Herons Facts in Hindi | बगुले से जुड़े रोचक तथ्य

Herons Facts in Hindi
Herons Facts in Hindi

लम्बी चोंच और लम्बी टांगो वाली यह पानी की चिडिया है | यह ट्रॉपिकल और सब ट्रॉपिकल भागो में पायी जाती है लेकिन कुछ उत्तरी समशीतोष्ण भागो में भी मिलती है |  पुरानी दुनिया की प्रजातियाँ पर्पल हेरन , ग्रेट वाइट हेरन ,  लिटल अग्रेट ,  केटल एग्रेट  यूरोप में प्रजनन करती है और बहुत कम ब्रिटेन की प्रवास यात्रा करती है | यूरोपियन हेरन में सिर्फ ग्रे हेरन ब्रिटेन में जल से भरे टापू में घोंसला बनाती है | यह प्रवास यात्रा नही करती है | आइये आपको बगुले की अन्य प्रजातियों रोचक तथ्य बताते है |

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  1. नई दुनिया की प्रजातियाँ अमरीकन एग्रेट (Sonwy Egret) लुसियाना हेरन , लिटल ब्ल्यू हेरन और ग्रीन हेरन |हेरन का गला और चोंच लम्बी होती है | दुम छोटी होती है और पंख लम्बे और चौड़े होते है |उत्तरी अमेरिका का ग्रीन हेरन 16 इंच (40 सेमी) होता है | बड़ी प्रजाति 50 इंच होती है | ग्रे हेरन तीन फीट ऊँची होती है |पंखो का फैलाव 5 फीट होता है | वजन 1.3 -2 किलोग्राम होता है |यह मुख्यतः मछलिया और पानी के पास जीवन बिताने वाले जन्तुओ को खाती है |
  2. भारतीय काला बगुला छोटे बगुले की तरह होते है |ये दो तरह के होते है एक बिलकुल सफेद , दूसरा स्लेटी , जिसमे कंठ पर सफेद धब्बा होता है |कुछ चिडियो में चितकबरा रंग भी देखने को मिलता है |प्रजननकाल में दो पिच्च्को वाली कलंगी निकल आती है जो पीछे की ओर झुकी रहती है |
  3. पूर्वी प्रवाल बक बर्मा और अंडमान द्वीप समूहों में पायी जाती है |इसकी कलंगी में रोयेदार पिच्छक होते है |ये मुख्यतः समुद्री तट पर रहने वाली चिड़िया है और ज्वारीय पानी वाले क्षेत्रो से दूर नही जाती |क्रस्टेशियन , मोलस्क और मछलिया इसका मुख्य भोजन है |उथले जल की लहरों में या ज्वार-भाटा के पानी से बने नालो में घुमती फिरती है और टाँगे मोडकर , गर्दन आगे कर ,चोंच खोलकर चुपचाप खडी रहती है | शिकार के पास आते ही चोंच मारकर पकड़ लेती है |अन्य बगुलों की तरह टहनियों का मंच सा घोंसला बनाती है |मादा 3-4 फीके हरे या नीले-हरे बिना चित्तियों वाले घोंसले बनाती है |
  4. ग्रे हेरन के उपरी भाग पर सफेद शिखा होती है | लम्बी-पतली , अंग्रेजी के अक्षर S आकृति की ग्रीवा सफेद होती हहै | चोंच नुकीली कटारदार होती है | वक्ष पर लम्बे सफेद पर होते है जिन पर काली लकीरे होती है | यह नरकुल वाली झीलों ,नदियों के किनारे रहती है | उत्तरी भारत में जुलाई से सितम्बर और दक्षिण भारत में नवम्बर से मार्च तक प्रजनन समय होता है | मादा 3 से 6 गहरे समुद्री हरे अंडे देती है |
  5. अँधा बगुला को धान्य पक्षी या ताल बक (Pond Heron) भी कहते है | यह बैठी हुयी तो मटमैली भूरी दिखाई देती है लेकिन उड़ते समय चमकीले सफेद पंख स्पष्ट नजर आते है | प्रजनन काल में रोम जैसे मरून पिच्छक नजर आते है | झीलों ,तालो के किनारे अकेले या टोलियों में नजर आते है | जहा कही पानी रहता है यह पहुंच जाता है | नदी , झील सडक के किनारे गड्डो से भरे पानी , कच्चे कुए , तालाब के अलावा समुद्र तट के आसपास पहुच जाता है | शिकार के लिए चुपचाप गर्दन झुकाए खड़ा रहता है | शिकार के नजर आते ही झपटकर उसे पकड़ लेता है | मेंढक , मछली ,केकड़े और कीड़े मकोड़े इसका भोजन है | कौए और अन्य चिडियों के समूह में पत्तियों वाले बड़े पेड़ो पर बसेरा करती है | मादा फीके हरे नीले 3-5 अंडे देती है |
  6. नाईट हेरन की चोंच अधिक सुदृढ़ होती है | उपर से भस्मी धूसर , पीठ और पिक्च चमकीले काले , नीचे से सफेद होते है | काले रंग की कलँगी में सफेद पिच्छक भी होते है | यह भारत , श्रीलंका , पाकिस्तान , बांग्लादेश , बर्मा में पायी जाती है | यह केंकड़े , मछली ,मेंढक और अन्य जलीय कीट खाता है | अन्य बको की तरह एक जगह बैठकर शिकार नही करती है बल्कि इसके लिए काफी दौड़-धुप करती है | मादा 4-5 फीके समुद्री हरे अंडे देती है | पानी के पास या दूर घनी पत्तियों वाले पेड़ो पर झुंडो में घोंसला बनाती है |
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