धनतेरस कथा और पूजन विधि | Dhanteras Katha and Pooja Vidhi in Hindi

Dhanteras Katha and Pooja Vidhi in Hindi

dhanteras-katha-and-pooja-vidhi-in-hindiधनतेरस का त्यौहार दीपावली आने की पूर्व सुचना देता है | इस दिन भगवान धन्वंतरि क्षीरसागर से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए वैध समाज हर्षोल्लास के साथ “धन्वंतरि जयंती” मनाता है | उल्लेखनीय है कि अमृतपान करने वाला प्राणी अमर हो जाता है इसलिए धन्वंतरि भगवान ने देवताओ को अमृतपान करवाकर अमर कर दिया था | भगवान विष्णु के अंश से धन्वंतरि आयुर्वेद के प्रवर्तक और आरोग्य के देवता के रूप में प्रतिष्टित हुए है | यही कारण है कि धनतेरस के दिन दीर्घायु और स्वस्थ्य जीवन की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि के पूजन का विशेष महात्म्य है |

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धनतेरस की प्राचीनता का प्रमाण वैदिक साहित्य मेभी पाया जाता है क्योंकि यमराज वैदिक देवता माने जाते है इसलिए इस दिन यमराज की भी पूजा की जाती है | धनतेरस कार्तिक मॉस की कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है | धनतेरस के दिन भगवान कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा का विशेष महत्व है | इस पूजा से भगवती लक्ष्मी प्रसन्न होकर आर्थिक सम्पन्नता और ऐश्वर्य प्रदान करती है | भगवान धनवंतरी का जन्मोत्सव होने के कारण इस दिन का विशेष महत्व है | आयुर्वेद के जन्म भगवान धन्वन्तरि की पूजा अर्चना आरोग्य प्रदान करती है | इस दिन सांयकाल में दीप दान किया जाता है तथा धनाधिपति भगवान कुबेर और गौरी-गणेश की पूजा श्रुधा भाव से की जाती है |इस दिन अन्नपूर्ण स्त्रोत एवं कनकधारा स्त्रोत पाठ करने का विधान भी है | सांयकालीन दीप दान से अकाल मृत्यु का निर्वानार्थ किया जाता है | इस दीप दान से पूर्वज खुश होते है और अपने वंशजो को आशीर्वाद देते है |

धनतेरस की पौराणिक कथा | Dhanteras Katha in Hindi

धन तेरस की कथा का पुराणों में वर्णन इस प्रकार हुआ है

एक समय यमराज ने अपने दूतो से पूछा कि क्या कभी तुम्हे प्राणियों के प्राण हरण करते समय किसी पर दयाभाव भी आया है तो वे संकोच में पडकर बोले “नही महाराज ! हमे दयाभाव से क्या मतलब | हम तो बस , आपकी आज्ञा का पालन करने में लगे रहते है ”

यमराज ने दुबारा पूछा तो उन्होंने संकोच छोडकर बताया कि एक बार एक ऐसी घटना घटी थी जिससे हमारा हृदय काँप उठा था | हेम नामक राजा की पत्नी ने जब एक पुत्र को जन्म दिया तो ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना करके बताया कि यह बालक जब भी विवाह करेगा ,उसके चार दिन बाद ही मर जाएगा | यह जानकर उस राजा ने बालक को स्त्रियों की छाया तक से बचाने हेतु यमुना तट की एक गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रखकर बड़ा किया |

संयोग से एक दिन जब महाराजा हंस की युवा बेटी यमुना तट पर घूम रही थी तो उस ब्रह्मंचारी युवक से मोहित होकर उससे गन्धर्व विवाह कर लिया | चौथा दिन पूरा होते ही वह राजकुमार मर गया | अपने पति की मृत्यु देखकर उसकी पत्नी बिलख बिलख कर रोने लगी | उस नवविवाहिता का करुण विलाप सुनकर हमारा हृदय भी कांप उठा | हमने जीवन में कभी भी ऐसी सुंदर जोड़ी नही देखी थी | वे दोनों साक्षात कामदेव एवं रति के अवतार मालुम होते थे | उस राजकुमार के प्राण हरण करते समय हमारे आंसू रुक नही रहते थे |

यह सुनकर यमराज ने कहा “क्या करे , विधि के विधानानुसार उसकी मर्यादा निभाकर हमे ऐसे अप्रिय कार्य करने ही पड़ते है ”

“क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नही है ?” एक यमदूत ने उत्सुकतावश पूछा |

यमराज बोले “हां उपाय तो है | अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को धनतेरस के दिन पूजन और दीपदान विधिपूर्वक करना चाहिए | जहा यह पूजन होता है वहा अकाल मृत्यु का भय नही सताता |”

पूजन सामग्री | Dhanteras Pooja Samagri

मिटटी का चौमुखी दीप , चार बत्तिया और एक छेद की हुयी कौड़ी , घी , जल से भरा लौटा ,पंचपात्र में जल एवं चम्मच , फुल ,रोली , चावल ,रूपये ,मिठाई ,धान की खील बताशा ,सुहाली ,शक्कर ,गुड , चौकी , रोली ,चावल ,आसन आदि |

पूजन की विधि | Dhanteras Pooja Vidhi in Hindi

शाम को तारा निकलने के बाद धन्वंतरि की पूजा की जाती है | पाटे पर मिटटी का चौमुखी दीपक रखे और घी डालकर चारो बत्तिया जलाए | इस दीपक में कौड़ी भी डाल दे | दीपक के चारो ओर जल का छींटा देकर रोली से तिलक निकाल क्र चावल लगाये | इस यम दीपक कहते है | इसके बाद चार सुहाली ,थोडा गुड शक्कर ,फुल और रुपैया चढाते है | कई लोग धान की खील एवं बताशा भी चढाते है | इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों को तिलक लगाया जाता है | दीपक के चार परिक्रमा करके प्रणाम करे | पूजा के समय इस मन्त्र का उच्चारण करे

त्रयोदशा दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति

घर का कोई भी एक सदस्य सिर पर किसी कपड़े से ढककर दीपक उठाकर बाहर ले जाए एवं घर के मुख्यद्वार से बाहर जाकर दरवाजे के सीधे हाथ की तरफ दीपक रख दे | दीपक जलाने वाले व्यक्ति को दक्षिण दी जाती है | इस दिन ब्राह्मण को विशेष रूप से जूते या छाते का दान दिय जाता है |

धनतेरस के दिन खरीददारी Shoping on Dhanteras in Hindi

धनतेरस के दिन लक्ष्मी का आवास घर में माना जाता है इस तिथि को पुराने बर्तनों के बदले नया बर्तन खरीदना शुभ माना गया है | ऐसा विश्वास है कि चांदी के बर्तन खरीदने से अधिक पूण्य लाभ मिलता है |इस दिन स्तिथ लग्न में बहुमूल्य रत्न एवं धातु , जवाहरात खरीदने के विशेष महत्व है | सोना चाँदी की खरीद से घर में समृधि बनी रहती है और देवी लक्ष्मी अति प्रसन्न होती है | लक्ष्मी की कृपा के लिए अष्टदल कमल बनाकर कुबेर , लक्ष्मी एवं गणेश जी की स्थापना कर उपासना जी जाती है | इस अनुष्टान में पांच घी के दीपक जलाकर तथा कमल ,गुलाब आदि पुष्पों से उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजन करना लाभदायक होता है | इसके अलावा “ॐ श्री श्रीये नम:” का जाप करना चाहिए | इस दिन अपने इष्टदेव की पूजा और मंत्रजाप विशेष फलदायी होता है |

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