धरती का स्वर्ग कश्मीर का इतिहास आर दर्शनीय स्थल | Jammu Kashmir History and Tourist Guide in Hindi

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है | सचमुच यदि धरती पर स्वर्ग का आनन्द लेना हो तो जाइए , कश्मीर घूम आइये | झीलों ,बागो ,हरे भरे वनों , झरनों-प्रपातो ,रंग बिरंगे फूल पौधों ने हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों के बीच बसे कश्मीर को अनुपम प्राकृतिक सौन्दर्य से सुशोभित कर दिया है | यहा आने पर स्वर्ग की कल्पना साकार हो उठती है | आइये आज हम आपको जम्मू कश्मीर के इतिहास और वहा के दर्शनीय स्थलों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करते है |

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कश्मीर का इतिहास

हिन्दू साम्राज्य के अंतिम सम्राट ललितादित्य मुख्यायिद ने सन 1339 तक कश्मीर पर शाशन किया | इसके बाद 1420 से 1470 तक इस पर सम्राट गैस-उल-उदीन का शाषन रहा | वह संस्कृति का अच्छा जानकर था | कश्मीर के मुख्य नगर श्रीनगर के सौन्दर्य से अभिभूत होकर सम्राट अकबर ने यंहा कई खुबसुरत मुगल उद्यान लगवाये और मस्जिदे बनवाई | कश्मीर पर मुगलों का शाषन अधिक दिनों तक नही रह पाया था |

सिख नरेश महाराजा रणजीत सिंह ने मुगलों को सन 1839 में यहा से उखाड़ फेंका | 1846 से डोगरा शाशको ने अमृतसर संधि के तहत 75 लाख रूपये में महाराजा रणजीत सिंह से इसे खरीद लिया था | भारत का विभाजन होने पर सन 1947 में जम्मू कश्मीर एक राज्य के रूप में भारत का अभिन्न अंग बन गया |  संस्कृत के प्रसिद्ध कवि कल्हण के अनुसार भारत में आर्यों के आगमन के पहले , ईसा से लगभग 3000 वर्ष पूर्व ,कश्मीर में राजाओ का शाषन था |

खुदाई में प्राचीन सभ्यताओं के अवशेष मिले है | इनमे कुछ पुराने मन्दिरों के अवशेष भी है | मेथालिथिक सभ्यता के भी अवशेष मिले है जिन्हें “पत्थर बने आदमी ” माना गया है | कश्मीर में बुर्जहोम और गोकुकाल गाँवों में अनेक “मेनहिर ” मिले है | इन्हें शापग्रस्त दूल्हा दुल्हन कहा जाता है |

जम्मू का इतिहास और पर्यटन स्थल

तवी नदी के तट पतर स्थित जम्मू , कश्मीर घाटी का मुख्य द्वार और जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी है | नौवी शताब्दी में राजा जेकुलोचन ने इसका निर्माण करवाया था ,इसलिए उन्के नाम पर इसे जम्मू कहा जाने लगा | अनेक झीलों  ,मन्दिरों , पर्वतमालाओ ,एतेहासिक इमारतो और प्राकृतिक दृश्यों के कारण यह एक आकर्षक पर्यटन स्थल बन गया है | यहा अनेकानेक विख्यात मन्दिर है , इसलिए इसे “मन्दिरों का नगर ” भी कहा जाता है | यहा जाने का सबसे अच्छा मौसम सितम्बर और मार्च के बीच है |

  • वैष्णो देवी मन्दिर- वैष्णो देवी मन्दिर जम्मू से 62 किमी दूर स्थित एक पवित्र गुफा मन्दिर है | रेलवे स्टेशन या टैक्सी द्वारा 48 किमी दूरी पर स्थित कटरा पहुचने पर पैदल ,घोड़े या पालकी द्वारा 14 किमी की चढाई के बाद मन्दिर तक पहुचा जा सकता है | पर्वतीय मार्ग के दोनों ओर रोशनी की अच्छी व्यवस्था है तथा खाने पीने की दुकाने दोनों ओर लगी रहती है | समुद्र तल से 2500 फीट उंचाई पर स्थित कटरा में कई होटल एवं धर्मशालाए है | कटरा से 1 किमी की दूरी पर दर्शनी दरवाजा और वहा से 100 फ़ीट की उंचाई पर बाणगंगा नदी है |कहा जाता है कि देवी ने यहा बाण चलाकर गंगा को प्रकट किया था | कटरा से लगभग 6 किमी आगे जाने पर पुरी यात्रा के बीच आदि या अर्ध्कुंवारी मन्दिर है | यहा गर्भजून है जंहा वैष्णो देवी ने नौ महीने तक तप किया था | यहा से लगभग 4 किमी की खडी चढाई के बाद समुद्र तल से 6700 फीट की ऊंचाई पर स्थित हाथी मत्था आता है | हाथी मत्था के बाद मार्ग ढलवा है | यहा से 2.5 किमी की दूरी पर वैष्णो देवी मन्दिर है |
  • रणवीरेश्वर मन्दिर – यह भगवान शिव का प्राचीन मन्दिर है जिसे सन 1883 में महाराज रणवीर सिंह ने बनवाया था | मन्दिर में प्रस्तर निर्मित 15 से 38 सेमी के 12 पारदर्शी शिवलिंग की दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रुधालू हर समय आते रहते है |
  • डोगरा आर्ट गैलरी – गांधी भवन के नये सचिवालय के पास स्थित इस आर्ट गैलरी में डोगरी चित्रकला के उत्कृष्ट नमूने देखे जा सकते है | यहा एतेहासिक अस्त्र शस्त्रों तथा पुरातात्विक वस्तुओ का भी अच्छा संग्रह है |
  • बाहू किला – जम्मू नगर से 4 किमी दूर तवी नदी के तट पर यह 3000 वर्ष पुराना किला है जिसका निर्माण बाहुलोचन नामक राजा ने करवाया था | किले के अंदर कालीजी का प्राचीन मन्दिर और खुबसुरत बाग़ है |
  • अमर महल – बाहू किले से कुछ दूरी पर राजा अमर सिंह द्वारा निर्मित यह राजमहल उत्कृष्ट वास्तुकला की दृष्टि से देखने योग्य है | यहा एक संग्रहालय भी है |
  • वासुकि कुंड – यह एक पवित्र कुंड भदेरवाह  से 22 किमी की दूरी पर स्थित है | जम्मू एवं कश्मीर वासियों के लिए यह अत्यंत पवित्र और धार्मिक स्थल है |
  • पीर खोह – सर्कुलर रोड पर स्थित इस स्थल पर एक प्राकृतिक शिवलिंग है | कहा जाता है कि शिवलिंग के सामने स्थित गुफा देश के बाहर किसी स्थान पर निकलती है |
  • मुबारक मंडी – यह पुराना सचिवालय है | इसका पुराना नाम मुबारक मंडी है | यह पहले राजमहल था ,जिसका अवशिष्ट भाग बहुत ही कलात्मक और सुंदर है |
  • बाग़ बाहुदीन – बाहू किल के नीचे यह पिकनिक के लिए बहुत सुंदर स्थान है | यहा से सारे शहर को देखा जा सकता है | यहा पर की जाने वाली रोशनी बहुत ही मोहक और सुवाह्नी प्रतीत होती है |
  • रघुनाथ मन्दिर – सन 1835 में राजा गुलाब सिंह द्वारा निर्मित इस मन्दिर की दीवारों पर रामकथा से सम्बन्धित अनेक देवी देवताओ की छोटी बड़ी कलात्मक प्रतिमाये दर्शनीय है |
  • झीले – मानसर झील और सुरिनसर झीले पिकनिक के लिए उत्तम स्थान है |
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