Home निबन्ध गंगा नदी पर निबन्ध | Ganga River Essay in Hindi

गंगा नदी पर निबन्ध | Ganga River Essay in Hindi

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गंगा नदी पर निबन्ध | Ganga River Essay in Hindi
गंगा नदी पर निबन्ध | Ganga River Essay in Hindi

भारत भर में गंगा सबसे प्रसिद्ध नदी है | वास्तव में इसका उद्गम हिमालय में है किन्तु पुराणों में इसकी उत्पति के विषय में बड़ी विचित्र कथा आती है | जिस समय कपिल ऋषि की क्रोधाग्नि से सगर के साठ हजार पुत्र दग्ध हो गये थे तो उस समय उनके उद्धार के अर्थ गंगा को जो पहले अन्तरिक्ष में बहती थी भूमंडल पर उतारने की आवश्यकता पड़ी | सुर्यवंश के बड़े बड़े राजाओं ने यत्न किये किसी ने कुछ न बन पड़ा | अंत में गंगा को अन्तरिक्ष से उतारने का सौभाग्य भागीरथ को प्राप्त हुआ | पहले यह आकाश से शिव की जटा में गिरी पुन: वहां से इसका प्रवाह पृथ्वी पर पहुचा | इसी कारण हिन्दू इसे अति पूज्य मानते है |

पर्वतराज हिमालय के पश्चिमोत्तर प्रदेश से निकलकर लगभग 1000 मील तक बहती हुयी अंत में यह बंगाल की खाड़ी में जा गिरती है | गंगा के भागीरथी ,जहान्वी , सुनदी आदि अनेक नाम प्रसिद्ध है | इसे देवताओ के नदी अथवा देवनदी भी कहा जाता है | गढवाल में कोई 13800 फीट की उंचाई से निकलकर यह दस मील की दूरी पर गंगोत्री के मन्दिर के पास पहुचती है | वहा से प्राय: 20 मील तक चलकर इसमें अलकनंदा का प्रवाह मिल जाता है | तब से यह गंगा कहलाने लग जाती है |

वहां से बड़े वेग से चलकर हरिद्वार से बहती हुयी प्रयाग पहुच जाती है | वहां इसमें यमुना और सरस्वती भी मिल जाती है | जहां पर यह तीनो नदियां मिलती है उसे संगम या त्रिवेणी कहते है | यह स्थान हिन्दुओ का बहुत पवित्र तीर्थ माना गया है | मार्ग में इसमें कर्मनाशक , गोमती , घाघरा , गंडक , कोशी , आदि अनेक छोटी छोटी नदियाँ मिलती है | अंत में गाजीपुर , पटना , भागलपुर होती हुयी यह बंगाल में चली जाती है और बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है |

जब रेलगाड़ी का प्रचार नही था तो इसके तटस्थ नगरो का व्यापार इसी के द्वारा होता था | इस कारण इसके किनारों पर बड़े बड़े नगरो का निर्माण हुआ जो आज भी देश के प्रमुख व्यापारी स्थान है | उन नगरो के द्वारा अब भी इससे व्यापार को बहुत लाभ हो रहा है | गंगा से कई लहरे निकाली गयी है जिससे हजारो एकड़ बंजर भूमि उपजाऊ बन गयी है | सबसे प्रसिद्ध नहर रुड़की के पास बहती है |

गंगा के महात्म्य के कारण हरिद्वार , प्रयाग आदि नगरो में प्रतिवर्ष लाखो की संख्या में लोग उपस्थित होते है | कुम्भ आदि बड़े बड़े मेले जुटते है जिनमे सैकंडो कोसो की दूरी के लोगो को परस्पर मिलने तथा देशसुधार संबधी विचार के लिए अवसर मिल जाता है | इससे एक बड़ी हानि यह हुयी है कि तीर्थस्थानों के पंडे और पुजारी लोग चढावे की आमदनी के कारण निरुत्साह ,आलसी और व्याभिचारी हो गये है |

गंगा का जल पीने में बहुत उत्तम और स्वादु है | हिमालय से निकलकर यह अनेक जड़ी बूटियाँ अपने साथ बहाकर ले आती है जिनके प्रभाव से इसका जल स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम माना जाता है | इसके प्रयोग से कई रोगों के कीटाणुओ का नाश होने से संक्रामक रोग निकट नही आते | यदि इस जल को सुरक्षित रखा जाए तो वर्षो तक इसमें कृमि आदि नही पड़ते | गंगा के तट पर बड़े बड़ी घने जंगल है जिनमे साधू महात्मा लोग तपस्या करते अपनी सारी आयु बिता देते है | वह भी इसके महात्म्य का एक कारण है |

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