विश्व दिव्यांग दिवस विशेष – प्रधानमंत्री मोदी की पहल से नि:शक्त लोगो को मिला नया नाम | World Disability Day Essay in Hindi

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World Disability Day Essay in Hindi

world-disability-day-essay-in-hindiWorld Disability Day विश्व दिव्यांग दिवस 1992 से संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निशक्त जनों को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू किया गया है | इस दिवस से लोग निशक्त लोगो से मिलकर उनके साथ अपना सुख दुःख बाँटते है | World Disability Day दिव्यांग दिवस को न केवल मानसिक रोगियों या शारीरिक विकलांग व्यक्तियों के लिए प्रोत्साहन दिवस है बल्कि ये असाध्य रोगों से पीड़ित रोगियों को भी प्रोत्साहित करने का अवसर है |

नि:शक्त या विकलांग से दिव्यांग तक

अंग्रेजी में नि:शक्त या विकलांग शब्द की व्याख्या की शुरुवात “Handicapped या Disabled” के रूप में की जाती है | आगे चलकर 1980 के दशक में इस परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया गया | अमेरिका के Democratic National Committee ने विकलांगो के लिए Handicapped की जगह Differently Abled शब्द के इस्तेमाल पर जोर दिया , जो अपने पूर्ववती शब्द Handicapped या Disabled” की तुलना में ज्यादा स्वीकार्य हुआ | नि:शक्तजनों की भावना को समझते हुए उन्हें एक सौम्य और करुणामयी शब्द से नवाजकर इस समिति ने भी अतिरिक्त योग्यता का प्रमाण प्रस्तुत किया |

वर्तमान में भारतीय परिदृश्य पर विचार करे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर प्रसारित होने वाले “मन की बात” कार्यक्रम में विकलांगो या नि:शक्तो के लिए “दिव्यांग” शब्द का प्रयोग किये जाने की बात कही | यह शब्द जनमाध्यमो में भी दिखाई सुनाई देने लगा है ऐसे में आमजनों में भी इस शब्द का प्रचलन बढने लगा है तथ जनमानस के बीच इस शब्द की स्वीकार्यता स्थापित होने लगी है | नि:शक्तो और विकलांगो को दिव्यांग कहकर सम्बोधित करना एक विशिष्ट प्रकार का विचार है | दिव्यांग शरीर वाले लोग कुछ मायने में भले शारीरिक तौर पर कमजोर होते है लेकिन ज्ञान ,मेधा और तार्किक शक्ति के लिहाज से अन्य व्यक्तियों से कम नही आंके जा सकते है |

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दिव्यांगता और कानून

भारत का सविधान अपने सभी नागरिको के लिए समानता ,स्वतंत्रता ,न्याय एवं गरिमा सुनिश्चित करता है | हाल के वर्षो में विकलांगो के प्रति समाज का नजरिया तेजी से बदला है | यह माना जाता है कि यदि दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर तथा प्रभावी पुनर्वास की सुविधा मिले तो वे बेहतर गुणवत्तापूर्ण जीवन व्यतीत कर सकते है | दिव्यांगो की बढती योग्यता की पहचान की जा रही है और उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल किये जाने पर बल दिया जा रहा है | भारत सरकार ने विकलांगो या निशक्तजनों के लिए निम्नलिखित कानूनों को लागू किया है |

  • दिव्यांग व्यक्ति (समान अवसर ,अधिकार सुरक्षा और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 , जो ऐसे लोगो को शिक्षा ,रोजगार , अवरोधमुक्त वातावरण का निर्माण ,सामजिक सुरक्षा इत्यादि प्रदान करना है |
  • स्वलीनता (Austism) , प्रमस्तिस्क पक्षाघात (cerebral palsy) ,मानसिक मंदबुद्धि एवं बहुविकलांगता के लिए राष्ट्रीय कल्याण अधिनियम 1999 के चारो वर्गो के कानूनी सुरक्षा तथा उनके स्वतंत्र जीवन हेतु सहज रूप से सम्भवत वातावरण निर्माण का प्रावधान है |
  • भारतीय पुनर्वास अधिनियम 1992 पुनर्वास सेवाओ के लिए मानव बल विकास का प्रयास करना है |

संस्थागत प्रयासों की उम्मीद

वर्तमान में कई संस्थाए शारीरिक और मानसिक रूप से निशक्तो या दिव्यांगो के लिए प्रशिक्षण केंद्र , विद्यालय , सामूहिक आवास आदि कुशलता से चला रही है | इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संस्थाए भी ऐसे व्यक्तियों के लिए काम करने वाली संस्थाओ को आर्थिक मदद देकर महत्चपूर्ण भूमिका अदा कर रही है | अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा चलाई जा रही संस्थाए भी है जो इस दिशा में व्यवस्थित रूप से कायक्रमो का संचालन कर रही है |

सयुंक्त राष्ट्र संघ ने इस मान्यता पर बल देने में प्रमुख भूमिका अदा की है कि निशक्तो के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में उनकी खुद की भागीदारी मुख्य रूप से होनी चाहिए | इससे न केवल बेहतर काम होगा बल्कि काम करते हुए निशक्त व्यक्तियों को देखकर अन्य नि:शक्तो का भी हौसला बढ़ेगा | यदि इस सिद्धांत पर वास्तविक तौर पर अमल हर देश में होने लगे तो विकलांगो की समस्याए काफी हद तक हल हो सकती है |

देश में निम्नलिखित राष्ट्रीय संस्थान निशक्तो या दिव्यांगगो के विकास एवं पुनर्वास के लिए विभिन्न क्षेत्रो में कार्य कर रहे है |

  1. शारीरिक विकलांग संस्थान , नई दिल्ली
  2. राष्ट्रीय दृष्टि विकलांग संस्थान , देहरादून
  3. राष्ट्रीय ओर्थोपेडिक विकलांग संस्थान ,कोलकाता
  4. राष्ट्रीय मानसिक विकलांग संस्थान ,सिकंदराबाद
  5. राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान , मुम्बई
  6. राष्ट्रीय पुनर्वास तथा अनुसन्धान संस्थान , कटक
  7. राष्ट्रीय बहु विकलांग सशक्तीकरण संस्थान ,चेन्नई

इस संबध में गैर सरकारी संघठन (NGO) एक गतिशील एवं उभरता हुआ क्षेत्र है जो दिव्यांग व्यक्ति को सेवा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है | कुछ NGO मानव संसाधन विकास तथा अनुसन्धान कार्य कर रहे है | केंद्र एवं राज्य सरकारे भी उन्हें सक्रिय रूप से नीतियों के सूत्रीकरन , योजना ,क्रियान्वन एवं निगरानी में शामिल करती है और दिव्यांगता के मुद्दों पर उनसे परामर्श प्राप्त करती है |

निष्कर्ष

केवल नया शब्द गढ़ देने मात्र से मानवीय सोच एवं संवेदनाओ में त्वरित और विशेष तरह का परिवर्तन आ जाएगा ,ऐसा सोचना जल्दबाजी होगी  | आज भी निशक्तजनों और दिव्यांगो को वैसा उचित सम्मान नही मिला पाता जिसके वे हकदार है | निशक्त व्यक्तियों को इसके लिए संघठित होकर अपनी शक्ति को पहचानते हुए आगे बढना होगा | साथ ही जरूरत है निशक्त या विकलांग व्यक्तियों के भीतर छुपी किसी भी अतिरिक्त प्रतिभा या गुण को पहचान कर उनके अंदर उपयुक्त कौशल का विकास किया जाए तब जाकर सही मायने में उन्हें बेहतर जीवन हासिल हो पायेगा |

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