दूरदर्शन के यादगार धारावाहिक Unforgettable TV Serials of Doordarshan

Unforgettable TV Serials of Doordarshan

मित्रो आज हम आपको दूरदर्शन के कुछ यादगार धारावाहिकों से रूबरू करवाएंगे जिसमे से कई धारवाहिको को आपने जरुर देखा होगा और नही भी देखा हो तो आप इस पोस्ट के बारे में उन धारावाहिकों के बारे में जान जायेंगे |

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हम लोग Hum Log

Hum Log TV Serial Doodarshanहम लोग भारतीय टीवी पर प्रसारित होने वाला पहला धारावाहिक और पहली नाटक श्रृंखला थी जो दूरदर्शन पर राष्ट्रीय प्रसारण के रूप में 7 जुलाई 1984 से प्रारम्भ हुयी थी | उस समय दूरदर्शन एकमात्र टीवी चैनल हुआ करता था | “हम लोग” को पहला धारावाहिक इसलिए कहते है क्योंकि इससे पहले भी कुछ शो आते थे लेकिन उनका प्रसारण क्षेत्रीय था जैसे मुंबई ,दिल्ली या कलकत्ता केंद्र हुआ करता था | हम लोग धारावाहिक को पहली बार पुरे देश में एक साथ दिखाया गया था | इस धारावाहिक की कहानी 1980 के दशक के एक मध्यमवर्गीय परिवार की है जो अपने जीवन में दैनिक कठिनाइयो और महत्वाकांक्षी जरुरतो से झुझते रहते थे |

इस धारावाहिक का कांसेप्ट एक मेक्सिकन टीवी सीरियल से लिया गया था जिसे उस समय के सूचना एवं प्रसारण मंत्री वंसत साठे को मेक्सिकन ट्रिप के दौरान विचार आया था | भारत आते ही उन्होंने लेखक मनोहर श्याम जोशी को इस नाटक के लिए पटकथा लिखने का काम दिया और कुमार वासुदेव को निर्देशन का काम सौंपा गया | इस नाटक का शीर्षक गीत संगीत निर्देशक अनिल बिस्वास से रचित किया था |  इस नाटक के कुल 156 एपिसोड प्रसारित किये गये थे और प्रत्येक एपिसोड 30 मिनट का आता था |  इस नाटक की शूटिंग गुडगाँव में की जाती थी लेकिन इसका रिहर्सल दिल्ली के हिमाचल भवन में की जाती थी |

इस नाटक के हर एपिसोड के अंत में हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार इस नाटक के सूत्रधार का काम करते थे  | अशोक कुमार पारिवारिक मुद्दों और जीवन की समस्याओ के बारे में समझकर उनके निराकरण का उपाय बताते थे | उस समय सयुंक्त परिवार का प्रचलन बहुत ज्यादा था लेकिन परिवारों के अलग होने को लेकर इस नाटक में अशोक कुमार ने बेहतर ढंग से समझाया |अशोक कुमार को इस नाटक से इतना प्यार मिला कि उनके पास 4 लाख नौजवानों की चिट्टिया आयी थी जिसमे नौजवान अपनी समस्याओ को अशोक कुमार तक पहुचाते थे |

इस नाटक को भारत की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी देखा करते थी जिनके पास टीवी हुआ करते थे | ये उस दशक की सबसे सफल नाटकीय श्रुंखला थी | अगर आज भी आप इस धारवाहिक को देखेंगे तो आपको वो दिन याद आ जायेंगे जब आपके पिताजी अपने परिवार को चलाने के लिए किस तरह संघर्ष करते थे | इस धारावाहिक के कलाकारो के अभिनय की सादगी को इतना सराहा गया कि इनको टीवी पर लगातार ओर नाटको के लिए प्रस्ताव आने लगे थे

आजकल के धारावाहिकों में आपको ऐसी सादगी देखने को नही मिल सकती है | आजकल सास बहु के नाटको को लोग पारिवारिक सीरियल मानते है लेकिन असल जिन्दगी में हम लोग जैसे धारवाहिक ही पारिवारिक नाटक कहलाने योग्य है | हम लोग में हर पात्र को बहुत सुंदर ढंग से पेश किया गया जो सदैव अपने परिवार को एकजुट करने के लिए अग्रसर रहते थे | उस समय के नाटको में अभिनय आत्मा से निकलता था जो उनके हाव भावो से टीवी पर नजर आते थे |

अगर आज के दौर में ऐसे नाटको का निर्माण किया जाए तो देश की 80 प्रतिशत जनता ऐसे नाटको को देखना पसंद नही करेगी और 20 प्रतिशत जनता वो होगी जिनका जन्म 70 या 80 के दशक के हुआ हो | उन्हें सयुंक्त परिवार और जीवन की कठिनाईयो की जानकारी है लेकिन वर्तमान बच्चो और युवाओ को उद्देश्यहीन नाटक ज्यादा पसंद आते है | मेरा जन्म 80 के दशक में हुआ था और मुझे मेरे पिताजी और दादाजी की जीवन के दैनिक समस्याओ की जानकारी थी जिसका प्रतिरूप इन नाटको में देखने को मिलता था लेकिन आने वाली पीढ़ी पारिवारिक नाटको से हटकर सास बहु सीरियल , कॉमेडी सीरियल या फिल्मे देखना ज्यादा पसंद करेंगे |

बुनियाद Buniyaad 1986

Buniyaad TV Serialहम लोग की अपार सफलता को देखते हुए मशहूर फिल्म निर्माता रमेश सिप्पी ने एक ओर नाटक श्रुंखला बनाने का विचार किया | उन्होंने मनोहर श्याम जोशी को एक बार फिर इस नाटक की पटकथा लिखने को बुलाया और भारत-पाकिस्तान विभाजन के मुद्दे पर “बुनियाद ” धारावाहिक का निर्देशन किया |  बुनियाद राष्ट्रीय दूरदर्शन चैनल डीडी नेशनल पर 1986 से प्रसारित किया जाने लगा जिसके बाद 2000 के दशक की शुरवात में  डीडी मेट्रो पर भी फिर प्रसारित किया था | यह नाटक हर मंगलवार और शनिवार शाम को प्रसारित किया जाता था और इस नाटक के कुल 104 एपिसोड प्रसारित किये गये थे |

बुनियाद ने हिंदी टीवी और सिनेमा को ऐसे कलाकार दिए जो आज भी फिल्म एवं टीवी जगत में सक्रीय है | इस नाटक में आलोकनाथ एक स्वतंत्रता सेनानी हवेलीराम का किरदार निभाते है और इस नाटक की मुख्य कहानी आलोकनाथ के इर्द गिर्द घुमती रहती है | इसके अलावा कंवलजीत सिंह ,सुधी पांडे ,किरण जुनेजा ,आशा सचदेव  और कृतिका देसाई का महत्वपूर्ण किरदार थे जिन्होंने आगे भी कई टीवी सीरियल में काम किया था |  इस नाटक की लोकप्रियता भारत से भी ज्यादा पाकिस्तान में थी जहा लोग इस नाटक को एकटकी लगाकर देखते थे क्योंकि वो विभाजन का दर्द समझ सकते थे | ये नाटक भारत और पाकिस्तान के लाखो लोगो के जीवन का हिस्सा बन गया था |

ये नाटक दूरदर्शन के इतिहास में दूसरा सबसे लम्बे समय तक चलने वाला धारवाहिक था | ये लोगो को इसलिए भी पसंद आया क्योंकि इसमें सयुंक्त परिवार को टूटते हुए दर्शाया गया है जो उस समय जनता की मनोदशा थी | ये नाटक जब खत्म हुआ था तब लोगो की आँखों में आसू आ गये थे क्योंकि उन्हें पता था कि ऐसा धारावाहिक फिर कभी नही बन सकेगा | बुनियाद और हम लोग जैसे धारावाहिकों ने उस समय देश की काफी जनता को परविर्तित कर दिया और उनके नजरिये में बदलाव आया था | इस नाटक के हर किरदार ने जनता पर अपनी एक छवि बनाई थी और उस समय देश की 70 प्रतिशत जनता इस नाटक को देखती थी |इस नाटक का प्रभाव ना केवल भारत में था बल्कि विदेशो में रहने वाले अप्रवासी भारतीय और अप्रवासी पाकिस्तानी भी इस नाटक को खूब पसंद करते थे |

Name of the Serial Category Episodes Duration Plot
Katha Sagar 44 22 minutes
Zindagi 26 22 minutes
Gul Gulshan Gulfaam 45 22 minutes
Manzil
Saahil 104 22 minutes
Junoon 510 22 minutes
Ghutan 100 22 minutes
Zara Hatke Zara Bachke
Khatta Meetha 23 22 minutes
Saboot 39 44 minutes
Deewar 26 22 minutes
Dil Apna Preet Parai 26 22 minutes
Jaane Bhi Do Paro 50 22 minutes
Hindustani 104 22 minutes
Nehle Pe Dehla 85 44 minutes
Kati Patan Hai Life Yaroon 15
Music Station 33 22 minutes
Maamla Gadbad Hai
Ek Tukda Chand Ka
Aati Rahengi Baharein
Aap Ki Taarif 27 22 minutes
Apni Khushi Apne Ghum
Kal Aaj Kal Aur Kal
Zindagi Milke Bitayenge
Sanskriti 188 22 minutes
Dharam Aur Hum 43 22 minutes
Draupadi
Noorjahan 78 44 minutes
Jai Mata Ki 84 44 minutes
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