Home निबन्ध साक्षरता पर निबन्ध | “Literacy in India” Essay in Hindi

साक्षरता पर निबन्ध | “Literacy in India” Essay in Hindi

75
0
SHARE
साक्षरता पर निबन्ध | "Literacy in India" Essay in Hindi
साक्षरता पर निबन्ध | “Literacy in India” Essay in Hindi

भोजन वस्त्र और आवास की भांति साक्षरता भी आज के मानव की मुलभुत आवश्यकता बन गयी है | रोटी , कपड़ा और मकान से मानव का विकास होता है यानि व्यक्ति का विकास होता है और साक्षरता से व्यक्तित्व का विकास होता है | खासकर विकास के वर्तमान दौर में निरक्षरता मानव के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है | जब कोई निरक्षर व्यक्ति किसी को पढ़ते हुए देखता है तो आत्मग्लानि से भर जाता है |

भारत के सुदूर इलाको में अब भी बहुत ऐसे लोग है जिनके लिए काला अक्षर भैस बराबर है | वे चिट्टिया पढने के लिए साक्षरो को खोजते-फिरते है | पुस्तको में निहित ज्ञान भंडार उनके लिए किसी काम का नहीं रहता है | इस प्रकार वे ज्ञान प्राप्ति के एक बहुत बड़े माध्यम से वंचित रह जाते है | निरक्षरता एक प्रकार का अंधापन है ये निति ग्रंथो में भी कहा गया है |

निरक्षरता राष्ट्र के विकास में सबसे बड़ा बाधक है | राष्ट्र के निहित राजनितिक ,सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ेपन की जड़ में निरक्षरता ही है एक निरक्षर व्यक्ति राजनितिक रूप से जागरूक नही होता है | वह मतदान के महत्वक ओ नही समझता है | जाति ,धर्म एवं आर्थिक प्रलोभनों में फंसकर वह गलत प्रतिनिधियों का चयन कर बैठता है | गलत प्रतिनिधियों के चयन से प्रजातंत्र की सफलता संदिग्ध हो जाती है |

इसी प्रकार बाल-विवाह , दहेज़ प्रथा , धार्मिक कट्टरता ,छुआछूत अदि सामाजिक बुराइया निरक्षरों में ज्यादा पायी जाती है | निरक्षरता देश के आर्थिक विकास में भी बाधक है | एक निरक्षर किसान खेती के वैज्ञानिक तरीके से अनभिज्ञ रहता है | फलत: पैदावार में वांछित बढ़ोतरी नही हो पाती है | निरक्षरों को सरकारी कार्यालयों में जाने , सरकारी कागजातों को समझने में काफी दिक्कत होती है | इस प्रकार वे वर्तमान विकास की दौड़ में पीछे रह जाते है |

निरक्षरता उन्मूलन के लिए सरकारी स्तर पर काफी प्रयास किये जा रहे है | ग्रामीण क्षेत्रो में प्राथमिक शिक्षा ,अनौपचारिक शिक्षा एवं प्रौढ़ शिक्षा पर काफी बल दिया जा रहा है | प्राथमिक विद्यालयों की संख्या बढती जा रही है एवं उनमे अधिक से अधिक बच्चो का नामांकन हो ,इसके लिए विद्यार्थियों में मुफ्त भोजन एवं अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है नई शिक्षा निति के तहत 8 से 14 वर्ष के बच्चो के लिए शिक्षा को अनिवार्य घोषित किया गया है | प्रौढ़ व्यक्तियों को साक्षर बनाने के लिए रात्रि पाठशाला की भी व्यवस्था की गयी है | इन विद्यालयों में प्रौढ़ अपने काम से निवृत होकर अक्षर ज्ञान प्राप्त करते है |

इस प्रकार सरकारी स्तर पर साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है | लेकिन सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण निरक्षरता उन उन्मूलन के नाम पर सिर्फ सरकारी खजाना खाली हो रहा है | यही कारण है कि आजादी के वर्षो बाद भी हमारे देश में साक्षरता का प्रतिशत मात्र 52 है | यह हम सबके लिए चिंता का विषय है | इसलिए निरक्षरता रूपी राक्षस के समूल विनाश के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास ही यथेष्ट नही है अपितु देश के सभी साक्षरो को भी प्रभावकारी भूमिका निभानी होगी | प्रत्येक साक्षर भाई-बहनों को यह प्रयास करना चाहिए कि वे कम से कम दस निरक्षरों को साक्षर बनाये |

किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास के लिए राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ना चाहिए | लेकिन निरक्षर व्यक्ति शिक्षा के अभाव में राष्ट्र की मुख्य धारा से जुड़ नही पाता | इस प्रकार आज भी भारत की लगभग आधी आबादी राष्ट्र की मुख्य धारा से कटी हुयी है | ऐसे में हं एक मजबूत भारत का कामना कैसे कर सकते है ? कौन जानता है कि निरक्षरों की इन बस्तियों में ही महान गणितज्ञ अर्थशास्त्री देशरत्न डा,राजेन्द्र प्रसाद और संविधान निर्माता डा.भीमराव अम्बेडकर निकल पड़े | यह तो तय है कि सम्पूर्ण साक्षरता का मशाल जलाकर जी ज्योतिर्मय भारत का निर्माण किया जा सकता है |

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here