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राजा महेंद्र प्रताप सिंह , जिनसे आप जीना सीख सकते है Inspirational Story of Raja Mahendra Pratap

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राजा महेंद्र प्रताप सिंह , जिनसे आप जीना सीख सकते है Inspirational Story of Raja Mahendra Pratap
राजा महेंद्र प्रताप सिंह , जिनसे आप जीना सीख सकते है Inspirational Story of Raja Mahendra Pratap

मित्रो आजकल लोगो के जीवन में इतनी समस्याए आती है कि लोग जीने की आस छोड़ देते है | फिर भी भारत में कुछ ऐसे लोग है जिनसे आप जीना सीख सकते है | जिन्होंने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाकर देश में अपना नाम किया और लोगो में जीने की अलख जगाई | आइये आज आपको उन्ही भारतीयों में से एक साहसी आदमी की कहानी बताते है जिनसे आप जीने की कला सीख सकते है |

हमारी पहली कहानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह की है जिन्होंने बिना हाथ पैरो के जीना सीखा | राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म हुआ था वो शारीरिक रूप से एकदम स्वस्थ्य थे लेकिन जब वो पांच वर्ष हुए तो तब उनके साथ एक ऐसी घटना हुयी जिससे उनके हाथ पैरो ने काम करना बंद कर दिया | राजा महेंद्र प्रताप सिंह की एक गलती ने उनको बचपन में ही विकलांग  कर दिया था | राजा महेंद्र प्रताप सिंह के दोस्तों ने उनसे शर्त लगाई कि वो खुले बिजली के तार से लोहे की छड को नही पकड़ सकता है | प्रताप ने बिना सोचे समझे साहस दिखाया और उस लोहे की छड को पकड़ लिया जिससे खुले बिजली के तार जुड़े हुए थे |

अब राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने जैसे ही उस छड को पकड़ा , बिजली की धारा उसके पुरे शरीर में प्रवाहित हो गयी | इस घटना के परिणाम स्वरुप प्रताप के हाथ पैरो को अलग करना पड़ा |उस दिन से 16 वर्ष की उम्र तक प्रताप अपने घर से बाहर नही निकले | वो हमेशा अपने घर की चाहरदीवारी में कैद रहते थे | उनके माता पिता भी उनको मेहमानों के सामने लाने में शर्म महसूस करते थे जिससे उनमे ओर ज्यादा मायूसी छा जाती थी | वो एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे इसके बावजूद उनके कपड़े सिलने के नाप लेने वाला दर्जी उनके घर पर आता था | इसी तरह बीमार होने पर डॉक्टर भी उनके घर पर आता था |

अब ऐसी कठिन परिस्थीती में उनकी तीन बड़ी बहिनों ने उनको साहस बंधाया | अब इन दस वर्षो में घर पर रहते हुए प्रताप ने कई किताबे पढ़ी और उनसे ज्ञान लिया | अब उन्होंने सोचा कि जीवन में अगर आगे बढना है तो थोड़ी कोशिश करनी पड़ेगी वरना जिन्दगी साथ नही देगी | इसलिए चल नही पाने के बावजूद भी इस दौरान प्रताप ने अपने शरीर को घुटनो के सहारे घिसते हुए चलने का प्रयत्न किया | अब धीर धीर प्रताप अपने मुह और टखने के सहारे चलना सीख लिया और चीजे उठाना शुरू कर दिया |अब उन्होंने ओर ज्यादा हिम्मत दिखाते हुए वो काम कर दिया जिसे सोच पाना नामुनकिन था | प्रताप ने अपने मुह और टखने की सहायता से कंप्यूटर चलाना  शुरू कर दिया , जबड़े की सहायता से लिखना शुरू कर लिया और घुटनो की सहायता से चलना शूरू कर दिया |

राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने 10वी और 12वी कक्षा बिना स्कूल जाए अच्छे अंको से उत्तीर्ण कर ली | अब पहली बार जब उनको घर से बाहर कदम रखने का मौका मिला तो प्रताप के उत्साह की सीमा नही रही | अब प्रताप पीछे मुडकर देखने वाले  नही थे और उनके हौसलों में उड़ान आ गयी थी जिससे विकलांग होने के बावजूद उन्होंने बी.कॉम पुरी की और उसके बाद ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से MBA पुरी की | प्रताप को दिल्ली के एक संस्थान ‘National Center for Promotion of Employment for Disabled People”से छात्रवृत्ति मिली जिसकी राशि 1000 प्रति वर्ष थी | आज वो खुद इतने सक्षम हो गये है कि खुद विकलांग बच्चो को छात्रवृत्ति देते है |

अब उन्हें काम की तलाश थी अब उन्हें जॉब के लिए कई कॉल आये लेकिन जब उनका साक्षात्कार हुआ तो प्रताप को देखकर लोगो की मानसिकता बदल गयी क्योंकि कोई भी एक विकलांग व्यक्ति को अपनी कम्पनी में लेने को तैयार नही था क्योंकि उनको ये विश्वास नही था कि उनको दिया गया काम वो पूरा कर पायेगा या नही |  समाज के प्रति उनके व्यवहार ने एक बार तो उनको हताश कर दिया था लेकिन फिर भी वो लगातार जॉब की तलाश में लगे थे | अंततः राजा महेंद्र प्रताप सिंह को दिल्ली के नेशनल हाउसिंग बैंक में असिस्टेंट मेनेजर की जॉब मिली और ये पहला मौका था जब उनके पिता को अपने पुत्र पर गर्व महसूस हुआ था |

वर्तमान में प्रताप अहमदाबाद के ONGC ऑफिस में फाइनेंस और अकाउन्ट् ऑफिसर है | अब उनके सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनका साथ देना शुरू कर दिया | अब उनको समाज में भी सम्मान मिलने लगा था जिस समाज ने एक बार उनको नकार दिया था | अब उनकी इच्छा शक्ति इतनी तेज हो गयी कि किसी भी काम को बड़ी आसानी से कर लेते है जिससे उनके ऑफिस के अधिकारी भी उनसे प्रस्सन है | प्रताप की वजह से पुरे ऑफिस में पॉजिटिव वातावरण रहता है |

अब उनकी योग्यता को देखते हुए ऑफिस वालो ने उनको कंपनी की तरफ से क्वार्टर भी अलोट किया है जहा पर वो अपने दैनिक जीवन के सारे काम खुद करते है | प्रताप की अभी तक शादी नही हुयी है और उनका परिवार अभी भी हैदराबाद ही रहता है | वो हमेशा अपने परिवार और दोस्तों से जुड़े रहते है और फोन से बाते करते रहते है | प्रताप बस ,ट्रेन और प्लेन में भी बिना किसी की मदद के आसानी से चढ़ लेते है | प्रताप को केरम और शतरंज खेलना बहुत पसंद है | प्रताप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने खुद पर हंसना सीख लिया है और जब भी कोई उन्हें विकलांग या नाटा कहता है तो उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा देते है जिससे सामने वाले शर्म से मर जाता है | खुद पर हसने वाले आदमी को संसार में आगे बढने से कोई नही रोक सकता है क्योंकि वो दुसरो की बातो से भटकने के बजाय अपने लक्ष्य में लगा रहता है |

राजा महेंद्र प्रताप सिंह जैसे लोग विकलांग कहला सकते है लेकिन हमे ये नही भूलना चाहिए है कि हर इन्सान विकलांग है चाहे वो मानसिक रूप से हो या शारीरिक रूप से |  हमारे भारत में आज भी आंकड़ो के अनुसार लगभग 3 करोड़ लोग विकलांग है जिसमे से प्रताप जैसे कई व्यक्तियों ने अपनी विकलांगता को हथियार बनाकर आगे बढने का प्रयत्न किया और कुछ लोग उसी जगह पर रह गये | प्रताप के इस जज्बे को सलाम

मित्रो राजा महेंद्र प्रताप सिंह की कहानी से आपको बहुत सी प्रेरणा मिलती है | सबसे पहली प्रेरणा तो ये है कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने विकलांग होने के बावजूद संगर्ष में लगे रहे लेकिन हम शारीरिक रूप से सही सलामत होने के बावजूद भी निराश रहते है और बेरोजगारी की रट लगाये रहते है मित्रो एक बाद याद रखना “कोशिश करने वालो की हार नही होती ” चाहे वो दुनिया का कोई भी इन्सान क्यों ना हो | दुसरी प्रेरणा मै प्रताप के जरिये उन लोगो को देना चाहूँगा जो अपनी विकलांगता का फायदा उठाकर भिखारी बन जाते है और रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर लोगो की भीख का इंतजार करते है | एक बार मै भी बचपन में इनकी दरिद्रता को देखकर जब इनको भीख देने लगा तो मुझे मेरे पिताजी ने मना कर दिया और कहा कि “आज तू इनको भीख देगा तो कल ये फिर भीख का इंतजार करेंगे और उनको जब ये पता चल जाएगा कि जब भीख से जीवन चल जाता है तो काम करने की क्या जरूरत है तो ये कभी भीख मांगना नही छोड़ेंगे “|

उस दिनों से भिखारियों को भीख देना बंद कर दिया और जब भी कोई भिखारी मुझसे भीख मांगता है तो मै उसे कुछ काम करने की सलाह देता हु |  वैसे अधिकतर भिखारीयो को नशे की आदत होती है और उन पैसो से वो खाना खाने की बजाय नशा करते है | इसलिए मित्रो मेरी आपसे सलाह है कि आप उन्हें भीख देने की बजाय काम करने की सीख दे | क्योंकि अगर प्रताप जैसा व्यक्ति नौकरी कर सकता है तो इन भिखारियों को काम क्यों नही मिल सकता है | प्रताप जैसे नौजवानों को युवा का एक बार फिर से सलाम

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