विश्व मृदा दिवस विशेष- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ,जो है कृषि के क्षेत्र में एकल प्रयास | World Soil Day Special- Soil Health Card Scheme Details in Hindi

World Soil Day Special- Soil Health Card Scheme Details in Hindi

inagauration of soil-health card scheme in hindiकृषको को उपयुक्त आगतो का उपयोग करते हुए मृदा/फसल उत्पादकता में सुधार हेतु एक महत्वकांक्षी पहल के रूप में 19 फरवरी 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सुरतगढ़ नगर में “मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना” Soil Health Card का शुभारम्भ किया | मृदा परीक्षण को जरुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि एक किसान को इस बात की जानकारी होना बहुत जरुरी है कि वह जिस भूमि पर कृषि करना चाहता है उसकी सेहत या हालात कैसी है |

देशभर के किसानो को इस योजना से फायदा पहचाना सरकार का मकसद है जिसके तहत केंद्र सरकार अगले तीन वर्षो में देश के 14.5 करोड़ किसानो को “राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड” Soil Health Card उपलब्ध करवायेगी | इस वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3 करोड़ किसानो के खेतो की मिटटी की जांच होगी और तीन वर्ष बाद इस कार्ड का नवीनीकरण किया जाएगा ,जिसमे मृदा की उर्वरा शक्ति के साथ किसानो के लिए विभिन्न प्रकार के उर्वरको के उपयोग की जानकारी दर्ज होगी ताकि किसान फसल उत्पादन बढ़ा सके |

Soil Health Card स्वास्थ मृदा कार्ड अक मन्त्र है “स्वस्थ धरा और संदेश है खेत हरा” यानि “स्वस्थ धरा खेत हरा” के घोष वाक्य के साथ शुरू इस योजना में खर्च की 75 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार वहन करेगी , इसके अलावा मृदा परीक्षण प्रयोगशालाये स्थापित करने के लिए राज्यों को सहायता मुहैया कराई जा रही है राज्य सरकारे इन कार्डो को जारी करने के वास्ते गाँवों की औसत मृदा सेहत का निर्धारण करने के लिए नवीन पद्दतिया अपना रही है जिनमे मृदा परीक्षण के लिए कृषि विद्यार्थियों ,गैर सरकारी संघठनो (NGOs) तथा निजी क्षेते की सेवाए शामिल है |

तमिलनाडू ,आंध्रप्रदेश ,गुजरात ,हरियाणा जैसे राज्य इन कार्डो का वितरण पिछले कई वर्षो से सफलतापूर्वक कर रहे है लेकिन भारत सरकार द्वारा इस योजना को संचालित करने का उद्देश्य देशभर के किसानो को SHC जारी करना है | आँकड़े बताते है कि मार्च 2012 तक किसानो को 48 करोड़ से अधिक मृदा सेहत कार्ड जारी किये जा चुके है तमिलनाडु वर्ष 2006 से ही इन्हें जारी कर रहा है इसके लिए यहा 30 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाये और 18 मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाए प्रचलित है |

12 मई 2015 को पंजाब के कृषि विभाग ने किसानो को व्यक्तिगत “मृदा सेहत कार्ड” जारी करने के कार्य का शुभारम्भ कर सभी किसानो को SHC जारी करने वाला प्रथम राज्य बन गया है इसके लिए प्रत्येक जिले को एक मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला प्रदान की गयी है जो प्रत्येक खेत से मिटटी के नमूने लेकर डिजिटल SHC जरी करती है |

मृदा स्वास्थ्य कार्ड की आवश्यकता | Necessity of Soil Health Card in Hindi

Soil Samples Procedure for Soil Health Cardआज भी हमारे सकल घरेलू उत्पाद का छटवां भाग खेती से संबध गतिविधियों से आय अर्जन करता है और देश की दो तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर है लेकिन कृषि की बढती लागते , महंगी होती आदते और मृदा की बिगड़ती सेहत की वजह से कृषि संसाधनों का अधिकतम उपयोग नही हो पा रहा है |

उर्वरको का असंतुलित प्रयोग ,जैविक तत्वों का कम प्रयोग और पिछले कुछ दशको से घटते पोषक तत्वों की गैर प्रतिस्थापना के परिणामस्वरूप देश के कुछ भागो में मृदा उर्वरता और उसमे पोषक तत्वों की मात्रा तेजी से घटी है इसके बावजूद कृषको को मृदा स्वास्थ्य के बारे में नियमित अंतरालो पर आंकलन करने की आवश्यकता होती है ताकि वे मृदा में पहले से मौजूद पोषको का लाभ उठाते हुए अपेक्षित पोषको का प्रयोग सुनिश्चित कर सके |

इसके अलावा यदि देश की मौजूदा स्तिथि पर गौर करे तो देश की कुल भूमि क्षेत्रफल करीब 329 मिलियन हेक्टेयर है जिसमे करीब 144 मिलियन हेक्टेयर में खेती होती है और करीब 178 हेक्टेयर भूमि बंजर है | इस बंजर भूमि को सुधारने की बेहद जरूरत है इसी तरह 47.23 मिलियन हेक्टेयर भूमि को परती के रूप में चिन्हित किया गया है जो देश के कुल भू-क्षेत्र का 14.2 प्रतिशत है इस भूमि को सुधार कर खेती के काबिल बनाया जा सकता है |

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना से जुड़े आंकड़े (1 दिसम्बर 2016 तक)

  • संग्रहित किये गये मिटटी के नमूनों की संख्या – 2,17,23,969
  • जांच किये गये मिटटी के नमूनों की संख्या – 1,32,86,126
  • छापे गये Soil Health Cars की संख्या – 3,75,53,568
  • बांटे गये Soil Health Cards की संख्या – 3,59,23,341

SHC योजना के लक्ष्य और उद्देश्य | Targets of Soil Health Card Scheme in Hindi

  • SHC से किसानो को मृदा में पोषक तत्वों की विषय में तथा इन तत्वों की कमी को दूर कर मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाने और इसकी उत्पादकता बढाने के लिए पोषक तत्वों की उचित मात्रा की अनुश्न्शाओ को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी |
  • इसके तहत नियमित तौर पर तीन वर्ष में एक बार देश के सभी खेतो के मृदा स्वास्थ्य स्तर का मूल्यांकन करने की योजना है ताकि मृदा में पोषक तत्वों की कमियों को चीन्हित कर आवश्यक सुधर किये जा सके | इस दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग के अंतर्गत मृदा परीक्षण केन्द्रों द्वारा हर ब्लॉक में SHC कार्य चालु कर दिया गया है |
  • भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय कृषि विद्यालयों (SAUs) के सम्पर्क में क्षमता निर्माण , कृषि विज्ञान के छात्रों को शामिल करके मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओ के क्रियाकलाप को सशक्त बनाना |
  • राज्यों में मृदा नमूने के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओ के साथ मृदा उर्वरता संबधी बाधाओं का पता लगाना और विश्लेषण करना तथा विभिन्न तालुका/प्रखंड स्तरीय उर्वरक संबधी सुझाव तैयार करना |
  • पोषक प्रबन्धन परम्पराओं को बढ़ावा देने के लिए जिला और राज्य स्तरीय कर्मचारियो के साथ साथ प्रगतिशील किसानो की क्षमता का निर्माण करना |
  • किसानो को तकनीकी नवप्रवर्तन और अभिनव प्रयोगों द्वारा खेती करने हेतु अभिप्रेरित करना और खेत विशेष की मृदा में प्रासंगिक फसल चक्र अपनाने में मदद करना |

Soil Health Card को लेकर मन में उठने वाले प्रश्न और उनके उत्तर

Soil Health Card सॉयल हैल्‍थ कार्ड (SHC) योजना क्‍या है?
यह भारत सरकार, कृषि मंत्रालय, कृषि एवं सहकारिता विभाग के द्वारा चलाई जा रही एक योजना है। इसका कार्यान्‍वयन सभी राज्‍य एवं केंद्र शासित सरकारों के कृषि विभागों के माध्‍यम से किया जाएगा। सॉयल हैल्‍थ कार्ड का उद्देश्‍य प्रत्‍येक किसान को उसके खेत की सॉयल के पोषक तत्‍वों की स्‍थिति की जानकारी देना है और उन्‍हें उर्वरकों की सही मात्रा के प्रयोग और आवश्‍यक सॉयल सुधारों के संबंध में भी सलाह देना है ताकि लंबी अवधि के लिए सॉयल हैल्‍थ को कायम रखा जा सके।

Soil Health Card सॉयल हैल्‍थ कार्ड क्‍या है?
Soil Health Card format in HindiSoil Health Card एक प्रिंटिड रिपोर्ट है जिसे किसान को उसके प्रत्‍येक जोतों के लिए दिया जाएगा। इसमें 12 पैरामीटरों जैसे NPK (मुख्‍य-पोषक तत्‍व); सल्‍फर (गौण-पोषक तत्‍व); जिंक, फेरस, कॉपर, मैगनीशियम, बोरॉन (सूक्ष्‍म-पोषक तत्‍व) ; और पीएच, इसी, ओसी (भौतिक पैरामीटर) के संबंध में उनकी सॉयल की स्‍थिति निहित होगी। इसके आधार पर Soil Health Card में खेती के लिए अपेक्षित सॉयल सुधार और उर्वरक सिफारिशों को भी दर्शाया जाएगा।

Soil Health Card का प्रयोग किसान किस प्रकार कर सकता है?
कार्ड में किसान के जोत की सॉयल पोषक तत्‍व स्‍थिति के आधार पर सलाह निहित होगी। इसमें विभिन्‍न आवश्‍यक पोषक तत्‍वों की मात्रा के संबंध में सिफारिशों को दर्शाया जाएगा। इसके अलावा इसमें किसानों को उर्वरकों और उसकी मात्रा के संबंध में सलाह दी जाएगी जिसका उन्‍हें प्रयोग करना चाहिए और मृदा सुधारकों की भी स्‍थिति के बारे में सलाह दी जाएगी जिसे उन्‍हें प्रयोग करना चाहिए जिससे कि उपज का अनुकूल लाभ प्राप्‍त किया जा सके।

क्‍या किसान प्रत्‍येक वर्ष और प्रत्‍येक फसल के लिए एक कार्ड प्राप्‍त करेंगे?
यह 3 वर्ष के अंतराल के बाद उपलब्‍ध कराया जाएगा, जो उस अवधि के लिए किसान की जोत के सॉयल हैल्‍थ की स्‍थिति को दर्शाएगा। अगले 3 वर्ष में दिया गया एसएचसी उस अनुवर्ती अवधि के लिए सॉयल हैल्‍थ में परिवर्तनों को रिकॉर्ड करने में समर्थ होगा।

नमूने लेने के मानक क्‍या है?
सॉयल नमूने जीपीएस उपकरण और राजस्‍व मानचित्रों की मदद से सिंचित क्षेत्र में 2.5 है० और वर्षा सिंचित क्षेत्र में 10 है० के ग्रिड से लिए जाएंगे।

Soil Samples (सॉयल नमूने) कौन लेगा?
राज्‍य सरकार उनके कृषि विभाग के स्‍टॉफ या आउटसोर्स एजेंसी के स्‍टॉफ के माध्‍यम से नमूने एकत्रित करेगी। राज्‍य सरकार क्षेत्रीय कृषि महाविद्यालयों अथवा साइंस कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी शामिल कर सकती है।

Soil Samples (सॉयल नमूने) लेने का उचित समय क्‍या है?
क्रमश: रबी और खरीफ फसलों की कटाई के बाद सॉयल नमूने सामान्‍यत: वर्ष में 2 बार लिए जाते है, या जब खेत में कोई फसल न हो।

किसान के खेत से Soil Samples (सॉयल नमूने) कैसे एकत्रित किए जाएंगे?
सॉयल नमूने “V” आकार में सॉयल की कटाई के उपरांत 15-20 से०मी० की गहराई से एक प्रशिक्षित व्‍यक्‍ति द्वारा एकत्रित किए जाएंगे। यह खेत के 4 कोनों और मध्‍य से एकत्रित किए जाएंगे और पूरी तरह से मिलाए जाएंगे और इसमें से एक भाग नमूने के रूप में लिया जाएगा। छाया वाले क्षेत्र को छोड़ दिया जाएगा। चयनित नमूने को बैग में बंद किया जाएगा और कोड नंबर दिया जाएगा। इसके उपरांत इसे विश्‍लेषण के लिए सॉयल जांच प्रयोगशाला को भेज दिया जाएगा।

सॉयल जांच प्रयोगशाला क्‍या है?
Soil Health Card Labयह प्रश्‍न सं० 2 के उत्‍तर में दर्शाए गए अनुसार 12 पैरामीटरों पर सॉयल नमूने जांच के लिए एक सुविधा है। यह सुविधा स्‍थायी, मोबाइल प्रयोगशाला या दूरस्‍थ क्षेत्रों में प्रयोग किए जाने हेतु पोर्टेबल भी हो सकती है।

Soil Samples (सॉयल नमूने) की जांच कौन और कहां करेगा?
सॉयल नमूने निम्‍नलिखित तरीके से सहमत किए गए सभी 12 पैरामीटरों पर अनुमोदित मानकों के अनुसार जांच किए जाएंगे:
i. कृषि विभाग के स्‍वामित्‍व में एसटीएल पर और उनके स्‍वयं के स्‍टॉफ के द्वारा
ii. कृषि विभाग के स्‍वामित्‍व में एसटीएल पर परंतु बाह्य सोर्स एजेंसी के स्‍टॉफ द्वारा
iii. बाह्य सोर्स एजेंसी स्‍वामित्‍व एसटीएल पर और उनके स्‍टॉफ द्वारा
iv. केवीके और एसएयू सहित आईसीएआर संस्‍थानों पर
v. एक प्रोफेसर /वैज्ञानिक के पर्यवेक्षण के तहत विज्ञान कॉलेजों/विश्‍वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं पर विद्यार्थियों द्वारा।

सॉयल हेल्‍थ परीक्षण की गुणवत्‍ता कैसे सुनिश्‍चित की जायेगी?
राज्‍य सरकारों द्वारा प्राथमिक प्रयोगशालाओं के परिणामों के विश्‍लेषण एवं प्रमाणीकरण हेतु एक वर्ष में जांचे गए कुल नमूनों का 1% ‘’रैफरल प्रयोगशाला में भेजा जायेगा। राज्‍य सरकारों को आवश्‍यक रैफरल प्रयोगशालाओं की स्‍थापना के लिए सहायता प्रदान की जाएगी।

प्रत्‍येक नमूनों हेतु कितना भुगतान किया जाएगा?
राज्‍य सरकारों को प्रत्‍येक सॉयल नमूने के लिए कुल 190 रू प्रदान किया जाता है। इसमें सॉयल सेम्‍पलिंग, टेस्‍टिंग, सॉयल हैल्‍थ कार्ड सृजन एवं किसानों को वितरण की लागत शामिल है।

स्‍कीम का कुल परिव्‍यय क्‍या है? क्‍या स्‍कीम की शुरूआत की गई है?
3 वर्षों की अवधि के लिए स्कीम का कुल परिव्‍यय 568.54 करोड़ रू है। स्कीम को चालू वर्ष अर्थात 2015-2016 के दौरान सभी राज्‍यों में शुरू किया गया है।

सॉयल हेल्‍थ कार्ड तैयार करने के लिए तीन वर्षों में कितने मृदा नमूनों का परीक्षण किया जाएगा?
मंत्रालय द्वारा अपनाएं गए निर्धारित प्रतिमानों के अनुसार लगभग 14 करोड़ सॉयल हेल्‍थ कार्ड तैयार करने के लिए प्रत्‍येक तीन वर्षों में 253 लाख सॉयल नमूनों का परीक्षण किया जाएगा।

देशभर में एक समान सॉयल हेल्‍थ कार्डो की तैयारी के लिए क्या कोई सॉफ्टवेयर मौजूद है?
जी हां, राष्‍ट्रीय सूचना विज्ञान केन्‍द्र (एनआईसी) ने एकसमान सॉयल हेल्‍थ कार्ड के सृजन एवं उर्वरक सिफारिशों के लिए एक वैब पोर्टल (www.soilhealth.dac.gov.in) विकसित किया है जिसके चार माड्यूल हैं:
(क) सॉयल नमूनों का पंजीकरण
(ख) सॉयल परीक्षण प्रयोगशालाओं में नमूनों का परीक्षण।
(ग) सॉयल टेस्‍ट क्रॉप रिस्‍पोंस (एसटीसीआर) समीकरण पर आधारित उर्वरक सिफारिशें।
(घ) एमआईएस रिपोर्टें

कृषि मंत्रालय का कौन सा प्रभाग स्कीम के कार्यान्‍वयन के संबंध में राज्‍य सरकारों को दिशा निर्देश प्रदान करेगा?
समेकित पोषक तत्‍व प्रबंधन (आईएनएम) प्रभाग, कृषि एवं सहकारिता विभाग नियमित रूप से राज्‍यों का दौरा करेगा ओर उन्हें तकनीकी मामलों में दिशा-निर्देश प्रदान करेगा।

संबंधित केन्‍द्र और राज्‍य सरकार के अधिकारियों का सम्‍पर्क सम्‍बन्‍धी ब्‍यौरा ?
केन्‍द्र सरकार: अपर आयुक्‍त (आईएनएम) भारत सरकार, कृषि मंत्रालय कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि भवन, नई दिल्‍ली
फैक्‍स – 011-23384280, ई मेल- dwivediv@nic.in
राज्‍य सरकार: राज्‍य कृषि निदेशक / जिला कृषि अधिकारी
सॉयल हेल्‍थ कार्ड स्‍कीम पर सूचना के लिए www.soilhealth.dac.gov.in या www.agricoop.nic.in पर सम्‍पर्क कर सकते हैं।

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