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होली त्यौहार पर निबन्ध | Holi Essay in Hindi

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होली त्यौहार पर निबन्ध | Holi Essay in Hindi
होली त्यौहार पर निबन्ध | Holi Essay in Hindi

होली हमारे देश के मुख्य त्योहारों में से एक है | यह प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है | यह त्यौहार शरद ऋतू की समाप्ति एवं ग्रीष्म ऋतू के आगमन का सूचक है | होली के अवसर पर लोग मन्दिरों और गाँवों के चबूतरे पर एकत्र होकर ढोल बजाकर ऊँचे स्वर में “होली” के गीत गाते है | इस पर्व के साथ अनके पौराणिक कथाये जुड़ी हुयी है |

प्राचीनकाल में दानवो का एक दुष्ट राजा हिरण्यकश्यप था | वह बहुत शक्तिशाली था | उसने अपने बल से देवताओं पर विजय प्राप्त कर ली थी जिससे उसमे अहंकार उत्पन्न हो गया था | उसने अपने राज्य में भगवान का नाम लेने पर रोक लगा दी थी तथा प्रजा को स्वयं की पूजा करने के आदेश दिए | उसने घोषणा कर दी कि जो मेरे अलावा अन्य भगवान की पूजा करेगा या नाम लेगा उसे मृत्युदंड दिया जाएगा | मृत्यु के भय से प्रजा ने भगवान का नाम लेना बंद कर दिया और हिरण्यकश्यप की पूजा करना आरम्भ कर दिया |

हिरण्यकश्यप का पुत्र भगवान विष्णु का परमभक्त था | अपने पिता के आदेश के बाद भी उसने भगवान की पूजा बंद नही की | इस बात से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को कठोर दंड दिए | प्रहलाद को पहाड़ से नीचे फेंका गया , हाथी के नीचे कुचलवाया गया , उसके शरीर पर जहरीले साँप छोड़े गये , भोजन में जहर भी दिया गया और उसके शरीर पर पत्थर बांधकर समुद्र में भी फेंका गया परन्तु हर बार प्रहलाद बच गया |

अंत में हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने की एक चाल ओर चली | हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में नही जलने का वरदान प्राप्त था | वह प्रहलाद को गोदी में लेकर जलती हुयी चिता में बैठ गयी | भगवान की कृपा से प्रहलाद एक बार फिर बच गया और होलिका जलकर भस्म हो गयी | होलिका के जलने और प्रहलाद के बचने की खुशी में होली का त्यौहार मनाया जाता है |

इस सन्दर्भ में एक ओर कथा प्रचलित है | कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध भी इसी दिन किया था | वृन्दावन में इसी खुशी में Holi का त्यौहार मनाया जाता है | बाद में इसी पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोप और गोपियों के साथ रासलीला रचाई और दुसरे दिन रंग खेलने का उत्सव मनाया | नन्द गाँव में और राधा के गाँव बरसाने में एक अलग तरह की लठमार होली खेली जाती है | यहाँ स्त्रियाँ पुरुषो को डंडे से पीटती है | यह उत्सव पन्द्रह दिन तक चलता है | होली का माहौल तो बसंत पंचमे से ही प्रांरभ हो जाता है |

होली का त्यौहार दो दिन का होता है | पहले दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को एक स्थान पर सुखी लकड़िया एकत्र कर जलाई जाती है जिसे होली कहते है | होली के लिए एक माह पूर्व एक विशेष प्रकार के तने को होली के रूप में रोपा जाता है | इसके आस-पास सुखी लकड़िया , काँटे ,डंडे , सुखी घास आदि एकत्रित किये जाते है | लकड़िया गोबर से बडबुले बनाकर सुखाती है | उनमे धागा पिरोकर माला बनाकर होली पर चढाती है | सांयकाल निश्चित स्थान पर सभी लोग एकत्रित होते है और होली को जलाया जाता है | इस जलती हुयी Holi की आग में गेंहू की बालियाँ भुनी जाती है |

Holi का दूसरा दिन धुलण्डी का होता है | इस दिन सभी एक-दुसरे पर रंग और गुलाला लगाते है | इस दिन सभी प्रकार की दुश्मनी भूलकर मित्रता एवं प्रेम-भाव से परस्पर गले मिलते है | रंग और गुलाल से सराबोर मौज-मस्ती में गीत गाते ,ढोल बजाते , हर्ष और उल्लास के साथ होली खेली जाती है | होली खेलने के लिए विशेष तौर पर टेसू के फूलो का रंग बनाया जाता है | पूर्ण रूप से प्राकृतिक रंग होने के कारण यह त्वचा के लिए नुकसानदायक नही होता है | Holi पर भांग भी गोटी जाती है | इस दिन दुधिया भांग बनाकर सबको पिलाई जाती है |

होली की तैयारी पहले से ही शुरू हो जाती है | अपने अपने घरो में होली के लिए सभी तरह की मिठाईयां बनाते है | होली एकता और मित्रता का त्यौहार है | इस उत्सव का सामाजिक महत्व भी है | लोग वर्ण भेद और जाति भेद तथा मन की कटुता भुलाकर जब परस्पर गले मिलते है तो एकता का आदर्श स्थापित होता है |

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