Bats Facts in Hindi | चमकादड से जुड़े रोचक तथ्य

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Bats Facts in Hindi
Bats Facts in Hindi

आइये आज हम आपको चमकादड (Bats) से जुड़े रोचक तथ्य बताते है

  1. चमकादड एकमात्र ऐसा स्तनपायी जन्तु है जो उड़ सकता है हिया |
  2. चमकादड (Bats) कीड़े-मकौड़ो और हानिकारक जीवो को खाता है |
  3. चमकादड वायु में , उड़ने वाली ध्वनि तरंगो के सहारे आगे बढ़ता है और अँधेरे में कभी किसी वस्तु आदि से टकराता नही |
  4. चमकादड समूह में रहते है |
  5. चमकादड जमीन पर नही उतरता | जमीन पर यह ठीक से चल नही सकता और न ही आसानी से उड़ सकता है |
  6. चमकादड दिन भर किसी पेड़ की  डाली , पुरानी इमारत या अंधेरी गुफा में उल्टा लटका रहता है |
  7. मेंढक की तरह चमकादड भी शीत निद्रा के लिए जाते है तो फिर गर्मियों में ही  दिखाई  देते है |
  8. शरद भूभागो में रहने वाले चमकादड चिरस्थायी विश्राम करते है | किसी अँधेरे स्थान में उल्टे लटके कई मास तक निराहार सोते रहते है | इस अवधि में इनकी शक्तियाँ इतनी मंद पड़ जाती है कि हाथ में लेकर उछाल देने पर भी चैतन्य नही होते |
  9. ग्रीष्म ऋतू की एकत्रित की गयी चर्बी घुल-घुलकर इसके शरीर को जिन्दा रखती है |
  10. इसकी कई जातियाँ मिलती है | कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाया जाने वाला लाल कत्थई बालो वाला चमकादड सर्दी  के दिन शुरू होते ही दक्षिणइ ओर प्रवास यात्रा  पर चल पड़ता है | कई तो अंधमहासागर पार करते हुए 900 किमी दूर बरमूडा तक पहुच  जाते है | फिर गर्मी आरम्भ होते ही उत्तर दिशा की ओर उड़ जाते है |
  11. यूरोप में चूहे जैसे कान वाले चमकादड  सर्दिया बिताने के लिए अफ्रीका के उत्तरी भाग में चले जाते है | सर्दियों के   शुरू में भूमध्य सागर  के दक्षिणी तट की ओर  बड़े बड़ी झुण्ड  रहते है |
  12. फ्रांस के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में प्रवास यात्रा प्रारम्भ करने वाले चमकादडो को पिरेनीज पर्वत पार करना पड़ता है |    यह  पर्वत काफी उंचा है | इसे पार करने के  लिए कई कठिनाइयो का सामना करना पड़ता है | प्रवास यात्रा के दौरान यह चमकादड स्पेन  के दक्षिणी तट पर  पिरेनीज पर्वत की   गुफाओं रॉक ऑफ़ जिब्राल्टर आदि  जगहों पर रुककर अपनी थकान दूर करते है |  इन विश्राम स्थलों पर रुकते हुए एटलस पर्वतों की गुफाओं में पहुच जाते है जहा ये शीत निद्रा लेते है |
  13. बड़े कान वाले Bats की नाक के उपर झिल्ली की एक परत सी लगी होती है | यह छोटा सा चमकादड भारत में सब जगह मिलता है | पुराने घरो गुफाओं आदि में रहता है | यह अन्य जातियों के चमकादडो का खून पिया करता है | उड़ते हुए चमकादडो के कान के पीछे यह चिपट जाता है और खून चूस जाता है | खून पीने के बाद यह अपने शिकार को खा भी जाता है | इसका रंग हल्का पीला होता है | शरीर की लम्बाई 3-4 इंच होती है | कान विशेष रूप से बड़े होते है |
  14. पीला चमकादड की लम्बाई दुम सहित 5 इंच से कुछ अधिक होती है | यह कर्नाटक ,उत्तरी भारत और बंगाल में मिलता है | रंगदार चमकादड का शरीर लगभग 3.5 इंच होता है | यह भारत में सब जगह मिलता है | इसके शरीर के उपरी भाग का रंग नारंगी-सा होता है | नीचे के भाग का रंग पीला होता है | उड़ने वाली झिल्ली का रंग बिल्कुल काला होता है और उस पर नारंगी रंग की धारियाँ होती है | अपने सुंदर रंगो के कारण उड़ने में यह तितली की तरह लगता है | केले के गोल लिपटे हुए नये पत्तो के अंदर छिपा रहता है |
  15. वेस्टर टीलियो जाति के चमकादडो की लगभग 43 उपजातिया मिलती है | मूंछदार चमकादड इसी जाति का है | इस छोटे से चमकादड का शरीर दुम सहित लगभग 2.5 इंच का  होता है | उपरी होठ के दोनों ओर बाहर निकले हुए मूंछों के समान बाल होते है | यह भारत में बहुत कम मिलता है |
  16. फ़ाइला स्तोमा जाति के चमकादडो की नाक पर खाल अथवा झिल्ली की एक पत्ती सी खडी होती है | इनका मूंह बहुत चौड़ा खुलता है और जीभ पर काँटे होते है | उपरी जबड़े की पुष्ट कीले मूंह के बाहर निकले होते है | इस जाति के जीव सिर्फ मध्य और दक्षिणी अमेरिका में मिलते है | इसका स्वभाव बहुत भीषण होता है |
  17. इस प्रजाति के चमकादडो को कीड़े-मकौड़े से ही संतुष्टि नही होती बल्कि पशुओ का खून पिया करते है | गाय, बैल घोड़ो से ये चिपट जाते है और खाल काटकर खून चूसते है | मौका मिलने पर मनुष्य से भी चिपट जाता है | जंगल में खुले सोते हुए लोगो के पैरो के अंगूठे से चिपक जाते है और खून चूस लेते है | इनके काटने से इतनी कम पीड़ा होती है कि मनुष्य की नीदं भी नही टूटती |
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