• in

    Guwahati Tour Guide in Hindi | गुवाहाटी के प्रमुख पर्यटन स्थल

    Guwahati Tour Guide in Hindi
    Guwahati Tour Guide in Hindi
    Guwahati Tour Guide in Hindi

    गुवाहाटी (Guwahati) का शाब्दिक अर्थ है सुपारी (गुवा) का बाजार (हाटी) और सचमुच गुवाहाटी एवं उसके आसपास सुपारी के वृक्षों की बहुतायत है | गुवाहाटी (Guwahati) के उत्तर में भूटान और अरुणाचल प्रदेश , दक्षिण में मेघालय , मिजोरम , त्रिपुरा और बांग्लादेश , पूर्व में नागालैंड और मणिपुर तथा पश्चिम में पश्चिमी बंगाल है | वर्तमान असम राज्य की राजधानी गुवाहाटी प्राचीनकाल में प्रागज्योतिषपुर के नाम से जाना जाता था | गुवाहाटी (Guwahati) को पूर्वोतर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है क्योंकि मेघालय , मणिपुर , नागालैंड , मिजोरम ,त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश इसी से होकर जाना पड़ता है | गुवाहाटी पूर्व में अनेक राजाओं की राजधानी रह चूका है और यह शहर अपने में एक लम्बा इतिहास समेटे हुए है | कामख्या मन्दिर , वशिष्ट आश्रम आदि के कारण इसकी धार्मिक महत्ता ज्यादा है |

    छोटी छोटी पहाडियों से घिरा गुवाहाटी (Guwahati) काफी फैला हुआ शहर है | सड़के चौड़ी और साफ़-सुथरी है | ब्रह्मपुत्र नदी इस शहर की शोभा को द्विगुणित कर देती है | गुवाहाटी (Guwahati) पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा शहर होने के कारण एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र भी है | पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा चाय बिक्री केंद्र यही है | गुवाहाटी शहर में बंगाली , बिहारी और मारवाड़ी लोग काफी तादात में है | स्थानीय लोग आमतौर पर शांत और सहयोगात्मक प्रवृति वाली है | असम भारत में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है लेकिन गुवाहाटी एवं आसपास चाय की खेती कम ही देखने को मिलती है | हां भीतरी भागो में चाय की सघन खेती अवश्य होती है | गुवाहटी में पर्यटकों के लिए बहुत कुछ है लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों की हिंसक गतिविधियों ने इस क्षेत्र के पर्यटन को काफी नुकसान पहुचाया है |

    गुवाहाटी के दर्शनीय स्थल | Popular Tourist Places of Guwahati

    कामख्या मन्दिर (Kamakhya Temple) –  कामाख्या मन्दिर या शक्तिपीठ गुवाहाटी स्टेशन से लगभग 8 किमी की दूरी पर नीलांचल पर्वत पर अवस्थित है | कामख्या मन्दिर से सटे अन्य कई मन्दिर भी है | कामख्या मन्दिर तक पहुचने के लिए बाजार से या स्टेशन के निकट से राज्य परिवहन निगम की बसे उपलब्ध है |

    वशिष्ट आश्रम (Vashisht Aashram)- गुवाहाटी स्टेशन से लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित इस स्थान पर कभी महर्षि वशिष्ट रहा करते थे | इस स्थान पर पेशेवर फोटोग्राफर भी मौजूद रहते है जो तुंरत फोटो खींच कर देते है लेकिन वे 40 रूपये की दर से पैसे वसूलते है इसलिए बेहतर है कि आप अपने साथ कैमरा लेकर जाय |

    नेहरु पार्क (Nehru Park)- गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित यह एक खुबसुरत पार्क है | यहाँ शाम को बड़ी चहल-पहल रहती है | बच्चो के मनोरंजन हेतु यहाँ ढेर सारी सुविधाए है | किस्म-किस्म के फूलो एवं तरतीब से लगाये गये सजावटी वृक्षों से युक्त इस पार्क में एक म्यूजिकल फाउंटेन भी है | संगीत की धुन पर फव्वारों के बनते-बिगड़ते बहुविध रूप एक अद्भुद शमा बाँध देते है |

    चिड़ियाखाना – चिड़ियाखाना एवं जैविक उद्यान रेलवे स्टेशन से 5 किमी की दूरी पर है | यहाँ नाना किस्म के पशु-पक्षियों का जमावड़ा है | ये रंग-बिरंगे पशु-पक्षी आगन्तुको को सम्मोहित कर देते है | यहाँ सांप की अनेक प्रजातियों का दुर्लभ संग्रह भी देखने लायक है |

    स्टेट म्यूजियम (State Museum)- यह म्यूजियम गुवाहाटी का एक प्रमुख आकर्षण है | यहाँ एतेहासिक महत्व की ढेर सारी चीज बड़े करीन से सजा कर रखी गयी है | म्यूजियम के अवलोकन हेतु कम से कम तीन घंटे का समय चाहिए | म्यूजियम सोमवार को बदं रहता है | यह म्यूजियम रेलवे स्टेशन से कुछ ही दूर है | म्यूजियम के पास ही रवीन्द्र भवन है और एक पार्क भी |

    अन्य प्रमुख आकर्षण | Other Popular Attraction of Guwahati

    उमानंदा – शिव को समर्पित यह एक एतेहासिक मन्दिर ब्रह्मपुत्र नदी के बीच टापू पर बना है |

    टी.वी.टावर – पुरे गुवाहाटी शहर के विहंगम दृश्यावलोकन के लिए यह उत्तम स्थान है |

    विश्वविद्यालय – 1948 में स्थापित गुवाहाटी विश्वविद्यालय देश का एक प्रतिष्टित विश्वविद्यालय है | इसकी प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है | इसके अतिरिक्त गांधी मंडप , गीता मन्दिर , तेल-शोधक कारखाना आदि भी दर्शनीय है |

    कब जाए | Best Time to Visit

    गुवाहाटी की यात्रा किसी भी सीजन में की जा सकती है लेकिन वैसे पर्यटकों को , जो गुवाहाटी को केंद्र मानकर निकटवर्ती पर्यटन स्थलों जैसे शिलोंग , काजीरंगा , मनसा इत्यादि जाने के भी इच्छुक है के लिए सितम्बर से मई के बीच जाना उचित होगा

    कैसे जाए

    वायु मार्ग – इंडियन एयरलाइन्स और वायु दूत की उड़ाने गुवाहाटी को कोलकाता , बाग़डोगरा ,इम्फाल ,अगरतला ,दीमापुर , आइजोल , डिब्रूगढ़ आदि स्थानों से जोडती है |

    रेल मार्ग – गुवाहाटी उत्तर-पूर्व रेलवे का मुख्य केंद्र है जो दिल्ली, लखनऊ , डिब्रूगढ़ तथा अन्य बड़े शहरों से जुड़ा है |

    सडक मार्ग – गुवाहटी देश के प्रमुख नगरो तथा अपने पड़ोसी राज्यों के नगरो से जुड़ा हुआ है | उत्तर-पूर्व के विभिन्न शहरों से यहाँ के लिए सरकारी बसे चलाई जाती है | प्राइवेट बसे , डीलक्स विडियो कोच भी उपलब्ध है |

  • in

    Chennai Travel Guide in Hindi | चेन्नई के प्रमुख पर्यटन स्थल

    Chennai Travel Guide in Hindi
    Chennai Travel Guide in Hindi
    Chennai Travel Guide in Hindi

    तमिलनाडु की राजधानी मद्रास का नाम अब चेन्नई (Chennai) है | 1639 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पने ने चेन्नई (Chennai) नामक एक छोटे से गाँव को अपना प्रथम व्यापारिक केंद्र बनाया था | विविधताओं का यह नगर भारत के 4 महानगरो में एक है | यहाँ आधुनिकता के साथ साथ प्राचीन सभ्यता और संस्कृति सुरक्षित है | चेन्नई कभी पल्लव राजाओं की राजधानी थी | चेन्नई को भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है | चेन्नई (Chennai) जाने के लिए शरद ऋतू सबसे अधिक उपयुक्त है | इस ऋतू में यहाँ का मौसम बहुत ही सुहावना रहता है | दिसम्बर-जनवरी में यहाँ अनेक स्थलों पर सांस्कृतिक कायर्क्रम प्रस्तुत किये जाते है | इन समारोहों में दक्षिण भारत के प्रत्येक क्षेत्र की झलक देखी जा सकती है |

    चेन्नई के प्रमुख दर्शनीय स्थल | Tourist Places of Chennai

    मेरीना बीच – मेरीना बीच संसार के सभी समुद्रतटो में दूसरा सबसे बड़ा और सुरम्य बीच है | इस सागर तट पर लाइट हाउस भी है और अन्ना और एम.जी.रामचन्द्रन की समाधियाँ है | तट के साथ-साथ चौड़ी ,स्वच्छ और सुंदर सड़क है | सडक के दुसरी ओर विश्वविद्यालय ,प्रेसिडेंसी कॉलेज और आइस हाउस है | रात के समय बिजली की जगमगाहट सागर तट को आकर्षक बना देती है | तट पर शंख और सीपियो से बनी सुंदर वस्तुए बिकती है |

    इलियट्स बीच – यह बीच पिकनिक के लिए उपयुक्त स्थान है | बीच के किनारे अष्टलक्ष्मी मन्दिर और बेलाकानी चर्च है |

    वल्लुवरकोट्टम – तमिल के संत कवि तिरुव्ल्ल्लुवर की स्मृति में निर्मित इस भवन में 23 मीटर लम्बे रथ पर स्थापित तिरुवल्लुवर की प्रतिमा दर्शनीय है इस भवन के विशाल हॉल में 4000 लोग बैठ सकते है |

    थियोसोफिकल सोसायटी – इलियट्स बीच के पास ही के बड़े बगीचे में स्थित सोसायटी के अंदर प्रवेश करने पर बड़ी शांति महसूस होती है | दर्शक आत्मकेन्द्रित हो जाते है | यहाँ के प्राचीन पुस्तकालय भी है जो प्रात: 8 से 10 और शाम 2 से 4 बजे तक खुला रहता है | यहाँ 40 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैले एक पुराने पीपल वृक्ष के नीचे प्रवचन होता है |

    कलाक्षेत्र – प्रसिद्ध नृत्यांगना रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा 1936 ई. ने स्थापित इस प्रसिद्ध नृत्य विद्यालय में नृत्य संगीत ,चित्रकला , बुनाई और टेक्सटाइल डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है |

    हार्टी कल्चर उद्यान – जो लोग हरियाली के प्रेमी है | उनके लिए घुमने का यह सर्वोत्तम स्थान है | 22 एकड़ जमीन पर फैले इस उद्यान में तरह तरह के फुल और पेड़-पौधे मन-मोह लेते है |

    गिंडी नेशनल पार्क – इस पार्क में बिल्ली- हिरण ,सियार, बन्दर तथा तरह तरह के पक्षियों को देखा जा सकता है | इसके मुख्य द्वार पर मगरमच्छ बैंक , सर्पघर और मनोरंजन पार्क है | मगरमच्छ बैंक में मगरमच्छ की तरह तरह की प्रजातियों और सर्पघर में तरह तरह के सांप है |

    वंडलूर जू – चेन्नई से 30 किमी दूर 150 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस चिड़ियाघर में अनेको प्रकार के पशुओ को उन्मुख वातावरण में विचरण करते देखा जा सकता है | तरह तरह के पक्षियों के सम्मिलित स्वर से एक कर्णप्रिय संगीत की सृष्टि होती है |

    बिडला प्लेनेटेरीयम – 1988 में निर्मित इस प्लेनेटेरियम में सूर्य चन्द्रमा और तारो की स्थिति ,अन्तरिक्ष यान , कामेट , सूर्यग्रहण के दृश्यों को विस्तार से दिखाया जाता है | प्रात: 10:45 , अपराह्न 01:15 और शाम 03:45 पर ये शो दिखलाए जाते है | प्रवेश शुल्क देना होता है |

    सरकारी संग्रहालय – इस प्राचीन संग्रहालय में पल्लव , चोल और पांड्या राजाओं के समय की कलाकृतिया तथा ताम्बे की वस्तुए देखी जा सकती है | यहाँ एक आर्ट गैलरी भी है जिसमे आधुनिक और समकालीन कला के नमूने , खासकर शिल्पकला की बारीकी देखते ही बनती है | संग्रहालय के अलग-अलग कक्षों में जीव विज्ञान , भू-विज्ञान , पुरातत्व विज्ञान तथा वनस्पति शास्त्र संबंधी वस्तुए देखी जा सकती है |

    कपालेश्वर मन्दिर –  मायलापुर में 13वी शताब्दी में निर्मित चेन्नई के सबसे बड़े मन्दिर के 37 मीटर लम्बे गोपुर में उत्कीर्ण पौराणिक कथाये द्रवित शिल्पकला के उत्कृष्ट नमूने प्रस्तुत करती है | इस मन्दिर में स्वच्छ जल का एक सुंदर सरोवर है जिसके चारो ओर सीढ़िया बनी हुयी है | कहा जाता है कि इस मन्दिर के आस-पास तमिल भाषा के महान ग्रन्थ तिरुक्क्ल के प्रणेता विद्वान संत एवं तमिल कवि तिरुवल्लुवर रहते थे |

    पार्थसारथी मन्दिर – तिरुवल्लीकेनी में 8वी सदी में पल्लव राजाओं द्वारा निर्मित इस मन्दिर में विष्णु के पांचो अवतारों की मुर्तिया है | यहाँ जनवरी में बैकुंठ एकादशी का उत्सव होता है | मुख्य मन्दिरों के अलावा वादापलानी मन्दिर में नवम्बर-दिसम्बर में करथिगई उत्सव होता है |

    मामल्लूपुरम के मन्दिर – पल्लव राजाओ का समुद्री बन्दरगाह मामल्लूपुरम एक एतेहासिक नगर था | इस क्षेत्र के 6 मन्दिर जलमग्न हो गये ,शेष शिव मन्दिर देखने योग्य है | टैगोर गुफा, 5 रथ , दीवारों पर उकेरे गये चित्र और अर्जुन की तपस्या तथा महिषासुर मर्दन के दृश्य एवं प्रतिमाये बहुत ही सुंदर और दर्शनीय है | पत्थरों को तराश कर बनाये गये मन्दिरों में 5 पांड्वो के और एक द्रौपदी के नाम पर है | कृष्ण मंडप के सामने तपस्यारत अर्जुन की प्रतिमा है |

    सेंट मेरी चर्च – एशिया का सबसे प्राचीन एग्लिकन गिरिजाघर है | यहाँ की बड़ी रोशनी वाली मस्जिद दर्शनीय है |

    जलपक्षी विहार और पार्क – चेन्नई से 58 किमी दूर वेदान्तनगर चेन्नई का ही नही , देश का जलपक्षी विहार है | जल में विहार करते पक्षियों का दृश्य बड़ा मनोहारी होता है जिसे देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है |

    चेन्नई से 35 किमी दूर मातवरम के पास किष्किन्धा

  • in

    Vrindavan Tour Guide in Hindi | वृन्दावन के प्रमुख पर्यटन स्थल

    Vrindavan Tour Guide in Hindi
    Vrindavan Tour Guide in Hindi
    Vrindavan Tour Guide in Hindi

    वृन्दावन (Vrindavan) ब्रजमंडल के 84 कोस के तीर्थो में सर्वोपरि है तभी तो कहा गया है “वृन्दावन सब धामों का धाम, जहां मिलेंगे राधे-श्याम” | यह मथुरा से 15 किमी दूर यमुना तट बसा ऐसा पावन क्षेत्र है जहां की पवित्र माटी भक्तजनों के हृदय को पुलकित कर देती है | वृन्दावन का नाम वृन्दावन क्यों पड़ा ? वृन्दा तुलसी को कहते है | वृन्दावन (Vrindavan) में तुलसी के पौधे अधिक होने के कारण इसे वृन्दावन कहा जाता है | विद्वानों का मत है कि वृंदा कृष्ण प्रिया राधा जी के 16 नामो में से एक है |

    वृन्दावन के प्रमुख पर्यटन स्थल | Tourist Places of Vrindavan

    बांकेबिहारी का मन्दिर

    जिस प्रकार मथुरा का सर्वाधिक प्रसिद्ध और दर्शनीय स्थल श्री कृष्ण जन्म भूमि है ठीक उसी प्रकार वृन्दावन का सर्वाधिक पवित्र और दर्शनीय मन्दिर बाँकेबिहारी का मन्दिर | बादामी रंग के पत्थरों पर खुबसुरत नक्काशी एवं रजत स्तम्भों वाले इस मन्दिर का निर्माण संगीत सम्राट तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास ने किया था | मन्दिर में बांकेबिहारी जी के दर्शन का समय सुबह 9 बजे से 12 एवं सांयकाल 6 से 9 बजे तक है | पुष्पों एवं बैंडबाजो से नित्य बांकेबिहारी जी की आरती की जाती है | बांकेबिहारी के दर्शन पर्दे में होते ही | यह परम्परा इसलिए है क्योंकि एक बार भक्त के प्रेमाभाव से मूर्ति भक्त के पीछे चल दी थी |

    निधिवन

    वृन्दावन प्राचीन कला में एक वन क्षेत्र था तथा निधिवन वृक्षों का वन है जिसके वृक्ष सदा हरे रहते है जहां तानसेन के गुरु वैष्णव संत स्वामी हरिदास ने राधा-कृष्ण युगल को अपने भजन से साक्षात प्रकट कर लिया था | इस वन में राधा-कृष्ण विहार करते थे | वन का प्रत्यक्ष जनश्रुति चमत्कार यह है कि यहाँ एक मन्दिर कक्ष में राधा-कृष्ण की शैय्या बिछा दी जाती है तथा श्री राधा जी का शृंगार का सामान रख दिया जाता है | रात्रि को कक्ष बंद कर दिया जाता है | सुबह जब इस कक्ष को खोला जाता है रो शैय्या अस्त-व्यस्त मिलती है और शृंगार का सामान प्रयोग में लाया होता है | यहाँ स्वामी जी की समाधि भी है |

    श्रीशाह का मन्दिर

    निधिवन के नजदीक ही स्थापित है 150 वर्ष प्राचीन श्रीशाह विहारी जी का मन्दिर | टेढ़े-मेढ़े खम्भों वाले इस मन्दिर का निर्माण शाह विहारी ने करवाया था | इस मन्दिर में संगमरमर एवं रंगीन पत्थर की वास्तुकला अद्वितीय है | लगभग 27 टेढ़े-मेढ़े खम्भों वाला यह मन्दिर कला का अद्भुद उदाहरण है | परिसर में तीन कलात्मक फव्वारे है | मन्दिर के फर्श पर बने पांवो के स्थायी निशान एवं उन पर बनी रंगीन कलाकृतिया बेहद सुंदर है | मन्दिर शिखर पर बनी मूर्तियों एवं दीवारों पर बनी संगमरमर की तस्वीरे अतुलनीय है |

    श्री राधा मोहन मन्दिर

    इस मन्दिर को अमृतसर के रामदास सौदागर ने सन 1523 में बनवाया था | यह मन्दिर दर्शनीय है ही , यहाँ बैठकर अपूर्व शान्ति का अनुभव होता है |

    काली दह

    यह वह क्षेत्र है जहां यमुना नदी में कालिया नाग रहता था तथा भगवान कृष्ण ने उसका मान-मर्दन करके उसके फनो पर नृत्य किया था |

    सेवा-कुंज

    सेवा कुंज का दूसरा नाम निकुंजवन है | सेवा कुंज के प्रांगण में एक तालाब एवं कदम्ब के वृक्ष है | ऐसा माना जाता है कि यहाँ नित्य राधा-कृष्ण रास रचाते है | आज भी इस वन में रात्रि को कोई प्राणी नही ठहरता है |

    श्रीरंगनाथ मन्दिर

    सोने के खम्भों वाले इस मन्दिर का निर्माण 1825 में सेठ गोविन्ददास एवं राधाकृष्ण ने करवाया था | दक्षिणी एवं उत्तरी वास्तु शैली में बने इस मन्दिर का मुख्य प्रवेश द्वार राजस्थानी शैली एवं मुख्य भवन दक्षिणी शैली में बना है | सात परकोटो वाला यह मन्दिर 1 किमी वनक्षेत्र में फैला हुआ है तथा मन्दिर के प्रांगण में 500 किलोग्राम वाला 60 फीट ऊँचा सोने का गरुड स्तम्भ है | मन्दिर के प्रवेश द्वार पर 19 सोने के कलश स्थापित है | अद्वितीय वास्तुकला से मंडित इस मन्दिर का मुख्य आकर्षण श्री रंगनाथ जी है | चाँदी एवं सोने के सिंहासन , पालकी एवं चन्दन का विशाल रथ विशेष रूप से दर्शनीय है | जिस कुंड से भगवान कृष्ण ने गजेन्द्र हाथी को मगरमच्छ के फंदे से छुड्वाया था वह इसी मन्दिर के प्रांगण में है |

    अन्य दर्शनीय स्थल

    उपरोक्त मुख्य दर्शनीय स्थलों के अतिरिक्त वृन्दावन में अहिल्या टीला , अद्वैतवट ,शृंगारवट , चीरघाट , वेणु कूप , गोविन्द देव मन्दिर , कांच का मन्दिर , गोपेश्वर मन्दिर , सवामन शालिग्राम , अंग्रेजो का मन्दिर और पागल बाबा का मन्दिर विशेष दर्शनीय है |

    कैसे पहुचे

    दिल्ली से लगभग 170 किमी दूर बसे वृन्दावन धाम हेतु रेल और बस सुविधाए सहज ही उपलब्ध है | मथुरा से वृन्दावन तक पहुचने हेतु स्थानीय बसे ,ऑटो रिक्शा उपलब्ध है | यात्रियों के प्रवास हेतु दर्जनों धर्मशालाए , होटल और आश्रम आसानी से मिल जाते है | यहाँ भोजन की भी व्यवस्था है |

  • in

    धर्मशाला के प्रमुख पर्यटन स्थल | Dharamshala Tour Guide in Hindi

    Dharamshala Tour Guide in Hindi
    Dharamshala Tour Guide in Hindi
    Dharamshala Tour Guide in Hindi

    धर्मशाळा (Dharamshala) हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी का प्रमुख पर्यटन स्थल है | धर्मशाला (Dharamshala) में एक ओर जहा धौलाधार पर्वत श्रुंखला है वही दुसरी ओर उपजाऊ घाटी एवं शिवालिक पर्वतमाला है | अंग्रेजो ने धर्मशाला (Dharamshala) को एक छोटे पर्यटन स्थल के रूप में बसाया था | दलाईलामा द्वारा यहाँ अपना स्थायी निवास निर्मित करने और तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय यहाँ स्थापित होने के कारण यह पर्यटन स्थल विश्व पर्यटन मानचित्र पर उभर कर सामने आया है | धर्मशाला (Dharamshala) शहर को दो भागो में बांटा जा सकता है | एक निचला धर्मशाला जहां कोतवाली बाजार स्थित है | दूसरा उपरी धर्मशाळा जिसे मेक्लोड़गंज के नाम से जाना जाता है जो 1982 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है |

    धर्मशाला के दर्शनीय स्थल | Popular Tourist Places in Dharamshala

    मैक्लोड़गंज – यह स्थान तिब्बती बस्तियों के कारण छोटा ल्हासा के नाम से भी जाना जाता है | यहाँ छोटी छोटी दुकाने है जहां तिब्बती हस्तकला की वस्तुए बेची जाती है | इस बाजार में कई रेस्तरां भी है जहां परम्परागत तिब्बती व्यंजन खाने को मिलते है | मैक्लोड़गंज में एक वृहद प्रार्थना चक्र है | यहाँ स्थित मठ में एक बौद्ध प्रतिमा भी दर्शनीय है | मैक्लोड़गंज में तिब्बत के धर्मगुरु दलाईलामा का निवास तथा निर्वासित सरकार का मुख्यालय भी है | ट्रेकिंग में रूचि रखने वालो के लिए यहाँ गाइड भी उपलब्ध है |

    सेंट जॉन चर्च – धर्मशाळा में मैक्लोड़गंज मार्ग के बीच स्थित यह चर्च एक निर्जन एवं घने जंगल में निर्मित किया गया है | चर्च पत्थरों से निर्मित है तथा इसे लार्ड एल्गिन की याद में निर्मित किया गया है |

    त्रियुंड – 2975 मीटर की उंचाई पर स्थित यह स्थान एक आकर्षक पिकनिक स्थल है | आप यहाँ आकाश छुते धुँलाधार पर्वत का दीदार कर सकते है | यह स्थान धौलाधार पर्वतारोहण का आधार भी है | यह धर्मशाला से 10 किमी दूर है |

    कुशल पत्थरी – कोतवाली बाजार से 3 किमी की दूरी पर स्थित यह देवी मन्दिर स्थानीय पत्थर से निर्मित है |

    डल झील – धर्मशाला से 11 किमी दूर स्थित यह झील एक सुंदर पिकनिक स्थल है | फर के पेड़ो से घिरी यह झील प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करती है | प्रतिवर्ष सितम्बर माह में यहाँ एक मेले का आयोजन भी किया जाता है |

    धर्मकोट – 2100 मीटर की उंचाई पर स्तिथ यह जगह धर्मशाला से 11 किमी दूर स्थित है | यहाँ से धौलाधार पर्वत माला का दृश्य देखते ही बनता है |

    भग्सूनाथ – डल झील के समीप इस जल प्रपात तक आप पैदल भी पहुच सकते है यहाँ भग्सूनाथ का मन्दिर भी है | धर्मशाला से यह स्थान 11 किमी की दूरी पर है |

    मछरियाल एवं तत्वानी – धर्मशाळा से 25 किमी दूर स्थित मछरियाल अपने झरने तथा तत्वानी अपने गर्म पानी के चश्मे के लिए प्रसिद्ध है |

    करेरी – 1983 मीटर की उंचाई पर स्थित यह एक लुभावना पिकनिक स्थल है | यहाँ से 13 किमी दूरी पर स्थित 3250 मीटर उंचाई पर स्थित करेरी झील तथा इसके आसपास फ़ैली मखमली चरागाहे एक अनूठा प्राकृतिक एहसास प्रदान करती है | यह स्थान धर्मशाळा से 22 किमी दूर है |

    चामुंडा देवी मन्दिर – हिन्दुओ के प्रमुख धर्मस्थल अपने देवी मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है | धर्मशाळा से 15 किमी दूर इस जगह आप प्रकृति का आनन्द उठा सकते है |

    कैसे जाये

    समीपवर्ती नैरोगेज रेलवे स्टेशन कांगड़ा है जो धर्मशाला से 18 किमी की दूरी पर है | समीपवर्ती रेलवे जंक्शन पठानकोट है जो धर्मशाला से 90 किमी दूर है | पठानकोट देश के प्रमुख रेलमार्गों से जुड़ा है | धर्मशाळा भारत के प्रमुख सडक मार्गो से जुड़ा है | यहाँ के लिए चंडीगढ़ ,दिल्ली ,शिमला , मनाली ,पठानकोट से सीधी बस सेवाए उपलब्ध है |

    कब जाए

    अप्रैल से जून एवं सितम्बर से अक्टूबर के बीच जाना उत्तम रहता है | स्मरण रहे , चेरापूंजी के बाद भारत में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र धर्मशाला ही है इसलिए गर्मियों में अपने साथ हल्के उनी , सर्दियों में भारी उनी कपड़ो के अलावा छाता अवश्य ले जाए |

  • in

    हरियाणा के प्रमुख पर्यटन स्थल | Haryana Tour Guide in Hindi

    Haryana Tour Guide in Hindi

     

    Haryana Tour Guide in Hindi
    Haryana Tour Guide in Hindi

    हरियाणा भारत की एक पवित्र भूमि है जहां प्रसिद्ध हिन्दू ग्रन्थ महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी इसी कारण इसका धार्मिक महत्व जादा है | इसके अलावा हरियाणा को Green Land of India भी कहा जाता है | आइये अब आपको हरियाणा के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तार से बताते है |

    कुरुक्षेत्र

    इस पवित्र स्थान में महर्षि मनु ने मनुस्मृति की रचना की थी तथा ऋषियों एवं बुद्धिजीवियों ने ऋग्वेद एवं सामवेद जैसे धार्मिक ग्रंथो में संबध स्थापित किया | कौरवो एवं पांड्वो के पूर्व राजा कुरु ने यहाँ रहने वाले लोगो के लिए महान बलिदान दिया था | इसी स्थान पर महाभारत का युद्ध हुआ एवं अर्जुन द्वारा बाण से प्रगट की गयी बाणगंगा एवं वर्तमान की भुगत सरस्वती भी इसी क्षेत्र में बहती है | तकरीबन 48 कोस में फैले हुए क्षेत्र को कुरुक्षेत्र कहा जाता है | यहाँ महाभारत कालीन 360 तीर्थ स्थलों के दर्शन किय जा सकते है | इनमे प्रमुख दर्शनीय स्थल हो पेहोवा , कलयात , थानेश्वर , ज्योतिसर एवं कुरुक्षेत्र आदि |

    कुरुक्षेत्र के प्रमुख दर्शनीय स्थल

    ब्रह्मसरोवर – समस्त सरोवरों में ब्रह्मसरोवर का जल सबसे पवित्र माना जाता है | इस सरोवर का क्षेत्रफल करीबन ३६००x५५०० फीट है | इसे सभ्यता का गढ़ माना जाता है | सूर्यग्रहण के अवसर पर सरोवर में स्नान करने से समस्त पाप धुल जाते है | प्रतिवर्ष नवम्बर एवं दिसम्बर माह में गांधी जयंती  समारोह के दिन दीप दान एवं आरती एक आकर्षक अवसर है | सरोवर में प्रवासी पक्षी भे दूर दूर से यहाँ आते है | ब्रह्मसरोवर के ही नजदीक बिरला गीत मन्दिर एवं बाबा नाथ की हवेली देखने योग्य है |

    सन्नहित सरोवर – यह पवित्र ताल तकरीबन 1500×450 फीट क्षेत्र में फैला है | यह विश्वास किया जाता है कि यह सरोवर सात पवित्र सरस्वतीयो का संगम स्थल है | कहते है कि अमावस्या या चन्द्रग्रहण की रात्रि को सरोवर का जल इकट्ठा करे तो समस्त पाप धुल जाते है | ताल में स्नान करने से अश्मवेध यज्ञ करने के समान पूण्य प्राप्त होता है | यहाँ का कुम्भ मेला भी बहुत प्रसिद्ध है |

    कृष्ण संग्रहालय – भगवान कृष्ण के जीवन की विभिन्न झाँकियो को इस संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है |

    ज्योतिसर – कुरुक्षेत्र का यह पवित्र क्षेत्र भगवतगीता का जन्म स्थल माना जाता है | यहाँ खुदाई करने पर रेतीले पत्थरों की बने हुए कई प्राचीनतम प्रतिमाये मिली है | प्राचीनकाल में इस कस्बे का नाम राजा पृथु के नाम से पृथुदक था | यहाँ अभी भी घाट एवं मन्दिरों का निर्माण किया जा रहा है |

    फल्गु – स्थानीय बोली में इस कस्बे का नाम फुर्ल है | यह कुरुक्षेत्र से 53 किमी की दूरी पर है | पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान ब्रह्मा की प्रार्थन पर भगवान विष्णु स्वयम यहाँ प्रकट हुए थे | स्थानीय लोगो के अनुसार कुंड में दुबकी लेने से धन एवं समृधि प्राप्त होती है | कुंड के घाटो को लाल पत्थर से सुसज्जित किया गया है |

    कुरुक्षेत्र का गुरुद्वारा – अपनी कुरुक्षेत्र यात्रा के दौरान गुरु नानक देव ने यहाँ विश्राम किया था | यह गुरुद्वारा सिद्ध्व्ती के नाम से प्रसिद्ध है | सन्निहित सरोवर के निकट स्थित गुरुद्वारा छठवे गुरु हरगोविंद सिंह जी को समर्पित है |

    शेख चिल्ली का मकबरा – थानेश्वर के उत्तरी दिशा में एवं शेरशाह सुरी द्वारा निर्मित सराय के नजदीक ही शेख चिल्ली का संगमरमर निर्मित मकबरा है | शेखचिल्ली ईरान के सूफी संत थे | वे 16वी शताब्दी में हजरत क़ुतुब जलालुदीन से मुलाक़ात करने के लिए थानेश्वर आये थे परन्तु उनका यही देहांत हो गया | शाहजहाँ उनका इतना आदर करते थे कि उन्होंने हजरत जलालुद्दीन के लिए निर्मित मकबरे में शेखचिल्ली को दफनाने के आदेश दिया |

    बाणगंगा की गाथाये – बाणगंगा के गाथाये महाभारत युद्ध के ग्रन्थ से जुडी है | इस स्थल पत भीष्म पितामह की प्यास बुझाने के लिए अर्जुन ने अपने बाण से पवित्र गंगा को प्रवाहित किया था | यह स्थल कुरुक्षेत्र से 3 मील की दूरी पर स्थित है तथा भीष्म कुंड के नाम से प्रसिद्ध है | कुरुक्षेत्र से ठीक 5 किमी दूर कुरुक्षेत्र किरमिच मार्ग पर एक अन्य स्थल बाणगंगा है यहाँ 78×110 फीट आकार के इस कुंड में हनुमान मन्दिर एवं महाभारत के प्रमुख पात्रो की मुर्तिया प्रतिष्टित है | वैशाखी के दिन यहाँ एक मेला भी लगता है |

    यातायात सुविधाय – कुरुक्षेत्र सडक ,रेल एवं वायु परिवहन द्वारा भली भाँती जुडा हुआ है | समस्त यात्रा रूट पर बहुत सुविधाए होने के फलस्वरूप यात्रा बड़ी आरामदायक होती है | यहाँ का नजदीकी हवाई अड्डा दिल्ली एवं चंडीगढ़ है जो रेल एवं सडक द्वारा कुरुक्षेत्र से भली भाँती जुड़े हुए है |

    पिंजौर

    पिंजौर एक प्राचीन शहर है | यह चंडीगढ़ से मात्र 22 किमी की दूरी पर चंडीगढ़ शिमला राजमार्ग पर बसा हुआ खुबसुरत कस्बा है | चंडीगढ़ से स्थानीय बसे एवं टैक्सीयाँ नियमित पिंजौर जाती है | कहा जाता है पिंजौर का निर्माण पंजाब के तत्कालीन गर्वनर फिदाई खान ने 17वी शताब्दी में कराया था | पिंजौर नगर में प्राचीन मुगल साम्राज्य सहित पटियाला शाही खानदान की कई यादे बिखरी हुयी है | वर्तमान में यह एक अच्छा पर्यटन स्थल बन चूका है | चंडीगढ़ घुमने आने वाले पिंजौर की यात्रा जरुर करते है | पिंजौर उद्यान पर्यटकों का मन मोह लेता है | यहाँ कई छोटे बड़े सुंदर बाग़ है | पिंजौर में ठहरने के लिए छोटे बड़े होटलों सहित हरियाणा राज्य पर्यटन विभाग के होटल भी है |

    दर्शनीय स्थल -“यादवेन्द्र उद्यान” पिंजौर का मुख्य आकर्षण है | इस उद्यान का निर्माण औरंगजेब ने कराया था | कहा जाता है कि मातहत फिदाई खान को यहाँ खुबसुरत झरने इतने भा गये थे कि उसने एक अमोद स्थल बनाने की ठान ली थी | इसका निर्माण कार्य पूर्ण होने पर नवाब अपनी बेगम सहित यहाँ रहने आ गये थे | यादवेन्द्र गार्डन को कभी मुगल गार्डन भी कहा जाता था | यह मुगल वास्तुशिल्प का एक अनूठा नमूना है | यहाँ की हरी भरी मखमली घास एवं नाना प्रकार के रंग-बिरंगे फुल पर्यटकों को बरबस ही आकर्षित करने लगते है | बाग़ के बीचो-बीच बनाई गयी नहर भी पर्यटकों का मन मोह लेती है | इस गार्डन में बंने शीशमहल , रंग महल , जल महल यानि तीनो खुबसुरत महल यहाँ के मुख्य आकर्षण है | पर्यटक इनकी सुन्दरता निहारते ही ढ़ह जाते है |

    शीश महल को फिदाई खान का दरबार कहा जाता है जबकि उसी के सामने बना रंगमहल उसकी बेगमो के मनोरंजन स्थल के रूप में जाना जाता है | बेगमो के स्नान के लिए बनाया गया जल महल भी बहुत ही खुबसुरत है | यह रंगमहल से लगा हुआ है | इसमें प्राकृतिक जल से भरे लम्बे-चौड़े तलाब एवं झरने है | बाहर से प्राकृतिक नजारों का आनन्द लेने के लिए रंगमहल में झरोखे भी बने हुए है | पिंजौर का फ्लाइंग क्लब वायुयान एवं ग्लाइडर उड़ान का प्रशिक्षण देता है | देश-विदेश से आये लोग यहाँ प्रशिक्षण प्राप्त करते है |

    अन्य पर्यटन स्थल – पिंजौर एक खुबसुरत कस्बा है | यहाँ का मिनी जू देखने लायक है | यहाँ के सुंदर रेस्तौरेंट , ओपन एयर थिएटर , जापानी बाग़ कैफ़े ,ऊंट की सवारी दर्शनीय है | पर्यटक यहाँ के मनोरम दृश्यों को देखकर मन्त्रमुग्ध हो उठते है |

    लाडवा

    उत्सवो तथा मेलो का नगर लाडवा कुरुक्षेत्र से 18 किमी पूर्व में पीपली-यमुना नगर रोड पर स्तिथ है | यह एक प्राचीन नगर है | यहाँ लाडली वाला सुंदर देवी का लगभग 500 साल पुराना प्राचीन मन्दिर है | सम्भवत: लाडली देवी के नाम से ही नगर का नाम लाडवा पड़ा |

    लाडवा के दर्शनीय स्थल

    बाला सुन्दरी का मन्दिर – यह प्राचीन मन्दिर लाडवा नगर के पूर्व की ओर यमुना नगर मार्ग पर स्थित है | यहाँ हर साल उतरते चैत्र की चौदस को बहुत बड़ा मेला लगता है जो एक सप्ताह तक चलता है | इस मेले में लाडवा नगर तथ आस-पास के गाँवों के लोग लाखो की संख्या में देवी को चढावा चढ़ाने आते है |

    सोहन-तालाब/एकादशी रूद्र तीर्थ – यह तीर्थ सोहन तालाब के नाम से प्रसिद्ध है | यह लगभग 5000 साल पुराना तीर्थ है तथा लाडवा के पश्चिम में पीपली-कुरुक्षेत्र रोड पर स्थित है | इस पवित्र तीर्थ के निर्माण में लाडवा के प्रसिद्ध तावा खानदान की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है | प्रतिदिन इस तीर्थ में हजारो लोग आते है और स्नान करते है | सोहन तालाब के दक्षिणी किनारे पर एक बहुत विशाल एवं भव्य मन्दिर का निर्माण लाला मंगल सेन ने करवाया था | इस मन्दिर में शिवलिंग तथा अन्य देवी देवताओं की मुर्तिया स्थापित है | यह तीर्थ एक रमणीय स्थल है जो पर्यटकों का मन मोह लेता है |

    एकादश रूद्र तीर्थ में शिवरात्रि के पर्व पर 3 दिन तक मेला लगता है | इस मेले में भगवान शिव शंकर जी के कीर्तन भजन एवं प्रवचन होते है | इस मेले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि फूलो की किश्तियाँ बनाकर तथा उनमे दीपक जलाकर रात के समय सोहने तालाब में प्रवाहित की जाती है जोकि बहुत ही सुंदर दृश्य प्रस्तुत करती है | इस सुंदर दृश्य का अवलोकन करने के लिए बहुत दूर दूर से लोग यहाँ आते है |

    रामकुंडी तीर्थ तथा आर्य समाज मन्दिर – एकादश रूद्र तीर्थ बाला सुन्दरी देवी मन्दिर के बीच रामकुंडी नाम का तीर्थ है जो कि 500 साल पुराना , पक्की सीढियों वाला बहुत बड़ा तालाब है | तालाब के पश्चिमी किनारे पर बहुत प्राचीन शिव मन्दिर है | यहाँ प्रत्येक वर्ष कई धार्मिक मेलो का आयोजन किया जाता है |

    आठवाडिया मन्दिर – यह भगवान राधाकृष्ण का प्रसिद्ध मन्दिर है | इसका निर्माण आठवादिया खानदान ने करवाया था इसलिए इसे आठवादिया मन्दिर कहा जाता है | इस मन्दिर में भगवान शिव की बेहद प्राचीन मूर्ति है तथ हाल ही में हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति स्थापित की गयी है |

  • in

    लेह के प्रमुख पर्यटन स्थल | Leh Tour Guide in Hindi

    Leh Tour Guide in Hindi
    Leh Tour Guide in Hindi
    Leh Tour Guide in Hindi

    सिन्धु नदी द्वारा बनाये गये पठार के शिखर पर समुद्र तल से 3368 मीटर की ऊँचाई पर स्थित लेह एक छोटा नगर है | 14वी शताब्दी में रव्री-त्सुग्ल्दे द्वारा स्थापित लेह शुरू में स्ले या ग्ले कहा जाता था | 19वी शताब्दी में मोरोवियन मिशनरी के नाम पर इसका नाम लेह रखा गया | यह लद्दाख क्षेत्र का प्रमुख नगर है | इसकी स्थापना से ही यह मान्यता प्रचलित थी कि राजगद्दी का भावी उत्तराधिकारी लेह में जन्म लेगा | फलस्वरूप लद्दाख के राजाओ ने इस नगर में अनेक महलो, बौद्ध मठो और धार्मिक भवनों का निर्माण अपने वर्षो के शासनकाल के दौरान करवाया | लेह में इस्लाम का आगमन यारकंद और कश्मीर के व्यापारियों द्वारा हुआ |

    लेह के दर्शनीय स्थल

    नौ-मंजिला महल

    लेह मे राजा सिंगे नाम ग्याल का नौ मंजिला महल तिब्बत के पारम्परिक वास्तुशिल्प का शानदार नमूना है | विशाल पत्थरों की सीधी ढलान वाली ऊँची पहाडी पर एक एक करके चढाया गया और निपुण कारीगरों द्वारा उन्हें काट-काटकर नौ-मंजिला भवन बनाया गया जिसे देखने पर पहाडी की चट्टाने भी इसी का हिस्सा प्रतीत होती है | भगवान बुद्ध के जीवन का उल्लेख करती हुयी चित्रकारी से सजी दीवारे इस महल के तंग घुमावदार गलियारे उन कमरों से जुड़े हुए है जिनमे शताब्दी पुराने ढंका चित्रों ,स्वर्ण मूर्तियों और तलवारों के संग्रहालय है | इस महल में 12 मन्दिर और दो बौद्ध शाही मठ है |

    महल के पूर्व में उसके प्रवेश द्वार पर लकड़ी की बनी हुयी शेर की एक प्रतिमा है | महल के आरम्भिक दिनों में रस्सी से बंधा हुआ एक शेर पिंजरे में रखा गया था जो पिंजरे में प्रवेश करने और बाहर निकालने के दौरान गर्जना किया करता था | पहाडी पर बनी सीढिया एक विशाल प्रांगण की ओर जाती है जिसे ठेकचेन कहा जाता है जहां शाही नृत्यों का आयोजन किया जाता है | डोगरा आक्रमण के दौरान दरबार हॉल और लोगो के इतिहास ,धर्म और संस्कृति का उल्लेख करते हुए चित्र नष्ट हो गये थे |

    लद्दाख का यह अद्वितीय महल जो कि जोरावर की क्रूरतापूर्ण बमबारी से भी बच गया था अब केवल म्यूजियम या प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गया है जिसका स्वामित्व इसमें निवास करने वाली लद्दाख से लोकसभा के लिए चुनी गयी रानी पार्वती देवी के पास है | महल के उपर की ओर उस पहाडी के अन्य चोटी पर लेह मोनेस्ट्री और एक पुराने किले के बुर्ज है |

    सेमो गोम्पा

    महल के पीछे एक शाही मोनेस्ट्री है जिसका निर्माण राजा द्वारा करवाया गया था | यह एक देवता के रूप में उत्कृष्ट कृति है | यह बैठी अवस्था में दो मंजिला ऊँची चम्बा की पवित्र प्रतिमा है | इस प्रतिमा में शरीर के अंगो की बनावट , उनमे परस्पर अनुपात और संतुलन , चेहरे की सुन्दरता तथा विशेषतया आँखों की परमानन्द से पूर्ण अभिव्यक्ति ,देखने वाले व्यक्ति को स्तब्ध और अभिभूत कर देती है |

    लेह मोनेस्ट्री

    महल वाली पहाडी की एक अन्य चोटी पर स्थित लेह मोनेस्ट्री न केवल महल पर ,बल्कि शहर पर भी प्रभावी है | अनेक गलियारों से युक्त इस विशाल गोम्पा में अमूल्य पांडूलिपियों एवं चित्रावलियो की कुंडलिया है | इसमें प्राचीन समय के महान चित्रकारों द्वारा बनाये गये बादलो ,नदियों ,जंगलो ,आकाशीय कृतियों और साक्य-मुनि बुद्ध के जीवन वृतांत के चित्र है | इसमें लामा विद्यार्थियों के लिए स्कूल है | यह विशाल मोनेस्ट्री 281 वर्ग मीटर के क्षेत्र में निर्मित है |

    लेह मस्जिद

    सोवांग नामग्याल के भाई जाम्यांग नामग्याल ने 1555 ई. ,इ स्कार्दू की मुस्लिम राजकुमारी अवग्याल खातून से , उसके पिता शेर अली से युद्ध में हारने के बाद विवाह किया | यह महान रानी प्रसिद्ध एवं पराक्रमी सिंगे नामग्याल की माता बनी जिसने बौद्ध जगत के सर्वाधिक प्रसिद्ध गोम्पाओ का निर्माण करवाया | इस मस्जिद का निर्माण उसने अपनी माता की याद में 1594 ई. ,में करवाया जो कि तुर्की एवं इरानी वास्तुशिल्प का एक सूक्ष्म एवं दक्षतापूर्ण कार्य है तथा मुख्य बाजार में स्थित है | इसके अलावा लेह में देखने योग्य मुख्य स्थान है जो खांग का आधुनिक सर्वदेशीय मन्दिर , पूर्व ताम्रकार का भवन -जान्स्ती , पूर्व मोरोवियन चर्च जोकि लद्दाख पारिस्थितिक केंद्र बन चूका है |

    गोम्पाओ में मनाये जाने वाले उत्सवो में नृत्य नाटको का आयोजन किया जाता है जिसमे लामा चमकदार रंगीन पोशाक में सजे हुए भयानक मुखौटे पहनकर स्वांग रचते है तथा धर्म के विभिन्न पक्षों का प्रदर्शन करते है जैसे आत्मा का उत्थान या इसका शुद्धिकरण उया बुराई पर अच्छाई की जीत | ईस अवसर पर लोगो को अपने नये मित्र बनाने और पुराने मित्रो से मिलने-जुलने का अवसर प्राप्त होता है |

    सबसे बड़ा और प्रसिद्ध बौद्ध मठ उत्सव है हेमिस , जिसमे सैलानी और स्थानीय लोग इकट्ठे होते है | यह जून के अंतिम सप्ताह के पहले पखवाड़े तक चलता है और पद्मासम्भव को समर्पित किया जाता है | हर 12 वर्ष बाद गोम्पा की सबसे बड़ी निधि एवं विशाल थंगा जोकि कपड़े पर चित्रित या कढाईदार एक धार्मिक आकृति होती है का धार्मिक अनुष्टान के साथ प्रदर्शन किया जाता है |

    कहा ठहरे ?

    लेह में ए.बी.सी. इकॉनमी केटेगरी के आधार पर होटल उपलब्ध है और उच्च या मध्यम आर्थिक आधार पर गेस्ट हाउस भी उपलब्ध है | श्रीनगर लेह पर सरकारी पर्यटक बंगले है |

    कैसे जाए ?

    हवाई मार्ग द्वारा लेह के लिए दिल्ली-चंडीगढ़ , जम्मू और श्रीनगर से इंडियन एयरलाइन्स की नियमित सेवाए उपलब्ध है | सडक मार्ग द्वारा लेह के लिए दो सडक मार्ग है |एक मार्ग श्रीनगर से लेह होकर जाता है जो कि लगभग 434 किमी लम्बा है तथा मार्ग में पूर्ण रात्रि के लिए यात्रा के दौरान रुकना पड़ता है | दूसरा रास्ता मनाली से लेह है जिसकी लम्बाई 475 किमी है यह बीस घंटे की यात्रा है तथा इसमें भी पूर्ण रात्रि के लिए रुकना पड़ता है | श्रीनगर एवं मनाली बस सेवा के अलावा टैक्सी एवं जीप आदि भी किराये पर मिलती है |

Load More
Congratulations. You've reached the end of the internet.