कोलकाता के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Kolkata Tour Guide in Hindi

Kolkata Tour Guide in Hindi
Kolkata Tour Guide in Hindi

हुगली नदी के तट पर स्थित पश्चिम बंगाल के राजधानी कोलकाता भारत का एक प्रमुख महानगर है | विश्व में जितने महानगर है उनमे इसकी भी महानगर के रूप में गणना की जाती है | सबसे अधिक आबादी वाले इस नगर को पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है | 300 वर्ष पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी की ओर से एक अंग्रेज व्यापारी ने सुबर्नी चौधरी से सिर्फ 1200 रूपये में इस शहर को खरीद लिया था | उस व्यापारी का नाम चारनाक था | चारनाक मुगलों के भय हुगली स्थित कारखाने को सुतानारी गाँव में ले गये | धीरे धीरे इस गाँव का विस्तार कालिकाता गाँव तक हो गया | सन 1698 में कम्पनी की ओर से औरंगजेब के पुत्र से निकवर्ती गोविन्दपुर नामक गाँव भी चारनाक ने खरीद लिया | इस प्रकार कालिकाता , गोविन्दपुर और सुतानारी – इन तीन गाँवों को मिलाकर जो नगर बसा , वही आज का महानगर कोलकाता है |

प्रथम ब्रिटिश गर्वनर वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता को भारत की राजधानी बनाया | सन 1885 से 1912 तक यह भारत की राजधानी था | कोलकाता के नामकरण के विषय में कई तरह की बाते कही जाती है | कहा जाता है कि किसी साहब के मुंह से कालकाटा शब्द निकला और यही शब्द कलकत्ता और अब कोलकाता हो गया | कुछ लोगो का कहना है कि कोलकाता कालीकट का ही अपभ्रंश है | 15वी शताब्दी के एक ग्रन्थ मनसा मंगल में भी कोलकाता शब्द आया था | यह भी कहा जाता है कि प्राचीन कोलकाता के आदिवाश सम्प्रदाय का कोल्काहोता शब्द कोलकाता बन गया |

कोलकाता एक अनूठा और अनोखा महानगर है | भारत के सभी राज्यों के लोग यहाँ रहते है | कुछ नौकरी की तलाश में आते है कुछ व्यवसाय के लिए | यहाँ सभी धर्मो , जातियों ,सम्प्रदायों और विभिन्न संस्कृतियों के लोग निवास करते है | कोलकाता में सम्पूर्ण भारत का दर्शन सुलभ है | यहाँ सभी तरह के रहन सहन , खान-पान ,वेशभूषा और सभी भाषाओं के बोलनेवाले इस नगर की संस्कृति के अंग है | कोलकाता भारत के एक अत्यंत समृद्ध नगर तो है ही , यूह एक महान सांस्कृतिक नगर भी है | यह महान समाज सुधारको , राजनेताओ , योगियों -सन्यासियों ,और साहित्यकारों तथा कलाकारों की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि है |

भारतवर्ष में जो पुनर्जागरण आया , उसका प्रमुख केंद्र कोलकाता ही था | पुन्रजागरण जे अग्रदूतो में राजाराममोहन राय अग्रणी है | उन्होंने सती प्रथा के उन्मूलन और विधवा विवाह को मान्यता दिलाने के लिए अथक प्रयास किया | रामकृष्ण परमहंस ने सर्वधर्म समन्वय का संदेश दिया तथा उनके शिष्य विवेकानन्द ने सारे विश्व को भारतीय संस्कृति और आधयात्म की गरिमा से पाश्चात्य देशो को परिचित कराया | विश्वकवि रविन्दनाथ ठाकुर , बंकिमचन्द्र चर्टजी , काजी नजरुल इस्लाम , तथा मधुसुदन दत्त जैसे कवियों एवं विमल मित्र जैसे कथाकारों ने अपनी रचनाओं से बंगला भाषा को ही नही , सम्पूर्ण भारतीय साहित्य को समृद्ध किया | नन्दलाल बसु , अवनींद्रनाथ ठाकुर , गाग्नेंद्र नाथ ठाकुर , एवं यामिनी रे जैसे कलाकारों ने भारतीय चित्रकला को नये आयाम दिए | इसी प्रकार उस्तादों के उस्ताद अलाउद्दीन खा , सितार वादक पंडित रविशंकर एवं निखिल चक्रवती , कर्म्तुल्ला आदि महान संगीतज्ञो ने अपनी संगीत साधना से कोलकाता को गौरवान्वित किया |

सचमुच कोलकाता एक विलक्षण सबसे अलग एक अनूठा शहर है | यहाँ आज भी भूमिगत ट्रेनों और पांच सितारा होटलों के साथ साथ फुटपाथ पर लिट्टी रोटी की दुकाने चलती है | अट्टालिकाओ के साथ साथ लाखो लोगो की राते फुटपाथ पर कटती है | पहले यहाँ घोड़े की तरह आदमी रिक्शे खींचते थे कोर्ट के आदेश पर आज ये बंद कर दिए गये है | आइये इस महानगर की सैर करते हुए देखे , कि क्या दर्शनीय है |

कोलकाता के प्रमुख दर्शनीय स्थल

विक्टोरिया मेमोरियल – सन 1921 में ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के याद में 1 करोड़ रूपये की लागत से 200 फीट ऊँची सफेद संगमरमर से निर्मित इन 25 क्लादीर्घाओ में 3500 अनूठी वस्तुए रखी हुयी है | इस इमारत में सीढियों से उपर चढने पर महारानी विक्टोरिया की भव्य प्रतिमा है | इसकी चोटी पर 16 फीट ऊँची विक्टर के मूर्ति है | एक ओर आर्ट गैलेरी और दुसरी तरफ संग्रहालय है | ब्रिटिश और मुगल स्थापत्य कला शैली इसका निर्माण कराया गया है | शाम के प्रकाश एवं ध्वनि के सहारे दो आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है | सुबह 10 बजे से शाम 3 बजे तक यह खुला रहता है |

बिडला तारामंडल – सन 1962 में 2 अरब रूपये की लागत से निर्मित इस वैज्ञानिक भवन के हॉल में 500 लोगो के बैठने की व्यवस्था है | यहाँ ग्रहों और सितारों के संबध में रोचक और रोमांचक जानकारियाँ दी जाती है | दोपहर 12:30 से सांय 8:30 तक हिंदी बंगला , और अग्रेजी में कुछ आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है |

भारतीय संग्राहलय – सन 1878 में इतालवी स्थापत्य शैली से निर्मित यह एशिया का सबसे बड़ा संग्रहालय है जिसमे 6 खंड है कला, भूगर्भ , पूरा संपदा  विज्ञान , जन्तु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान | सोमवार को छोडकर प्रतिदिन यह संग्रहालय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है |

शहीद मीनार – चौरंगी के समीप मैदान में स्थित 52 मीटर ऊँची इस मीनार पर 218 सीढिया पार कर चढने पर यहाँ से कोलकाता का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है | सन 1914-16 में नेपाल के साथ युद्ध में ब्रिटिश फौजों के विजयी होने पर डेविड ओक्तर लोनी के सम्मान में सन 1928 इस मीनार का निर्माण हुआ था | इसकी स्थापत्य कला में सीरियाई ,मिस्त्र ,तुर्की शैलियों का मिश्रण स्पष्ट है | अब इसका नाम शहीद मीनार है |

ईडन गार्डन – अलेक्सेंडर की बहन ईडन के नाम पर निर्मित इस गार्डन के पश्चिम में ईडन उद्यान है जोसैर-सपाटे के लिए उपयुक्त स्था है |

चिड़ियाघर – 45 एकड़ में विस्तृत अलीपुर के इस विशाल चिड़ियाघर में संसार के सभी देशो से मंगाए पशु पक्षियों को देखा जा सकता है | यहाँ दुर्लभ प्रजाति के कई जानवर है | इससे सटे मछलीघर और आस-पास का प्राकृतिक सौन्दर्य दर्शनीय है |

काली मन्दिर – कोलकाता में काली घाट का काली मन्दिर विश्वप्रसिद्ध है | ऐसी मान्यता है कि यहाँ सती के दाहिने पैर की अंगुली गिरी थी | धर्मतल्ला से रास बिहारी एवेन्यू जाने वाली बस ,ट्राम या मेट्रो ट्रेन से यहाँ जाया जा सकता है |

रवीन्द्र गैलेरी – रवीन्द्र गैलेरी में रवीन्द्रनाथ ठाकुर से संबधित चित्र और दस्तावेज प्रदर्शित है | समकालीन भारतीय कला के नमूने भी यहाँ देखे जा सकते है |

नेहरु बाल संग्रहालय – चौरंगी एवं लोअर सर्कुलर रोड पर स्थित यह संग्रहालय विशेषकर बच्चो के लिए आकर्षण का केंद्र है | रामायण-महाभारत के सजीव चित्र प्रस्तुत करते हुए पुतलो और विज्ञान संबधी मॉडलों को देखकर बच्चे मुग्ध हो जाते है |

नेशनल लाइब्रेरी – इस विश्वप्रसिद्ध पुस्तकालय में 17 लाख पुस्तके एवं 5 लाख दस्तावेज एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज है | पार्क स्ट्रीट एवं चौरंगी मोड़ पर एशियाटिक सोसायटी ऑफ़ बंगाल का पुस्तकालय भी दर्शनीय है |

तैरता हुआ संग्रहालय – हुगली नदी पर विश्व के पहले तैरते हुए नौवहन म्यूजियम में 200 से अधिक विभिन्न वस्तुओ के साथ कोलकाता के 300 वर्षो का सचित्र इतिहास देखा जा सकता है |

मार्बल पैलेस – 12 एकड़ भूमि में विस्तृत 126 प्रकार के रंग-बिरंगे संगमरमर के तराशे हुए पत्थरों से निर्मित यह भवन देखने योग्य है | धर्मतल्ला से बस या मेट्रो ट्रेन से महात्मा गांधी रोड पर यह महल स्थित है | बृहस्पतिवार को छोडकर शेष दिनों में इसे देखने के लिए प्रयत्न विभाग से अनुमति लेनी होती है |

हावड़ा पुल – अब इसका नाम रवीन्द्र पुल है | हुगली नदी पर 1500 फीट लम्बा और 17 फीट चौड़ा यह विश्व का सबसे बड़ा तैरता हुआ पुल है | एक साथ 8 कतारों में गाड़ियां आ जा सकती है | इस पर बढ़ते बोझ को देखते हुए 152 तारो का विद्यासागर पुल बनाया गया है |

दक्षिणेश्वर – दक्षिणेश्वर काली मन्दिर बंगाल का ही नही ,सम्पूर्ण भारत का अत्यंत पवित्र स्थान है | रामकृष्ण परमहंस इस मन्दिर में काली की उपासना में तल्लीन रहते थे | मन्दिर के उत्तर पश्चिम में बने एक घर में परमहंस जी रहा करते थे | यही पर रामकृष्ण के नये मन्दिर के अलावा आद्यापीठ का मन्दिर दर्शनीय है |

रवीन्द्र सरोवर – कोलकाता के पश्चिम में यह एक कृत्रिम झील है | झील के तट पर रोइंग एवं क्लब , लापानी बौद्ध मन्दिर , तरणताल , रवीन्द्र स्टेडियम और बच्चो के मनोरंजन के लिए चिल्ड्रन पार्क एवं खिलौना ट्रेन भे है |

बैरुल मठ – दक्षिणेश्वर के पास ही बेलूर मठ में मन्दिर , मस्जिद और चर्च के स्थापत्य का समन्वय दर्शनीय है | दक्षिणेश्वर में नाव पर सवार होकर विवेकानंद सेतु देखा जा सकता है |

मेट्रो ट्रेन – टालीगंज से दमदम तक जमीन के नीचे ट्रेन चलती हेई जिसे मेट्रो ट्रेन कहते है | चौरंगी में इस ट्रेन का टर्मिनल स्टेशन है | पुरे भारत में कोलकाता में भूमिगत ट्रेन चलती है | इन रेलगाड़ियो में सफर करने का एक अलग ही आनन्द है |

बोटैनिकल गार्डन – हावड़ा रेलवे स्टेशन से 4 किमी दक्षिण शिवपुर में 270 एकड़ में फैले इस बोटैनिकल गार्डन में 250 वर्ष पुराना एक वटवृक्ष है जिसमे 1573 जटाए है | बीच में एक झील है जिसमे नौकायन का आनन्द लिया जा सकता है |

शान्ति निकेतन – बोलपुर में विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित शिक्षा संस्थान शान्ति निकेतन दर्शनीय है | यहाँ प्राकृतिक वातावरण में प्राचीन गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली के अनुसार छात्रों को शिक्षा दी जाती है | यहाँ छात्र उसी प्रकार रहते है जैसे प्राचीन काल में गुरुकुल में रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे | हरे भरे पेड़ पौधों से आवेशित इस संस्थान का वातावरण सुखद , शांत और मनोरम है | अन्य विषयों के अतिरिक्त यहाँ संगीत ,नृत्य और चित्रकला की भी उच्चतम शिक्षा दी जाती है |

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