क्रिसमस ट्री से जुड़े 20 रोचक तथ्य | Christmas Tree Facts in Hindi

क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री का अपना ही महत्व है | क्रिसमस ट्री नामक पेड़ प्राचीन समय से ही मिस्त्र , चीन और इजराइल में होता रहा है और इसके साथ अनेक प्राचीन रीती रिवाजो भी जुड़ते गये | आइये आज हम आपको क्रिसमस ट्री से जुड़े ऐसे ही रोचक तथ्य बताते है जो इससे पहले आपने कभी नही पढ़े होंगे |

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Christmas Tree Facts in Hindi – Fact 1 to 5

  • सामान्य रूप से विश्व के यूरोपीय देशो बेल्जियम  , नार्वे , स्वीडन तथा हॉलैंड में तो भुत भगाने के लिए क्रिसमस के पेड़ की टहनियों का उपयोग किया जाता था | ऐसे स्थानों पर टहनिया रोप दी जाती थी और यह मान्यता बन गयी थी कि इसकी टहनिया रोपने से भुत प्रेत नही आयेंगे |
  • यूरोपीयन देशो में तो क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री लगाना अनिवार्य परम्परा सी बन गयी है | यदि प्राकृतिक वृक्ष ना हो तो फिर नकली पेड़ खरीद कर घरो में लगाकर सजाये जाते है | आज बाजार में क्रिसमस ट्री के अनेक नकली वृक्ष मिलते है | सम्पन्न वर्ग के लोग तो क्रिसमस ट्री को सोने चांदी से भी सजाने लगे है |
  • एक मान्यता के अनुसार क्रिसमस ट्री को क्रिसमस पर सजाने पर सजाने की परम्परा जर्मनी से प्रारम्भ हुयी | यहा 19वी सदी से यह परम्परा इंग्लैंड में पहुच गयी , जहा से सारे विश्व में यह प्रचलन में आ गयी | अमेरिका में इसे जर्मनी के अप्रवासियो ने आरम्भ किया था |
  • वैसे तो क्रिसमस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से है | जब उनका जन्म हुआ तब उनके माता पिता मरियम एवं जोसेफ बधाई देने वालो ने , जिनमे स्वर्गदूत भी थे , एक सदाबहार फर को सितारों से रोशन किया था | तब से ही सदाबहार क्रिसमस फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में मान्यता मिली |
  • क्रिसमस ट्री को लेकर कई मान्यताये भी है | प्राचीन रोम में एक मान्यता के अनुसार एक वृक्ष की एक छोटी शाखा को एक शिशु ने भोजन और आवास के बदले कुछ आदिवासियों को दी थी | ऐसा माना जाता है कि वह शिशु ओर कोई नही , स्वयं प्रभु यीशुमसीह थे | घरो में क्रिसमस ट्री लगाकर लोग क्रिसमस पर अच्छे फ्लो की प्राप्ति की कामना करते है |

Christmas Tree Facts in Hindi – Fact 5 to 10

  • क्रिसमस ट्री को इंग्लैंड में लोग कीसी के जन्मदिन ,विवाह या किसी परिजन की मृत्यु हो जाने पर भी उसकी स्मृति में रोपते है | वे कामना करते है कि इससे पृथ्वी हमेशा हरी भरी रहे |
  • प्राचीन इतिहास ओर कुछ कथाओं से यह भी पता चला है कि क्रिसमस ट्री का वृक्ष अदन के बाग़ में भी लगा था | जब हव्वा ने उस वृक्ष के फल को तोडा , जिस परमेश्वर ने खाने ने मना किया था |तब इस वृक्ष की वृद्धि रुक गयी और पत्तिय सिकुड़ कर नुकीली बन गयी | कहते है इस पेड़ की वृद्धि उस समय तक नही हुयी , जब तक प्रभु यीशु का जन्म नही हुआ | उसके बाद यह वृक्ष बढने लगा
  • क्रिसमस ट्री के बारे में इक ओर कथा है कि एक बुढिया अपने घर देवदार के वृक्ष की एक शाखा ले आयी और उसे घर में लगा दिया | लेकिन उस पर मकडी ने अपने जाले बना लिए | जब प्रभु यीशु का जन्म हुआ था तब वे जाले सोने के तार में बदल गये थे | इस तरह के संबध में अनेक मान्यताए , कहानिया और इतिहास है |
  • कहा जाता है कि युल नामक पर्व मनाया जात अता जो अब बड़ा दिन के उत्सव में घुल मिल गया है इस त्यौहार में पेड़ो को खूब सजाया जाता था |सभवत: इसी से क्रिसमस ट्री की प्रथा चल पड़ी |
  • वैसे क्रिसमस ट्री की परम्परा के पीछे लम्बी कहानी है | कुछ इतिहासकारो का मानना है कि जगमगाते -चमकते क्रिसमस का संबध मार्टिन लूथर से था | मार्टिन लूथर ने छोटे हर भरे पौधों से जलती हुयी मोमबत्ती लगा दी ताकि लोगो को स्वर्ग की रोशनी की ओर प्रेरित कर सके | यह प्रतीक था स्वर्ग की रोशनी का , जो पहले क्रिसमस के अवसर पर बेथलहम में दिखाई दी थी |

Christmas Tree Facts in Hindi –  Fact 10 to 15

  • यह परम्परा पहले जर्मनी में थी इसे बाद में ब्रिटेन में लाया गया , जो राजघराने में लोकप्रिय हो गया | जर्मनी में देवदार के पेड़ को गुलाब के फुल , सेब और रंगीन पेपर से सजाया जाता था | मार्टिन लूथर ने पहली बार इन्हें मोमबत्तियो से जलाया था |
  • वर्ष 1834 में प्रिंस अल्बर्ट ने पहली बार राजघराने में क्रिसमस ट्री सजाया , जिसे नोर्वे की महारानी ने प्रिंस को उपहारस्वरूप दिया था | कुछ लोगो का मानना है कि ईसा पूर्व से ही क्रिसमस की परम्परा कायम थी |\
  • मिस्त्र के लोग शरद ऋतू में सबसे छोटे दिन का त्यौहार मनाते थे | इस दिन वे खजूर के पत्ते अपने घरो में लाते थे जो जीवन का मृत्यु पर विजय का प्रतीक था | रोम के निवासी शनि त्यौहार के दिन हरे पेड़ की शाखाओ को हाथ में लेकर उपर उठाते थे और त्यौहार में शामिल होते थे |
  • क्रिसमस ट्री लगाने की शुरुवात ब्रिटेन के संत बोनीफस ने सातवी शताब्दी में की | उन्होंने त्रियक , परमेश्वर पिता , पुत्र और पवित्र आत्मा के प्रतीकात्मकता दर्शाने के लिए त्रिकोणीय लकड़ी को लोगो के सामने रखा | यह लकड़ी फर वृक्ष की थी |सदाबहार फर वृक्ष को ईसा पूर्व भी पवित्र माना जाता था |
  • मॉडर्न क्रिसमस ट्री की उत्पति जर्मनी से 16वी शताब्दी में हुयी | उस समय आदम और हव्वा के नाटक पर फर का पेड़ लगाया जाता था | स्टेज पर पिरामिड भी रखा जाता था | इसके सबसे उपर एक सितारा लगाया जाता था | बाद में 16वी शताब्दी में फर का पेड़ और पिरामिड एक हो गये और इसका नाम हो गया क्रिसमस ट्री |
  • 18वी शताब्दी में क्रिसमस बेहद लोकप्रिय हुआ बाद में इंग्लैंड में लोकप्रिय हुआ | 19वी सदी में क्रिसमस उत्तरी अमेरिका में आया और यही से इस परम्परा नहे पुरी दुनिया में जगह बना ली | आज क्रिसमस ट्री का अच्छा बाजार है |

Christmas Tree Facts in Hindi –  Fact 15 to 20

  • सबसे सजा हुआ क्रिसमस का पेड़ 1510 ईस्वी में Latvia में रिगा शहर में देखा गया था
  • क्रिसमस ट्री का पहला प्रिंटेड reference 1531 में जर्मनी में देखा गया था
  • लगभग 1 लाख लोगो को फुल टाइम या पार्ट टाइम Christmas tree industry से रोजगार मिलता है
    अमेरिका में 15 हजार से ज्यादा क्रिसमस tree farms है जहा 3.5 करोड़ से ज्यादा Christmas trees पौधे है |
  • सबसे लोकप्रिय क्रिसमस ट्री Scotch pine, Douglas fir, noble fir, Fraser fir, balsam fir, Virginia pine and white pine है
  • प्राचीन समय में हरे पेड़ो के अलावा चेरी और hawthorns जैसे वृक्षों को Christmas trees के रूप में प्रयोग किया जाता था
  • अमेरिका में पहला Christmas tree retail lot 1851 में न्युयोर्क ने मार्क कार ने शुरू किया था

Christmas Tree Facts in Hindi –  Fact 20 to 25

  • सजीव क्रिसमस पेड़ अमेरिका में 1850 से व्यापारिक रूप से बेचे जा रहे है
  • क्रिसमस ट्री पर छोटी छोटी मोमबत्तियाँ लगाने का प्रचलन 17वी शताव्दी से शुरू हो गया था
  • 2012 में अमेरिका में लगभग 1 करोड़ कृत्रिम क्रिसमस ट्री खरीदे गये थे |
  • क्रिसमस ट्री पर इलेक्ट्रिक लाइट लगाने का विचार 1882 में थॉमस एडिसन के सहायक एडवर्ड जॉनसन के दिमाग माँ आया था | 1890 में भारी संख्या में क्रिसमस ट्री लाइट्स खरीदे गये थे |
  • आजकल कृत्रिम क्रिसमस पेड़ PVC प्लास्टी के बनते है | PVC ट्री अग्नि रोधी तो है लेकिन अग्नि प्रतिरोधी नही है |
  • 80 प्रतिशत से ज्यादा कृत्रिम artificial trees विश्व में सबसे ज्यादा चीन में बनाये जाते है |
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