वक़्त की आंधी Motivational Story in Hindi

Motivational Story in Hindiबहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक ईमानदार व्यापारी रहता था लेकिन व्यापार में घाटा होने के कारण वह काफी कंगाल हो गया था | व्यापारी की पत्नी क्रोधी स्वभाव की थी | वह हर वक्त बात बात पर व्यापारी से उलझती रहती थी | एक दिन व्यापारी कामकाज के सिलसिले में वो एक जमींदार के खेत पर गया | वहा पर जमींदार ने उसे गन्ने काटने का काम दे दिया | जब गन्ने पुरे कट गये तो जमींदार ने मजदूरी के बदले कुछ गन्ने व्यापारी को दे दिए |

व्यापारी गन्ने की गठरी लेकर अपने घर की तरफ रवाना हुआ | रास्ते में उसे कुछ बच्चे मिले | वो बच्चे व्यापारी की सरल प्रकृति को जानते थे | वो गन्ने मांगते गये और व्यापारी उन्हें एक एक बांटता गया | घर पहुचते पहुचते व्यापारी के पास केवल एक गन्ना शेष रह गया | हाथ में केवल एक गन्ना देखकर व्यापारी की पत्नी का कर्कश स्वाभाव ओर भी उग्र हो गया | जब व्यापारी की पत्नी ने केवल एक गन्ना लाने का कारण पूछा तो बड़ी सरलता से व्यापारी ने सारी बात अपनी पत्नी को बता दी |

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झगड़ालू और गुस्सैल पत्नी ने वह गन्ना जोर से उसकी पीठ पर दे मारा | उसी समय गन्ने के दो टुकड़े हो गये | इस पर व्यापारी ने मुस्कुराते हुए कहा “देवीजी , तुमने ये बहुत अच्छा काम किया , जो गन्ने के दो टुकड़े कर दिए , वरना मै खुद ही इसके दो टुकड़े करने वाला था , इन दो टुकडो में से एक तुम ले लो और दूसरा मुझे दे दो , भगवान ने हमे जो थोडा बहुत कुछ दिया है उसे बांटकर ही खाना चाहिए ” |

अपने पति के मुख से ऐसी बात सुनकर वो झगड़ालू पत्नी मोम की तरह पिघल गयी और उसे अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ | उसकी आँखों में आसू आ गये और वो बोली “सचमुच , आप देवता से भी बढकर हो , मै आपके महान विचारो को आज तक नही समझ सकी थी , दरअसल आप तो दया के सागर है ” |

व्यापारी ने अपनी पत्नी से कहा “इस जीवन के सफर में पैसा धुप छाँव की तरह है , मै फिर से व्यापार करूंगा और शीघ्र ही अच्छी दौलत भी कमा लूँगा | ” चंद दिनों बाद व्यापारी के बचपन का मित्र उसके पास आकर बोला “मै तुम्हारे साथ सांझे का व्यापार करना चाहता हु  तुम धन की चिंता मत करो , पूंजी मेरी और श्रम तुम्हारा , तुम्हारी इमानदारी पर मुझे पूरा विश्वास है  ,हमे व्यापार में अच्छी सफलता मिलेगी ” |

दोनों ने मिलकर सांझे का व्यापार किया और एक दिन उन्हें उन्हें व्यापार में अच्छा मुनाफा हुआ | अपने वाडे के मुताबिक मित्र ने व्यापारी को मुनाफे का आधा हिस्सा दे दिया और इस तरह कंगाल हुआ व्यापारी फिर से लखपति बन गया | इस कहानी से हमे दो शिक्षाए मिलती है पहले “मुसीबत में कभी भी संयम नही खोना चाहिए ” और दूसरा “वक़्त की आंधी कभी भी अपना रुख बदल सकती है ” |

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