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क्यों होते है हर इन्सान के फिंगरप्रिंट अलग ? Fingerprints Facts in Hindi

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हर व्यक्ति के शरीर की हर बात अनूठी होती है | यहाँ तक कि हमारे भीतरी अंग भी एक जैसे नही होते | यह सब हमारे जीन्स से तय होता है | इसी वजह से हर व्यक्ति का शरीर दुसरे से अलग ढंग से विकसित होते है | आज तक धरती पर एक जैसे शरीर वाले दो लोग पैदा नही हुए है | फिंगरप्रिंट के मामले में भी कुछ ऐसा ही है | संसार में किन्ही भी दो लोगो के हाथो ही नही , पैरो के निशाँ भी एक जैसे नही हो सकते है | प्रकृति ने सभी की उंगलियों की त्वचा की संरचना इस प्रकार की है कि हर किसी के फिंगरप्रिंट अलग होते है |

जुड़वाँ के भी फिंगरप्रिंट अलग

यहाँ तक कि जुड़वाँ जन्म लेने वालो के ये निशान भी अलग होते है | जीवन भर व्यक्ति के शरीर में कई तरह की बढत और बदलाव होते है लेकिन हाथ पैरो की उंगलियों के निशानो में जन्म से लेकर मृत्यु तक कोई परिवर्तन नही होता है | फिंगरप्रिंट हमारे DNA से भी अधिक अनूठे होते है |

क्यों होते है हाथो में फिंगरप्रिंट

हमारी उंगलियों के निशान इसलिए होते है ताकि हनारे हाथ स्पर्श को बेहतर संवेदनशीलता से महसूस कर सके | साथ ही ये चीजो को बेहतर ढंग से पकड़ने में भी हमारी मदद करते है | यदि हाथो में निशान न होते तो हमारे सपाट हाथो का हमे पूरा लाभ नही मिल पाता क्योंकि चीजे हमारे हाथो से आसानी से गिर एवं फिसल जाती |

हजारो सालो से पता है यह तथ्य

दो लोगो की उंगलियों के निशान एक जैसे नही होते , यह तथ्य बेबीलोन तथा चीन के लोगो को हजारो साल पहले से पता था इसलिए चीनी राजा महत्वपूर्ण कागजातों पर अपने अंगूठे की निशानी लगा देते थे | उससे पहले प्राचीन बेबीलोन में भी व्यापार के सौदे में अंगूठे के निशानो के प्रयोग के प्रमाण मिल चुके है | इस तथ्य को सन 1600 से 1900 के बीच विभिन्न वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक स्तर पर सिद्ध करके दिखाया कि हर इंसान की उंगलियों के निशाँ अलग होते है |

फिंगरप्रिंट पर लिखी जा चुकी है किताब

ब्रिटिश वैज्ञानिक सर फ्रांसिस गाल्टन ने 1892 में “फिंगरप्रिंट्स” नामक किताब लिखी जिसमे उंगलियो के निशानो की अनुठता के बारे में उन्होंने अपने शोध के बारे में लिखा था | इसमें पहली बार उन गुणों के बारे में बताया था जिनके आधार पर फिंगरप्रिंट्स की पहचान की जा सकती थी | आज भी उन्ही तरीको का प्रयोग किया जाता है |

अपराधियों को पकड़ने में मददगार

तभी से इस तथ्य को अपराधियों का पता लगाने में प्रयोग में लिया जा रहा है | किसी भी पुलिस विभाग में हजारो लोगो के उंगलियों के निशानो का रिकॉर्ड रखा जाता है जिससे मिनटों में अपराधियो का पता लग सकता है | आज तक अनगिनत अपराधो को हाथो के निशानों के आधार पर ही सुलझाया गया है |

8 तरह के निशान

अमेरिका की अपराधिक जांच एजेंसी FBI आठ तरह के फिंगरप्रिंट्स को मानती है | इनमे रेडियल लूप , डबल लूप , सेंट्रल पॉकेट लूप , प्लेन आर्क म तेंतेंड आर्क , प्लेन व्होर्ल , तथा एक्सीडेंटल | इन सभी में से उलनार लूप सबसे आम प्रकार के फिंगरप्रिंट्स है |

Dactylography  – फिंगरप्रिंट पहचानने की तकनीक

फिंगर प्रिंट्स पहचानने की तकनीक को Dactylography कहते है जिसका इस्तेमाल 1900 से हो रहा है | यह तकनीक फिंगरप्रिंट में दिखने वाले पैटर्न्स के विश्लेषण और वर्गीकरण पर निर्भर करती है | ये निशान उंगलियो की त्वचा पर घुमावदार लकीरों के रूप में बने होते है जिनमे कई तरह की संरचनाये नजर आती है | हर पैटर्न दुसरे से अलग होता है |

फिंगरप्रिंट्स में व्यक्तिगत विशेषताए भी होती है जिन्हें मिनुटिया कहा जाता है जैसे कि लकीरों और उनके समूह की संख्या जो आमतौर पर नजर नही आती है | जिन भी चीजो को हाथो से छुआ जाता है उन पर फिंगरप्रिंट्स छुट जाते है जो अक्सर नजर नही आते है \ हालंकि डस्टिंग तकनीक से इनके निशानों का पता लगाया जा सकता है \

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