Home निबन्ध ग्राम पंचायत पर निबन्ध | Essay on Gram Panchayat in Hindi

ग्राम पंचायत पर निबन्ध | Essay on Gram Panchayat in Hindi

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ग्राम पंचायत पर निबन्ध | Essay on Gram Panchayat in Hindi
ग्राम पंचायत पर निबन्ध | Essay on Gram Panchayat in Hindi

गाँव की अदालत को पंचायत कहते है | प्राचीनकाल में न्यायालयों की प्रथा बहुत कम थी | गाँव के लोग आपस में वाद-विवाद को पंच फैसले द्वारा निपटा लिया करते थे | सुनवाई करने के लिए गाँव के पाँच विश्वस्त मूखियो को चुन लिया जाता था जिन्हें पंच कहते थे | वे पंच गाँव की चौपाल में बैठकर दोनों पक्षों की बात सुनते थे और फिर निष्पक्ष होकर सच्चा निर्णय देते थे | इसे पंचायत प्रथा कहते है | आज गाँवों में प्रथा को फिर से जीवीत किया जा रहा है |

पंचायत का उद्देश्य एवं लाभ

पंचायत का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों के आपसी झगड़े निपटाना और उसमें पारस्परिक प्रीति बढाना है | गाँव के लोग प्राय: अनपढ़ होते है और बात ही बात में घूंसों और लाठियों पर उतर आते है | झगड़ने वालो को समझा-बुझाकर उनकी फिर सुलह करवा देना गाँव के पंचो के लिए साधारण सी बात होती है किन्तु अंग्रेजो के राज्यकाल में तनिक से मतभेद का निर्णय करवाने के लिए भी न्यायालय का द्वारा खटखटाने की प्रथा चल पड़ी थी |

न्यायालय में मनमुटाव दूर नही होता अपितु बढ़ जाता है | बेचारे ग्रामीणों को बीसियों बार उपस्थिति की तिथियाँ भुगतने के लिए गाँव से चलकर न्यायालयो में जाना पड़ता है और अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए वकीलों , मुंशियो और अन्याय कचहरी वालो को शुल्क देने पड़ते है | इतना व्यय करने भी सच्चा न्याय नही हो पाता क्योंकि न्यायाधीश गाँव के घटना-स्थल से कोसो दूर बैठा होता है और उसे गवाहों के कहे अनुसार ही मानना पड़ता है | इसलिए कभी कभी सच्चे को झूठा और झूठे को सच्चा भी घोषित किया जा सकता है | इसलिए विपरीत गाँव के पंचलोग गाँव के एक-एक व्यक्ति को जानते और वहा की घटनाओं का भली प्रकार आँखों देखा हाल प्राप्त कर सकते है |

अत: उनके न्याय में अंतर नही पड़ सकता | वैसे भी ग्रामीणों का विश्वास है कि पंच परमेश्वर होता है और जब वह आसन पर बैठता है तो उसमे परमेश्वर निवास करते है इसलिए वह झूठा निर्णय नही दे सकता | आज भी गाँव में ऐसे अनेक दृष्टांत मिलते है कि पिता ने पंच के आसन पर बैठकर अपने पुत्र का लिहाज न किया और उसे दंड का अधिकारी बनाया | इस प्रकार पंचायतो में एक तो सच्चा न्याय हो सकता है और दुसरे गाँव वाले शहर आने जाने के व्यय और समस्या से बच जाते है | इधर बीज की बुवाई या फसल की कटाई का समय हो और उधर किसान को न्यायालय में प्रस्तुत होने का बुलावा आ जाए तो उसकी हानि का अनुभव एक गाँववासी ही लगा सकता है |

पंचायतो के विविध कार्यक्रम

आजकल की पंचायते किसी अवसर विशेष के लिए अस्थिर रूप से नही बुलाई जाती | अब उन्हें स्थिर सभा का रूप दे दिया गया है | इसमें गाँव के लोग अपने प्रतिनिधि चुनकर उन्हें पंच बनाते है | इस पंचायत को सरकार भी स्वीकार करती है और उसे न्यायालय के लगभग सभी अधिकार प्राप्त होते है \ पंचायत के लिए गये निर्णय की अपील न्यायालय में भी नही हो सकती | इसके अतिरिक्त ग्राम सुधर विषयक सभी काम पंचायत द्वारा किये जाते है | अशिक्षितों की पढाई , गली-मोहल्लो की सफाई , कुए तालाबो की सफाई , बुरे रीती-रिवाजो में सुधर इत्यादि सभी काम पंचायतो के अधीन होते है | आधुनिक पंचायतो में पुस्तकालय , रेडियो , समाचार पत्र और इसी प्रकार के जनहितकारी सभी साधनों को जुटाया जाता है | कई पंचायते गाँव में मनोरंजन का प्रबंध करती , मेले-उत्सव लगवाती और सस्ती तथा अच्छी वस्तुओ की दुकाने खुलवाती है |

पंचायतो का भविष्य

महात्मा गांधी तप पंचायत को गाँव का स्वास्थ कहते थे | भारत सरकर भी गाँवों में धड़ाधड़ पंचायत प्रथा को प्रोत्साहन दे रही है | कुछ ही समय में प्रत्येक गाँव की अपनी पंचायत होगी | पंचायतो में भाग लेने से गाँववासी अपने उत्तरदायित्व को समझने लगते है और उनमे जागृति आ जाती है | ग्रामीणों में धार्मिक भावना तो स्वाभाविक रूप से होती ही है पंचायत में पारस्परिक मेलजोल और पठन-पाठन से वे लोग भारत के आदर्श नागरिक बन जायेंगे | तभी हमारा देश सच्चे अर्थो में उन्नत कहला सकेगा |

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