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Essay on Tree Plantation in Hindi | वृक्षारोपण पर निबन्ध

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Essay on Tree Plantation in Hindi | वृक्षारोपण पर निबन्ध
Essay on Tree Plantation in Hindi | वृक्षारोपण पर निबन्ध

वृक्ष मानव मित्र है | ये मानव को दैहिक , दैविक और भौतिक तीनो तापो से मुक्ति दिलाने में सहायक है | हमारे प्राचीन धर्मग्रन्थ और आज का विज्ञानं दोनों वृक्षों की महिमा का भरपूर गुणगान करते है | हमारे धर्मग्रन्थ तो वृक्षों को देवतुल्य समझते है | आज का विज्ञान भी यह साबित कर चूका है कि सबसे अधिक प्राणवायु (ऑक्सीजन) पीपल वृक्ष के से ही मिलता है | इसलिए हमारे देश में पीपल की पूजा की जाती है |

तुलसी के मूल में तो भगवान विष्णु का वास माना जाता है | इसके तने , पत्तिया एवं बीज सभी रोगों के इलाज में प्रयुक्त होते है | यही कारण है कि तुलसी का पौधा प्राय: हिन्दूओ के घरो में पाया जाता है | इसी प्रकार अशोक की छाल एवं पत्तियों से भी अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियाँ बनाई जाती है | अपने नाम के अनुरूप हमारे शोरो का भी शमन करता है |

नीम की उपयोगिता तो अवर्णनीय है | इसका रस , गोंद , पती , फल , बीज ,तना सभी के सभी उपयोगी है | नीम के संबध में एक कहानी सूनी जाती है | यूनान देश के एक वैध ने भारतीय वैध की परीक्षा लेनी चाही | यूनानी वैध ने भारतीय वैध के पास अपने एक दूत को भेजा | पत्र में लिखा था “श्रीमान मै कुष्ट रोगी को भेज रहा हु | आप इसे ठीक कर वापस भेज दे | “|

भारतीय वैध ने प्रत्युत्तर के साथ दूत को वापस भेज दिया और दुत को यह हिदायत दी कि रस्ते में जहां जहां नीम का वृक्ष मिले उसी की छाया में विश्राम करना | उसी की पत्ती एवं छाल को ओंटकर पीना और नीम जल से स्नान करना | कुछ समय उपरान्त दूत यूनानी वैध के समक्ष प्रत्युतर के साथ उपस्थित हो गया | प्रत्युत्तर में भारतीय वैध ने लिखा था “मै एक स्वस्थ व्यक्ति भेज रहा हु | सचमुच यूनानी वैध के सामने एक स्वस्थ व्यक्ति खड़ा था” इसलिए नीम के बारे में कहा गया है “सर्वरोग हरो निम्ब:” |

इसी प्रकार कमोबेश सभी वन सम्पदा से मानव को लाभ ही लाभ है | फलदार वृक्ष तो मानव के लिए वरदान है | शाकाहारी भोजन फलो के बिना असंतुलित माना जाता है | आम ,अमरूद एवं केले की मिठास और अंगूर की पौष्टिकता से भला कौन परिचित नही होगा | वृक्षों से अच्छी वर्षा होती है भू-रक्षण होता है वायु प्रदूषण होता है | इतना ही नही लाह और रेशम के कीड़े वृक्षों पर ही पलते है |

कागज का निर्माण चीड एवं बांस से ही होता है | इसके अलावा भवन निर्माण और फिर कुर्सी , टेबल , रेल के डिब्बे एवं अन्य फर्नीचर के निर्माण में लकड़ी की उपयोगिता सर्वविदित है | इस प्रकार मानव के जन्म से मृत्यु तक वृक्ष उसका साथी है | वृक्ष हमे नैतिकता एवं परोपकार का भी संदेश देते है |

आज का भौतिकतावादी मानव अपनी सुख सुविधाओं के लिए वृक्षों की अंधाधुंध कटाई कर रहा है | इससे पृथ्वी के वनक्षेत्र के प्रतिशत में कमी आ गयी | वैज्ञानिक आकंडे बताते है कि पर्यावरण संतुलन के लिए पृथ्वी के भूभाग का 33 प्रतिशत वन होना चाहिए | वृक्षों की कमी , मानव में जनसंख्या वृद्धि , फैक्ट्रियो एवं वाहनों से निकलने वाले धुएं एवं आणविक परीक्षण हमारे पर्यावरण को दिनोदिन प्रदूषित करते जा रहे है | इसके फलस्वरूप पृथ्वी पर वर्षा की कमी आ गयी है | मनुष्य की आयु घट रही है | पृथ्वी का तापक्रम बढ़ रहा है और सबसे खतरे की बात तो यह है कि हमारी सुरक्षा कवच ओजोन परत में छिद्र होने जा रहा है | ये सब मानव जाति के अस्तित्व के लिए खतरे की घंटी है |

इस संकट से निजात पाने का एक ही उपाय है कि अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण इसके लिए सडक के दोनों और एवं परती जगहों पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए | वृक्ष लगाने वाले वाले किसानो को सरकार की ओर से प्रोत्साहित करना चाहिए | इस पवित्र कार्य में उन्हें आर्थिक सहायता भी मिलनी चाहिए | यह खुशी की बाते है कि अब हरे वृक्षों को काटना कानूनी अपराध है |

इतना ही नही वृक्षारोपण को बीस सूत्री कार्यक्रम में स्थान दिया गया है फिर भी सरकार द्वारा इस संबध में की गयी कार्यवाही को संतोषजनक नही कहा जा सकता है | इस योजना को तो जन जन तक पहुचाकर आन्दोलन का रूप देना चाहिए | लोगो को चाहिए कि अपने जन्मदिन , शादी एवं शुभ अवसरों पर स्मृति बनाये रखने के लिए पेड़ अवश्य लगाये | तभी “पेड़ लगाओ देश बचाओ” का नारा कार्यरूप से परिगत होगा | सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा वृक्षों की रक्षा हेतु चलाया गया “चिपको आन्दोलन” इस दिशा में एक प्रशंशनीय एवं अनुकरणीय कदम है |

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