स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओ का योगदान Female Indian Freedom Fighters

Female Indian Freedom Fighters

Female Indian Freedom Fightersभारत सदा से वीरो की जन्मभूमि रहा है | जब अंग्रेजो ने भारत पर कब्जा कर लिया और लोगो पर अत्याचार शुरू कर दिए थे तो कुछ ऐसे देशभक्त थे जिन्होंने अंग्रेजो के विरुद्ध विदोह का एलान कर दिया और उनसे लड़ते हुए अपने देश पर बलिदान हो गये | पुरुषो के साथ साथ देश की स्वतंत्रता के लिए महिलाये Female Indian Freedom Fighters भी अपना योगदान देने में पीछे नही रही और अपनी जन्मभूमि को स्वंतंत्र कराने में अपने प्राण त्याग दिए | ऐसी वीरांगनाओ को शत शत नमन | अब आइये आपको आज उन्ही वीरांगनाओ Female Indian Freedom Fighters की वीरता के किस्से आपको सुनाते है किस तरह उन्होंने अंग्रेजो से मुकाबला किया था |

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01 बेगम हजरत महल Begum Hazrat Mahal History in Hindi

1857 के स्वंतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महान क्रांतिकारी महिला थी अवध के नवाब वाजिद अली शाह की बेगम हजरत महल | 1857 में लार्ड डलहौजी जब भारत का वायसराय बनकर आया , उसी साल वाजिद अली लखनऊ के नवाब बने थे | उनके विलासी स्वभाव के कारण अंग्रेजो ने उन्हें गद्दी से हटा देने की योजना बना ली थी पर वाजिद अली ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था फलस्वरूप उन्हें नजरबंद करके कलकत्ता भेज दिया |

इसी बीच क्रांति का बीज बोया जा चूका था एवं अंग्रेजो के अत्याचारों से त्रस्त जनता अंग्रेजी सरकार को उखाड़ फेंकने को तत्पर थी | जब अंग्रेजो ने लखनऊ पर पुरी तरह कब्जा कर लिया तो बेगम को अपना महल छोड़ना पड़ा लेकिन पुरी हिम्मत से वह ब्रिटिश सरकार से टक्कर लेती रही| नवम्बर 1858 को महारानी विक्टोरिया ने ईस्ट इन्डिया कम्पनी का शाशन खत्म करके भारत की सत्ता अपने हाथो में ले ली | बेगम भी काफी समय तक लडती रही फिर वह अपने पुत्र के साथ वहा से निकलकर नेपाल चली गयी और अपना बाकी जीवन वही व्यतीत किया और वही उनकी मृत्यु हुयी |

02 झलकारी बाई Jhalkari Bai History In Hindi

जब ब्रिटिश सेना ने झांसी को घेर रखा था और लक्ष्मीबाई के आदेश पर उनके तोपची अंग्रेजो पर गोले बरसा रहे थे तो उन्होंने भी जवाबी हमला कर दिया ,जिसमे लक्ष्मीबाई के काफी सैनिक मारे गये | तब उनकी महिला फ़ौज की एक सैनिक झलकारी ने लक्ष्मीबाई के सामने यह कहते हुए प्रस्ताव रखा कि कुछ समय बाद अंग्रेज हम पर भारी पड़ने वाले है ऐसे में आपको यह सुरक्षित निकलना जरुरी है ताकि आप अपनी मातृभूमि की रक्षा कर सके लेकिन इसके लिए अंग्रेजो का ध्यान बंटाना जरुरी है |

तब वह लक्ष्मीबाई की पोशाक पहनकर छोटी सी सैनिक टुकड़ी के साथ किले से बाहर आकर एक तरफ भाग चली तो अंग्रेज उसके पीछे लपके और उधर लक्ष्मीबाई अपने कुछ सैनिको के साथ दुसरी तरफ से सुरक्षित निकल गयी | झलकारी ने पुरे साहस से दुश्मनों का सामना किया और इसी दौरान तोप का एक गोला उसके पास आकर गिरा जो झलकारी की मौत का कारण बना |

03 झांसी की रानी लक्ष्मीबाई Rani Lakshmi Bai

झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद मात्र 18 वर्ष की आयु में उनकी पत्नी रानी लक्ष्मीबाई को ब्रिटिश सरकार ने मार्च 1854 में झांसी छोड़ने का आदेश दे दिया | एक देशभक्त एवं स्वाभिमानी महिला होने के नाते उन्होंने झांसी छोड़ने से मना कर दिया और झांसी को अंग्रेजो से मुक्त कराने का निश्चय कर लिया | उन्होंने पुरुषो एवं महिलाओ की एक फ़ौज तैयार की और उन्हें युद्ध से सम्बधित हर तरह का प्रशिक्षण दिया |1858 में ब्रिटिश सरकार ने झांसी पर हमला कर उसे घेर लिया पर रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नही हारी | अपने पुत्र को पीठ पर बांधकर और दोनों हाथो में तलवारे लेकर घोड़े पर सवार रानी ने अपने दुश्मनों से बड़ी बहादुरी से डटकर मुकाबला किया |

अंग्रेजो का पलड़ा भारी होते देख रानी अपने कुछ सैनिको के साथ वहा से निकल गयी | तात्या टोपे से मिलने जब वह कालपी पहुची तो वहा के कई स्वंतन्त्रता आन्दोलन से जुड़े संघठन उनसे जुड़े गये | इसी दौरान लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर की ओर रुख किया जहा उसने शत्रु सेना का बड़े साहस से सामना किया लेकिन युद्ध के दुसरे दिन 18 जून 1858 को भारत की आजादी के लिए चलने वाले प्रथम स्वंतन्त्रता संग्राम में यह वीरांगना अंग्रेजो से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गयी |

04 ईश्वरी देवी Ishvari Devi History in Hindi

तुलसीपुर एक छोटा सा राज्य था जहा के राजा दृगनाथ को ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध काम करने पर नजरबंद कर दिया था और इसी दौरान उनकी मृत्यु हो गयी | तब उनकी रानी ईश्वरी देवी ने अपनी रियासत सम्भाली | अंग्रेजो के अमानवीय अत्याचारों के बावजूद समझौता करने की बजाय रानी ने युद्ध करने का निर्णय लिया |13 जनवरी 1859 को रानी ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध विद्रोह कर दिया | उन्हें हथियार डाल देने के लिए कई तरह के प्रलोभन दिय गये पर रानी ने आत्मसमर्पण की बजाय निर्वासित जीवन बिताना पसंद किया |अंग्रेजो ने उन पर खूब अत्याचार किये और वह तुलसीपुर को अपना अंतिम प्रणाम कर जंगलो में चली गयी |

05 बालिका मैना Balika Maina Devi History in Hindi

नाना साहेब पेशवा के बिठुर महल में जब अंग्रेजो ने तोपों को ध्वस्त करना शूरू किया तो उनकी पुत्री मैना को तहखाने में सुरक्षित पहुचा दिया गया | आधी रात को बालिका मैना ने समझा कि शायद अंग्रेज चले गये है तो वह तहखाने से बाहर आयी | तब चालाकी से अंग्रेजो ने उसे पकड़ लिया और क्रांतिकारियों के बारे में पूछना शूरू कर दिया | पेशवा की बहादुर पुत्री होने के नाते उसने हर जुल्म का मुह तोड़ जवाब दिया | तब क्रूर अंग्रेजो ने आग में उसे जिन्दा जला दिया |

ये सब वो वीरांगनाये Female Indian Freedom Fighters थी जिन्होंने 1857 की क्रान्ति के दौरान अंग्रेजो से लोहा लिया था | इनके अलावा भी असंख्य महिलाओ Female Indian Freedom Fighters ने पुरुषो के कंधे से कंधा मिलाकर आजादी की लड़ाई लड़ी , जिनमे मैडम भीखाजी कामा ,कस्तूरबा गांधी , सरोंजनि नायडू ,विजय लक्ष्मी पंडित , एनी बीसेंट , कमला नेहरु , सुचेता कृपलानी , अरुणा आसफ अली ,सावित्री बाईफुले का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है |

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