लेह के प्रमुख पर्यटन स्थल | Leh Tour Guide in Hindi

Leh Tour Guide in Hindi
Leh Tour Guide in Hindi

सिन्धु नदी द्वारा बनाये गये पठार के शिखर पर समुद्र तल से 3368 मीटर की ऊँचाई पर स्थित लेह एक छोटा नगर है | 14वी शताब्दी में रव्री-त्सुग्ल्दे द्वारा स्थापित लेह शुरू में स्ले या ग्ले कहा जाता था | 19वी शताब्दी में मोरोवियन मिशनरी के नाम पर इसका नाम लेह रखा गया | यह लद्दाख क्षेत्र का प्रमुख नगर है | इसकी स्थापना से ही यह मान्यता प्रचलित थी कि राजगद्दी का भावी उत्तराधिकारी लेह में जन्म लेगा | फलस्वरूप लद्दाख के राजाओ ने इस नगर में अनेक महलो, बौद्ध मठो और धार्मिक भवनों का निर्माण अपने वर्षो के शासनकाल के दौरान करवाया | लेह में इस्लाम का आगमन यारकंद और कश्मीर के व्यापारियों द्वारा हुआ |

लेह के दर्शनीय स्थल

नौ-मंजिला महल

लेह मे राजा सिंगे नाम ग्याल का नौ मंजिला महल तिब्बत के पारम्परिक वास्तुशिल्प का शानदार नमूना है | विशाल पत्थरों की सीधी ढलान वाली ऊँची पहाडी पर एक एक करके चढाया गया और निपुण कारीगरों द्वारा उन्हें काट-काटकर नौ-मंजिला भवन बनाया गया जिसे देखने पर पहाडी की चट्टाने भी इसी का हिस्सा प्रतीत होती है | भगवान बुद्ध के जीवन का उल्लेख करती हुयी चित्रकारी से सजी दीवारे इस महल के तंग घुमावदार गलियारे उन कमरों से जुड़े हुए है जिनमे शताब्दी पुराने ढंका चित्रों ,स्वर्ण मूर्तियों और तलवारों के संग्रहालय है | इस महल में 12 मन्दिर और दो बौद्ध शाही मठ है |

महल के पूर्व में उसके प्रवेश द्वार पर लकड़ी की बनी हुयी शेर की एक प्रतिमा है | महल के आरम्भिक दिनों में रस्सी से बंधा हुआ एक शेर पिंजरे में रखा गया था जो पिंजरे में प्रवेश करने और बाहर निकालने के दौरान गर्जना किया करता था | पहाडी पर बनी सीढिया एक विशाल प्रांगण की ओर जाती है जिसे ठेकचेन कहा जाता है जहां शाही नृत्यों का आयोजन किया जाता है | डोगरा आक्रमण के दौरान दरबार हॉल और लोगो के इतिहास ,धर्म और संस्कृति का उल्लेख करते हुए चित्र नष्ट हो गये थे |

लद्दाख का यह अद्वितीय महल जो कि जोरावर की क्रूरतापूर्ण बमबारी से भी बच गया था अब केवल म्यूजियम या प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गया है जिसका स्वामित्व इसमें निवास करने वाली लद्दाख से लोकसभा के लिए चुनी गयी रानी पार्वती देवी के पास है | महल के उपर की ओर उस पहाडी के अन्य चोटी पर लेह मोनेस्ट्री और एक पुराने किले के बुर्ज है |

सेमो गोम्पा

महल के पीछे एक शाही मोनेस्ट्री है जिसका निर्माण राजा द्वारा करवाया गया था | यह एक देवता के रूप में उत्कृष्ट कृति है | यह बैठी अवस्था में दो मंजिला ऊँची चम्बा की पवित्र प्रतिमा है | इस प्रतिमा में शरीर के अंगो की बनावट , उनमे परस्पर अनुपात और संतुलन , चेहरे की सुन्दरता तथा विशेषतया आँखों की परमानन्द से पूर्ण अभिव्यक्ति ,देखने वाले व्यक्ति को स्तब्ध और अभिभूत कर देती है |

लेह मोनेस्ट्री

महल वाली पहाडी की एक अन्य चोटी पर स्थित लेह मोनेस्ट्री न केवल महल पर ,बल्कि शहर पर भी प्रभावी है | अनेक गलियारों से युक्त इस विशाल गोम्पा में अमूल्य पांडूलिपियों एवं चित्रावलियो की कुंडलिया है | इसमें प्राचीन समय के महान चित्रकारों द्वारा बनाये गये बादलो ,नदियों ,जंगलो ,आकाशीय कृतियों और साक्य-मुनि बुद्ध के जीवन वृतांत के चित्र है | इसमें लामा विद्यार्थियों के लिए स्कूल है | यह विशाल मोनेस्ट्री 281 वर्ग मीटर के क्षेत्र में निर्मित है |

लेह मस्जिद

सोवांग नामग्याल के भाई जाम्यांग नामग्याल ने 1555 ई. ,इ स्कार्दू की मुस्लिम राजकुमारी अवग्याल खातून से , उसके पिता शेर अली से युद्ध में हारने के बाद विवाह किया | यह महान रानी प्रसिद्ध एवं पराक्रमी सिंगे नामग्याल की माता बनी जिसने बौद्ध जगत के सर्वाधिक प्रसिद्ध गोम्पाओ का निर्माण करवाया | इस मस्जिद का निर्माण उसने अपनी माता की याद में 1594 ई. ,में करवाया जो कि तुर्की एवं इरानी वास्तुशिल्प का एक सूक्ष्म एवं दक्षतापूर्ण कार्य है तथा मुख्य बाजार में स्थित है | इसके अलावा लेह में देखने योग्य मुख्य स्थान है जो खांग का आधुनिक सर्वदेशीय मन्दिर , पूर्व ताम्रकार का भवन -जान्स्ती , पूर्व मोरोवियन चर्च जोकि लद्दाख पारिस्थितिक केंद्र बन चूका है |

गोम्पाओ में मनाये जाने वाले उत्सवो में नृत्य नाटको का आयोजन किया जाता है जिसमे लामा चमकदार रंगीन पोशाक में सजे हुए भयानक मुखौटे पहनकर स्वांग रचते है तथा धर्म के विभिन्न पक्षों का प्रदर्शन करते है जैसे आत्मा का उत्थान या इसका शुद्धिकरण उया बुराई पर अच्छाई की जीत | ईस अवसर पर लोगो को अपने नये मित्र बनाने और पुराने मित्रो से मिलने-जुलने का अवसर प्राप्त होता है |

सबसे बड़ा और प्रसिद्ध बौद्ध मठ उत्सव है हेमिस , जिसमे सैलानी और स्थानीय लोग इकट्ठे होते है | यह जून के अंतिम सप्ताह के पहले पखवाड़े तक चलता है और पद्मासम्भव को समर्पित किया जाता है | हर 12 वर्ष बाद गोम्पा की सबसे बड़ी निधि एवं विशाल थंगा जोकि कपड़े पर चित्रित या कढाईदार एक धार्मिक आकृति होती है का धार्मिक अनुष्टान के साथ प्रदर्शन किया जाता है |

कहा ठहरे ?

लेह में ए.बी.सी. इकॉनमी केटेगरी के आधार पर होटल उपलब्ध है और उच्च या मध्यम आर्थिक आधार पर गेस्ट हाउस भी उपलब्ध है | श्रीनगर लेह पर सरकारी पर्यटक बंगले है |

कैसे जाए ?

हवाई मार्ग द्वारा लेह के लिए दिल्ली-चंडीगढ़ , जम्मू और श्रीनगर से इंडियन एयरलाइन्स की नियमित सेवाए उपलब्ध है | सडक मार्ग द्वारा लेह के लिए दो सडक मार्ग है |एक मार्ग श्रीनगर से लेह होकर जाता है जो कि लगभग 434 किमी लम्बा है तथा मार्ग में पूर्ण रात्रि के लिए यात्रा के दौरान रुकना पड़ता है | दूसरा रास्ता मनाली से लेह है जिसकी लम्बाई 475 किमी है यह बीस घंटे की यात्रा है तथा इसमें भी पूर्ण रात्रि के लिए रुकना पड़ता है | श्रीनगर एवं मनाली बस सेवा के अलावा टैक्सी एवं जीप आदि भी किराये पर मिलती है |

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