वैष्णोदेवी यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी Vaishno Devi Travel Guide in Hindi

Vaishno Devi Travel Guide in Hindiवैष्णो देवी भारत के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है जहा लाखो श्रुधालू प्रतिवर्ष माता के दर्शन करने को आते है | माता के दर पर आने वालो की मुरादे पुरी होने पर श्रुधालू यहा बार बार आते है | आज मै आपको मेरे निजी अनुभव के आधार पर आपको वैष्णो देवी यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी आप लोगो तक पहुचाना चाहता हु ताकि यात्रा में आपको कही व्यवधान ना आये | वैष्णो देवी यात्रा के बारे में बताने से पहले मै आपको माता वैष्णो देवी की संक्षिप्त कथा बताना चाहता हु ताकि आप माता की महिमा समझ सके |

Loading...

The Story of Mata Vasihno Devi

पौराणिक कथाओ के अनुसार जब असुरो का आतंक बढ़ गया था तब माता के तीनो रूप माता काली , माता लक्ष्मी और माता सरस्वती तीनो ने एक होकर अलौकिक शक्ति को जन्म दिया | उनकी इस अलौकिक शक्ति से एक सुंदर युवती प्रकट हुयी जिसने तीनो देवियों से उनके निर्माण का कारण पूछा तो देवियों ने बताया कि उनका जन्म पृथ्वी पर सत्य और धर्म को बढ़ाने के लिए किया गया है | इसके बाद उन तीनो देवियों ने उस युवती को रत्नाकर नामक व्यक्ति के घर में जन्म लेने को कहा जो उनका परम भक्त था |

कुछ समय  बाद रत्नाकर की पत्नी ने एक सुंदर बच्ची को जन्म दिया जिसका नाम उन्होंने वैष्णवी रखा था | वो बच्ची बचपन से ही ज्ञान की धनी थी जिसका कोई मुकाबला नही था | वैष्णवी ने अपने अंतर्ध्यान की बदौलत स्वयं को अपने उदेश्ह्य तक ले जाने के लिए गहन योग की आवश्यकता थी | इसी वजह से वैष्णवी सारे पारिवारिक सुख त्यागकर तपस्या के लिए गहन वन में चली गयी | इसी दौरान भगवान राम अपने चौदह वर्ष के वनवास पर थे और उनकी भेंट वैष्णवी से हुयी | वैष्णवी ने तुंरत भगवान राम को पहचान लिया और उन्हें अपने अंदर समाहित होने के लिए निवेदन किया ताकि वो एक शक्ति का रूप ले सके |

हालांकि भगवान राम ने उस समय मना कर दिया और वनवास खत्म होने पर वापस लौटते समय उनकी इच्छा पुरी करने का वादा किया | भगवान राम अपने वचन के अनुसार वनवास पूरा होने पर वापस लौटे लेकिन इस बार ओव वृद्ध आदमी के वेश में आये थे | दुर्भाग्य से वैष्णवी भगवान राम को पहचान नही पायी | भगवान राम ने वैष्णवी को समझाते हुए कलयुग में जाने के लिए एक होने को कहा ताकि वो अपने कल्कि अवतार में कलयुग में जन्म ले सके | भगवान राम ने वैष्णवी को त्रिकुटा पहाडी पर आश्रम बनाने को कहा ताकि गरीब और दुखी लोगो के दुःख दूर कर सके |  वैष्णवी ने वैसा ही किया और भगवान राम के कथन अनुसार वैष्णवी की ख्याति सब जगह फ़ैल गयी |

समय गुजरता गया और इसी दौरान महायोगी गुरु गोरख नाथ जी ने वैष्णवी की परीक्षा लेने का विचार किया कि वास्तव में वैष्णवी में अलौकिक शक्तिया है | इसलिए उन्होंने अपने शिष्य भैरोनाथ को सच का पता लगाने भेजा | भैरोनाथ चुपके से वैष्णवी के आश्रम में पहुचे तो उनकी सुन्दरता को देखकर मोहित हो गये और उनसे विवाह करने का विचार बनाया | इसी दौरान वैष्णवी की भक्त माता श्रीधर ने के भंडारे का आयोजन किया जिसमे उन्होंने पुरे गाँव को बुलाया जिसमे महायोगी गोरख नाथ जी उनके शिष्य भैरोनाथ सहित सरे शिष्यों को बुलाया | अब भंडारे के दौरान भैरोनाथ ने वैष्णवी को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन विफल रहा |

वैष्णवी भागते हुए पहाडो में चली गयी और वहा तपस्या करने लगी लेकिन भैरोनाथ उनका पीछा करते हुए वहा पर भी आ गया | उसके बाद वैष्णवी दौडती हुयी बाणगंगा , चरणपादुका और अर्धकुंवारी से होते हुए पवित्र गुफा तक पहुची | भैरोनाथ वहा पर भी आ गया लेकिन गुफा के मुख पर वैष्णवी ने उसका सर कलंक कर दिया जो उड़ता हुआ दूर पहाडी पर जा गिरा | भैरोनाथ को जब देवी की शक्ति का एहसास हुआ तब वो वैष्णो देवी से माफी मांगने लगा | दयालु माता ने भैरोनाथ पर दया दिखाते वरदान दिया कि माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के बाद भैरोनाथ के दर्शन करने पर ही यात्रा पुरी मानी जायेगी |इसी दौरान माता वैष्णवी ने ध्यान करते हुए साढ़े पांच फीट उची चट्टान पर पिंडी का रूप ले लिया जो पवित्र गुफा में आज भी मौजूद है

How to Reach Katra

माता वैष्णोदेवी के दर्शन करने के लिए सबसे पहले उसके आधार बिंदु कटरा तक पहुचना पड़ता है जो जम्मू कश्मीर में स्थित है | कटरा तक पहुचने के लिए हाल ही में रेल मंत्रालय ने एक रेल शुरू की है जो सीधे कटरा तक पहुचाती है | बस से आने वाले यात्रीयों को पहले जम्मू आना पड़ता है जहा से कटरा की दूरी 50 किमी है जिसे हम 2 घंटे में तय कर सकते है | जम्मू से कटरा तक जाते वक़्त आपको रेल से मनमोहक नजारा देखने को मिलेगा जो वास्तव में भारतीय रेल का बेजोड़ नमूना है | कटरा रेलवे स्टेशन भी बिलकुल आधुनिक तकनीक से बना हुआ है जहा पर आपको सारी सुविधाए आसानी से मिल जायेगी |कटरा में आप आपको बहुत सस्ती होटल मिल जायेगी जहा आप आराम करने के बाद चढाई कर सकते है |

Trek Route [Helicopter/Horses/Palki/Foot]

अब चढ़ाई करने से पहले आपको श्राइन बोर्ड से पास बनाना पड़ता है और बाणगंगा चेक पोस्ट पार करने के बाद आपकी चढाई शुर होती है | बाणगंगा चेक पोस्ट से माता भवन की दूरी 13 किमी है जो आपको भले ही कम लग रही होगी लेकिन काफी कठिन चढाई है | आप चढाई के लिए अलग अलग तरीको का इस्तेमाल कर सकते है |

कटरा से आप हेलीकाप्टर के द्वारा भी माता के भवन के करीब पहुच सकते है जिसके लिया आपको तीन महीने पहले ही एडवांस बुकिंग करनी पडती है | इसके लिय आप Mata Vaishno Devi Shrine Board की वेबसाइट से एडवांस बुकिंग कर सकते है | हेलीकाप्टर केवल अच्छे मौसम में ही  उड़ान भरेंगे अन्यथा यात्रा रद्द भी हो सकती है | कटरा हेलिपैड मुख्य शहर कटरा से 3.5 किमी की दूरी पर है जहा पर आपको उड़ान से दो घंटे पहले ही पहुचना पड़ता है | कटरा से आपको हेलीकाप्टर आपको संजिछ्त पहुचाता है जो माता भवन से केवल  3 किमी की दूरी पर है | बाकि यात्रा आप पैदल या खच्चरों से कर सकते है और आपको भवन पहुचने में लगभग 1 या 1.5 घंटा लगेगा | हेलीकाप्टर से जाने वालो को VIP पास भी दिया जाता है जिससे उनको गेट न.5 से सीधे भवन में प्रवेश मिल जाता है

माता वैष्णो देवी जाने के लिए सबसे ज्यादा यात्री पैदल यात्री होते है जो माता की शक्ति से भवन तक पहुचते है | बाणगंगा चेकपोस्ट से माता भवन तक पहुचने में आपको अपनी क्षमता के आधार पर 6  से 8 घंटे लग सकते है |जो व्यक्ति किन्ही भी कारणों से पैदल चलने में असमर्थ होते है उनके लिए घोड़े , खच्चर , पालकी की भी सुविधा होती है | बुजुर्ग लोग जो घोड़े पर ढंग से नही बैठ सकते है उनके लिए पालकी की सुविधा भी होती है जिन्हें चार व्यक्ति कन्धो पर ढोकर ले जाते है | इसके अलावा छोटे बच्चो को आप पिट्टू पर ले जा सकते है जिसमें पिट्ठू का काम करने वाले आदमी अपनी पीठ पर बच्चो को बांधकर चढाई चढ़ते है |

Bhawan

भवन पहुचने पे आप वहा के घाटो पर स्नान कर सकते है | इसके लिए आपको आपका सारा सामान , मोबाइल फ़ोन , कैमरा और लेथर आइटम को लाकर में जमा करण पड़ता है जिसकी चाबी आपके पास रहती है | इसके बाद आपको “यात्रा पर्ची ” दिखाकर यात्रा के लिए लाइन में लगना पड़ता है | सामान्यत श्रुधालुओ को गेट न.3 से प्रवेश दिया जाता है | यहा पर बहुत लम्बी लाइन चलती है जो धीरे धीरे आगे बढती रहती है | श्रुधालू “जय माता दी” बोलते हुए भवन में प्रवेश करते है और फिर पवित्र गुफा में पिंडी दर्शन के बाद बाहर आ जाते है |

इसके बाद अधिकतर श्रुधालू भैरो मदिर के लिए रवाना होते है जो भवन से 3 किमी की दूरी पर चढाई पर स्तिथ है | इसे भी आप खच्चरों की सहायता से चढ़ सकते है | भैरो मन्दिर के दर्शन करने के बाद आप आप वापस दुसरे रस्ते से नीचे लौट सकते है इस तरह आपकी यात्रा पूर्ण होती है |

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *