सिंदबाद जहाजी की छठी समुद्री यात्रा The Sixth Voyage of Sinbad the Sailor

The Sixth Voyage of Sinbad the SailorThe Sixth Voyage of Sinbad the Sailor अब सिंदबाद ने अपनी पांचवी समुद्री यात्रा की कहानी सुनाई | मै फिर कुछ दिनों तक बगदाद में रहा और एक दिन कुछ व्यापारियों के साथ फिर यात्रा करने निकल पड़ा | इस बार फिर मैंने व्यापार के लिए जरूरत की चीजे लेकर बसरा से जहाज में सवार हो गया | अब मै एक टापू से दुसरे टापू पर होता हुआ व्यापार करने लगा | एक दिन हर बार की तरह मेरा जहाज एक चट्टान से टकराकर तबाह हो गया और कई लोग डूब गये | मै पास ही एक टापू पर तैरता हुआ पहुच गया | मैंने उस टापू पर कई जहाजो के बिखरे हुए टुकड़े देखे जो पानी से बहकर यहाँ जमा हो गये थे |

मै अब उस टापू के एक पहाडी की ओर आगे बढ़ने लगा और मेरे साथ कई लोग भी आगे बढ़ रहे थे | वहा पर रास्ते में हमे कई हीरे जवाहरात मिले जो शायद उन जहाजो के लोगो के बहकर इस टापू पर आ गये थे | वहा पर खाने की कोई चीज नही थे इसलिए हम कुछ दिनों तक जहाजो में बही हुए खाने को खाकर दिन निकाले | धीरे धीरे वो खाना भी खत्म हो गया और हममे से लोग धीरे धीरे मरने लगे | इस तरह कई लोग भूख के कारण मर गये | अब हमारे जहाज के अंतिम सदस्य के मरने के बाद उस टापू पर मै अकेला रह गया | मै भी जल्द ही मरने वाला था इसलिए अपनी कब्र खोदना शुरू कर दिया और खुद से कहने लगा “जब मेरी मौत नजदीक आ जायेगी , मै इस कब्र में दफन हो जाऊँगा और अपने उपर मिटटी डाल दूंगा ” |

फिर मै अपने आप को दोष देने लगा क्योंकि इतने मुश्किल हालातो से बचने के बाद भी मै वापस यात्रा पर क्यों आया था | मेरी एक भी यात्रा बिना कठिनाई के पार नही हुयी और मै खुदा को याद करने लगा | अब मुझे वहा पर बहती नदी को देखकर विचार आया कि शायद ये नदी किसी बसी हुयी जगह पर जाती होगी | इसलिए मैंने हिम्मत करते हुए लकडियो से नाव बनाई और उसमे कुछ हीरे जवाहरात लेकर सवार हो गया | अब मै उस नदी में बहते हुए सोचने लगा कि अगर मरना ही है तो भूख के बजाय इस नदी में मरना बेहतर है | अब वो नदी पहाडी के नीचे की ओर बह रही थी इसलिए मुझे चप्पू की जरुरुत नही पड़ी | वो मुझको बहाए ले जा रही थी | अब दो दिनों और दो रातो तक जागने के बाद मुझे उस बेड़े पर नींद आ गयी |

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जब मेरी नींद खुली तो मै नदी के तट पर था और मेरे आसपास लोग खड़े थे | जब उन्होंने मुझे देखा तो वो दौड़ते हुए मेरे पास आये मुझसे बात की | मै उनकी भाषा नही समझाता था लेकिन एक आदमी ने मुझसे अरबी भाषा में बात की “तुम कौन हो , कहा से आये हो और तुम यहाँ क्यों आये हो , हमने यहा से किसी को भी आते नही देखा “| मैंने उन्हें अपना पूरा परिचय बताया | वो किसान थे जो उस नदी के तट पर खेती करते थे | मै भूख के मारे कुछ बोल नही पा रहा था इसलिए वो मेरे लिए खाना लेकर आये | मैंने खूब जमकर खाना खाया और खुदा को जान बचाने के लिए शुक्रिया कहा |

अब वो किसान मुझे उनके राजा के पास लेकर गये इसलिए वो मेरे बड़े पर रखी सभी जवाहरातो के साथ मुझे राजा के पास लेकर गये | वो श्रीलंका के राजा सरनदीब थे जिनका मैंने हाथ जोडकर अभिवादन किया | उन्होंने मेरे बारे में पूछा तो मैंने उन्हें अपनी पुरी कहानी सुनाई और अपने साथ लाये जवाहरातो से कुछ जवाहरात दिए | उन्होंने मेरा खूब सत्कार किया | मैंने उन्हें अपने खलीफा के बारे में बताया तो उन्होंने खलीफा की तारीफ़ सुनकर कहा “तुम्हारा खलीफा बहुत अच्छा है इसलिए मै तुम्हारे द्वारा उनके लिए कुछ उपहार भेजना चाहता हु ” मैंने उनको हां कर दिया | अब मै कुछ दिन वहा रहने के बाद राजा से वापस अपने देश लौटने की इजाजत मांगने गया | उन्होंने मुझे कुछ उपहार देकर अपने खलीफा को देने को कहा |

अब मै बगदाद लौट आया और अपने परिवार से मिलने के बाद खलीफा से मिलने गया | खलीफा को मैंने राजा द्वारा दिए उपहार दिए जिसे देखकर राजा बहुत खुश हुआ और उसने उस देश द्वारा खलीफा की बढाई भी की | मैंने उन्हें ये भी बताया कि वहा कोई काजी नही है लोग आपस में ही झूठ सच का पता लगा देते है | खलीफा ये सुनकर चौंक गया और उन्होंने मुझे कुछ जवाहरात देकर घर भेज दिया | मैंने अपने दोस्तों को फिर कई उपहार भेंट किये | अब मै कल तुम्हे अपने अंतिम सातवी यात्रा की कहानी सुनाऊंगा | ये कहकर सिंदबाद ने उस हमाल को अगले दिन आने को कहा | वो हमाल अगले दिन फिर आया और सिंदबाद ने अपनी अंतिम समुद्री यात्रा की कहानी सुनाई |

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