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विलुप्त हो चुके इन जीवो को वापस लाने की तैयारी | Extincted animals to be clone soon

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वर्ष 1900 से लेकर अब तक के समय में जीवो की लगभग 500 प्रजातियाँ इस धरती से पुरी तरह समाप्त हो चुकी है इनमे से कुछ तो ऐसे जीव है जिनकी संख्या लाखो में थी लेकिन इंसानों की गतिविधियों की वजह से ये अपना अस्तित्व बचा नही पाए हालांकि अच्छी बात यह है कि वैज्ञानिक इनमे से कुछ को क्लोलिंग जैसी तकनीको के जरिये वापस इस दुनिया में लाने की कोशिश कर रहे है | आइये इनके बारे में जानते है |

कैरोलाइना पराकीट

कैरीलोना पराकीट तोते की एक ऐसी प्रजाति थी जिसमे पंखो में अलग अलग रंग देखने को मिलते थे य तोता पूर्वी यूएस में पाया जाता था | इसके पंखो में शामिल हरे ,लाल और पीले रंगो की वजह से यह बहुत आकर्षक लगता था | महिलाओं के लिए हैट बनाने के लिए इनका शिकार बड़ी मात्रा में किया गया , जिससे इनकी संख्या लगातार कम होती चली गयी | आखिरी कैरीलोना पराकीट की मौत सिनसिनाटी जू में 1918 में हो गयी थी

सुनहरा मेंढक

साइंस मैगज़ीन के अनुसार सुनहरे मेंढक का अस्त्तित्व खत्म होने के लिए ओर कोई नही , बल्कि Global Warming जिम्मेदार है वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में बनने वाले अल-नीनो इफेक्ट के कारण सुनहरे मेंढक का अस्तित्व खत्म हो गया | दरअसल अल-नीनो प्रभाव के दौरान सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है | आखिरी बार मेंढक की इस प्रजाति को 1989 में कोस्टारिका के मोंटेवार्ड में देखा गया था |

पैसेंजर पीजन

पेसेंजर पीजन कभी उत्तरी अमेरिका में पाया जाने वाला सबसे कॉमन कबूतर था | ये कबूतर 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते थे | इस क्षेत्र में इनकी भारी संख्या पायी जाती थी | बाद में उत्तरी अमेरिका में यूरोपीय देश के लोग आकर बसने लगे और सस्ते मांस के लालच में उन्होंने इनका शिकार करना शुरू कर दिया ,जिसके कारण इनकी संख्या धीरे धीरे कम होने लगी | वर्ष 1914 में इस प्रजाति की आखिरी कबूतर मार्था की मौत सिनसिनाटी चिड़ियाघर में हो गयी थी |

ब्रेबल-के मेलोमिस

ग्रेट बेरियर रीफ दुनिया की सबसे विशाल मुंगे की चट्टान है जो ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के पास है इसके उत्तर पूर्वी छोर को ब्रेबल बे के नाम से जाना जाता है | कुछ साल पहले तक इस छोटे से प्रवाल द्वीप पर मछुआरो को चूहे की तरह दिखने वाले “मेलोमिस” कभी बालू के बीच बिल बनांते , कभी झाड़ियो में तो कभी तटीय क्षेत्र म रहेने वाले चिडियों या कछुओ के घोंसलों में नजर आते थे लेकिन 2009 के बाद शायद ही किसी ने उन्हें देखा हो , आखिरकार वैज्ञानिकों इ इसे लुप्त हो चुकी प्रजातियों की लिस्ट में शामिल कर लिया है | ब्रेबल के मेलोमिस को पहला ऐसा मेमल माना जा रहा है जो ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अब धरती पर पुरी तरह से समाप्त हो चूका है | ब्रेब्ल के एक बिल्कुल सीधा और सपाट इलाका है समुद्र की सतह से ये अब मात्र 9 फुट ऊँचा है |हर साल समुद्र की सतह चौथाई इंच उपर हो जाती है | समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटा के कारण यहाँ की वनस्पति धीरे धीरे नष्ट होती चली गयी | पेड़-पौधों और खाने के अभाव में धीरे धीरे मेलोमिस खत्म हो गये |

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