लोककथा – दो चालाक भाई | Lokkatha – Do Chalak Bhai

Lokkatha - Do Chalak Bhai
Lokkatha – Do Chalak Bhai

एक राजा था | उसका मंत्री बड़ा चतुर था | मंत्री दो बेटे छोडकर स्वर्ग सिधार गया | बेटे अपने पिता जैसे चतुर चालाक थे | राजा ने उन्हें मंत्री बनाने की सोची लेकिन दरबार के कुछ लोगो ने उनके खिलाफ षडयंत्र रचा | राजा से कह दिया “इनके स्वर्गीय पिता ने हमसे साठ हजार रूपये कर्ज लिए थे” | इस पर नये मंत्री ने कहा कि जब तक ये लोग कर्ज न चूका दे , मंत्री का सम्मानजनक पद इन्हें देना ठीक नही |

राजा ने मंत्री के बेटों को बुलाकर कर्ज के बारे में पूछा | लडके बोले “अन्नदाता ,हमे तो इसके बारे में कोई जानकारी नही है लेकिन जब नये मंत्री ने इसका दावा किया है तो हम जरुर अदा करेंगे” इसके बाद उन्होंने राजा से कोई नौकरी देने की प्रार्थना की | मंत्री उन्हें काम देने को तैयार हो गया , पर वह बहुत ही चालाक था | उसने एक को दरबान की नौकरी दी और दुसरे को बाग़ में माली बना दिया | दोनों भाइयो को जितनी तनख्वाह मिलती थी वह गुजारे के लिए कम पडती थी | कर्ज भुगतान करने के लिए उनके पास कुछ बचता ही नही था |

यह हालत देखकर एक दिन दोनों भाइयो ने आपस में सलाह की और कुछ करने का निश्चय किया | अगले दिन जब राजा दरवाजे से गुजर रहे थे तो दरबान ने कहा “अन्नदाता , आपके दरबार में चतुर आदमियों की कमी नही | अगर कोई मुझे यह बता दे कि संसार में सबसे ऊँची चीज क्या है तो मै उसका बड़ा अहसान मानूंगा”| राजा ने दरबार में पहुचकर यह सवाल वहा के मौजूद मंत्रियों और गुणीजनों से पूछा | किसी ने कहा कि पहाड़ सबसे ऊँचे है | कोई धन की शक्ति को सबसे ऊँचा बताने लगा | एक बोला “खेत में बोये गये बीजो का महत्व ही सबसे ऊँचा ह्होता है” |

लेकिन इन उत्तरों से राजा को तसल्ली नही हुयी | दरबारियों को भी यह उत्तर पसंद नही आये | उन्हें हर उत्तर में कोई न कोई कसर दिखाई दी | राजा निरुत्तर रह गया | उसने इस बात का ख्याल किया कि दरबान उसके स्वर्गीय मुख्यमंत्री का बेटा है | उसे बुलाकर कहा कि कोई ऐसा आदमी लाओ , जो इस सवाल अक जवाब दे सके | दरबान बोला “हुजुर , मेरे विचार से अगर कोई आदमी मेरे सवाल का जवाब दे सकता है तो वह आपके बाग़ का नया माली है ”

राजा ने तुंरत माली को बुलवा भेजा | माली आया | उससे सवाल पूछा गया तो उसने कहा “हुजुर संसार में आदमी की जबान सबसे ऊँची होती है ” इस जवाब को दरबान और दरबार में मौजूद दुसरे लोगो ने भी पसंद किया | सबने कहा “यह माली होशियार आदमी है”

राजा ने खुश होकर कहा “तुम जो चाहो सो मांग लो”|

माली ने बीस हजार रूपये मांग लिए |

अगले दिन जब राजा दरवाजे से निकल रहा था , दरबान ने कहा “हुजुर , आपने यह तो बता दिया कि संसार में सबसे ऊँची चीज आदमी की बात होती है लेकिन मै यह भी जानना चाहत हु कि वह रहती कहा है ?”

राजा ने दरबार में उपस्थित अपने मंत्रियों और गुणीजनों से उसका उत्तर पूछा | एक ने कहा कि यह पंडितो में निवास करती है | दूसरा बोला , वह ईमानदार आदमी के पास रहती है | तीसरे का कहना था कि वह अमीरों के पास वास करती है लेकिन कोई भी उत्तर दरबारियों और दरबान को ठीक नही लगा | आखिर माली को फिर बुलाया गया | माली ने कहा “जवाब देने से पहले मुझे बीस हजार रूपये चाहिए” राजा ने दिलवा दिए |

इसके बाद माली ने बताया “अन्नदाता , बात न अमीर के पास रहती है न पंडित और इमानदार के पास| वह तो उन आदमियों के पास रहती है जो वचन के धनी होते है | अपनी बात से कभी नही फिरते” |

यह उत्तर सभी को पसंद आया | दरबान भी संतुष्ट हो गया |

तीसरे दिन जब राजा दरवाजे से गुजरा तो दरबान ने फिर रोक लिया | कहने लगा “हुजुर , मेरे दो प्रश्नों के उत्तर तो दे दिए आपने बता दिया कि आदमी की बात ही दुनिया में सबसे ऊँची चीज है और यह वचन के धनी आदमियों के पास रहती है लेकिन मै यह जानना चाहता हु कि यह खाती क्या है ?”

यह प्रश्न सुनकर राजा अचरच में पड़ गया | उसने दरबार में जाकर वहा उपस्थित लोगो से इसका उत्तर पूछा | कोई भी जवाब न दे सका | आखिर राजा ने माली को बुलाया और उससे जवाब माँगा |

माली बोला “अन्नदाता , अगर बीस हजार रूपये ओर मिल जाए तो मै इसका भी जवाब दे सकता हु ”

राजा ने बीस हजार रूपये दिलवा दिए |

माली ने कहा “इस संसार में आदमी की बात ही सबसे ऊँची होती है यह वचन के धनी आदमियों के पास रहती है और इसका भोजन है धैर्य”|

उसके उत्तर से सभी संतुष्ट हो गये |

अगले दिन जब राजा दरवाजे से गुजरने लगा तो दरबान ने फिर कहा “हुजुर आपने मेरे तीनो प्रश्नों के उत्तर दे दिए | आपने बताया कि दुनिया में सबसे ऊँची चीज होती है आदमी की बात | यह वचन के धनी आदमियों के पास रहती है और धैर्य खाती है लेकिन यह तो बताइए कि यह करती क्या है ?”

प्रश्न सुनकर राजा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा | उसने अपने मंत्रियों से फिर पूछा | कोई भी बी बता सका तो राजा ने माली को फिर बुलवाया |

माली ने आकर साठ हजार रूपये राजा के सामने रखे दिए बोला “अन्नदाता हमारे पिता की मृत्यु के बाद मंत्री के षडयंत्र करके हम पर साठ हजार रुपयों का झूठा कर्ज लाद दिया| हमे कोई कर्ज नही देना , फिर भी चूका रहे | अब मेरी एक ही प्रार्थना है कि मेरे जवाब देने से पहले अपराधी को दंड दिया जाए”

राजा ने मंत्री को प्राणदंड सुना दिया | इसके बाद माली ने जवा दिया “अन्नदाता , आदमी की बात संसार में सबसे ऊँची चीज होती है | यह वचन के धनी आदमियों के पास रहती है | धैर्य इसका भोजन है और यह ऐसे ऐसे काम करती है हो धन बल और बुद्धि से भी नही किये जा सकते”

एक लडके के मुंह से ऐसा जवाब सुनकर वहा मौजूद हर आदमी चकित रह गया | राजा इतना खुश हुआ कि उन दोनों भाइयो को उनके स्वर्गीय पिता की जगह मंत्री पद दे दिया |

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