भारत पाक विभाजन की पुरी कहानी-प्रथम भाग The Story of India Pakistan Partition in Hindi-Part One

The Story of India Pakistan Partition in Hindi-Part One

The Story of India Pakistan Partitionमित्रो आज India Pakistan Partition भारत-पाक विभाजन की वो कहानी बताएँगे जो आपने अभी तक केवल किताबो में पढी होगी | मेरी इतिहास में रूचि काफी समय से थी लेकिन मुझे अपनी बात कहने का माध्यम नही मिला था | आज मै गजबखबर के माध्यम से भारत के ऐसे इतिहास को बताना चाहता हु जिसके बारे में आपने इन्टरनेट पर पहले कभी हिंदी भाषा में नही पढ़ा होगा | अगर मेरे लेख में इतिहास के पन्नो को लेकर या भाषा से संबधित कोई त्रुटी हो तो मुझे क्षमा करे |

तो मित्रो पाकिस्तान के निर्माण की जड़े 622 ईस्वी से ही पड़ गयी थी जिसे इतिहासकार जे.एन,दीक्षित ने अपनी किताबो में लिखा था | उन्होंने अपनी किताबो में बताया था कि 622 ईस्वी में पैगम्बर मोहम्मद की मक्का से लेकर मदीना तक यात्रा चल रही थी तो उस दौरान उनको काफी उत्पीडन सहना पड़ा था जिसे उर्दू भाषा में हेजिरा कहते है | हेजिरा की मान्यता यह थी कि मुस्लिम धर्म का प्रभाव दुसरी धर्म पर नही पड़ने दिया जाए | वो अपना जीवन केवल अपनी आस्था को बनाये रखने के लिए जीए | अब जहा इस्लाम धर्म का प्रभुत्व नही था उस क्षेत्र को दर-उल-हरब कहा जाता था और उसे अपने स्थान से हटाने की जरूरत थी | इसी धारणा के कारण जिन्ना के दिमाग के पाकिस्तान का विचार आया था कि जहा मुस्लिम अल्पसंख्यक है उस क्षेत्र को ही हटा देना चाहिए |

ये तो उस समय की बात जब मुस्लिम अल्पसंख्यक थे लेकिन समय के साथ मुस्लिम लोगो की संख्या विश्व के कई देशो में बढ़ती गयी और बाद में कई विदेशी मुस्लिम आक्रमणकारियों की वजह से भारत में भी मुस्लिम आबादी शुरू हो गयी जिसकी संख्या लगातार मुस्लिम शाशको की वजह से बढ़ती गयी | अब 1857 की क्रांति में मुस्लिम धर्म के जिहाद के कारण वो अंग्रेजो से लड़े और आपको तो पता ही होगा कि 1857 की क्रांति में मुस्लिम लोगो की संख्या सबसे ज्यादा थी | उस समय मुस्लिम लोग अंग्रेजो को हराकर एक बार फिर दर-उल-इस्लाम की स्थापना करना चाहते थे और अंग्रेजो को मुस्लिम लोगो से भय लगने लग गया था | अब 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेज मुस्लिम धर्म के लोगो से बिलकुल नही उलझे |

1857 की क्रांति से पहले मुस्लिम लोगो का अंग्रेजो से द्वेष का कारण था कि उन्होंने 1843 में सिंध और 1856 में सिंध राज्य पर कब्जा कर लिया जहा उस समय भारत की बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती थी | उसके बाद अंग्रेजो ने मुगल राजा बहादुर शाह जफर को रंगून भेज दिया | उधर दक्षिण में दक्कन साम्रज्य में निजामो का राज था जो मुस्लिम थे | इस तरह 1857 की क्रांति में मुस्लिम लोगो के क्रोध का अंग्रेज शिकार हुए थे जिनके कारण उनको हार माननी पड़ी | अब वो इस गलती को दुबारा नही दोहराना चाहते थे इसलिए उन्होंने भारत के मुस्लिम लोगो से दोस्ती बढ़ाना शुरू कर दिया और मुस्लिम लोगो के साथ अच्छा व्यवहार करने लगे थे |

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अब 1857 की क्रांति के बाद हिन्दुओ का प्रभुत्व थोडा बढ़ा क्योंकि मुगल साम्राज्य का अंत हो चूका था | अब अंग्रेजो ने अपनी नीतिया लगाना शुरू कर दिया और 1857 की क्रांति से पहले भारत की आधिकारिक भाषा पारसी हुआ करती थी जिसे अंग्रेजो ने खत्म करना चाहा | इसके लिए उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा को भारत में फैलाना शुरू कर दिया | अब हिन्दुओ ने अंग्रेजी शिक्षा को आसानी से अपना लिया लेकिन मुस्लिम लोगो ने उसे आसानी से नही अपनाया | अब मुस्लिम लोगो ने सोचा कि अगर हिन्दू अंग्रेजी सीख जायेंगे तो उन्हें अंग्रेज राज में अपना शाषन बढ़ाने का मौका मिल जाएगा इसलिए मुस्लिम लोगो ने भी आख़िरकार अंग्रेजी भाषा को अपना लिया |

इस तरह अंग्रेजो ने “फुट करो राज करो” की निति अपनाना शुरू कर दिया और जो हिन्दू-मुस्लिम बरसों से एकता के साथ रह रहे थे उनमे मनमुटाव पैदा करना शुरू कर दिया |  1817 में ही हिन्दू कॉलेज की स्थापना हो गयी जहा अंग्रेजी शिक्षा दी जाती थी इसलिए मुसलमानो ने अब आगे बढ़ने का प्रयास किया |  1866 में हुए लोक सेवा आयोग की परीक्षा में मुस्लिम लोगो को अंग्रेजी की महत्ता का असली पता चला | अब इस बात को दादाभाई नौराजी ने समझ लिया था कि मुस्लिम लोग केवल स्वार्थी हितों के लिए अंग्रेजी सीखना चाहते थे ताकि वो हिन्दुओ का भारत में विकास ना होने दे |

अब मुसलमानों को आगे बढ़ने के लिए सत्ता में आना जरुरी लग गया था इसलिए इस नाज़ुक मोड़ पर 1870 में सर सय्यद अहमद खान सामने आये | उन्होंने मुसलमानों और अंग्रेजो के बीच राजनीतिक मेल-मिलाप बनाने का प्रयास किया | दुसरी तरफ उन्होंने अंग्रेजो से ये भी कहा कि मुसलमान राज के लिए अपने देश से कभी गद्दारी नही करेंगे | अब उनके दिमाग में ऑक्सफ़ोर्ड और कैम्ब्रिज जैसे मुस्लिम कॉलेज बनाने की धारणा आयी जिसके फलस्वरूप 1877 में लार्ड लेटन  ने अलीगढ़ में मुहम्मद एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज की नीव रखी | सर सय्यद की कोशिशो की वजह से उनका समुदाय उपर उठा |

1888 में सर सय्यद अहमद खान ने के भाषण में कहा था कि “हिन्दू और मुस्लिम ना केवल दो राष्ट्र है बल्कि दो जीवनमरण राष्ट्र है जो कभी भी एक आम राजनीतिक जीवन का प्रभुत्व नही कर सकते है भले अंग्रेज बहरत छोड़ दे , मान लो अंग्रेज भारत छोडकर चले जाए तो भारत पर राज कौन करेगा , ऐसी परिस्थीतीयो में ऐसा हो सकता है कि हिन्दू और मुस्लिम दोनों राज करना चाहे लेकिन ऐसा सम्भव नही होगा , इसके लिए एक समुदाय को दुसरे समुदाय को हराना होगा , दोनों समुदायों का एक साथ रहना अंसभव है ” उनके इस भाषण को भारतीय इतिहास की पुस्तक में प्रकाशित किया गया था |

जब अंग्रेजो को सर सैय्यद अहमद खान के भाषणों से उनके इरादे पता चले तो उनको अब सही अवसर मिल गया | अब अंग्रेजो ने हिन्दू-मुसलमानो को अलग करने के नीतिया बनाई जो आज भी आपको इतिहास की पुस्तको में पढने को मिल जायगी | उनकी नीतियों में ये था कि मुसलमानों और अंग्रेजो के बीच तो दोस्ती हो सकती है लेकिन हिन्दू और अंग्रेज कभी दोस्त नही हो सकते है | अब अंग्रेजो की नीतियों के कारण हिन्दूमुस्लिम दंगो की शुरुवात हो चुकी थी और 1885 से  1893 तक पहला हिंदू-मुस्लिम दंगा हुआ था जिसमे कई बेगुनाह मारे गये थे | इस दौरान 1885 में लाहोर , 1886 में दिल्ली , 1889 में अम्बाला और 1891 में तमिलनाडु में हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए थे |1893 में दंगो का रौद्र रूप था और जिनमे छ: दिनों मुंबई और उत्तर प्रदेश में धमाके हुए थे |

तो मित्रो India Pakistan Partition भारत-पाक विभाजन की कहानी का पहला अंश था और अब दुसरे अंश में हम आपको बंगाल के विभाजन की कहानी बतायेंगे जिससे भारत-पाक विभाजन  India Pakistan Partition को राह मिली थी |

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