Home निबन्ध “भारत के गाँव” पर निबन्ध | Indian Village Essay in Hindi

“भारत के गाँव” पर निबन्ध | Indian Village Essay in Hindi

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"भारत के गाँव" पर निबन्ध | Indian Village Essay in Hindi
“भारत के गाँव” पर निबन्ध | Indian Village Essay in Hindi

प्रस्तावना – कहते है कि गाँवों को ईश्वर ने बनाया और शहरों को मनुष्यों ने | भारत की आत्मा गाँवों में रहती है | गाँवों को देखकर भारत का वास्तविक रूप ज्ञात होता है | भारत की लगभग 75 प्रतिशत जनता गाँवों में रहती है | भारत में लगभग छ: लाख लोग है |

गाँवों का प्राचीन रूप

गाँवों में बहुत बड़ी संख्या में किसान रहते है | किसानो का मुख्य व्यवसाय खेती है | प्राचीन काल में खेती करना बहुत अच्छा माना जाता था | कहावत अभी तक प्रसिद्ध है उत्तम खेती मध्यम वान , निषिद चाकरी भीख निदान अर्थात खेती की तुलना में व्यापार अच्छा नही माना जाता था | नौकरी को तो बिल्कुल निषिद्ध (बुरा) मानते थे | इसका कारण यह था कि किसान कठिन परिश्रम करते थे अत: धरती सोना उगलती थी | किसानो द्वारा पैदा किया हुआ धन सबसे अच्छा धन माना जाता था | कहा जाता था अन्न धन श्रेष्ट धन , सोना चांदी मध्य धन | इस श्रेष्ठ धन के पैदा करने वाले किसान परिश्रमी ,सन्तोशी और सुखी थे |

मुस्लिम शासन में गाँवों की दशा 

भारत में दो प्रकार के मुसलमान आये | कुछ लुटेरे कुछ शासक | लुटेरे मुसलमान सम्पति लुटकर चले गये | किन्तु जो यहाँ के शासक बने , वह यहाँ के निवासी भी बन गये | उन्होंने भारत को अपना घर समझा | वे यहाँ से प्राप्त होने वाले धन को यहाँ की प्रजा की भलाई में ही लगाते थे | यदि सुखा या बाढ़ आ जाती थी तो ये शाही खजाने को प्रजा की भलाई में लगाते थे | ये सड़के तथा बड़ी बड़ी इमारते बनवाते थे | इससे लाखो-करोड़ो लोगो को काम मिल जाता था |

अंग्रेजी शासनकाल में गाँवों की दशा

अंग्रेज शासको ने भारत की दशा सुधारने की ओर बिल्कुल ध्यान नही दिया | इन्होने जमींदारी प्रथा लागू की | इस प्रथा को लागू करने से उन्हें थोड़े से लोगो से सारे देश का लगान मिल जाता था | जमींदार किसानो पर तरह तरह के कर लगाकर उन्हें चूसते थे | गरीब होने के कारण किसानो को साहुकारो से कर्ज लेने पड़ते थे | किसानो को अपनी फसल इन महाजनों के हाथ बेचनी पडती थी |

वर्तमान दशा

देश के स्वतंत्र होने पर कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले जमींदारी प्रथा समाप्त की | उसने किसानो के कर्ज माफ़ किये तथा सिंचाई के लिए बाँध बनवाए | किसानो को सस्ते दामो पर बिजली दी गयी और भूमिहीनों को भूमि दी गयी | कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया गया | अब किसानो की दशा बहुत अच्छी हो गयी है | किसानो को रासायनिक खाद दिया जाता है | उन्हें अच्छे बीज दिए जाते है | सस्ती बिजली दी जाती है | इनके अतिरिक्त बहुत सी सुविधाए किसानो को दी जा रही है |

अब गाँवों में स्कुल खोले जा रहे है तथा कुटीर उद्योगों का विस्तार किया जा रहा है | सभी गाँवों में इलाज की व्यवस्था की जा रही है तथा ग्राम सभाओं की स्थापना की जा रही है | ग्राम सभाए गाँवों की उन्नति में पूरा ध्यान दे रही है | आशा है शीघ्र ही गाँवों की दशा भी सुधर जायेगी |

उपसंहार

भारतीय गाँवों के पिछड़ेपन का का मुख्य कारण है शिक्षा का आभाव | इसी कारण यहाँ बेरोजगारी , ईर्ष्या , प्रमाद , अज्ञानता आदि अनुचित अमानवीय दुर्गुण उत्पन्न होते रहते है इसलिए शिक्षा के दीप जलाकर बुद्धि की लौ से चाहे तो हम गाँवों की अज्ञानतामयी धुंध और जड़ता को छिन्न-भिन्न करके विकास का सुंदर एवं रोचक वातावरण तैयार कर सकते है | ऐसा होना पूर्णत: सम्भव है और सहज भी | इसके लिए विज्ञान की विभिन्न सुविधाओं जैसे विद्युत , टीवी , रेडियो , कृषि समेत अनेक सुविधाओ द्वारा आज भारतीय गाँव निरंतर दिन दुनी रात चौगुनी गति से विकासोनुमुख हो रहे है |

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