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Kavi Pradeep Biography in Hindi | अमर गीतों के रचियता कवि प्रदीप की जीवनी

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Kavi Pradeep Biography in Hindi

Kavi Pradeep Biography in Hindi | अमर गीतों के रचियता कवि प्रदीप की जीवनी
Kavi Pradeep Biography in Hindi | अमर गीतों के रचियता कवि प्रदीप की जीवनी

अपने देशभक्ति गानों के लिए मशहूर कवि प्रदीप Kavi Pradeep का मूल नाम रामचन्द्र नारायण द्विवेदी था | Kavi Pradeep कवि प्रदीप का जन्म 6 फरवरी 1915 को उज्जैन जिले के बडनगर ग्राम में हुआ था | अपने छात्र जीवन में ही उन्होंने कवि सम्मेलन में भाग लेना शूरू कर दिया था और उनकी कविताये सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे | इसी दौरान उन्होंने अपना नाम प्रदीप रख लिया था जो बोलने में आसान था | 1939 में स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद वो अध्यापक बनना चाहते थे लेकिन वो  मुम्बई आ गये और बॉम्बे टॉकीज से जुड़ गये | उन्होंने पहली बार फिल्म कंगन के गीत लिखे और अपने गीतों के माध्यम से फ़िल्मी दुनिया पर छा गये |

Kavi Pradeep कवि प्रदीप ने अपने करीब 60 साल के करियर में 1700 से ज्यादा फ़िल्मी और गैर फ़िल्मी गीत लिखे | उन्होंने जिस अंतिम फिल्म के लिए गीत लिखे वह थी “आँख का तारा “|वैसे तो कवि प्रदीप ने हर तरह के गीत लिखे लेकिन उन्होंने जितने भी देशभक्ति गीत लिखे ,वे सभी गीत अमर हो गये | इन्ही अमर गीतों ने Kavi Pradeep कवि प्रदीप को भी अमर कर दिया लेकिन कवि प्रदीप को जिस गीत ने सबसे अधिक लोकप्रियता दिलाई और उन्हें अमर गीतकार की श्रेणी में ला खड़ा किया वह है “ए मेरे वतन के लोगो ,जरा आँख में भर लो पानी ,जो शहीद हुए है उनकी ,जरा याद करो कुर्बानी “|
Lata mageshkar and Jawahar lal nehru on Kavi Pradeep Songsइस गीत को स्वर दिया स्वर समाज्ञ्री लता मंगेशकर ने | चीनी हमले (1962 ) के दौरान देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देने वाले वीर शहीदों की याद में चीनी हमले के बाद राजधानी दिल्ली में आयोजित एक समारोह में लता मंगेशकर ने इस गीत को जब पहली बार गाया ,तब उस गेट को सुनकर समारोह में उपस्थित भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की आँखों में आसू आ गये थे |
फिल्म “जागृति” के लिए लिखे गये Kavi Pradeep कवि प्रदीप के गीत “दूर हटो ए दुनिया वालो ,हिंदुस्तान हमारा है ” ने स्वाधीनता सेनानियों के दिल में जोश भर दिया था | इस गीत ने उस समय भारत पर शाषन करने वाले ब्रिटिश हुक्मरानों के कान खड़े कर दिए | यह वह जमाना था जब महात्मा गांधी के नेतृत्व में देश में भारत छोड़ो आन्दोलन अपनी चरम सीमा पर था | उस समय अंग्रेजी शाशको के पंडित द्विवेदी के नाम से जाने जाने वाले कवि प्रदीप को पकड़ने की मुहिम चलाई ,जिसके कारण इन्हें भूमिगत होना पड़ा |

Kavi Pradeep कवि प्रदीप ने जो अन्य  अन्य अमर गीत लिखे है उनमे नास्तिक फिल्म के गीत “सूरज न बदला चाँद न बदला न बदला ये आसमान ,कितना बदल गया इन्सान ” , जागृति फिल्म के लिए “साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल ” और “आओ बच्चो तुम्हे दिखाए झांकी हिंदुस्तान की “, वामन अवतार फिल्म के लिए “तेरे द्वार खड़ा भगवान ” तथा किस्मत फिम के लिए “घर घर में दीवाली” शामिल है |

Kavi Pradeep  कवि प्रदीप के जिस गीत ने लोगो के मन में एकता और अखंडता की भावना मजबूत करते हुए लोगो के दिलो दिमाग को जीत लिया , वह था “पैगाम” फिल्म का प्रमुख गीत “इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा यही पैगाम हमारा “| मजदूरों और मालिको के संघर्ष को दर्शाने वाली इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनय सम्राट दिलीप कुमार ने निभाई थी और डायलॉग डिलीवरी के बेताज बादशाह स्व. राजकुमार ने भी इस फिल्म में काफे सशक्त भूमिका निभाई थी |
Kavi Pradeep Family Picturesजीवन में ही मिथक बन जाने वाले इस गीतकार  गायक Kavi Pradeep  कवि प्रदीप को वर्ष 1997-98 का प्रतिष्टित दादा साहेब फाल्के पुरुस्कार देकर सम्मानित किया गया | इसके अतिरिक्त उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरुस्कार ,राष्ट्र कवि पुरुस्कार ,भारतीय संस्कृति संबध परिषद का पुरुस्कार मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विशेष पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया | 11 दिसम्बर 1998 को 83 वर्ष के उम्र में इस महान कवि का मुम्बई में देहांत हो गया | कवि प्रदीप की दो बेटिया सरगम ठाकर और मितुल प्रदीप है जिन्होंने बाद में कवि प्रदीप फाउंडेशन की स्थापना की  | Kavi Pradeep कवि  प्रदीप की याद में एक अवार्ड “कवि प्रदीप सम्मान” भी दिया जाता है |

1 COMMENT

  1. Kavi pradeep was a great poet. He supported Indian philosophy through his songs & poetry. He will be remembered for centuries.

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