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ईसाईयो के त्यौहार क्रिसमस पर निबन्ध | Christmas Essay in Hindi

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ईसाईयो के त्यौहार क्रिसमस पर निबन्ध | Christmas Essay in Hindi
ईसाईयो के त्यौहार क्रिसमस पर निबन्ध | Christmas Essay in Hindi

क्रिसमस (Christmas) ईसाईयों का सबसे बड़ा त्यौहार है | लगभग 2000 वर्ष पूर्व ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह का जन्म 25 दिसम्बर को हुआ था | इसी दिन को ईसाई लोग क्रिसमस (Christmas) कहते है और अत्यंत हर्षोल्लास के साथ ईसामसीह का जन्मदिन मनाते है | ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह का व्यक्तित्व बुद्ध , महावीर स्वामी और महात्मा गांधी तथा संसार के अन्य महान व्यक्तियों की तरह असाधारण है |

महात्मा ईसा का जन्म दिवस क्रिसमस (Christmas) विश्व के प्रत्येक देश में धूमधाम से मनाया जाता है | गिरिजाघरो में इस दिन विशेष समारोह आयोजित किय जाते है | भजन संगीत का आयोजन होता है तथा रात्रि में विशेष समारोह आयोजित किये जाते है | भजन संगीत के साथ रात्री में विशेष प्रकाश किया जाता है | ईसा मसीह का जन्मकाल से ईस्वी सन प्रारम्भ होता है | यह त्यौहार “बड़ा दिन” के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि 25 दिसम्बर से दिन बड़े होने लगते है और राते छोटी होने लगती है |

ईसा मसीह का जन्म फिलिस्तीन के प्राचीन नगर येरुशलम के पास स्थित एक छोटे से गाँव बेथहेलम में रात्रि के समय एक गौशाला में हुआ था | इनके पिता का नाम युसूफ था जो बढ़ई का काम करते थे | इनकी माता का नाम मरियम था | ईसा अपने माता-पिता के आज्ञाकारी पुत्र थे | उनका स्वभाव बहुत नम्र था | ईसा ने भी अपने पिता की तरह बढ़ई का कार्य कर अपना जीवन प्रारम्भ किया लेकिन उनका मन इस कार्य में नही लगा | वे यहूदी समाज का उद्धार करने के लिए पृथ्वी पर आये थे | उनके जन्म के समय रोम में सम्राटो की पूजा ईश्वर की भाँती की जाती थी | अनेक कुरीतियाँ एवं धार्मिक आडम्बरो के साथ यहूदी समाज में निराशा का वातावरण था |

ईसामसीह ने गाँव गाँव जाकर लोगो को उपदेश दिया कि परमात्मा सबको समान दृष्टि से देखता है उन्हें आत्मज्ञान हो गया था और सत्य का मार्ग भी मिल गया था लेकिन यहूदियों को उनके संदेश अच्छे नही लगे | येरुशलम के एक उत्सव में यहूदियों के हिंसात्मक कार्यो का ईसा ने विरोध किया तो यहूदी समाज भी उनके विरोध में हो गया | ईसा मसेह के एक शिष्य “जुडास” ने एक षडयंत्र रचकर धोखे से उन्हें गिरफ्तार करवा दिया | उन्हें सूली पर चढने का दंड दिया गया | सूली पर चढाते समय ईसा ने कहा “हे इश्वर ! इन्हें क्षमा करना क्योंकि ये लोग नही जानते कि वे क्या कर रहे है | ” ईसा मसीह ने येरुशलम को क्ल्वरी नामक पहाडी पर सूली पर चढाया गया | इसी कारण यह ईसाइयो का पवित्र तीर्थ स्थल है |

ईसा मसीह का जीवन आदर्शं जीवन था | वे शत्रुओ को भी क्षमा कर देनें में विश्वास करते थे | वे कहते थे कि प्रेम एवं क्षमा से शत्रु भी मित्र बन जाते है | उन्होंने लोगो की भलाई के लिए कष्ट सहे | वे कहते थे कि “पाप से घृणा करो ,पापी से नही ” | उन्होंने लोगो को सत्य , अहिंसा , दीन-दुखियो की सेवा एवं बलिदान की शिक्षा दी | लोगो ने हमेशा उन्हें गलत समझा और उन्होंने उन्ही की भलाई में अपने प्राण त्याग दिए | उनके मृत्यु के बाद ही लोगो को अपनी गलती का एहसास हुआ और ईसाई धर्म का प्रचार सम्पूर्ण विश्व में हुआ | आज विश्व में अनेक धर्म है परन्तु ईसाई एकमात्र ऐसा धर्म है जिसके धर्मावलम्बियों की संख्या अन्य धर्मो की अपेक्षा सबसे अधिक है | यह संसार के सभी देशो में फैला हुआ है | इसका मुख्य कारण इस धर्म का आडम्बर रहित होना है | इनके उपदेश इसाइयों के पवित्र ग्रन्थ “बाइबिल” में संकलित है |

25 दिसम्बर को ईसा मसीह का जन्मदिवस क्रिसमस (Christmas) के रूप में सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है | क्रिसमस (Christmas) का कार्यक्रम एक दिन पहले से आरम्भ हो जाता है | 24 दिसम्बर को Christmas Eve कहा जाता है | इस दिन सभी ईसाई अपने घरो एवं गिरिजाघरो को दीपकों से सजाते है | क्रिसमस के दिन प्रात:काल गिरिजाघरो में इश प्रार्थना होती है और उनके पुत्र ईसामसीह का गुणगान किया जाता है | पादरी द्वारा ईसामसीह के उपदेशो की व्याख्या होती है | आराधना के कार्यक्रम के पश्चात गरीबो को देने के लिए अनाज-वस्त्र एवं धन का दान एकत्र किया जाता है | फिर लोग एक दुसरे को बधाई देते हुए गले मिलते है | लोग अधिकतर केक-पेस्ट्री आदि खाने की चीजे घर पर ही बनाते है | एक दुसरे को तोहफे देते है | हर घर में एक क्रिसमस ट्री रखा जाता है | इस वृक्ष को सुंदर ढंग से सजाया जाता है |

भिन्न भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न ढंग से क्रिसमस (Christmas) का त्यौहार मनाया जाता है | भारत में केरल राज्य के ईसाई इस त्यौहार को मनाने के लिए एक दिसम्बर से माँस खाना छोड़ देते है और उपवास रखना शुरू कर देते है | केरल निवासी यह त्यौहार 25 दिसम्बर को न मनाकर 27 दिसम्बर को मनाते है | भारत में केरल के ईसाइयो की तरह आर्मेनियन लोग भी 6 जनवरी को क्रिसमस मनाते है | डेनमार्क , नोर्वे एवं स्वीडन में इस त्यौहार को युलडे या युतलाग कहते है | युल एक पेड़ का नाम है | इन देशो में युल की डालो को फूलो से सजाया जाता है | स्विटजरलैंड और जर्मनी में Holy Night कहते है | जर्मनी में लोग पुआल बिछाकर रात भर अस्तबल में सोते है क्योंकि वे ऐसा मानते है कि अस्तबल में ही ईसा मसीह का जन्म हुआ था |

इंग्लैंड में इस अवसर पर बोअर हेड की प्रथा प्रचलित है जिसका अर्थ है “सूअर का सिर ” | मेक्सिको में जिनेवा का रिवाज है | बच्चो की आँखों में पट्टी बांधकर पिनेठा अर्थात मिट्टी के बर्तम में मिठाई भरकर उसे तोडा जाता है | अमेरिका के वाशिंगटन में क्रिसमस ट्री को खूब सजाया जाता है और इस दृश्य को टीवी पर भी दिखाया जाता है | इटली में इस “मदर बलेका” कहते है जबकि अनेक यूरोपीय देशो में इसे कादर क्रिसमस कहते है | इस दिन लोग खिडकियों को खुला रखते है | ब्राजील में इसे “पापा नोएल” कहते है | लाबिया के लोग मानते है कि इस दिन सांता क्लोज उपर से उतरकर सब बच्चो को मिठाई बांटने आते है | स्पेन के लोग इस दिन गिरिजाघरो में न जाकर अपने घरो में ही अच्छा खाना पीना खाते है और आनन्द लेते है | ऑस्ट्रेलिया के लोग इस दिन समुद्र के किनारे जाकर बालू में खेलते है और समुद्र में तैरते है और वहां भोजन बनाकर खाते है और रात बिताते है |

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