन की सांझेदारी की थी |सहवाग के आउट होने पर गांगुली औए गांगुली के आउट होने के बाद द्रविड़ आये जिससे रनों की गति धीमी हो रही थी | धोनी अपनी शैली में धीरे धीरे खेल रहे थे और दुसरी तरफ धोनी गेंद को सीमा रेखा के पार पहुचकर दर्शको का मनोरंजन कर रहे थे | लम्बे बालो वाले महेंद्र सिंह धोनी को उस मैच ने रातो रात स्टार बना दिया | अगले दिन सारी मीडिया धोनी की सराहना करने लगी थी |

इस मैच में Mahendra Singh Dhoni धोनी ने द्रविड़ के साथ मिलकर 149 रनों की सांझेदारी की थी और भारत को 356 के एक विशाल स्कोर तक पहुचाया था | उस समय पाकिस्तान के खिलाफ भारत का सबसे बसा स्कोर था | धोनी ने इस मैच में 123 गेंदों पर 148 रन बनाये थे जिसमे 12 चौके और चार छक्के शामिल थे | जवाब में पाकिसतानी टीम ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 298 रन पर आल आउट हो गये थे और भारत की जीत हो गयी थी | इस मैच में धोनी को पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय मैचो में मेन ऑफ़ द  मैच मिला था | लगातार दो मैच जीतने के बाद श्रुंखला के बाकि चार मैचो में पाकिस्तान ने अपने झंडे गाडकर भारत को सीरीज में हर दिया था लेकिन धोनी स्टार बन चुके थे | बाकि चार मैचो में धोनी का प्रदर्शन ज्यादा अच्छा नही था |

इसक  बाद श्रीलंका के साथ भारत की एक त्रिकोणीय श्रुंखला आयोजीत हुयी जिसके शुरवाती दो खेलो में तो उन्हें ज्यादा मौका नही मिला लेकन जब तीसरा एकदिवसीय मैच जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में रखा गया तब उन्होंने कमाल कर दिया | श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते ही भारत को 299 रन का टारगेट दिया जिसके जवाब में जब भारतीय टीम उतरी तो सचिन तेंदुलकर जल्दी आउट हो गये | धोनी को एक बार फिर तीसरे नम्बर पर उतारा गया और उन्होंने ताबड़तोड़ 183 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई | इस मैच से उनका दुसरी पारी में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड बना जो आज तक नही टूट पाया है | इस सीरीज में धोनी को Man of the Series चुना गया |

इसके बाद धोनी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए 2006 में ICC ODI Rankings  में रिकी पोटिंग को पछाड़कर पहला स्थान ले लिया | इसके बाद 2007 वर्ल्ड कप में धोनी ज्यादा कमाल नही कर पाए थे जिसके कारण उन्हें आलोचना झेलनी पड़ी थी | धोनी जब वर्ल्ड कप से वापस लौटे थे तब उनके घर पर उप्द्व्रियो ने पत्थर फेंके थे क्योंकि भारत वर्ल्ड कप के पहले ही राउंड में बांग्लादेश से हारकर बाहर हो गया था और वापस घर लौटना पड़ा था | इसके बाद वापस धोनी ने अपने खेल पर काम करना शूर किया और अपने प्रदर्शन को सुधारा जिसकी वजह से उन्हें आगामी सीरीज में एकदिवसीय टीम का उप-कप्तान चुना गया |

Captain of First T20 World Cup and ODI Team

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धोनी की आक्रामक बल्लेबाजी और बढ़िया प्रदर्शन के चलते उन्हें जून 2007 में World Twenty20 का कप्तान चुना गया | धोनी ने साउथ अफ्रीका में ICC World Twenty 20 trophy में बेहतरीन प्रदर्शन किया | इस ICC World Twenty 20 trophy के फाइनल में पाकिस्तान को हराकर भारत ने पहला T20 World Cup जीत लिया जिसके कारण उनका भारत में बहुत अच्छा स्वागत हुआ | कपिल देव के बाद क्रिकेट के किसी भी फॉर्म में वर्ल्ड कप लाने वाले धोनी दुसरे कप्तान बने | भारत लौटने पर उनकी खूब सराहना की गयी और इस युवा कप्तान ने भारत के करोड़ो क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया था |

इसके बाद 2007 में में ऑस्ट्रलिया के खिलाफ सात मैचो की श्रुंखला में भारतीय एकदिवसीय टीम का कप्तान बनाया गया | इसके बाद 2008 में कुबले के चोटिल होने के कारण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे और अंतिम टेस्ट मैच में भी उन्हें कप्तान बना दिया गया | उसके बाद कुंबले ने सन्यास ले लिया जिससे धोनी टेस्ट टीम के नियमित कप्तान बन गये थे | धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ICC Test Rankings में शिखर पर पहुच गयी | 2009 में भी वो काफी समय तक  ICC ODI Batsman rankings में प्रथम रहे थे | 2011 ICC Cricket World Cup में भी धोनी की कप्तानी में भारत ने 28 साल बाद वर्ल्ड कप पर कब्जा किया था जिसके लिए भारत आज भी उनका आभारी है |

2011 ICC Cricket World Cup के फाइनल मैच में धोनी ने 91 रन की नाबाद पारी खेलकर साबित कर दिया कि वो एक अच्छे मैच फिनिशर है | सचिन तेंदुलकर ने भी कभी वर्ल्ड कप का स्वाद नही चखा था जो कि विश्व के सबसे महान बल्लेबाज है | सचिन तेंदुलकर ने धोनी की सराहना करते हुए कहा था कि धोनी की कप्तानी में पुरी टीम सामंजस्य के साथ खेली थी और किसी भी कप्तान के नेतृत्व में वो खेले तो धोनी उन सब में से सबसे अच्छे कप्तान है | धोनी की कप्तानी में सचिन तेंदुलकर का वर्ल्ड कप जीतने का सपना पूरा हुआ जो इससे पहले काफी वर्ल्ड कप खेल चुके थे |

मार्च 2013 में धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान बने जिन्होंने सौरव गांगुली के 49 टेस्ट में 21 जीत के रिकॉर्ड को तोडा था | सौरव गांगुली खुद ऐसा मानते है कि धोनी अब तक के भारत के सबसे सफल कप्तान है और उनकी वजह से भारत फिर शिखर पर पहुचा है | नवम्बर 2013 में धोनी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1000 रन बनाने वाले दुसरे भारतीय खिलाड़ी बने जिसमे सचिन तेंदुलकर प्रथम स्थान पर है |धोनी शुरुवात में अपनी आक्रामक शैली के लिए जाने जाते थे लेकिन बाद में उन्होंने अपनी बैटिंग तकनीक में परिवर्तन किया जिसके कारण उन्हें “कैप्टेन कूल” के नाम से जाना जाता है | धोनी विकेटों के बीच बहुत तेज दौड़ते है और स्टंपिंग में बहुत तेज है |

Indian Premier League

Indian Premier League2008 में जब IPL की शुरुवात हुयी तो उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स ने 1.5 Million USD में खरीदा जो IPL के पहले सीजन के सबसे महंगे खिलाड़ी थे | धोनी शुरवात से अब तक  चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान है जिनकी कप्तानी में  चेन्नई सुपर किंग्स दो बार IPL विजेता बना है | धोनी ने 2013 IPL तक 84 इनिंग्स में 2243 रन बनाये है जिसमे उन्होंने सर्वाधिक 70 रन बनाये है |

Personal Life and Hobbies

धोनी ने अपनी बचपन की मित्र साक्षी सिंह रावत के साथ विवाह किया जो उनके साथ बचपन में DAV Jawahar Vidya Mandir में साथ पढती थी | उनका विवाह 4 जुलाई 2010 को उत्तराखंड के देहरादून जिले में हुयी | शादी के समय साक्षी होटल मैनेजमेंट की पढाई कर रही थी और कोलकाता के ताज बंगाल में ट्रेनी थी | साक्षी के पिता चाय का व्यापार करते थे जो बाद में अपने पैतृक गाँव देहरादून आ गयी थे | शादी से एक दिन पहले उन दोनों की सगाई हुयी थी | धोनी 6 फरवरी 2015 को एक लडकी के पिता बने जिसका नाम उन्होंने जीवा रखा |

धोनी को बचपन से लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गानों के साथ साथ गजले सुनना पसंद है | इसके अलावा धोनी को कंप्यूटर गेम्स और बैडमिंटन भी खेलना पसंद है | धोनी की सबसे पसंदीदा हॉबी बाइक चलाना और अलग अलग तरह की बाइक रखना है | धोनी को अंग्रेजी गाने सुनना और जिम जाना बिलकुल भी पसंद नही है | धोनी खेल में अपना आदर्श एडम गिलक्रिस्ट को मानते है | महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर 2016 में एक फिल्म रिलीज़ हो रही है जिसमे धोनी का किरदार सुशांत सिंह राजपूत ने निभाया है | इस फिल्म का नाम M. S. Dhoni: The Untold Story है जिसका निर्देशन नीरज पांडे ने और निर्माण Rhiti Sports Management द्वारा किया गया है |

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