महाबलीपुरम के प्रमुख पर्यटन स्थल | Mahabalipuram Tour Guide in Hindi

महाबलीपुरम के प्रमुख पर्यटन स्थल | Mahabalipuram Tour Guide in Hindi
महाबलीपुरम के प्रमुख पर्यटन स्थल | Mahabalipuram Tour Guide in Hindi

हमारे देश में एक ऐसी जगह है जहा पत्थर भी गाते है हंसते है बोलते है कहानिया सुनाते है | उनके गीतों और कहानियों में भारते की प्राचीन संस्कृति , धार्मिक विश्वास , कलाप्रियता और वास्तु , स्थापत्य तथा शिल्प कला के उत्कृष्ट रूप के दर्शन होते है | इन पत्थरों का संगीत सुनने और इनके माध्यम से भारत की प्राचीन संस्कृति , इतिहास और कला से परिचित होने के लिए संसार के सभी देशो से पर्यटक आते ही रहते है | महाबलीपुरम (Mahabalipuram) धार्मिक दृष्टि से तो तीर्थ है ही , कला की दृष्टि से भी यह एक तीर्थ है इसलिए धार्मिक प्रवृत के श्रुद्धालुओ के अलावा कला-प्रेमी भी यहाँ आने को उत्सुक रहते है |

महेद्रवर्मन के पुत्र नरसिंह वर्मन (प्रथम) ने सातवी शताब्दी के मध्य में महाबलीपुरम (Mahabalipuram) का निर्माण करते हुए इसे भी बनवाया था | चेन्नई से 45 किमी दूर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित पल्लव वंश के शासनकाल में यह पूर्ण विकसित नगर था | पहली ईस्वी के आस-पास यह प्रख्यात बन्दरगाह था | 600-800 ईस्वी में पल्लव शासको ने इसे अपना व्यापारिक बन्दरगाह बनाया | उस समय यह पोताश्रय अत्यंत उत्तम अवस्था में था | इस पोताश्रय से बहुमूल्य पत्थर , मुंगे-मोती , मणि-माणिक्य आदि विदेशो को भेजे जाते थे |

कहा जाता है कि स्कॉटलैंड एक एक इंजिनियर मैकंजी साहब ने प्रथम बार महाबलीपुरम की कला-सम्पदा का उल्लेख किया , जिसमे लोगो को यहाँ के कला-वैभव की जानकारी मिली | अजन्ता के बाद दक्षिण भारत की मूर्तिकला की परम्परा खास तौर से उजागर हुयी | उसकी बानगी यहाँ देखने को मिलती है | एक बड़ी चट्टान के ठीक सामने हिमालय से धरती पर आती हुयी गंगा नदी को जमीन पर ले आना एक मानवीय प्रयास था जिसे शायद भागीरथ ही कर सकते थे | चट्टानों को काटकर बनाये गये यहाँ मूर्तिशिल्प अपनी पुरी बनावट में भरपूर ताजगी लिए हुए और जीत-जागते नजर आते है |

महाबलीपुरम (Mahabalipuram) के कई नाम है जैसे म्म्मलापुरम , मल्लाई , कराल मल्लाई | आज से लगभग 600 वर्ष पूर्व दक्षिण भारत में पल्लव वंश के राजाओं का शासन था | यह साम्राज्य तोंडामंडलम के नाम से प्रसिद्ध था | इसकी राजधानी कांचीपुरम थी | पल्लव वंश के नरेशो के सिंह , विष्णु एवं उनके सुपुत्र महेंद्र वर्मन बड़े धर्म परायण और कला प्रेमी थे | महेंद्र वर्मन ने अनेक गुफा मन्दिरों का निर्माण करवाया | ओंकोट जिले स्थित मण्डपगढ़ के गुफा-मन्दिर में ब्रह्मा , विष्णु और महेश की प्रतिमाये है | ये मन्दिर प्राचीन शिल्प कला के उत्कृष्ट उदाहरण है |महाबलीपुरम का मूर्ति शिल्प आम आदमी की रोजमर्रा की जिन्दगी को दिखाता है | यह सही है कि देवी देवताओ की प्रतिछ्विया बहुतायत में है लेकिन आम आदमी वही बहुत पीछे नही छुट गया है | तमाम मन्दिरों , गोपुरम , विमानम और गुफाओं को देखने पर रोजमर्रा की जिन्दगी में उलझा आदमी गायब नजर नही आता |

दर्शनीय स्थल

गुफा मन्दिर – महाबलीपुरम की कलाकृतियों को चार वर्गो में बांटा जा सकता है गुफा मन्दिर , समुद्र तटीय मन्दिर , रथाकृति मन्दिर एवं प्रस्तर खंडो पर उत्कीर्ण देवी -देवताओं की मुर्तिया | गुफा मन्दिर में पत्थरों को तराशकर अनेक पौराणिक गाथाओं को उत्कीर्ण किया गया है | इन गुफाओं में एक गुफा में अस्त्र-शस्त्रों से सज्जित देवी दुर्गा और वराह गुफा में शिव-विष्णु एवं शक्ति की मुर्तिया है | एक गुफा में शिव की अनेक भाव-भंगिमाओ को चित्रित किया गया है | गुफा की दीवारों और समुद्र-गर्भ से पृथ्बी का उद्धार करने , वराह , गंगा को अपनी जटाओ में समेटते शंकर , लक्ष्मी जी पर जल डालते गज की मुर्तिया अंकित है | इनके अतिरिक्त शेषसाई भगवान विष्णु की मूर्ति भी बड़ी सजीव है |

रथाकार मन्दिर – ठोस चट्टान को काटकर रथाकार बने पांच मन्दिर सर्वाधिक कलात्मक और आकर्षक है | महाभारत के दृश्य इन मन्दिरों में दर्शाए गये है जो बड़े ही सुंदर और कलापूर्ण है | इन रथाकार मन्दिरों में सबसे बड़ा रथ मन्दिर है धर्मराज मन्दिर | इसके बाद क्रमश: भीम ,अर्जुन ,द्रौपदी और नकुल-सहदेव के रथ मन्दिर है | इन मन्दिरों का निर्माण एक विशाल शिलाखंड को काट-छांटकर किया गया है |

पंचपांडव मन्दिर – एक विशाल प्रस्तर-खंड पर शीकृष्ण के चरित संबधी कई दृश्य अंकित किये गये है | एक दृश्य में भगवान श्रीकृष्ण अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण किये हुए है जो स्थापत्य कला की दृष्टि से प्रशंसनीय है | कृष्ण मंडप के पास 30 फीट ऊँचे और 90 फीट लम्बे एक विशाल शिलाखंड पर अर्जुन मूर्ति-समूह के अंतर्गत 150 से अधिक मुर्तिया अंकित है | इन मूर्तियों में तपस्यारत अर्जुन ,गन्धर्व , किन्नर , शिव की उपासना करते भक्त , दो हाथियों के मध्य में विष्णु , अप्सराये , पशु-पक्षी आदि अंकित है | आकर्षक और जीवंत मुर्तिया उत्कृष्ट शिल्प कला का उदाहरण है | यह शिलाखंड विश्व का सबसे विशाल कलाकृति-अंकित शिलाखंड है |

समुद्र-तटीय मन्दिर – कहा जाता है कि राजा राजसिंह ने समुद्र-तट पर स्थित चट्टानों को तराशकर सात मन्दिर बनवाये थे जिनमे एक मन्दिर समुद्र के गर्भ में जाने से बच गया है | वलयीकृत शिखरवाला यह मन्दिर स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है | सागर की लहरों के आघात से बचाने के लिए चारो ओर पत्थरों की सुदृढ़ दीवार बनाई गयी है | यह शिव और विष्णु का संयुक्त मन्दिर है | यह दक्षिण भारत का प्राचीनतम मन्दिर माना जाता है |

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *