महाभारत और दिल्ली के सुल्तान की मनोकामना Tenali Raman Story in Hindi

Mahabharat and Delhi Sultan’s wishएक दिन राजा कृष्ण देव राय को दिल्ली के तत्कालीन सुल्तान आदिल शाह ने दो प्रान्तों के बीच चल रहे मसलो को सुलझाने के लिए बुलाया | अनावश्यक रक्तपात से बचने और शांति बहाल के लिए राजा कृष्ण देव राय अपने कवियों, नर्तको और  विद्वानों की टोली साथ लेकर दिल्ली पहुचे | आदिल शाह ने राजा का भव्य स्वागत किया  और वार्तालाप के सुखद दौर में कृष्ण देव राय के कवियों ने महाभारत के कुछ दृश्यों के बारे में सुनाया | आदिल शाह महाभारत महाकाव्य की बाते सुनकर काफी प्रभावित हुआ और उसने राजा कृष्ण देव से अपने आदमियों से , स्वयं और उसके मित्रो को पांडव और उसके दुश्मनों कोए कौरव बताकर . इस काव्य को फिर से लिखने की बात कही |

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राजा कृष्ण देव राय सुल्तान की ऐसी अजीब फरमाइश सुनकर दंग रह गया | वो अब चिंतित हो गया कि अगर उसके आदमी सुल्तान की फरमाइश को पूरा करने में असफल हो गये तो वो विजयनगर पर आक्रमण बोल सकता है | राजा को चिंतित देख तेनालीराम ने स्तिथि को सम्भालने का राजा को विश्वास दिलाया | राजा अब निश्चिंत था क्योंकि इस पेचीदा मसले से केवल तेनालीराम Tenali Raman  ही बचा सकता है इसलिए उसने तेनालीराम को सुल्तान से मिलने की अनुमति दे दी |

अगली सुबह तेनालीराम Tenali Raman ने सुल्तान से अकेले में मिलने की इजाजत मांगी | अब वो जब सुल्तान के सामने आया तो हाथ जोडकर प्रार्थना करने लगा “हे महाराज ! ये हमारा सौभाग्य है कि आपने हमारे पुराने ग्रंथो में रूचि दिखाई | हमारे सबसे कुशल लेखक और कवि नई महाभारत लिखने में व्यस्त है लेकिन हम एक जगह पर अटक गये है और हमे आपकी सहायता की आवश्यकता है ” | सुल्तान ने कहा “बोलो , तुम मुझसे क्या चाहते हो ??”

तेनालीराम Tenali Raman  ने कहा “जहापनाह , महाभारत में आपको पांड्वो में सबसे ज्येष्ठ धर्मराज युधिष्टर का पात्र और आपके मित्रो को भीम , अर्जुन , नकुल और सहदेव का पात्र दिया गया है लेकिन जैसा कि आप जानते है कि पांचो पांड्वो ने द्रौपदी से विवाह किया था और सभी पर उसका बराबर अधिकार था | अब समस्या यह है कि शाही परिवार में द्रौपदी का पात्र किसे दिया जाए  ” |

सुल्तान तेनालीराम की बात सुनकर अपनी बेगम को द्रौपदी पात्र में तो कतई नही लाना चाहता था इसलिए उसने Tenali Raman तेनालीराम को उसी समय महाभारत के लेखन का कार्य रोक देने का आदेश दिया  | तेनालीराम की इस बुद्धिमता से राजा कृष्णदेव राय काफी प्रसन्न हुए और वो समझ गये कि तेनालीराम जटिल से जटिल समस्याओ को भी चंद मिनटों में सुलझा सकता है |

 

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