EVM से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य | Electronic Voting Machine Facts in Hindi

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EVM Electronic Voting Machine Facts in Hindi
EVM Electronic Voting Machine Facts in Hindi

आजकल कई राजनितिक दल अपनी हार का कारण EVM में गडबडी को बता रहे है और फिर से पुरानी पद्दति से चुनाव करवाने की मांग कर रहे है | आज हम आपको इसी मुद्दे पर EVM से जुड़े रोचक तथ्यों सहित EVM से जुड़े मामलों को आपके सामने पेश करेंगे |

  • EVM को Electronic Voting Machine कहते है | ये पांच मीटर Cable द्वारा जुडी दो यूनिटों एक Control और दुसरी बैलैटिंग यूनिट से बनी होती है |
  • EVM में अलग अलग पार्टियों के चुनाव चिन्ह के सामने एक बटन होता है | वोट डालने के लिए इस बटन को दबाया जाता है |
  • EVM को Battery की मदद से भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है | Bharat Electronics Limited और Electronic Corporation of India Limited इसके लिए बैटरी तैयार करते है |
  • Electronic Voting Machine में अधिकतम 3840 वोट आ सकते है | सामान्य तौर पर एक Polling Booth पर वोटर की संख्या 1500 से अधिक नही होती है | ज्यादा संख्या होने पर मशीन की संख्या बढ़ा दी जाती है |
  • Electronic Voting Machine अधिकतम 64 Candidates के लिए काम कर सकती है | एक बैलैटिंग यूनिट में 16 candidates के लिए प्रावधान है | 16 से ज्यादा कैंडिडेट्स होने पर पहली बैलैटिंग यूनिट के साथ दुसरी बैलैटिंग यूनिट जोड़ी जाती है | इस तरह इसे 64 उम्मीदवारों के लिए तैयार किया जाता है |
  • इलेक्ट्रॉनिक Voting मशीन Bharat Electronics Limited और Electronic Corporation of India Limited की मदद से निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार और डिजाईन की गयी है |
  • 1989-90 में जब मशीने खरीदी गयी थी उस समय एक EVM की लागत 5500 रूपये थी | इसके आने से काउंटिंग का समय कई गुना कम हो गया | साथ ही वैलेट पेपर का खर्च भी बच गया |
  • आखिरी मतदाता द्वारा वोट डालने के बाद Control Unit इसके क्लोज बटन को दबा देता है जिसके बाद इसमें कोई नया वोट नही जाता |
  • 1980 में एच.बी.हनीफा ने भारत की पहली वोटिंग मशीन Electronically operated vote counting machine का अविष्कार किया जिसके वास्तविक डिजाईन को तमिलनाडू के 6  शहरों में प्रदर्शनी के लिए दिखाया गया |
  • Electronic Voting Machine के आने के बाद हर राष्ट्रीय चुनाव में लगभग 10 हजार टन बैलट पेपर की बचत होती है जिसकी कीमत हर यूनिट के लिए लगभग 10 हजार रूपये होती है |
  • Electronic Voting Machine को बैलट बॉक्सेस के मुकाबले कही अधिक आसानी से एक स्थान से दुसरे स्थान पर पालीप्रोप्लीन कैरी केस में ले जाया जा सकता है |
  • EVM की वोट काउंटिंग भी बहुत फास्ट है और EVM को तो अशिक्षित लोगो ने भी बैलट पेपर के मुकाबले अधिक सुविधाजनक माना है |
  • Electronic Voting Machine के आने के बाद तो बोगस वोटिंग भी बंद हो चुकी है क्योंकि वोट केवल एक बार ही रिकॉर्ड होता है |
  • एक यूनिट इसकी मेमोरी में रिजल्ट को तब तक स्टोर रखती है जब तक कि इसे manually किसी व्यक्ति द्वारा Erase ना किया जाए |
  • Electronic Voting Machine की बैटरी को भी तभी एक्टिवेट किया जाता है जब polling या वोट काउंटिंग शुरू होती है बाकि समय इसकी बैटरी को बंद किया जा सकता है |
  • इंडियन Electronic Voting Machine की शेल्फ लाइफ लगभग 15 वर्ष होती है |
  • Electronic Voting Machine को लेकर हर राजनितिक दल ने मुद्दा उठाया लेकिन हर बार EVM को गलत साबित करने में नाकाम रहे है |
  • नेपाल ,भूटान नामीबिया और केन्या में भारत निर्मित EVM खरीदी है |
  • ECI ने EVM के जरिये पिछले 23 सालो से अब तक 107 आम चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव , तीन लोकसभा चुनाव करवाए है जो कि शत प्रतिशत सफल रहे है |
  • 2014 के लोकसभा चुनाव में लगभग 55 करोड़ मतदाताओं ने Electronic Voting Machine के जरिये वोटिंग की है जो कि एक बहुत बड़ा आंकड़ा है |

तो मित्रो ये तो EVM से जुड़े तथ्य थे | उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद EVM में गडबडी को लेकर विवाद शुरू हुआ था | बहुजन समाज पार्टी की मायावती ने सबसे पहले EVM पर सवाल उठाये थे उसके बाद अखिलेश यादव ने भी मायावती का बात का समर्थन किया था | लेकिन केजरीवाल इन सबसे आगे निकले गये और वो हाथ धोकर अपनी हर हार का जिम्मेदार EVM को बता रहे है | पंजाब चुनाव हो या MCD चुनाव कभी आम आदमी पार्टी में खुद हार को अस्वीकार करते हुए सारा दोष EVM पर डाल दिया और इतना ही नही कल ही विधानसभा में EVM जैसी मशीन को टैम्पर करने से बाज नही आये |

मित्रो मान लिया जाए कि EVM को हैक किया जा सकता है लेकिन इतने बड़े स्तर पर हैकिंग करना नामुनकिन है | सोचिये उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में हजारो EVM का इस्तेमाल हुआ होगा और सभी बूथ पर गडबडी भी हो गयी होगी इसे माना नही जा सकता है | एक छोटे चुनाव में माना भी जा सकता है लेकिन इतने बड़े चुनाव में EVM में गडबडी नही हो सकती है | ECI ने तो सभी राजनितिक दलों को चुनौती दी है कि वो चुनाव आयोग की EVM को हैक करके दिखाए | विपक्षी दलों की इन बचकानी हरकतों से भारत का नाम विश्व में डूब रहा है |

आज तकनीक के दौर में अगर पुराने तरीको का इस्तेमाल करे तो गलत ही होगा | सोचिये आजकल इतना ऑनलाइन व्यापार होता है उसमे भी हैकिंग होती है ये सोचकर ऑनलाइन व्यापार तो बंद नही हो जाएगा | अगर आप गाड़ी से गिर गये या एक्सीडेंट हो जाए तो आप गाड़ी चलाना तो नही छोड़ेंगे | दुसरी बात EVM का कोई ऐसा विकल्प भी मौजूद नही है जो इससे बेहतर तरीके से काम कर सके | इसलिए सभी राजनितिक दलों से अनुरोध है कि अपनी हार की वजह किसी मशीन को ना बताये और आत्मचिंतन करे |

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