Koel Bird Facts in Hindi | कोयल से जुड़े रोचक तथ्य

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Koel Bird Facts in Hindi
Koel Bird Facts in Hindi

कुक्कू प्रजाति की कोयल (Koel) भारत , मलाया और ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी भागो में मिलती है | ऑस्ट्रेलिया में यह बसंत ऋतू में प्रवास यात्रा करती है | यह उत्तर से पूर्व की ओर प्रवास यात्रा करती है | मार्च-अप्रैल में यह ऑस्ट्रेलिया छोडकर फिर उत्तर की ओर चली जाती है | आइये आपको कोयल (Koel) से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |

  1. कोयल (Koel) भारत की प्रसिद्ध चिड़िया है लेकिन इसे बहुत कम लोगो ने देखा है क्योंकि यह पेड़ो से जमीन पर कभी उतरती ही नही |
  2. बसंत के आरम्भ होते ही आम के पेड़ जब बौरो से लद जाते है तो मंजरी और फलो के रस का स्वाद लेती हुयी कोयल बहुत मीठा गाती है और डाल-डाल पर नाचती है |
  3. बसंत के बाद भी ग्रीष्म और पावस में इसका कूकना जारी रहता है | वर्षाकाल में यह पुरे जोशोखरोश से गाती है और तब तक गाती है जब तक शीतकाल प्रारम्भ नही हो जाता |
  4. साल भर में यह चार महीने से ज्यादा चुप नही रहती | जाड़ो में यह दक्षिण की ओर चली जाती है जहा ठंड नाममात्र की होती है |
  5. कोयल (Koel) घरेलू कौए से कुछ दुबली पतली और लम्बी दुम वाली होती है |
  6. कोयल में नरमादा के रंग-रूप में काफी अंतर होता है | नर नीली-हरी चमक लिए पूरा काला होता है और मादा भूरी होती है | मादा के पेट पर गहरा भूरापन होता है | डैनो आदि पर सफेद चित्तिया होती है | दम गहरी भूरी होती है जिस पर सफेद धारियाँ होती है |
  7. नर और मादा दोनों की आँखे लाल और पाँव गहरे स्लेटी रंग के तथा चोंच हरी होती है |
  8. कोयल (Koel) की लम्बाई 17 इंच होती है |
  9. गाने का शौक नर को ही होता है | मादा कभी कभी एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर जाते हुए किक-किक-किक की बोली बोलती है |
  10. भारत में उत्तर-पश्चिम सीमान्त को छोडकर सभी राज्यों में कोयल पायी जाती है | बाग़-बगीचों और पेड़ो के झुरमुट में रहती है इसलिए देख पाना मुश्किल होता है | अगर कोई इसे देखने की कोशिश करता है तो यह दुसरे पेड़ पर चली जाती है | इसे एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर जाते हुए देखा जा सकता है |
  11. कई बार काले रंग के कारण इसे देखकर कौए का भ्रम हो जाता है |
  12. अधिकतर वट आदि वृक्षों का फल इसका भोजन है | कभी कभी कीड़े-मकोड़े भी खा लेती है |
  13. यह कुहू कुहू ….जैसी बोली बोलती है | कोई इसकी बोली की नकल करता है तो यह ओर जोश के साथ गाने लगती है |
  14. कोयल (Koel) कई अंडे देती है | इसके अंडे नीलापन लिए हरे रंग के होते है जिन पर कत्थई चित्तिया होती है |
  15. कोयल अपना घोंसला न बनाकर चतुराई से अपने अंडे चुपके से कौए के घोंसले मे रख आती है | इसके लिए पहले नर कोयल कौए के घोंसले के पास पहुचता है और तरह तरह की भाव-भंगिमाओ से उसे रिझाता है | तब मादा आसपास के पेड़ पर अंडा मुंह में रखकर छिपी बैठी होती है | नर की हरकतों से चिढकर क़ुआ उस पर टूट पड़ता है और वह भाग जाता है | कौए उसका पीछा करते है उड़ने में तेज कोयल काफी दूर निकल आती है | इस बीच मादा कौये के घोंसले में घुस जाती है और कौए के अन्डो को नीचे गिराकर अपने अंडे रख देती है | फिर आवाज का संदेश देती है कि काम हो गया है |
  16. कोयल के अंडे से शिशु जन्म लेते है तो कौया अपने शिशु समझकर उनका पालन-पोषण करता रहता है | शिशु बड़े होते ही एक दिन वहा से नौ दो ग्यारह हो जाते है |
  17. पर्वतीय कोयल समतल क्षेत्रो में पायी जाने वाली कोयलों से भिन्न होती है देखने में इनसे सुंदर होती है लेकिन गले में वह मधुरता नही है जो इन काली कोयलों में है |
  18. वन कोकिल के पंख नोकदार होते है | बारिश के दिनों में यह जोर जोर से सिटी जैसी आवाज में बोलती है | इनका रंग गहरा-भूरा होता है | गला और नीचे का हिस्सा सफेद होता है जिस पर काली काली धारियाँ होती है |
  19. वन-कोकिल की लम्बाई 10 इंच होती है | वन कोकिल भारत के अलावा बर्मा और दक्षिणी चीन में भी मिलती है | यह खुले घने जंगलो में और जलाशयों के निकट रहती है | कीड़े-मकोड़े ,चींटिया और मछलिया इसका मुख्य भोजन है | यह उड़ने में तेज होती है |
  20. वन कोकिल अन्य कोयल की तरह घोंसला नही बनाती बल्कि अपने अंडे दुसरी चिडियों के घोंसले में दे देती है |
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