Home निबन्ध हिमालय पर्वत पर निबन्ध | Essay on Himalaya in Hindi

हिमालय पर्वत पर निबन्ध | Essay on Himalaya in Hindi

113
0
SHARE

हिमालय “हिम” और “आलय” से बना हुआ संस्कृत शब्द है | इसका अर्थ है “बर्फ का घर” | इसका कारण यह है कि यह सदा बर्फ से ढका रहता है | हिन्दू इसे शिव का स्थान समझते है इसलिए उनकी दृष्टि में यह पूज्य है | पुराणों में इसका बहुत वर्णन आता है | उनमे लिखा है कि इनकी कन्या पार्वती से शिव का विवाह हुआ था | महाभारत में आता है कि युधिष्ठिर आदि पाँच पांड्वो ने इसकी कन्दराओ में जाकर अपने शरीर छोड़े थे | हिमालय का सर्वोत्कृष्ट वर्णन कविकुलगुरु कालिदास ने “कुमारसम्भव” में किया है |

प्रसार और वर्णन

हिमालय भारत के उत्तर-पश्चिम में पूर्व तक 1500 मील लम्बा चला जाता है और इसकी चौड़ाई 80 से 150 मील के लगभग है | इसकी ऊँचाई एक सिरे से दुसरे सिरे तक एक सी नही है | यदि कही पर यह इतना ऊँचा है कि इसके समान संसार भर में कोई होगा तो अन्य स्थानो पर यह इतना नीचा है कि प्राय: भूतल के बराबर हो जाता है |

हिमालय के श्रुंखलाबद्ध पर्वत है | इसके बीच में कई गहरे गड्डे आ जाते है जिनमे से उनमे नदी-नाले बहने लगते है | कंचनजंघा , धौलागिरी और एवेरेस्ट इसके सर्वोच्च शिखर है | इनमे एवेरेस्ट की ऊँचाई 29004 फीट है | हिमालय में जो स्थान 2000 या 2500 फीट की ऊँचाई पर है वहा पर कभी कभी बर्फ गिरती है 6500 फीट की ऊँचाई पर सर्दी में ज्यादा बर्फ पडती है किन्तु हो शिखर 16000 फीट अथवा इससे भी अधिक उंचाई पर है वहा पर सदा बर्फ रहती है |

हिमालय में कई नगर और ग्राम भी बसे हुए है जिनका शासन पहले छोटे बड़े रजवाडो के अधीन रहा है | स्वतंत्रता के पश्चात अनेक रियासतों को मिलाकर प्रदेश नामक एक प्रांत बना दिया है | शेष छोटी छोटी रियासते आसपास के प्रान्तों से मिला दी गयी है | इसमें नेपाल नामक एक स्वतंत्र देश भी है | हिमालय की तराई में बसा हसा कश्मीर अत्युत्तम प्रदेश है | शिमला , नैनीताल ,दार्जिलिंग ,मंसूरी आदि कई स्थान ऐसे है जहां पर पहले ग्रीष्म ऋतू में भारत सरकार तथा अन्याय प्रांतीय सरकारों के दफ्तर जाया करते थे |

पहाडी नगरो के लोगो का वर्ण शीत की प्रधानता के कारण गोरा और उनके शरीर बड़े पुष्ट और बलिष्ट होते है | वे लोग हमारे देश के लोगो की तरह छली और कपटी नही होते | भिन्न भिन्न स्थानीय लोगो के भिन्न भिन्न खानपान और आचार होते है | इन लोगो की स्त्रियों में प्राय: परदा नही होता | हिमालय में सिंह , बाघ , रीछ , बन्दर आदि सब प्रकार के जानवर पाए जाते है | प्रतिवर्ष कितने ही प्राणियों की जाने इसके कारण जाती है |

उपकार

इस पर्वतराज से जगतभर को साधारणत: और भारतवर्ष को विशेषत: अनेक लाभ पहुच रहे है | इससे झेलम , चिनाव , व्यास , यमुना , ब्रह्मपुत्र आदि कतिपय नदियाँ निकलकर जनता का एक बहुत उपकार कर रही है | इसके जंगलो से जितनी लकड़ी निकलती है वह या तो मकान बनाने के काम आती है या जलाने के | इसकी जलवायु उत्तम है | कई असाध्य बीमारियों से ग्रस्त लोग यहा आकर केवल जलवायु सेवन से ही भले चंगे हो जाते है |

तपेदिक के बीमारों के लिए धर्मपुर आदि स्थानों में अस्पताल बने है | हिमालय में बहुत से खाने भी है जिनमे से अमूल्य खनिज पदार्थ निकाले जाते है | अभी तक इस ओर किसी का विशेष ध्यान नही गया परन्तु विज्ञानवेत्ताओ का विचार है कि हिमालय जितना बर्फ का घर है उतना ही खनिज पदार्थो का भी है |

अनेक साधू , महात्मा इसकी कन्दराओ और घने जंगलो में जाकर परमात्मा के भजन में अपनी आयु बिता देते है | भारतवर्ष में वर्षा बहुधा इससे प्रभावित होती है | जो जलपूर्ण वायु हिन्द महासागर से उठकर इससे टकराती है वह ठंडी होकर वर्षा के रूप में बदल जाती है | इसी पर भारत और तिब्बत की सीमा मिलती है | हिमालय हिन्दुओ के मुख्य मुख्य तीर्थो का घर है | यहा प्रतिवर्ष केदारनाथ , बद्रीनाथ , अमरनाथ आदि की यात्रा के लिए हजारो यात्री आते है |

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here