कृष्णनगरी वृन्दावन , जो है श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ का साक्षी | Vrindavan Temples History in Hindi

कृष्णनगरी वृन्दावन , जो है श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ का साक्षी | Vrindavan Temples History in Hindiवृन्दावन मथुरा से लगभग 15 किमी की दूरी पर है | वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओ का साक्षी है | इस पावन स्थली का नामकरण वृन्दावन कैसे हुआ इसके बारे में अनेक मत है | वुन्दा तुलसी को कहते है | पहले यह तुलसी का घना वन था इसलिए वृन्दावन कहा जाने लगा | वृन्दावन की अधिष्ठात्री देवी वृंदा अर्थात राधा है | ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्री राधा रानी के सोलह नामो में से एक नाम वृंदा भी है | वृंदा अपने प्रिय श्रीकृष्ण से मिलने की आकांशा लिए इसी वृन्दावन में निवास करती है तथा वृन्दावन को पावन और रसमय करती है | वृन्दावन की गलिया बड़ी प्रसिद्ध है और वृन्दावन की इन गलियों को कुंज गलिया कहते है |आइये अब हम आपको वृन्दावन के प्रसिद्ध मन्दिरों की जानकारी देते है |

01 बांके बिहारी का मन्दिर

वृन्दावन का प्रमुख दर्शनीय मन्दिर श्री बांके बिहारी मन्दिर है | स्वामी हरिदास जी द्वारा निर्मित यह मन्दिर अति प्राचीन है | मन्दिर की स्थापित श्री विग्रह निधिवन से प्रकट हुए थे जिसे स्वामी हरिदास ने यहा स्थापित किया था | श्री बिहारी की चरण दर्शन केवल अक्षय तीज को ही होते है तथा सावन में हिंडोले के दर्शन होते है |

02 गोविन्दं देव जी का मन्दिर

श्री गोविन्द देव जी का मन्दिर लाल पत्थरों से निर्मित एक सुंदर मन्दिर है | इसका निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह ने करवाया था | आततायियो ने इसकी उपरी मंजिले नष्ट कर दी थी | कहते है कि यह पहले यह सात मंजिला था अब केवल चार मंजिला ही रह गया है |

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03 रंग जी का मन्दिर

रंग जी मन्दिर दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुद नमूना है | यह मन्दिर अपनी भव्यता तथा मन्दिर प्रांगण में खड़ा 6 फुट सोने के खम्भे के लिए प्रसिद्ध है | मन्दिर का प्रांगण भी विशाल है | रंग जी मन्दिर का रथ उत्सव ,बैकुंठ उत्सव तथा जन्माष्टमी उत्सव देखने योग्य होता है |

04 शाह जी का मन्दिर

यमुना तट पर बना शाह जी का मन्दिर अपने संगमरमर के खम्भों के लिए प्रसिद्ध है | इसे टेढ़े मेढ़े खम्भों के लिए प्रसिद्ध है |वास्तव में इसका नाम ललित कुंज है | बसंत पंचमी को यहा मेला लगता है |

05 निधिवन जी का मन्दिर

निधिवन स्वामी हरिदास जी का समाधि स्थल है | यहा तुलसी के पौधे बहुत है | यहाँ राधा रानी का श्रुंगार रूपी सिंदूर प्रसाद है |इसे इस्कॉन संस्था द्वारा बनवाया गया है | यह मन्दिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है | अनेको विदेशी यहा हिन्दू वैष्णव धर्म की दीक्षा लेते है | मन्दिर में गौरनिताई , राधाकृष्ण युगल तथा कृष्ण बलराम के मनोहर दर्शन है |

06 सेवा कुंज

सेवा कुंज को निकुंजवन भी कहते है यहा ताल और कदम्ब का पेड़ है | कोने में एक छोटा सा मन्दिर है | कहा जाता है कि रात्रि में यहा राधा जी के साथ भगवान श्रीकृष्ण विहार करते है | यहा रात्रि में रहना वर्जित है | शाम ढलते ही मन्दिर से सभी जीव जन्तु स्वत: ही अपने आप चले जाते है यह अपने आप में अचरज की बात है |

वृन्दावन वह जगह है जहा श्री कृष्ण ने महारस किया था | यहाँ के कण कण में राधा कृष्ण के प्रेम की आध्यात्मिक धरा बहती है | वृन्दावन में जन्माष्टमी मथुरा से अगले दिन मनाई जाती है तथा छप्पन भोग लगाया जाता है | यहाँ लगने वाले छप्पन भोग को देखने दूर दूर से श्रुधालू आते है | वृन्दावन में आकर श्रुधालू भगवान श्री कृष्ण की इस पावन धरा पर उनकी आत्मिक अनुभूति सहज ही महसूस कर सकते है | मथुरा आगरा से 56 किमी तथा दिल्ली से 145 किमी की दूरी पर है |मथुरा उत्तर पूर्व रेलवे का एक महत्वपूर्ण जंक्शन है | यह रेलमार्ग से देश के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है | मथुरा में कोई हवाई अड्डा नही है | इसका निकटतम हवाई अड्डा आगरा का है | वृन्दावन और मथुरा के बीच अच्छा परिवहन सम्पर्क है |

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