जानिए भारत में अलग अलग जगह पर कैसे मनाते है दशहरा ? Different Rituals of Celebrate Dussehra in Hindi

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Different Rituals of Celebrate Dussehra in Hindi

हर वर्ष आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाने वाला पर्व दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप मनाया जाता है | इस दिन पुरे देश में रावण ,मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलो को जलाया जाता अहि | यधपि रावण दहन के दिवस के रूप में हर स्थान पर जाना जाता है लेकिन फिर भी अलग अलग क्षेत्रो में इसे विभिन्न तरीको से मनाया जाता है | आइये जाएं भारत में अलग अलग जगहों पर कैसे मनाते है दशहरा ?

01 मैसूर का भव्य दशहरा | Dussehra of Mysore

dussehra-of-mysoreमैसूर का दशहरा अंतर्राष्ट्रीय उत्सव के रूप में अपनी अलग पहचान बना चूका है जिसमे शामिल होने के लिए विदेशो से पर्यटक आते है | इस दिन यहाँ कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है लेकिन सबसे अधिक प्रसिद्ध है 12 हाथियों की इस इस उत्सव में उपस्थिति | इन हाथियों की अपनी अपनी विशेषता होती है | दशहरा उत्सव के अंतिम दिन यहा मैसूर महल से “जम्बो सवारी” का आयोजन किया जाता है जिसमे रंग बिरंगे आभूषण और कपड़ो से सजे हाथी एक साथ शोभायात्रा के रूप में इकट्ठे चलते है और इन सबका नेतृत्व करने वाल विशेष हाथी “अम्बारी ” है जिसकी पीठ पर चामुंडेश्वरी देवी की प्रतिमा सहित 750 किलो का “स्वर्ण हौदा” रखा होता है | यह सवारी मैसूर महल से तीन किलोमीटर की दूरी तय करने एक बाद बन्नीमंडप पहुचकर समाप्त होती है |

कहा जाता है कि मैसूर के दशहरे का इतिहास विजयनगर साम्राज्य से जुड़ा है | वाड़ेयार राजवंश के लोकप्रिय शाषक कृष्णदेव वाड़ेयार की इच्छा थी कि यह पर्व धूमधाम से मनाया जाए ताकि आने वाली पीढ़िया इस उत्सव को याद रखे | इसके लिए उन्होंने एक निर्देशिका भी बनवाई जिसमे लिखा था कि कुछ भी हो जाए ,दशहरा मनाने की परम्परा टूटनी नही चाहिए | कहते है कि दशहरे के एक दिन पूर्व राजा के पुत्र नंजाराजा की मृत्यु हो गयी लेकिन राजा वाड़ेयार ने बिना किसी विरोध के दशहरा उत्सव का आयोजन किया और अपनी परम्परा को कायम रखा |

02 पंजाब का उल्लासपूर्ण दशहरा | Dussehra of Punjab

यहा दशहरा से पूर्व नौ दिनों तक नवरात्रों में माँ दुर्गा की उपासना भी की जाती है और कन्याओं को देवी के स्वरूप मान उन्हें पूजा जाता अहि | इसके बाद दशमी की शाम को श्रीराम और रावण के मध्य युद्ध का आयोजन किया जाता है एवं सूर्यास्त के समय रावण मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलो में अग्निबाण द्वारा जलाया जाता है | यहा जगह जगह मेले लगते है और हलवाइयो की दुकाने सजती है जिसमे खासतौर पर लोग जलेबी खरीदना और खाना बहुत पसंद करते है |

03 तमिलनाडू , तेलंगाना , आंध्रप्रदेश और कर्नाटक का दशहरा | Dussehra of Tamilnadu , Telangana , Andhra Pradesh and Karnaataka

इन सभे राज्यों में दशहरा नौ को नौ दिनों तक मनाने की परम्परा है | यहाँ के लोग दशहरे पर तीनो देवियों लक्ष्मी ,सरस्वती और दुर्गा की पूजा करते है | अगर कोई भी नया कार्य करना हो तो इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है | इन सभी राज्यों में लक्ष्मी माता की पूजा प्रथम तीन दिनों में की जाती है उसके अगले तीन दिनों में विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है और अंत के तीनो दिनों में शक्ति की देववी माँ दुर्गा का पूजन किया जाता है |

04 उत्तर प्रदेश का दशहरा | Dussehra of Uttar Pradesh

पंजाब की भाँती यहाँ भी दशहरे से पहले रामलीला ,नवरात्र और फिर अंत में रावण दहन का आयोजन होता है | यहा दशहरे की रौनक देखते ही बनती है | जहा एक ओर रामनगर की लीला विश्वविख्यात है | वही बनारस में घट स्थापना से शुरू हुआ यह उत्सव दस दिन तक चल चलता है |

05 कुल्लू का विश्वविख्यात दशहरा | Dussehra of Kullu

dussehra-in-hindiहिमाचल प्रदेश में स्थित कुल्लू का दशहरा एक अनोखे और भव्य अंदाज में मनाये जाने की व्झ्स इ विश्व्विखायत है | कुल्लू का दशहरा पारम्परिक और एतेहासिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है | यहा इस पर्व को मनाने की परम्परा राजा जगत सिंह के समय से चली आ रही है |एक कथा के अनुसार राजा जगत सिंह ने एक साधू की सलाह पर कुल्लू के भगवान रघुनाथ जी की प्रतिमा स्थापित की थी | दरअसल राजा किसी रोग से पीड़ित थे और इसी से मुक्ति पाने के लिए साधू ने उन्हें यह सलाह दी थी |

अयोध्या से लाइ गयी इस मूर्ति की स्थापना की बाद राजा जगत सिंह धीरे धीरे स्वस्थ होने लगे और उन्होंने इसी वजह से अपना शेष जीवन भगवान को समर्पित कर दिया |इस उत्सव के एक दिन पहले एक रथ यात्रा आयोजित की जाती है जिसमे रथ में भगवान रघुनाथ जी ,सीता जी एवं दशहरे की देवी मनाली की हिडिम्बा जी की प्रतिमाओं को रखा जाता है |सातवे दिन रथ से व्यास नदी के किनारे लाया जाता है जहा लंका दहन का आयोजन होता है | इसके बाद रथ पुन: वापस लाकर रघुनाथ जी को उनके मन्दिर में फिर से स्थापित कर दिया जाता है | दशहरे के दिन यहाँ की धूमधाम देखने योग्य होती है |

06 बंगाल का पारम्परिक दशहरा | Dussehra of West Bengal

यहा यह पर्व माँ दुर्गा पूजा उत्सव के रूप में ही मनाया जाता है जो बंगाल में पांच दिनों तक चलता है |यहा माँ दुर्गा की भव्य मूर्तियों को विभिन्न पंडालो से सजाया जाता है | षष्टी के दिन दुर्गा पूजा एवं प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया जाता अहि | सप्तमी ,अष्टमी और नवमी को प्रात: एवं सांयकाल को दुर्गा माता की पूजा की जाती है | दसवे दिन एक विशेष पूजा होती है जिसमे औरते देवी की प्रतिमा के माथे से सिंदूर चढाती है और बाद में प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है |

07 ओडिशा और असम का दशहरा | Dusshera of Odisha and Assam

ओडिशा और असम में भी बंगाल की तरह दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है | इन दोनों राज्यों में यह त्यौहार 4 दिन तक चलता है | यहाँ देवी दुर्गा की मूर्ति को पंडालो में विराजमान करते है | यहा षस्टी के दिन दुर्गा देवी का बोधन , आमन्त्रण एवं प्राण प्रतिष्टा आदि का आयोजन किया जाता है | उसके उपरांत सप्तमी ,अष्टमी और नवमी के दिन प्रात: काल और सांयकाल दुर्गा की पूजा में व्यतीत होते है |अष्टमी के दिन महा पूजा की जाते है | दशमी के दिन यहा पर एक विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है और साथ ही प्रसाद वितरण किया जाता है | पुरुष आपस में  एक दुसरे से प्यार से गले मिलते है जिसे कोलाकुली कहते है | इस दिन यहा की स्त्रियाँ अपने माथे पर सिंदूर चढाती है और साथ ही साथ दुसरो को भी सिंदूर लगाती है | इस दिन इन राज्यों में नीलकंठ नामक एक पक्षी को देखना बहुत  शुभ माना जता है | अंत में देवी दुर्गा की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाया जाता है | विसर्जन की यह यात्रा भी बड़ी शोभनीय और दर्शनीय होती है |

08 गुजरात का दशहरा | Dussehra of Gujrat

गुजरात में मिटटी का एक रंगीन घड़े को देवी का प्रतीक माना जाता है जिसको कुंवारी लडकिया अपने सिर पर रखकर गरबा करती है  जो गुजरात की शान है | गुजरात के सभी पुरुष और महिलाये दो डंडो से गरबे के संगीत पर गरबा नाचते है | इस अवसर पर भक्ति और पारम्परिक लोक संगीत का समायोजन भी होता है | आरती हो जाने के बाद यहा पर डांडिया रास का आयोजन होता है जो पुरी रात चलता है | | नवरात्री में सोने के गहनों को खरीदना बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है |

09 बस्तर का दशहरा मेला | Dussehra Mela in Bastar

बस्तर के दशहरे के मुख्य कारण को राम की रावण पर विजय न मानकर लोग इसे माँ दंतेश्वरी की आराधना को समर्पित एक पर्व मानते है | दंतेश्वरी माँ बस्तर के निवासियों की आराध्य देवी मानी जाती है जो माँ दुर्गा का ही स्वरूप  है | यहाँ पर यह पर्व पुरे 75 दिन तक चलता है जो  दशहरा श्रावण मास की अमावस की शुक्ल त्रयोदशी तक चलता है | पहले  दिन को काछिन गादी कहते है जिसमे देवी से समारोह आरम्भ की अनुमति ली जाती है | यहाँ पर देवी एक कांटो की शैय्या पर विराजमान होती है जिसे काछिन गादी कहते है | यह कन्या अनुसूचित जाति की है जिससे बस्तर के राजपरिवार के व्यक्ति की अनुमति लेते है | यह समारोह लगभग 500 साल पहले 15वी शताब्दी से शुरू हुआ था | इसके बाद जोगी बिठाई होती है | इसके बाद यहाँ पर भीतर रैनी (विजयादशमी) , फिर बाहर रैनी (रथ यात्रा ) और अंत में मुरिया दरबार होता है | इसपर्व का समापन आश्विन शुक्ल त्रयोदशी को ओहाडी पर्व से होता है |

10 महाराष्ट्र का दशहरा | Dusshera in Maharashtra

महाराष्ट्र में माँ दुर्गा को नवरात्रि के नौ दिनों तक पूजा जाता है और दसवे दिन माता सरस्वती की पूजा की जाती है | यहा के लोगो का मानना है कि इस दिन माँ सरस्वती की पूजा करने से स्कूल में नये नये पढने वाले बच्चो पर माँ का आशीर्वाद रहता है इसलिए इस दिन को विद्या के लिए बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है | महाराष्ट्र में लोग नया घर खरीदने के लिए भी इस दिन को बहुत शुभ मानते है | | यहा पर एक सामजिक उत्सव सिलंगण का आयोजन भी इस दिन होता है जिसमे गाँव के सभी लोग नये कपड़े पहनकर गाँव के दुसरी ओर जार्क शमी वृक्ष के पत्तो को अपने गाँव लाते है | एक पौराणिक कथा के अनुसार शमी वृक्ष के पत्तो को स्वर्ण से जोड़ा गया है | इन शमी वृक्ष के पत्तो को स्वर्ण के रूप में लोग एक दुसरे को देकर इस पर्व का आनन्द लेते है |

11 कश्मीर का दशहरा | Dusshera in Kashmir

वैसे तो कश्मीर में हिन्दुओ की संख्या बहुत कम है फिर भी यहा पर अल्संख्यक हिन्दू इस पवित्र त्यौहार को अपने अलग ही अंदाज में मनाते है | यहाँ के लोग नवरात्रि के दिनों में केवल पानी पीकर ही उपवास करते है | यहा के हिन्दू परिवार खीर भवानी माता में बहुत आस्था रखते है और इस दिन माता के दर्शन को बहुत शुभ मानते है | यहाँ के लोगो का मानना है कि दशमी के दिन जो तारा उगता है उस समय विजय मुहूर्त माजा जाता है जो सभी कार्यो को सफल करता है इसलिए उस विजय मुहूर्त के तारे के नाम पर इसे विजयादशमी कहते है |

इन सबके अतिरिक्त विदेशो में भी विजयादशमी का त्यौहार बड़ी उमंगो और धूमधाम से मनाते अहि | नेपाल में नौ दिन तक माँ काली और माँ दुर्गा की पूजा की जाती है और दशहरे वाले दिन राज दरबार में राजा अपनी प्रजा को अबीर ,दही और चावल अक तिलक लगाते अहि | श्रीलंका ,चीन ,मलेशिया और इंडोनेशिया में भी अपने अपने रीती रिवाजो से अनुसार यह पर्व मनाने की परम्परा है |

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